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March 2026

Trending, विशेषज्ञों की राय

महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक क्यों है टीबी? ‘जेनिटल टीबी’ छीन सकती है मां बनने का सुख

World TB Day पर बड़ा खुलासा हर साल 24 मार्च को World TB Day मनाया जाता है, ताकि लोगों को Tuberculosis यानी टीबी के प्रति जागरूक किया जा सके। आमतौर पर टीबी को फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी महिलाओं के प्रजनन तंत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। क्या है ‘जेनिटल टीबी’? गुरुग्राम स्थित प्रजनन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा के मुताबिक, जब टीबी का संक्रमण महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम में पहुंचता है, तो इसे ‘जेनिटल टीबी’ कहा जाता है। यह बीमारी गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय को नुकसान पहुंचाती है। महिलाओं में कैसे असर डालती है टीबी? जेनिटल टीबी का सबसे गंभीर असर बांझपन के रूप में सामने आता है। यह फैलोपियन ट्यूब में सूजन और ब्लॉकेज पैदा करती है, जिससे अंडा और शुक्राणु का मिलना मुश्किल हो जाता है। गंभीर समस्याएं जो पैदा हो सकती हैं पीरियड्स का अनियमित होना गर्भधारण में कठिनाई बार-बार गर्भपात हार्मोनल असंतुलन पुरुषों में क्यों कम खतरा? Tuberculosis का असर पुरुषों में आमतौर पर फेफड़ों तक सीमित रहता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह टेस्टिस और प्रोस्टेट को प्रभावित कर सकता है, लेकिन महिलाओं की तुलना में बांझपन का खतरा कम होता है। पहचान में देरी क्यों होती है? जेनिटल टीबी के लक्षण बहुत हल्के होते हैं—जैसे पेट दर्द, कमजोरी, या पीरियड्स में बदलाव। महिलाएं अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी देर से पकड़ में आती है। इलाज और बचाव विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। जागरूकता और समय पर मेडिकल सलाह लेना बेहद जरूरी है।

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नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी को लगाएं ‘गुड़ हलवा’ का भोग, जानें धार्मिक महत्व और आसान रेसिपी

नवरात्र का छठा दिन क्यों है खास? चैत्र नवरात्र का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित होता है। देवी दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा विशेष रूप से शक्ति, साहस और विवाह से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। गुड़ हलवा का धार्मिक महत्व मान्यता है कि मां कात्यायनी को गुड़ से बने व्यंजन अत्यंत प्रिय हैं। विशेष रूप से गुड़ का हलवा का भोग लगाने से देवी प्रसन्न होती हैं। गुड़ को शुद्धता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जो भक्त और देवी के बीच सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। भोग लगाने के पीछे की आस्था भोग केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण का प्रतीक है। जब भक्त पूरे मन से भोग तैयार कर देवी को अर्पित करता है, तो यह उसके विश्वास और भक्ति का प्रतीक बन जाता है। नवरात्र में बनाए गए प्रसाद को घर के सभी सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है। गुड़ हलवा बनाने की सामग्री सूजी – 1 कप गुड़ – 1 कप देसी घी – ½ कप पानी – 3 कप इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच ड्राय फ्रूट्स – काजू, बादाम, किशमिश केसर – वैकल्पिक स्टेप-बाय-स्टेप बनाने की विधि 1. गुड़ का घोल तैयार करें सबसे पहले एक बर्तन में पानी और गुड़ डालकर उबालें। जब गुड़ पूरी तरह घुल जाए, तो इसमें इलायची और केसर डालें। इसके बाद इसे छान लें। 2. सूजी को भूनें एक कड़ाही में घी गर्म करें और उसमें सूजी डालकर मध्यम आंच पर भूनें। सूजी को तब तक भूनें जब तक वह हल्की सुनहरी न हो जाए और खुशबू न आने लगे। 3. मेवे डालें अब इसमें कटे हुए काजू और बादाम डालकर हल्का भून लें। 4. गुड़ का पानी मिलाएं धीरे-धीरे गुड़ का घोल सूजी में डालें और लगातार चलाते रहें। 5. हलवा तैयार करें हलवा गाढ़ा होने तक पकाएं। अंत में थोड़ा घी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। स्वाद और सेहत का मेल गुड़ का हलवा स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहतमंद भी होता है। इसमें आयरन और ऊर्जा भरपूर मात्रा में होती है, जो उपवास के दौरान शरीर को ताकत देती है। निष्कर्ष नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी को गुड़ हलवा का भोग लगाना न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भक्ति और श्रद्धा का सुंदर प्रतीक भी है।

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ईरान-अमेरिका युद्ध: ट्रंप के बयान से Gift Nifty 800 अंक तक उछला, दुनियाभर के बाजारों में आई बड़ी तेजी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ तनाव कम करने की घोषणा की, जिससे युद्ध की स्थिति में राहत मिली। उन्होंने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर सैन्य हमले को 5 दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है, जो वार्ताओं पर निर्भर करेगा। इस खबर से गिफ्ट निफ्टी में 3.33% की जबरदस्त तेजी आई और वैश्विक बाजारों में भी उछाल देखा गया। ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमला 5 दिन टाला , गिफ्ट निफ्टी में 3.33% की जोरदार तेजी , वैश्विक शेयर बाजारों में भी बड़ा उछाल।    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव और युद्ध (US-Iran War) की स्थिति में अचानक राहत की खबर दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में “बहुत अच्छी और राहत भरी बात” हुई है। इन बातचीतों के सकारात्मक माहौल को देखते हुए उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग को ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर किसी भी सैन्य हमले को 5 दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है। यह फैसला जारी वार्ताओं की सफलता पर निर्भर करेगा। इस खबर के बीच गिफ्ट निफ्टी (सिंगापुर में ट्रेड होने वाला निफ्टी फ्यूचर्स) में जबरदस्त तेजी देखी गई। गिफ्ट निफ्टी 23,533 तक पहुंच गया, जो पिछले स्तर से 800 अंक या 4% तक की बढ़ोतरी है। इससे पहले बाजार में चिंता थी कि ईरान पर हमले से तेल की कीमतें और बढ़ेंगी, जिससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता था। लेकिन इस खबर ने निवेशकों में राहत की लहर दौड़ा दी है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में क्या लिखा? मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बहुत अच्छी और सकारात्मक बातचीत हुई है। हम मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे आपसी विवादों को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में चर्चा कर रहे हैं। इन गंभीर और रचनात्मक वार्ताओं के अच्छे रुख को देखते हुए, जो कि इस पूरे हफ्ते जारी रहेंगी मैंने युद्ध विभाग (Department of War) को निर्देश दिया है कि, ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले सभी सैन्य हमलों को 5 दिनों के लिए टाल दिया जाएं। यह रोक आगे होने वाली बैठकों और चर्चाओं की सफलता पर निर्भर करेगी। इस मामले पर ध्यान देने के लिए आप सभी का धन्यवाद! – राष्ट्रपति डोनल्ड जे. ट्रंप वैश्विक स्टॉक मार्केट इंडेक्स में दिखी तेजी डॉव जोन्स फ्यूचर्स: 46,503.58 (+926.11 अंक, +2.03%) चढ़ा। DAX: 22,819.50 (+439.31 अंक, +1.96%) चढ़ा। FTSE: 9,933.95 (+15.62 अंक, +0.16%) चढ़ा। क्या मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में दिखेगी तेजी? ट्रंप के इस घोषणा के बाद निवेशकों के मन मे एक अहम सवाल उठ रहा है कि क्या कल यानी मंगलवार, 24 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में तेजी आएगी? तो इसका सीधा जवाब है- हां! क्योंकि बाजार अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि अगले 5 दिनों में क्या होता है। भारतीय निवेशकों के लिए यह सकारात्मक संकेत है, क्योंकि गिफ्ट निफ्टी की तेजी से सोमवार को घरेलू बाजार में मजबूत शुरुआत की उम्मीद है। यह खबर मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद को जगाती है। क्योंकि पिछले कई हफ्तों से हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य की बंद होने की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही थी। ऐसे में यदि बातचीत सफल रहीं तो युद्धविराम संभव है, अन्यथा स्थिति फिर बिगड़ सकती है। ट्रंप की यह घोषणा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह पहले अनकंडीशनल सरेंडर पर अड़े हुए थे, लेकिन अब उत्पादक बातचीत पर जोर दे रहे हैं।  

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पंजाब के रंधावा सुसाइड केस में गृह मंत्री शाह ने दिए CBI जांच के साफ संकेत

पंजाब के वेयरहाउस डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या का मामला अब लोकसभा तक पहुँच गया है। पंजाब सरकार के मंत्री लालजीत भुल्लर पर प्रताड़ना के गंभीर आरोपों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले में CBI जांच के साफ संकेत दिए हैं। संसद में गूँजा मुद्दा, शाह बोले सोमवार को कांग्रेस सांसद गुरजीत औजला ने लोकसभा में रंधावा की मौत का मुद्दा उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- “यह पंजाब राज्य का विषय है लेकिन अगर पंजाब के सभी सांसद मुझे इस मामले में लिखित अनुरोध देते हैं, तो मैं तुरंत यह केस CBI को ट्रांसफर करने के निर्देश दे दूंगा।” पंजाब के कांग्रेस सांसदों ने अमित शाह को लिखा पत्र  मिली जानकारी के मुताबिक पंजाब से कांग्रेस सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर गगनदीप सिंह रंधावा के मामले में इंसाफ की मांग की है। इस पत्र के जरिए सांसदों ने पूरे मामले की CBI जांच की ज़ोरदार मांग की है। इस चिट्ठी पर पंजाब के जाने-माने कांग्रेस सांसद जिनमें गुरजीत सिंह औजला, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, धर्मबीर गांधी और सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल हैं, ने साइन किए हैं। इस दौरान उन्होंने वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के मैनेजर जी.एस. रंधावा की आत्महत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठाई। सांसदों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए CBI जांच जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल सीबीआई जांच ही किसी भी स्थानीय प्रभाव या दबाव से मुक्त निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर सकती है। उन्होंने पीड़ित परिवार और आम जनता की भावनाओं को भी व्यक्त किया, जो इस मामले में न्याय और स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।

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एक महीने में 51 लाख करोड़ साफ, बड़े-बड़े शेयर टूटे, लेकिन इस सरकारी कंपनी के स्टॉक को नहीं हुआ एक पैसे का लॉस

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जिससे 51 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण साफ हो गया। निफ्टी भी 11% से अधिक टूटा। हालांकि, इस दौरान सरकारी कंपनी पावर ग्रिड के शेयरों ने मजबूती दिखाई। HighLights युद्ध से 51 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण साफ हुआ। पावर ग्रिड के शेयर बाजार गिरावट में भी स्थिर रहे। फरवरी में 300 के नीचे क्लोज हुए और 302 पर कर रहे हैं कारोबार।  ईरान और अमेरिका (Iran-US War) के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय शेयर बाजार (Share Market Crash) लगातार गिरा है। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 11 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। 23 फरवरी को बीएसई पर लिस्टेड शेयरों का ज्वाइंट मार्केट कैप 467 लाख करोड़ था और 23 मार्च को यह 416 लाख करोड़ रह गया है। ऐसे में कुल 51 लाख करोड़ बाजार पूंजीकरण साफ हो गया है। लेकिन, आपको जानकार हैरानी होगी कि एक सरकारी कंपनी के शेयर पर इस गिरावट का ज्यादा असर नहीं हुआ है। फरवरी में पावर ग्रिड के शेयर 298 रुपये पर क्लोज हुए थे और अब 302 रुपये के ऊपर ही ट्रेड कर रहे हैं। दरअसल, पावर ग्रिड के शेयरों (Power Grid Shares) में वीकली और मंथली बेसिस पर कोई गिरावट नहीं देखी गई है। खास बात है कि पावर ग्रिड, निफ्टी50 के शेयरों में शामिल स्टॉक है और इस सरकारी कंपनी का मार्केट कैप 2 लाख 80 हजार करोड़ से ज्यादा है। 290 से 310 की रेंज में कारोबार पिछले एक महीने से  पावर ग्रिड के शेयर  290 से 310 रुपये की रेंज में कारोबार कर रहे हैं। मार्केट में कमजोरी आने के बाद इस कंपनी के शेयरों में हल्की गिरावट जरूर आई लेकिन वीकली और मंथली बेसिस पर अब भी यह शेयर मजबूती दिखा रहे हैं, जबकि निफ्टी दोनों ही टाइम फ्रेम पर काफी गिर चुका है। 23 मार्च को भी पावरग्रिड के शेयर कमजोर बाजार में डेढ़ फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए हैं। पावर ग्रिड के शेयरों में खरीदारी को लेकर जागरण बिजनेस ने दो मार्केट एक्सपर्ट से बात की। चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के सचिन गुप्ता ने कहा कि पावरग्रिड के शेयर मौजूदा सूरते हाल में काफी आकर्षक लग रहे हैं। इस शेयर के लिए 312 रुपये का स्तर अहम रेजिस्टेंस है, इसके ब्रेक होने पर शेयर में और तेजी देखने को मिल सकते हैं। वहीं, नीचे की ओर 290 रुपये एक अहम सपोर्ट है, जहां स्टॉपलॉस के साथ अपनी पॉजिशन बरकरार रखी जा सकती है। उधर, आनंद राठी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के जिगर एस पटेल ने बताया कि पावर ग्रिड के शेयरों के लिए 311 रुपये का स्तर अहम है और इसके टूटने पर 321 रुपये के टारगेट देखने को मिल सकते हैं, जबकि नीचे की ओर 290 रुपये का लेवल बड़ा सपोर्ट है। बता दें कि पावर ग्रिड के शेयरों का 52 वीक हाई 322 रुपये है जो इस शेयर ने पिछले साल 21 अप्रैल को लगाया था, और अब यह स्टॉक उसके आसपास ही कारोबार कर रहा है। (डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट और एक्सपर्ट की राय पर आधारित है, यह किसी भी तरह से निवेश की सलाह नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर अब मंडराने लगा है प्रॉक्सी वॉर और हाइब्रिड वॉरफेयर का खतरा

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध अब एक नए और खतरनाक चरण में पहुंच गया है। यह संघर्ष केवल मिसाइल हमलों या एयर स्ट्राइक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह प्रॉक्सी वॉर और हाइब्रिड वॉरफेयर में बदलता दिख रहा है। अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पूर्व RAW एजेंट व NSG कमांडो लकी बिष्ट ने एक वीडियो में   “हाइब्रिड वॉर” को लेकर चेतावनी जारी की है। प्रॉक्सी वॉर: ईरान की सबसे बड़ी ताकत ईरान लंबे समय से सीधे युद्ध के बजाय “प्रॉक्सी रणनीति” अपनाता रहा है। इसमें वह क्षेत्रीय संगठनों (जैसे लेबनान, इराक, यमन के समूह) के जरिए हमला करता है और अपने विरोधियों को कई मोर्चों पर उलझाए रखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह रणनीति ईरान को कम संसाधनों में भी बड़े देशों को चुनौती देने की ताकत देती है।  ईरान की पहले की प्रॉक्सी वॉर रणनीति (इतिहास) रहा है। लेबनान-हिजबुल्लाह हिजबुल्लाह को ईरान का सबसे मजबूत प्रॉक्सी माना जाता है इजराइल के खिलाफ कई बार संघर्ष में इस्तेमाल इराक-शिया मिलिशिया इराक में कई शिया समूह ईरान समर्थित माने जाते हैं अमेरिकी ठिकानों पर हमलों में इनकी भूमिका बताई जाती रही है यमन-हूती विद्रोही हूती आंदोलन को ईरान का समर्थन मिलता रहा है सऊदी अरब और खाड़ी देशों पर हमले सीरिया-असद सरकार समर्थन सीरिया में ईरान ने सरकार का समर्थन किया वहां भी प्रॉक्सी और मिलिशिया नेटवर्क सक्रिय रहे इन उदाहरणों से साफ है कि ईरान सीधे युद्ध से ज्यादा “अप्रत्यक्ष युद्ध” में माहिर रहा है। स्लीपर सेल और छिपे नेटवर्क का डर जैसे-जैसे युद्ध बढ़ रहा है, “स्लीपर सेल” यानी छिपे नेटवर्क की चर्चा भी तेज हो रही है। हालांकि अभी तक अमेरिका या यूरोप में बड़े पैमाने पर ऐसे नेटवर्क के सक्रिय होने का ठोस प्रमाण नहीं है लेकिन सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि  अगर युद्ध लंबा चला, तो छोटे स्तर के हमले या गुप्त नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं और यह खतरा पारंपरिक युद्ध से ज्यादा अप्रत्याशित होता है हाइब्रिड वॉर: बदलता युद्ध का चेहरा यह जंग अब “अनरिस्ट्रिक्टेड वॉरफेयर” यानी हर क्षेत्र में फैलती लड़ाई बनती जा रही है।  साइबर हमले (बैंकिंग, बिजली, डेटा सिस्टम), तेल और गैस सप्लाई पर हमले (जैसे होर्मुज संकट),  प्रॉक्सी ग्रुप्स के जरिए हमले,  प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध शामिल हैं। तेल और होर्मुज: जंग का सबसे बड़ा दांव इस युद्ध का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को बाधित किया  और अमेरिका ने इसे खोलने की चेतावनी दी है। इस जंग के कारण तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता आएगी।यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट जैसा बड़ा आर्थिक झटका दे सकता है। कैसे शुरू हुई यह जंग? यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाकर ईरान के ठिकानों और नेतृत्व को निशाना बनाया।इसके जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमले किए और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके लिए ईरान ने अपने प्रॉक्सी नेटवर्क को सक्रिय किया। अब यह संघर्ष मल्टी-फ्रंट वॉर बन चुका है, जिसमें लेबनान, खाड़ी देश और समुद्री मार्ग भी शामिल हो चुके हैं।

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आंध्र प्रदेश: विजयवाड़ा से शुरू हुई भारत की पहली AQI मॉनिटरिंग इंटरसिटी बस सेवा, यात्रियों को मिलेगी साफ हवा

विजयवाड़ा से देश की पहली AQI-आधारित इंटरसिटी बस सेवा शुरू हुई है, जिसका उद्देश्य यात्रियों को लंबी यात्रा के दौरान स्वच्छ हवा प्रदान करना है। विजयवाड़ा से देश की पहली AQI आधारित बस सेवा शुरू उन्नत एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम से बस में स्वच्छ हवा उपलब्ध यात्री ऐप और स्क्रीन पर रियल-टाइम AQI देख सकेंगे आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से देश में पहली बार एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर आधारित इंटरसिटी बस सेवा शुरू हो गई है। इंटरसिटी मोबिलिटी ब्रांड इंटरसिटी स्मार्टबस ने इस अनोखी सेवा को विजयवाड़ा-बेंगलुरु रूट पर लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य यात्रियों को लंबी यात्रा के दौरान भी स्वच्छ और सुरक्षित हवा उपलब्ध कराना है। इस सेवा का शुभारंभ विजयवाड़ा की डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) शेरीन बेगम ने किया। उन्होंने इसे इंटरसिटी ट्रांसपोर्टेशन में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो यात्रियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा पर फोकस करता है। बस के अंदर हवा बाहर से भी साफ सामान्य बसों में अंदर की हवा बाहर की हवा से 2-3 गुना ज्यादा प्रदूषित होती है, लेकिन स्मार्टबस AQI में लगाए गए एडवांस्ड एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम ने इस समस्या को दूर किया है। ट्रायल रन के दौरान बस के अंदर PM2.5 का स्तर लगभग 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रखा गया, जो कई बड़े शहरों की बाहरी हवा से भी बेहतर है। कंपनी के अनुसार, यात्रा के 90 प्रतिशत से ज्यादा समय हवा की गुणवत्ता अच्छी बनी रहती है। यह सिस्टम लगातार हवा की निगरानी करता है और जरूरत पड़ने पर फिल्ट्रेशन को ऑटोमैटिकली बढ़ा देता है, जिससे यात्री प्रदूषण से सुरक्षित रहते हैं। डिजिटल स्क्रीन और ऐप पर लाइव अपडेट इस बस की सबसे खास बात यात्रियों को सफर के दौरान ही हवा की गुणवत्ता की जानकारी मिलना है। बस के अंदर लगी डिजिटल स्क्रीन पर रियल-टाइम AQI और PM2.5 लेवल दिखाए जाते हैं। साथ ही, इंटरसिटी मोबाइल ऐप पर भी ये डेटा उपलब्ध रहता है, ताकि यात्री अपनी सीट से ही हवा की क्वालिटी ट्रैक कर सकें। यात्री इन बसों को इंटरसिटी ऐप या वेबसाइट पर इंटरसिटी एक्यूआई टैग चुनकर बुक कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि यह सेवा यात्रा को न सिर्फ आरामदायक, बल्कि सेहतमंद भी बनाएगी।

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दुर्गाष्टमी, अशोकाष्टमी व रामनवमी का दुर्लभ संगम

सिरोही। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर इस वर्ष 26 मार्च का दिन अत्यंत विशेष और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन चैत्र शुक्ल अष्टमी (दुर्गाष्टमी), अशोकाष्टमी और रामनवमी का खास संगम बन रहा है। यह संयोग धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्षों बाद ऐसा अवसर बन रहा है। जब देवी आराधना और भगवान श्रीराम जन्मोत्सव एक ही दिन विशेष मुहूर्त में मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी रहेगा। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन, भजन-कीर्तन और राम जन्मोत्सव के आयोजन होंगे। इस दिन की महत्ता को देखते हुए श्रद्धालुओं में पहले से ही उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। तिथियों का अदभुत संयोग चैत्र शुक्ल अष्टमी (दुर्गाष्टमी) 26 मार्च को सुबह 11.49 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात 11.50 बजे से नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। नवमी तिथि अगले दिन 27 मार्च को सुबह 10.07 बजे तक मान्य रहेगी। इस प्रकार 26 मार्च को ही अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों का संयोग बन रहा है, जो इसे और अधिक विशेष बना देता है। यही कारण है कि इस दिन दुर्गाष्टमी, अशोकाष्टमी और रामनवमी तीनों पर्व एक साथ मनाए जाएंगे। अभिजित मुहूर्त में होगा श्रीराम जन्मोत्सव ज्योतिष एवं वास्तुविद आचार्य प्रदीप दवे के अनुसार, भगवान श्रीराम का जन्म अभिजित मुहूर्त में हुआ था। इस वर्ष 26 मार्च को दोपहर 12.15 बजे अभिजित मुहूर्त पड़ रहा है, जो राम जन्मोत्सव के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, नवमी तिथि, अभिजित मुहूर्त में हुआ था। इस आधार पर 26 मार्च को दोपहर 12.15 बजे मंदिरों में विशेष पूजा, आरती और श्रीराम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। रामचरितमानस में वर्णित है श्रीराम जन्म का समय गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के बालकांड में श्रीराम जन्म का वर्णन करते हुए कहा गया है नौमी तिथि मधु मास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता। मध्य दिवस अति सीत न धामा, पावन काल लोक बिश्रामा। इस चौपाई का अर्थ है कि भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र (मधु) मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि में, अभिजित मुहूर्त में, दिन के मध्य में हुआ था, जब मौसम संतुलित और सुखद था। यह समय समस्त लोकों के लिए कल्याणकारी और पवित्र माना गया है। सूर्योदय तिथि सिद्धांत और निर्णय हिंदू पंचांग के अनुसार, जिस तिथि का प्रभाव सूर्योदय के समय होता है, वही तिथि पूरे दिन मान्य मानी जाती है। इस सिद्धांत के अनुसार 27 मार्च को सूर्योदय के समय नवमी तिथि रहेगी, इसलिए सामान्यत: रामनवमी 27 मार्च को मानी जा सकती थी। लेकिन इस वर्ष विशेष परिस्थिति यह है कि 26 मार्च को नवमी तिथि दोपहर से प्रारंभ हो रही है। उसी दिन अभिजित मुहूर्त भी उपलब्ध है। 27 मार्च को अभिजित मुहूर्त नवमी तिथि में नहीं आ रहा। इसी कारण शास्त्रसम्मत निर्णय के अनुसार रामनवमी 26 मार्च को ही मनाना अधिक उचित और मान्य रहेगा। दुर्गाष्टमी और अशोकाष्टमी व दुर्गाष्टमी का महत्व चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। श्रद्धालु कन्या पूजन, हवन और विशेष अनुष्ठान करते हैं। यह दिन शक्ति साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अशोकाष्टमी का पर्व भी इसी दिन मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दुखों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ‘अशोक’ का अर्थ होता है – शोक का नाश करने वाला, इसलिए यह दिन मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है। मंदिरों में विशेष आयोजन की तैयारी इस दुर्लभ संयोग को देखते हुए कमोबेश सभी क्षेत्रों के मंदिरों में विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों की सजावट की जा रही है। भजन-कीर्तन और सुंदरकांड पाठ का आयोजन होगा। राम जन्म के समय विशेष आरती की जाएगी। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाएगा। राम मंदिरों में विशेष रूप से दोपहर 12.15 बजे भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। घंटों-घडिय़ालों और जयकारों के बीच वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। इस बार एक ही दिन तीन प्रमुख पर्व होने के कारण श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। लोग व्रत, पूजा और धार्मिक आयोजनों की तैयारी में जुटे हुए हैं। महिलाओं द्वारा घरों में घट स्थापना, पूजा और कन्या पूजन की तैयारी की जा रही है। बाजारों में भी पूजा सामग्री, फल, फूल और सजावटी वस्तुओं की मांग बढ़ गई है। मिठाई की दुकानों पर भी रौनक देखने को मिल रही है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष दिन ज्योतिषियों के अनुसार यह दिन साधना, पूजा और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी। कन्या पूजन से माता दुर्गा की कृपा मिलेगी। राम नाम जप और सुंदरकांड पाठ से मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

राष्ट्रीय

अब बिना क्लेम के मिलेगा PF का पैसा: EPFO ला रहा ऑटो-सेटलमेंट सुविधा, करोड़ों खाताधारकों को राहत

बड़ी पहल: बिना आवेदन सीधे खाते में पैसा देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अब एक नई ऑटो-सेटलमेंट सुविधा शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत निष्क्रिय खातों में पड़ा पीएफ का पैसा सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इस सुविधा के लागू होने के बाद खाताधारकों को किसी तरह का क्लेम करने या कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। क्या है ऑटो-सेटलमेंट सुविधा? ऑटो-सेटलमेंट सुविधा एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था है, जिसके जरिए ईपीएफओ आधार से सत्यापित खातों की पहचान कर उनमें पड़ी लावारिस राशि को सीधे संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में भेज देगा। इससे वर्षों से अटके करोड़ों रुपये लोगों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। कितनी राशि और कितने खाते? ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार, करीब 81 लाख निष्क्रिय खातों में लगभग 5,200 करोड़ रुपये की राशि पड़ी हुई है। इनमें से कई खाते ऐसे हैं जिनमें लाखों रुपये जमा हैं, लेकिन खाताधारकों ने अब तक क्लेम नहीं किया है। लावारिस धन का बड़ा आंकड़ा फरवरी 2026 तक ईपीएफओ के पास 31.8 लाख निष्क्रिय खातों में कुल 10,181 करोड़ रुपये की राशि पड़ी हुई है। यह राशि लंबे समय से बिना दावे के पड़ी है, जिसे अब ऑटो-सेटलमेंट के जरिए निपटाने की योजना बनाई जा रही है। किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? इस सुविधा का सबसे ज्यादा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो रिटायर हो चुके हैं या जिन्होंने नौकरी बदलने के बाद अपना पीएफ ट्रांसफर नहीं कराया। इसके अलावा, ऐसे खाताधारक जिनके खाते आधार से लिंक हैं लेकिन लंबे समय से निष्क्रिय हैं, उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा। कैसे काम करेगा सिस्टम? नई प्रणाली के तहत ईपीएफओ पहले आधार और बैंक खाते की जानकारी का मिलान करेगा। इसके बाद सत्यापन पूरा होने पर राशि सीधे संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। निष्क्रिय खाता किसे माना जाता है? ईपीएफओ उन खातों को निष्क्रिय मानता है, जिनमें लंबे समय तक कोई योगदान नहीं किया गया हो। आमतौर पर, 55 वर्ष की आयु के बाद यदि तीन वर्षों तक कोई योगदान नहीं होता, तो खाता निष्क्रिय हो जाता है। सरकार की बड़ी पहल यह कदम सरकार की डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को उनके हक का पैसा समय पर मिलेगा।

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ट्रंप फैमिली की प्रेडिक्शन मार्केट में एंट्री से मचा हड़कंप, अमेरिकी राजनीति और कानून के बीच बढ़ा टकराव

डिजिटल सट्टेबाजी की दुनिया में बड़ा बदलाव अमेरिका में डिजिटल प्रेडिक्शन मार्केट्स को लेकर बहस तेज हो गई है, खासकर तब से जब Trump Media & Technology Group ने ‘ट्रुथ प्रेडिक्ट’ नामक प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की है। यह प्लेटफॉर्म Truth Social के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे यूजर्स को सीधे ऐप के भीतर ही सट्टेबाजी जैसे विकल्प मिल सकेंगे। ट्रंप परिवार की भूमिका पर उठे सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर का नाम भी इस पूरे मामले में सामने आया है। वह प्रमुख प्रेडिक्शन प्लेटफॉर्म्स काल्शी और पॉलीमार्केट से सलाहकार और निवेशक के रूप में जुड़े हुए हैं। इससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या हैं प्रेडिक्शन मार्केट्स? प्रेडिक्शन मार्केट्स ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म होते हैं जहां लोग चुनाव, खेल, आर्थिक घटनाओं और वैश्विक घटनाओं के परिणामों पर दांव लगाते हैं। समर्थकों का कहना है कि ये बाजार भविष्यवाणी के सटीक संकेत देते हैं, जबकि आलोचक इन्हें ऑनलाइन जुआ का नया रूप मानते हैं। अमेरिकी कांग्रेस की बढ़ती सख्ती वॉशिंगटन में इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस में इस साल प्रेडिक्शन मार्केट्स को नियंत्रित करने के लिए कई विधेयक पेश किए गए हैं। इनमें इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक, चुनावी दांव पर सख्ती और Commodity Futures Trading Commission की शक्तियों को बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। संवेदनशील विषयों पर प्रतिबंध की मांग कुछ विधेयकों में युद्ध, आतंकवाद, हत्या और खेल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सट्टेबाजी पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही, सरकारी अधिकारियों और सांसदों को इन बाजारों में भाग लेने से रोकने का प्रस्ताव भी रखा गया है। ट्रंप परिवार का पुराना जुआ कारोबार यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप परिवार का नाम सट्टेबाजी से जुड़ा हो। 1990 में डोनाल्ड ट्रंप ने अटलांटिक सिटी में ताजमहल कैसिनो शुरू किया था। हालांकि बाद में यह कारोबार बंद हो गया, लेकिन अब डिजिटल युग में ट्रंप परिवार फिर से इस क्षेत्र में सक्रिय होता दिख रहा है। कानूनी विवाद और राज्यों का विरोध नेवादा और न्यूजर्सी जैसे राज्यों ने इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म बिना लाइसेंस के ऑनलाइन सट्टेबाजी चला रहे हैं। वहीं, CFTC द्वारा इन्हें कुछ छूट दिए जाने से विवाद और बढ़ गया है। डिजिटल बाजार का तेजी से विस्तार प्रेडिक्शन मार्केट्स का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। हर हफ्ते अरबों डॉलर का दांव इन प्लेटफॉर्म्स पर लगाया जा रहा है। इससे पारंपरिक कैसिनो उद्योग पर भी असर पड़ रहा है। निष्कर्ष ट्रंप परिवार की एंट्री ने इस बहस को और तेज कर दिया है। अब यह केवल एक कारोबारी मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और कानूनी टकराव का विषय बन गया है।  

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