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March 2026

Trending, लाइफस्टाइल

हफ्ते में सिर्फ दो दिन योग और एक्सरसाइज से रहें फिट, बुढ़ापे तक हेल्दी

दो दिन में भी दिखता है फर्क आज की भागमभाग वाली जिंदगी में लोगों के पास अपनी सेहत का ध्यान रखने का समय कम है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि फिट रहने के लिए रोज जिम जाना पड़ेगा, महंगे उपकरण खरीदने होंगे या घंटों योग और व्यायाम करना होगा। लेकिन नई स्टडी से पता चला है कि सप्ताह में केवल दो दिन योग और एक्सरसाइज करने से भी मांसपेशियों की ताकत, संतुलन और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। नई स्टडी में हुआ खुलासा अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन के जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में लगभग 30 हजार वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया गया। स्टडी में पाया गया कि योग और सरल एक्सरसाइज जैसे स्क्वाट्स, पुश-अप्स, और घर के सामान को उठाने जैसी गतिविधियां भी मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं। मांसपेशियों की ताकत बढ़ने से शरीर का संतुलन सुधरता है, चलने-फिरने की गति बेहतर होती है और उम्र बढ़ने पर भी गिरने का खतरा कम रहता है। योग केवल फिटनेस को बनाए नहीं रखता, बल्कि यह दैनिक जीवन की गतिविधियों को आसान बनाता है—जैसे सीढ़ियां चढ़ना, घर का सामान लाना या घरेलू सामान लेकर चलना। सिर्फ दो दिन पर्याप्त हैं अध्ययन के अनुसार मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज रोज करने की जरूरत नहीं है। सप्ताह में दो दिन की एक्सरसाइज भी पर्याप्त लाभ देती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मांसपेशियों में हरकत लाने वाली क्रियाएं शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं। हालांकि, नियमितता जरूरी है। अधिक स्वस्थ रहने के लिए योग और व्यायाम सप्ताह में चार दिन तक जारी रखने की सलाह दी जाती है। मांसपेशियों के लिए जरूरी है व्यायाम विशेषज्ञों का कहना है कि मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज का मतलब है ऐसी गतिविधियां जिनमें आपकी मांसपेशियां किसी बाहरी बल या वजन के खिलाफ काम करें। उदाहरण के लिए, भारी सामान उठाना—इसमें वजन आपके शरीर को खींचता है और मांसपेशियां इसे संभालती हैं। 20 से 25 मिनट की एक्सरसाइज में पीठ, घुटने और कूल्हे की मांसपेशियों पर काम करना पर्याप्त होता है। सिर्फ टहलने से मांसपेशियां मजबूत नहीं होतीं, इसलिए योग और व्यायाम अनिवार्य हैं। योग: भारत की पारंपरिक विद्या योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन भी बनाए रखता है। यह रोग-मुक्त, शोक-मुक्त और संतुलित जीवन का प्राकृतिक उपाय है। योग केवल शरीर को मजबूत नहीं बनाता, बल्कि कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ाता है। एक्सपर्ट की राय आचार्य प्रतिष्ठा, निदेशक, मोक्षायतन योग संस्थान और अध्यक्ष, भारत योग, कहती हैं, “योग साधना को दिया गया एक घंटा बचे हुए 23 घंटों को 46 घंटों में बदल देता है। यह साधक की कार्य करने की क्षमता सौ गुना बढ़ा देता है। विज्ञान की कसौटी पर हो रहे शोध भी योग के लाभों को प्रमाणित करते हैं।” उनके अनुसार, योग को अपनाने से न केवल वर्तमान फिटनेस बनी रहती है, बल्कि बुढ़ापे में भी शरीर मजबूत और सक्रिय रहता है। दैनिक जीवन में योग और व्यायाम के लाभ मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है संतुलन सुधारता है, गिरने का खतरा कम होता है चलने-फिरने की गति और सहनशक्ति बढ़ती है घरेलू कार्य और सामान उठाना आसान होता है उम्र बढ़ने पर भी शरीर स्वस्थ और सक्रिय रहता है निष्कर्ष इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि फिटनेस और हेल्थ के लिए रोज जिम या घंटों व्यायाम करना जरूरी नहीं। सप्ताह में केवल दो दिन योग और व्यायाम करने से भी शरीर मजबूत, मांसपेशियां सक्रिय और जीवनशैली स्वस्थ बनी रहती है। योग और सरल एक्सरसाइज को अपनाकर आप बुढ़ापे तक फिट और सक्रिय रह सकते हैं। विज्ञान और परंपरा दोनों ही इस बात की पुष्टि करते हैं कि योग जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है।

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संसद से संसदीय क्षेत्र तक: 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने के लिए सांसदों का एकजुट संकल्प

एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन के तहत साझा प्रयास राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ कार्यक्रम के तहत विभिन्न राजनीतिक दलों के 20 से अधिक सांसद 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने की रणनीति पर एकजुट हुए। सांसदों ने बाल विवाह के खिलाफ कड़े कदम उठाने, निजी विधेयक लाने और संसदीय क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। बाल विवाह और सोशल मीडिया खतरों पर चर्चा संसद में बाल संरक्षण के लिए गठित इस मंच ने बाल विवाह और बच्चों के लिए सोशल मीडिया के खतरे को एक बड़ी चुनौती करार दिया। सांसदों ने शून्य काल का उपयोग, निजी विधेयक और संसदीय क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ सक्रिय प्रयास करने पर सहमति जताई। एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन की शुरुआत ‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ की शुरुआत 17 नवंबर 2024 को हुई थी, जिसमें बाल विवाह और बाल यौन शोषण पर चिंता जताते हुए 38 सांसदों ने इसका समर्थन किया। इस पहल को ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ का समर्थन प्राप्त है, जो बाल अधिकारों के संरक्षण का देश का सबसे बड़ा नागरिक समाज नेटवर्क है। इसके 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 450 से अधिक जिलों में काम कर रहे हैं। सांसदों का संदेश ‘डायलॉग विद पार्लियामेंटेरियंस ऑन अचीविंग चाइल्ड फुल पोटेंशल’ में बोलते हुए तेलुगु देशम पार्टी के नेता और एमपी’ज फ़र चिल्ड्रेन के संयोजक लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा, “बाल विवाह किसी एक पार्टी या धर्म का मुद्दा नहीं है। इसे खत्म करने पर सभी दलों में आम सहमति है। जब भारत ने सामूहिक संकल्प के साथ काम किया, हमने पोलियो खत्म किया और बच्चों को स्कूल तक पहुँचाया। उसी संकल्प के साथ 2030 तक बाल विवाह का खात्मा संभव है।” बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम को मजबूत बनाने की पहल संसदीय नेता देवरायलु ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 को मजबूत करने के लिए हाल ही में लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश किया। इस विधेयक में शामिल हैं: सख्त सजा का प्रावधान विशेष बाल विवाह निषेध अधिकारी विशेष अदालतें डिजिटल रिपोर्टिंग पोर्टल इस पहल का उद्देश्य बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करना है। सांसदों का व्यापक समर्थन सांसदों में विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल थे, जिनमें भीम सिंह (भाजपा), डॉ. धर्मवीर गांधी (कांग्रेस), राजा राम सिंह कुशवाहा (सीपीआई एमएल), लुंबा राम चौधरी (भाजपा), पुष्पेंद्र सरोज (सपा), जुगल किशोर शर्मा (भाजपा), महुआ माजी (जेएमएम) और कई अन्य शामिल थे। सभी सांसदों ने बाल विवाह के खिलाफ रणनीति और जागरूकता कार्यक्रमों में सहयोग देने का संकल्प लिया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का योगदान जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “बाल संरक्षण केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता है। बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन खतरों से सुरक्षित रखना राष्ट्र निर्माण की बुनियादी शर्त है। सांसदों ने इस दिशा में कदम उठाया है और ‘बाल विवाह मुक्त भारत दिवस’ घोषित करने पर सहमति जताई है।” बाल विवाह मुक्ति रथ अभियान संगठन ने बाल विवाह के खिलाफ 100 दिन के जागरूकता अभियान के तहत देशभर में 500 से अधिक रथ चलाए। ये रथ गांवों और जनसमुदाय तक बाल विवाह के खिलाफ संदेश पहुंचाने का माध्यम बने। देश के 28 राज्यों और 439 जिलों में ये रथ गए, और 104 से ज्यादा सांसदों ने अपने क्षेत्रों में रथ यात्रा का नेतृत्व किया। राज्य और जिला प्रशासन का सहयोग अभियान में दो मुख्यमंत्रियों, तीन उपमुख्यमंत्रियों, तीन विधानसभा अध्यक्षों, तीन उपाध्यक्षों, 49 राज्य मंत्रियों, 154 विधायकों और 99 जिला कलेक्टरों ने बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाई। इस कदम ने बच्चों के अधिकारों के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। निष्कर्ष संसद से संसदीय क्षेत्र तक इस पहल ने यह संदेश दिया कि बाल विवाह का खात्मा सामूहिक और राजनीतिक संकल्प से ही संभव है। 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य केवल कानून और प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक चेतना, शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से इसे हर स्तर पर लागू किया जाएगा। सांसदों और नागरिक समाज के एकजुट प्रयास ने इस दिशा में नई उम्मीद जगाई है।

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सरकारी शिक्षक के प्यार में अंधी पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर किया पति की हत्या

बालोतरा में दिल दहला देने वाली वारदात राजस्थान के बालोतरा जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। गिड़ा थाना क्षेत्र के मलवा गांव में एक महिला ने अपने प्रेमी शिक्षक के साथ मिलकर नींद में सो रहे पति महेंद्र कुमार की गला घोंटकर हत्या कर दी। यह मामला परिवारिक कलह, प्रेम संबंध और घातक परिणाम का दर्दनाक उदाहरण पेश करता है। विवाह और पारिवारिक तनाव महेंद्र कुमार (21) पुत्र पेमाराम मेघवाल का विवाह तीन साल पहले बागुंडी निवासी अनु देवी से हुआ था। शादी के बाद से दोनों के बीच मतभेद और कलह इतनी बढ़ गई कि अनु अधिकतर समय अपने मायके में ही रहने लगी। पति-पत्नी के बीच लगातार झगड़े होते रहे और कई बार पंचायत भी बुलानी पड़ी। मायके में हुआ प्रेम प्रसंग अनु देवी के मायके में रहने के दौरान उसकी दोस्ती तिलवाड़ा निवासी सरकारी शिक्षक अमराराम पुत्र चेनाराम मेघवाल से हुई। अमराराम चिड़िया क्षेत्र में सरकारी विद्यालय में कार्यरत हैं। पिछले दो सालों से अनु और शिक्षक के बीच प्रेम संबंध चल रहा था। पंचायत के बाद ससुराल वापसी पारिवारिक विवाद को लेकर पंचायत हुई और अनु कुछ समय के लिए ससुराल लौट आई। लेकिन ससुराल आने के सिर्फ दो दिन बाद ही उसने अपने प्रेमी अमराराम को फोन कर बुला लिया। यह कदम आगे चलकर घातक साबित हुआ। नींद में सो रहे पति की हत्या रात के समय, अनु और अमराराम ने मिलकर नींद में सो रहे महेंद्र कुमार की गला दबाकर हत्या कर दी। सुबह जब महेंद्र नहीं उठा तो उसकी मां कमरे में गई और देखा कि महेंद्र का शरीर शांत पड़ा है। गले और शरीर पर खरोंच के निशान देख कर परिवार में हड़कंप मच गया। मृतक के भाई ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी सूचना मिलते ही गिड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने अनु देवी और अमराराम को डिटेन कर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों ने हत्या की गवाही दी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मृतक का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंपा गया। सामाजिक और कानूनी पहलू यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि यह सामाजिक रीति-रिवाज, विवाह संबंधी कलह और प्रेम संबंधों के घातक परिणाम को भी उजागर करता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की पूर्व नियोजित हत्या भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत गंभीर अपराध मानी जाती है। परिवार और समाज में प्रतिक्रिया स्थानीय समाज में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। यह घटना परिवारिक विश्वास और सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक मानी जा रही है। लोग इस तरह की हत्या को गंभीर चेतावनी के रूप में देख रहे हैं और परिवारिक विवादों में सामाधान के लिए कानूनी मार्ग अपनाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। निष्कर्ष बालोतरा की यह घटना दर्शाती है कि प्रेम संबंध और पारिवारिक कलह कभी-कभी घातक परिणाम दे सकते हैं। यह मामला समाज को चेतावनी देता है कि पारिवारिक विवादों का समाधान समझदारी और कानूनी उपायों से करना आवश्यक है।

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एलपीजी पर बड़ी राहत: दो और जहाजों ने पार किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

भारत के दो एलपीजी टैंकर, ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’, युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ये जहाज लगभग 92,612 टन एलपीजी लेकर आ रहे हैं, जो भारत की एक दिन की खपत के बराबर है। इस उपलब्धि के साथ घरेलू गैस की आपूर्ति में एक बड़ी राहत की उम्मीद जताई जा रही है। युद्धग्रस्त जलमार्ग पार कर भारत की ओर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दोनों जहाज सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर गए। यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और खाड़ी देशों के तेल और गैस उत्पादों को दुनिया के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। हाल ही में अमेरिका और इज़राइल के हमलों के कारण यह क्षेत्र लगभग बंद हो गया था। कितनी LPG ला रहे हैं जहाज? पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इन दोनों जहाजों पर कुल 92,612 टन एलपीजी लोड किया गया है। इतनी एलपीजी से लगभग 65.21 लाख घरेलू सिलिंडर भरे जा सकते हैं। ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविकों के साथ आ रहे हैं। ये जहाज उन 22 भारतीय जहाजों में से हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद फंसे थे। भारत में पहुंचने की संभावना विशेष सचिव के अनुसार, इन टैंकरों के 26 मार्च से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है। इनकी सुरक्षित वापसी घरेलू एलपीजी आपूर्ति को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अन्य जहाजों की स्थिति शुरू में, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद थे। इनमें से 24 पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। अब तक दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे हैं। रणनीतिक महत्व और राहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व इसलिए है क्योंकि यह खाड़ी देशों के ऊर्जा उत्पादों का प्रमुख मार्ग है। युद्ध के कारण यह मार्ग बंद होने पर भारत समेत कई देशों में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती थी। ऐसे में इन दो टैंकरों की सुरक्षित वापसी एक सकारात्मक संकेत है। निष्कर्ष भारत की एलपीजी आपूर्ति अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटने की उम्मीद है। विशेषज्ञ मानते हैं कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से जहाजों की सुरक्षित वापसी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस कदम से घरेलू गैस की कीमतों और वितरण पर दबाव कम होने की संभावना है।

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ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमले से पहले नेतन्याहू ने ट्रंप से की थी फोन वार्ता

HighLights नेतन्याहू ने ट्रंप को खामेनेई पर हमले का अवसर बताया ट्रंप पहले युद्ध से बचने की इच्छा रखते थे अमेरिका-इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से 48 घंटे पहले, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य ट्रंप को यह समझाना था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाना और ट्रंप की हत्या के ईरानी प्रयासों का बदला लेना एक ऐतिहासिक अवसर है। खुफिया जानकारी और हमला शुरू करने का कारण सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू और ट्रंप दोनों को उसी सप्ताह नई इंटेलिजेंस ब्रीफिंग मिली, जिसमें बताया गया कि खामेनेई और उनके मुख्य सहयोगी जल्द ही तेहरान स्थित अपने परिसर में बैठक करेंगे। नेतन्याहू को यह जानकारी मिली कि बैठक का समय शनिवार रात से बदलकर शनिवार सुबह कर दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि अब या कभी नहीं – यह खामेनेई को मारने और ट्रंप के खिलाफ पूर्व ईरानी साजिशों का जवाब देने का सर्वोत्तम अवसर है। इसमें 2024 की एक कथित साजिश भी शामिल थी, जब ट्रंप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। नेतन्याहू ने फोन पर ट्रंप को बताया कि इस ऑपरेशन से वह इतिहास रच सकते हैं और ईरानी जनता सड़कों पर उतरकर धार्मिक शासन व्यवस्था को चुनौती दे सकती है। ट्रंप की सोच और निर्णय हालांकि, ट्रंप ने पहले सार्वजनिक रूप से ईरान के साथ युद्ध से बचने की इच्छा जताई थी और कूटनीतिक तरीके से समाधान पसंद किया। 2024 में अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत ईरान के साथ शांति बनाए रखने पर जोर दिया था। लेकिन व्हाइट हाउस सूत्रों के अनुसार, जब पिछले वसंत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत असफल रही, तो ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई पर विचार करना शुरू किया। जून में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की। कूटनीतिक प्रयास और आगामी हमले की तैयारी दिसंबर में, मार-ए-लागो दौरे के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को जून के ऑपरेशन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होने की जानकारी दी। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे कूटनीतिक बातचीत का एक और दौर आजमाना चाहते हैं, लेकिन सैन्य विकल्प भी तैयार रखते हैं। इस साल ईरान में सत्ता विरोधी आंदोलन के बीच, इजरायली डिफेंस फोर्सेज और अमेरिकी सेनाओं के बीच गोपनीय समन्वय मजबूत हुआ। फरवरी में नेतन्याहू ने ट्रंप को ईरान के बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और अमेरिका तक हमले की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी। निष्कर्ष नेतन्याहू की वार्ता, खामेनेई की बैठक की समय-सारिणी और ट्रंप के विकल्पों का संयोजन अमेरिका-इजरायल हमले के पीछे निर्णायक कारण बने। यह स्पष्ट है कि ट्रंप के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता को मारने का मौका, कूटनीतिक बातचीत के विकल्प के बावजूद, मुख्य प्रेरणा बना।

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बंगाल चुनाव 2026: ओवैसी-कबीर गठबंधन से बदलेगा सियासी खेल?

नई राजनीति, नया समीकरण 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक परिदृश्य में एक अहम मोड़ देखने को मिल रहा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने हुमायूं कबीर की क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबंधन किया है। यह कदम बंगाल में चुनावी रणनीति को पूरी तरह से बदल सकता है। हुमायूं कबीर, जिन्होंने पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और बाद में तृणमूल कांग्रेस के साथ राजनीति की है, अब अपनी अलग पहचान के साथ मैदान में हैं। उनके पास पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में स्थानीय नेटवर्क और मजबूत पैठ है। AIMIM के साथ गठबंधन करने के बाद उनकी ताकत और प्रभाव बढ़ सकता है। ओवैसी की रणनीति और विस्तार असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM पहले भी देश के कई राज्यों में अपनी पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही थी। पश्चिम बंगाल में पिछली कोशिशों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन के बाद पार्टी को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि AIMIM का उद्देश्य राज्य में मुस्लिम मतदाताओं पर असर डालना और उन्हें एक नई विकल्प की ओर मोड़ना है। यह गठबंधन छोटे और क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए भी तैयार है। वोट बैंक समीकरण बदलने की संभावना हुमायूं कबीर और AIMIM का गठबंधन खासकर उन इलाकों में असरदार हो सकता है, जहां अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह गठबंधन पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस समर्थकों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, विपक्ष का कहना है कि इससे वोटों का बंटवारा होगा, जिसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है। तीसरे विकल्प की चुनौती राजनीतिक विशेषज्ञ इस गठबंधन को बंगाल में तीसरे विकल्प के रूप में देख रहे हैं। अगर यह गठबंधन सफल होता है, तो राज्य की राजनीति में नया मोड़ आएगा। चुनावी समीकरण अब सिर्फ TMC और BJP तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि AIMIM-कबीर गठबंधन भी निर्णायक हो सकता है। स्थानीय मुद्दों पर ध्यान गठबंधन ने बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक न्याय जैसे स्थानीय मुद्दों पर काम करने की योजना बनाई है। हुमायूं कबीर ने कहा कि उनका मकसद जनता की आवाज को मजबूती देना है। गठबंधन का यह एजेंडा अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच काफी हद तक प्रभाव डाल सकता है। गठबंधन के राजनीतिक लाभ और चुनौतियां इस गठबंधन के कई संभावित लाभ हैं: स्थानीय नेताओं की ताकत बढ़ाना अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधना क्षेत्रीय मुद्दों पर फोकस वहीं चुनौतियां भी कम नहीं हैं: विपक्षी दलों का वोट बंटवारा TMC और BJP जैसी मजबूत पार्टियों के खिलाफ मुकाबला गठबंधन के नए नेताओं के बीच सामंजस्य चुनावी रणनीति और तैयारी राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि AIMIM और हुमायूं कबीर का फोकस उन सीटों पर होगा जहां मुस्लिम मतदाता अधिक हैं। यहां पर उनका उद्देश्य पारंपरिक पार्टियों के वोटरों को प्रभावित करना और नया विकल्प पेश करना है। चुनाव की तैयारी में गठबंधन ने स्थानीय नेता, कार्यकर्ता और सोशल मीडिया कैंपेन पर जोर दिया है। उनका मानना है कि यह रणनीति उन्हें निर्णायक बढ़त दिला सकती है। समर्थक और आलोचक क्या कहते हैं समर्थक मानते हैं कि गठबंधन का उद्देश्य क्षेत्रीय मुद्दों को मजबूती देना और स्थानीय नेतृत्व को आगे लाना है। वहीं आलोचक कहते हैं कि यह गठबंधन वोटों का बंटवारा कर सकता है और इसका फायदा BJP को मिल सकता है। निष्कर्ष 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन एक नया फैक्टर साबित हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि हुमायूं कबीर और AIMIM का यह कदम मतदाताओं के बीच कितना असर डाल पाता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह निश्चित रूप से एक नई चुनौती है। चुनावी मुकाबला अब पहले से अधिक रोमांचक और अनिश्चित नजर आ रहा है।

खेल जगत

धोनी का रिकॉर्ड क्यों है सबसे खास? IPL 2026 में फिर चर्चा तेज

IPL 2026 में फिर सुर्खियों में ‘कैप्टन कूल’ इंडियन प्रीमियर लीग यानी Indian Premier League का 2026 सीजन शुरू होते ही एक बार फिर दिग्गज खिलाड़ियों की चर्चा तेज हो गई है। इनमें सबसे प्रमुख नाम है महेंद्र सिंह धोनी का, जो अपने शानदार करियर और रिकॉर्ड्स के कारण आज भी सुर्खियों में बने हुए हैं। धोनी का एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे क्रिकेट एक्सपर्ट्स ‘अमर’ मानते हैं। यह रिकॉर्ड है विकेटकीपर के तौर पर सबसे ज्यादा डिसमिसल (शिकार) करने का, जो उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है। रिकॉर्ड जिसने बनाया धोनी को खास धोनी ने 2008 से 2025 तक IPL में 278 मैच खेले हैं और इस दौरान उन्होंने विकेट के पीछे 201 बल्लेबाजों को आउट किया है। इनमें 154 कैच और 47 स्टम्पिंग शामिल हैं। यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उनके लंबे और लगातार शानदार प्रदर्शन की कहानी है। विकेट के पीछे उनकी फुर्ती और सटीकता ने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपरों में शामिल किया है। क्यों खास है यह उपलब्धि? आज के समय में क्रिकेट काफी बदल चुका है। खिलाड़ियों का करियर छोटा होता जा रहा है और टीमों में लगातार बदलाव होते रहते हैं। ऐसे में किसी खिलाड़ी का लगभग दो दशक तक एक ही लीग में टिके रहना और लगातार अच्छा प्रदर्शन करना बेहद मुश्किल है। महेंद्र सिंह धोनी ने न सिर्फ लंबा करियर बनाया, बल्कि हर सीजन में अपनी उपयोगिता साबित की। यही कारण है कि उनका यह रिकॉर्ड अन्य खिलाड़ियों से काफी आगे नजर आता है। कप्तानी और विकेटकीपिंग का अनोखा मेल धोनी की खासियत सिर्फ विकेटकीपिंग तक सीमित नहीं है। उन्होंने Chennai Super Kings को पांच बार चैंपियन बनाया और टीम को एक स्थिर पहचान दी। कप्तानी और विकेटकीपिंग दोनों जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना आसान नहीं होता, लेकिन धोनी ने इसे बेहद सहजता से किया। उन्होंने मैदान पर कई बार ऐसे फैसले लिए, जो मैच का रुख बदलने वाले साबित हुए। विकेट के पीछे धोनी की खासियत धोनी की विकेटकीपिंग की सबसे बड़ी ताकत उनकी तेज रिफ्लेक्स और गेम रीडिंग है। बिजली जैसी तेज स्टम्पिंग गेंदबाजों को लगातार गाइड करना बल्लेबाजों की कमजोरी को तुरंत पहचानना उनकी स्टम्पिंग इतनी तेज होती है कि बल्लेबाज को संभलने का मौका ही नहीं मिलता। कई बार तो रिप्ले में ही पता चलता है कि बल्लेबाज आउट हो चुका है। कौन है इस रिकॉर्ड के करीब? मौजूदा खिलाड़ियों में ऋषभ पंत इस रिकॉर्ड के सबसे करीब माने जा रहे हैं। पंत ने अब तक 125 मैचों में 101 डिसमिसल किए हैं। हालांकि, वह अभी भी धोनी से काफी पीछे हैं। इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए उन्हें कई सालों तक लगातार खेलना होगा और फिट रहना होगा। दूसरे दावेदार क्यों पीछे रह गए? धोनी के बाद दिनेश कार्तिक का नाम आता है, जिन्होंने 174 डिसमिसल किए, लेकिन वह अब संन्यास ले चुके हैं। वहीं ऋद्धिमान साहा ने 113 डिसमिसल किए हैं, लेकिन उनका करियर भी अंतिम चरण में है। इन आंकड़ों से साफ है कि धोनी का रिकॉर्ड बाकी खिलाड़ियों से काफी आगे है और इसे पार करना आसान नहीं होगा। क्या IPL 2026 में बढ़ेगा यह रिकॉर्ड? IPL 2026 में महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर मैदान पर नजर आने वाले हैं। ऐसे में यह तय है कि उनके डिसमिसल का आंकड़ा और बढ़ेगा। जितना ज्यादा यह आंकड़ा बढ़ेगा, उतना ही यह रिकॉर्ड और मजबूत होता जाएगा और आने वाले खिलाड़ियों के लिए चुनौती और कठिन हो जाएगी। क्या यह धोनी का आखिरी सीजन हो सकता है? धोनी ने 2020 में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था, लेकिन IPL में वह अभी भी सक्रिय हैं। हर साल यह चर्चा होती है कि यह उनका आखिरी सीजन हो सकता है। इस बार उनकी फिटनेस, खासकर घुटने की समस्या को देखते हुए यह संभावना और ज्यादा लग रही है। अगर यह उनका आखिरी सीजन होता है, तो फैंस के लिए यह एक भावुक पल होगा। फैंस और क्रिकेट पर प्रभाव धोनी का यह रिकॉर्ड सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह IPL और क्रिकेट के इतिहास का अहम हिस्सा बन चुका है। फैंस के लिए धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक भावना हैं। उनका हर रिकॉर्ड उनके शानदार करियर की कहानी बयान करता है। निष्कर्ष: एक ऐसा रिकॉर्ड जो लंबे समय तक रहेगा कायम महेंद्र सिंह धोनी का विकेटकीपिंग रिकॉर्ड सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उनके समर्पण, मेहनत और निरंतरता का प्रतीक है। मौजूदा दौर में जिस तरह से क्रिकेट खेला जा रहा है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह रिकॉर्ड आने वाले कई वर्षों तक अटूट रहेगा। IPL 2026 में एक बार फिर यह रिकॉर्ड चर्चा में है और फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि ‘कैप्टन कूल’ एक बार फिर अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित करेंगे।

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वायरल हुआ ‘ऑपरेशन लियारी’ वीडियो, ‘धुरंधर 2’ के सीन से दिखी समानता

फिल्म की सफलता के बीच सामने आया असली वीडियो बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही फिल्म धुरंधर 2 इन दिनों हर तरफ चर्चा में है। दर्शकों के बीच इसकी कहानी, एक्शन और किरदारों को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है, जिसने फिल्म की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया है। यह वीडियो कराची के चर्चित ‘ऑपरेशन लियारी’ से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान के चर्चित पुलिस अधिकारी चौधरी असलम नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आते ही लोगों ने इसे फिल्म के एक खास सीन से जोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। क्या है ‘ऑपरेशन लियारी’? ऑपरेशन लियारी दरअसल कराची के लियारी इलाके में चलाया गया एक बड़ा पुलिस अभियान था। यह इलाका लंबे समय से गैंगस्टर गतिविधियों, ड्रग्स और संगठित अपराध का केंद्र माना जाता था। यहां कई आपराधिक गिरोह सक्रिय थे, जो इलाके में हिंसा और दहशत फैलाते थे। इन गिरोहों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की, जिसे ‘ऑपरेशन लियारी’ नाम दिया गया। इस ऑपरेशन का नेतृत्व चौधरी असलम जैसे सख्त और आक्रामक पुलिस अधिकारी कर रहे थे। कौन थे चौधरी असलम? चौधरी असलम पाकिस्तान पुलिस के उन अधिकारियों में गिने जाते थे, जो अपने सख्त रवैये और अपराधियों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के लिए जाने जाते थे। उन्हें ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में भी पहचाना जाता था। कराची जैसे बड़े और संवेदनशील शहर में उन्होंने कई बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया। लियारी इलाके में उनकी कार्रवाई को सबसे अहम माना जाता है, जहां उन्होंने गैंग नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए। वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में चौधरी असलम को अपने पुलिस दस्ते के साथ एक जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम देते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में गोलियों की आवाज, तनावपूर्ण माहौल और मौके पर मौजूद पुलिस बल की सक्रियता साफ दिखाई देती है। यह फुटेज उस समय की गंभीरता को दर्शाता है, जब पुलिस को गैंगस्टर्स के खिलाफ सीधे मोर्चा लेना पड़ा था। वीडियो के कई हिस्से ऐसे हैं, जो फिल्म के दृश्यों से काफी मिलते-जुलते लगते हैं। ‘धुरंधर 2’ से कैसे जुड़ा है यह मामला? फिल्म धुरंधर 2 में संजय दत्त ने एसपी असलम का किरदार निभाया है, जो काफी हद तक चौधरी असलम से प्रेरित बताया जा रहा है। फिल्म में एक सीन ऐसा भी है, जिसमें एक रिपोर्टर फायरिंग के बीच मौके से रिपोर्टिंग करता हुआ दिखाई देता है। जब यह वायरल वीडियो सामने आया, तो दर्शकों ने तुरंत इसे फिल्म के उसी सीन से जोड़ दिया। कई लोगों का मानना है कि फिल्म निर्माताओं ने इस वास्तविक घटना से प्रेरणा लेकर इसे बड़े पर्दे पर उतारा है। फिल्म और हकीकत के बीच समानता फिल्मों में अक्सर असली घटनाओं से प्रेरणा ली जाती है, लेकिन इस मामले में समानता काफी स्पष्ट नजर आती है। वायरल वीडियो और फिल्म के सीन में कई ऐसे तत्व हैं—जैसे ऑपरेशन का माहौल, पुलिस की रणनीति और मीडिया की मौजूदगी—जो एक-दूसरे से मेल खाते हैं। इसी वजह से दर्शकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि फिल्म ने वास्तविक घटनाओं को कितनी सटीकता से दिखाया है। सोशल मीडिया पर क्यों छाया वीडियो? यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है, जब धुरंधर 2 पहले से ही चर्चा में है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इस वीडियो को शेयर करते हुए फिल्म के सीन से तुलना कर रहे हैं। कुछ लोग इसे फिल्म की रिसर्च और प्रामाणिकता का उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि यह केवल एक संयोग भी हो सकता है। हालांकि, इस वीडियो ने फिल्म को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। फिल्म की सफलता और स्टारकास्ट धुरंधर 2 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और शुरुआती दिनों में ही शानदार कमाई कर चुकी है। फिल्म में रणवीर सिंह एक भारतीय जासूस की भूमिका में नजर आ रहे हैं। इसके अलावा संजय दत्त का किरदार सबसे ज्यादा चर्चा में है। उनके दमदार अभिनय और सख्त पुलिस अधिकारी की छवि ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। साथ ही अर्जुन रामपाल, आर माधवन और सारा अर्जुन भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। क्या है दर्शकों की प्रतिक्रिया? दर्शकों का कहना है कि फिल्म में दिखाए गए एक्शन और रियल लाइफ घटनाओं के बीच तालमेल इसे और ज्यादा रोचक बना देता है। वायरल वीडियो ने इस उत्सुकता को और बढ़ा दिया है, जिससे लोग फिल्म को एक नए नजरिए से देख रहे हैं। निष्कर्ष ‘ऑपरेशन लियारी’ का वायरल वीडियो और धुरंधर 2 के सीन के बीच समानता ने इस मामले को सुर्खियों में ला दिया है। यह केवल एक फिल्मी कहानी नहीं रह गई, बल्कि वास्तविक घटनाओं से जुड़ा एक ऐसा पहलू बन गया है, जिसने दर्शकों की दिलचस्पी को दोगुना कर दिया है। फिल्म और हकीकत के इस मेल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सिनेमा और वास्तविक जीवन के बीच की दूरी कभी-कभी बहुत कम रह जाती है।

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पूर्व सीएम Ashok Gehlot का सरकार पर तंज: “प्रदेश में चल रहा है इंतजारशास्त्र

राजस्थान की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने राज्य सरकार के कामकाज पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि दिसंबर 2023 से प्रदेश में एक अजीबोगरीब “इंतजारशास्त्र” लागू कर दिया गया है। उनका आरोप है कि पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू किए गए जनहितकारी प्रोजेक्ट्स को जानबूझकर धीमा कर दिया गया है, जिससे न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं बल्कि जनता को भी अपने अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल गहलोत ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार के दौरान शुरू किए गए कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स आज अधर में लटके हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार राजनीतिक कारणों से इन योजनाओं को आगे नहीं बढ़ा रही है। उनका कहना है कि इस तरह की राजनीति से प्रदेश का नुकसान हो रहा है और आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को रोकना या धीमा करना केवल राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। “जनता ने सरकार को काम करने के लिए चुना है, न कि पिछली सरकार के कामों को रोकने के लिए,” गहलोत ने कहा। जयपुर में तैयार संस्थान अब भी बंद पूर्व मुख्यमंत्री ने खास तौर पर Jaipur के जेएलएन मार्ग स्थित ‘महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज’ का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इस संस्थान की भव्य इमारत वर्ष 2024 में ही पूरी तरह तैयार हो चुकी है, लेकिन अब तक इसे शुरू नहीं किया गया है। गहलोत ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इस संस्थान को शुरू करने से क्यों बच रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“क्या सरकार इसीलिए इस संस्थान को शुरू नहीं कर रही क्योंकि यह Mahatma Gandhi के नाम पर है?” 233 करोड़ की लागत से बना संस्थान गहलोत ने जानकारी दी कि इस संस्थान की नींव अक्टूबर 2022 में लगभग 233 करोड़ रुपये के बजट से रखी गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के युवाओं को सुशासन और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और शोध सुविधाएं प्रदान करना था। उन्होंने कहा कि इस संस्थान को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे Tata Institute of Social Sciences और MIT Pune की तर्ज पर विकसित किया जाना था। इसका मकसद था कि राजस्थान के छात्र-छात्राओं को राज्य में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा मिल सके। स्वायत्त संस्थान के रूप में की गई थी स्थापना गहलोत ने यह भी बताया कि इस संस्थान को एक एक्ट के माध्यम से स्वायत्त दर्जा दिया गया था, ताकि यह राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहकर स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा और शोध जैसे क्षेत्रों को राजनीति से दूर रखना बेहद जरूरी है। “हमारा उद्देश्य था कि यह संस्थान आने वाले वर्षों में देश और दुनिया में एक पहचान बनाए और राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाए,” उन्होंने कहा। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस संस्थान को शुरू न करना सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र इस संस्थान में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण यह सपना अधूरा रह गया है। गहलोत ने कहा—“संस्थान किसी एक सरकार या दल के लिए नहीं होते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए बनाए जाते हैं। ऐसे में उन्हें रोकना या टालना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” गांधी के नाम पर राजनीति? अपने बयान में गहलोत ने यह भी कहा कि Mahatma Gandhi के नाम और उनके विचारों से राजनीतिक द्वेष रखना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गांधी जी देश के राष्ट्रपिता हैं और उनके नाम पर बने संस्थान का विरोध करना संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा—“गांधी जी के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। उनके नाम पर बने संस्थान को शुरू करने में देरी करना न केवल उनके विचारों का अपमान है बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी से भी मुंह मोड़ना है।” सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग गहलोत ने राज्य सरकार से मांग की कि वह तुच्छ राजनीति से ऊपर उठकर इस संस्थान को तुरंत शुरू करे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया, तो जनता इसका जवाब जरूर देगी। उन्होंने कहा—“जनहित के प्रोजेक्ट्स को रोकना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सरकार को चाहिए कि वह सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए और प्रदेश के विकास के लिए काम करे।” राजनीतिक माहौल में बढ़ी तल्खी गहलोत के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विकास परियोजनाओं को लेकर इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप जनता के बीच भी चर्चा का विषय बनते हैं और इससे सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है। जनता की उम्मीदें और सरकार की जिम्मेदारी राजस्थान की जनता ने हमेशा विकास और सुशासन को प्राथमिकता दी है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सरकारें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाएं। गहलोत का यह बयान न केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है, बल्कि यह उन सवालों को भी उठाता है जो आम जनता के मन में हैं—क्या विकास कार्य राजनीति की भेंट चढ़ रहे हैं?

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Rajasthan Board 5th 8th Result 2026: राजस्थान 5वीं 8वीं रिजल्ट लिंक rajpsp.nic.in पर होगा एक्टिव, 4 स्टेप्स में नतीजे करें चेक

आरबीएसई की ओर से कक्षा 5वीं और 8वीं का रिजल्ट आज किसी भी समय rajpsp.nic.in पर जारी कर दिया जायेगा। नतीजे आते ही छात्र सीधे ही इस पेज पर दिए लिंक से परिणाम की जांच कर सकेंगे। आरबीएसई 5th 8th रिजल्ट 24 मार्च को होना है घोषित। पास होने के लिए सभी विषयों में 33 फीसदी अंक प्राप्त करना अनिवार्य।  बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन राजस्थान (RBSE) की ओर से आज परिणाम आज जारी किया जायेगा। बोर्ड की ओर से दोनों ही कक्षाओं का रिजल्ट प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, बोर्ड अध्यक्ष व अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में जारी किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नतीजे जारी होते ही डायरेक्ट लिंक सीधे शालादर्पण पोर्टल rajshaladarpan.nic.in के साथ ही rajpsp.nic.in पर एक्टिव हो जायेगा। नतीजे जारी होने पर RBSE Board 5th 8th Result 2026 Link इस पेज पर भी उपलब्ध करवा दिया जायेगा जिस पर क्लिक करके आप सीधे परिणाम की जांच कर पाएंगे। मार्कशीट केवल 4 स्टेप्स में कर सकेंगे डाउनलोड राजस्थान बोर्ड 5th 8th रिजल्ट जारी होने के बाद यहां दी जा रही केवल 4 स्टेप्स को फॉलो करके परिणाम की जांच की जा सकेगी और मार्कशीट की डिजिटल कॉपी भी डाउनलोड की जा सकेगी स्टेप 1: राजस्थान 5th 8th रिजल्ट 2026 चेक करने के लिए सबसे पहले शालादर्पण पोर्टल rajshaladarpan.nic.in पर जाना होगा। स्टेप 2: वेबसाइट के होम पेज पर आपको जिस कक्षा का रिजल्ट चेक करना है उस लिंक पर क्लिक करना होगा। स्टेप 3: इसके बाद रोल नंबर एवं जिला या रोल नंबर एवं डेट ऑफ बर्थ दर्ज करना होगा। स्टेप 4: अब रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जायेगा जहां से आप इसे चेक करने के साथ ही मार्कशीट की प्रति डाउनलोड भी कर सकते हैं। छात्रों एवं उनके अविभावकों को बता दें कि वे ऑनलाइन माध्यम से केवल मार्कशीट का प्रिंट निकाल पाएंगे। ओरिजिनल मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के कुछ दिन बाद आपके स्कूल से प्राप्त होगी। पास होने के लिए सभी विषयों में 33 फीसदी अंक अनिवार्य राजस्थान बोर्ड 5th 8th क्लास में पास होने के लिए सभी विषयों में न्यूनतम 33 फीसदी अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। एक विषय में छात्रों को ग्रेस मार्क्स के साथ भी पास किया जा सकता है। इसके अलावा जो छात्र बोर्ड परीक्षा में फेल हो जायेंगे उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। बोर्ड के नए नियम के मुताबिक 45 दिनों के अंदर स्कूलों द्वारा दोबारा परीक्षा का आयोजन किया जायेगा। इसके बाद स्टूडेंट्स इसमें भाग लेकर एग्जाम को पास कर सकेंगे और अपना साल खराब होने से बचा पाएंगे।

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