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पावागढ़ काली माता मंदिर: शक्तिपीठ, आस्था और रहस्य का संगम

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विश्वामित्र की तपस्थली से जुड़ा है मंदिर, नवरात्र में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

काली माता का प्रसिद्ध मंदिर मां के शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। शक्तिपीठ उन पवित्र पूजा स्थलों को कहा जाता है, जहां मान्यता के अनुसार सती मां के अंग गिरे थे। पुराणों के अनुसार, पिता दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद सती ने योगबल से अपने प्राण त्याग दिए थे। सती की मृत्यु से व्यथित भगवान शिव उनके मृत शरीर को लेकर तांडव करते हुए ब्रह्मांड में भटकते रहे। मान्यता है कि इस दौरान सती के अंग जहां-जहां गिरे, वहीं शक्तिपीठ स्थापित हुए।
दाहिने पैर की अंगुली गिरने की मान्यता
मान्यता के अनुसार, पावागढ़ में मां सती के दाहिने पैर की अंगुली गिरी थी। जगतजननी मां के दक्षिण पैर का अंगूठा गिरने के कारण इस स्थान को अत्यंत पूजनीय और पवित्र माना जाता है। यहां की एक विशेष बात यह भी है कि दक्षिणमुखी काली मां की प्रतिमा विराजमान है, जिसकी दक्षिण रीति अर्थात तांत्रिक पद्धति से पूजा की जाती है। पावागढ़ की धार्मिक मान्यताओं का संबंध गुरु विश्वामित्र से भी बताया जाता है। कहा जाता है कि गुरु विश्वामित्र ने यहां काली मां की तपस्या की थी। यह भी मान्यता है कि काली मां की प्रतिमा की प्रतिष्ठा विश्वामित्र ने ही की थी। यहां बहने वाली नदी का नामकरण भी उन्हीं के नाम पर ‘विश्वामित्री’ किया गया है।
पावागढ़ नाम के पीछे भी है मान्यता
पावागढ़ के नाम को लेकर भी एक प्रचलित कथा है। कहा जाता है कि इस दुर्गम पर्वत पर चढ़ाई करना लगभग असंभव था। चारों तरफ खाइयों से घिरे होने के कारण यहां हवा का वेग भी चहुंतरफा रहता था। इसी वजह से इसे ‘पावागढ़’ अर्थात ऐसी जगह माना गया, जहां पवन का वास हो।
चांपानेर के पास ऊंची पहाड़ी पर स्थित मंदिर
यह मंदिर गुजरात की प्राचीन राजधानी चांपानेर के पास स्थित है और वडोदरा शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। पावागढ़ मंदिर ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। काफी ऊंचाई पर बने इस दुर्गम मंदिर तक पहुंचना पहले बेहद कठिन माना जाता था। अब यहां रोप-वे की सुविधा उपलब्ध है, जिसके जरिये श्रद्धालु पहाड़ी के ऊपरी हिस्से तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
रोप-वे की सुविधा माछी से शुरू होती है। यहां से रोप-वे के जरिये श्रद्धालु पावागढ़ पहाड़ी के ऊपरी हिस्से तक पहुंचते हैं। रोप-वे से उतरने के बाद लगभग 250 सीढिय़ां चढऩी पड़ती हैं। इसके बाद श्रद्धालु मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचते हैं।
नवरात्र में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
नवरात्र के दौरान पावागढ़ काली माता मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ती है। लोगों की माँ काली के प्रति गहरी आस्था है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां दर्शन करने के बाद मां उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।

Kamlesh Purohit
Kamlesh Purohit
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