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सुप्रीम कोर्ट बोला- बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने:ट्रिब्यूनल जिन्हें 21 अप्रैल तक वोटर मानेगा, वो 23 को वोट डाल सकेंगे
राजनीति

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया- बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने, 21 अप्रैल तक मान्य वोटर 23 को कर सकेंगे मतदान

नई दिल्ली,  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जल्द ही जारी करे, जिसमें उन सभी वोटर्स को शामिल किया जाए जिनकी अपीलों पर ट्रिब्यूनल ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिनकी अपीलें अभी लंबित हैं, उन्हें वोट डालने की अनुमति नहीं मिलेगी। इससे पहले, पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत लगभग 90.83 लाख वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इसके बाद त्रिपक्षीय ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है, जहां इन हटाए गए नामों पर अपीलों की सुनवाई की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमलया बागची शामिल हैं, SIR प्रक्रिया से जुड़े विवादों पर सुनवाई कर रही है। बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने वाले हैं, पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा 29 अप्रैल को। पहले चरण के लिए जिन इलाकों में मतदान होना है, वहां 21 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल के फैसले आने पर ही वोटर मतदान कर सकेंगे। वहीं दूसरे चरण के क्षेत्र के वोटर्स के लिए यह अंतिम तारीख 27 अप्रैल रखी गई है। ट्रिब्यूनल द्वारा नामों को वोटर सूची में वापस जोड़ने के आदेश के बाद, चुनाव आयोग का इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तुरंत सूची में संशोधन करेगा। ट्रिब्यूनल की संख्या 19 है और ये रिटायर्ड हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की अगुवाई में काम कर रहे हैं, जिनके सामने कुल 34 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं। कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि ट्रिब्यूनलों को अतिभारित ना किया जाए ताकि वे समय पर मामले निपटा सकें। पश्चिम बंगाल में SIR का उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लिकेट व अयोग्य नाम काटना है। बावजूद इसके, इस प्रक्रिया को लेकर सियासी विवाद खूब गर्माया है। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर उनके समर्थकों को सूची से बाहर किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जरूरी प्रक्रिया मानता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के बाद अक्टूबर 2023 तक पश्चिम बंगाल के कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 90.83 लाख नाम हटा दिए गए, जो कुल मतदाता संख्या का लगभग 11.85% है। ज्यादातर हटाए गए नाम राज्य के बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों जैसे नॉर्थ 24 परगना और मृतिका में हैं। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख मतदाताओं में से 3.25 लाख और मृतिका में 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटाए गए हैं। स्पष्ट रूप से इस प्रक्रिया ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। 8 अप्रैल को, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने चुनाव आयोग से बैठक की थी, जिसमें उन्होंने SIR को लेकर समय मांगा था। लेकिन बैठक में खराब व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने केवल पांच मिनट में उनकी बात सुनी और उन्हें भगा दिया। चुनाव आयोग ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बैठक तनावपूर्ण रही। अंत में, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट होता है कि न्यायालय चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि सभी वैध मतदाता चुनाव में भाग ले सकें और मतदाता सूची में व्यापक पारदर्शिता रहे। यह कदम राजनीतिक दलों के बीच मतदाता सूची को लेकर हो रही विवादों को कम करने के लिए भी अहम माना जा रहा है।

12 राज्यों-UT में SIR, 6.08 करोड़ लोगों के नाम कटे:UP में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़, बंगाल में 91 लाख वोटर फाइनल लिस्ट से बाहर
धर्म एवं यात्रा

12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया के दौरान 6.08 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए: यूपी में सबसे अधिक 2.04 करोड़, बंगाल में 91 लाख वोटर सूची से बाहर

  चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दूसरे फेज के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में फाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई, जिसके साथ ही 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट में कुल 6.08 करोड़ नाम कट गए हैं। यह सबसे बड़े पैमाने पर वोटर सूची संशोधन का उदाहरण है, जिससे देश के निर्वाचन तंत्र की पारदर्शिता और गुणवत्ता को और बढ़ावा मिलेगा। पिछले साल 27 अक्टूबर को SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 51 करोड़ थी, जो अब फाइनल लिस्ट के बाद घटकर 44.92 करोड़ रह गई है। उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को जारी SIR की फाइनल लिस्ट में वोटरों की संख्या करीब 13 प्रतिशत घटकर 13.39 करोड़ रह गई है, यानी लगभग 2.04 करोड़ नाम इस सूची से हटाए गए हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में करीब 91 लाख वोटर्स के नाम फाइनल लिस्ट से बाहर हुए हैं। SIR प्रक्रिया के दूसरे फेज में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, तथा लक्षद्वीप की फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित की गई है। यह प्रक्रिया सभी राज्यों में मतदाता सूची को अपडेट करने और साफ-सुथरी बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। चुनाव आयोग ने देश में अब तक करीब 60 करोड़ मतदाताओं को इस अभियान में शामिल किया है और बाकी 39 करोड़ मतदाताओं को अगले फेज में कवर किया जाएगा। SIR के तीसरे फेज में 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया लागू होगी, जो इस महीने पांच विधानसभा चुनावों के बाद शुरू होगी। पश्चिम बंगाल में वोटर सूची में बड़ी कटौती पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, यह कार्रवाई नवंबर से चल रही प्रक्रिया के तहत की गई है। आयोग के 28 फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक, SIR शुरू होने के बाद पहले से ही 63.66 लाख नाम हटाए गए थे, जिससे मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई। बाद में जांच और प्रक्रिया पूरी होने के साथ कुल हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर लगभग 90.83 लाख हो गई है। SIR प्रक्रिया के बारे में 6 जरूरी सवाल-जवाब SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है जिसमें घर-घर जाकर वोटर फॉर्म भरे जाते हैं और फॉरम्स के जरिए वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। इसमें नए 18 वर्ष से अधिक के वोटर जोड़े जाते हैं और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। पहले फेज में कौन-कौन से राज्यों की वोटर सूची संशोधित हुई? पहले फेज में बिहार में SIR किया गया था। दूसरे फेज में उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप को शामिल किया गया। ये प्रक्रिया कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का सत्यापन करते हैं। मतदाताओं को क्या करना होता है? मतदाताओं को दिए गए फॉर्म्स की जानकारी मिलान करनी होती है। यदि किसी वोटर के नाम दो जगह हैं तो एक हटवाना होता है, या नए वोटर होने पर नाम जोड़वाना होता है। कौन से दस्तावेज मान्य हैं? पेंशनर पहचान पत्र, सरकारी आईडी, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, 10वीं की मार्कशीट, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, आधार कार्ड आदि मान्य दस्तावेज हैं। SIR का उद्देश्य क्या है? यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट में कोई भी योग्य वोटर छूट न जाए और कोई अयोग्य मतदाता शामिल न हो। इसके जरिए मतदाता सूची में पुरानी और गलत जानकारियों को सही किया जाता है। पूरे देश में निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को मज़बूत करने के लिए इस तरह की व्यापक पहल आवश्यक है। 2025 तक पूरे भारत में SIR पूरी करने का लक्ष्य चुनाव आयोग ने निर्धारित किया है, जिससे भविष्य में चुनाव स्वच्छ और विश्वसनीय तरीके से आयोजित हो सकें।

यूपी में 2.5 करोड़ वोटर्स के नाम कटे:84 लाख नए मतदाता जुड़े, अब कुल वोटर्स 13.39 करोड़, SIR की फाइनल लिस्ट जारी
धर्म एवं यात्रा

यूपी में 2.5 करोड़ वोटर्स के नाम कटे, 84 लाख नए मतदाता जोड़े गए: कुल वोटर्स संख्या 13.39 करोड़, SIR की फाइनल लिस्ट जारी

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी शुक्रवार को सामने आई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रदेश की फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है। इस सूची में कुल 13.39 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जिसमें इस साल संशोधनों के बाद लगभग 2.05 करोड़ वोटर्स के नाम हटाए गए हैं, जबकि 84 लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं। इससे पहले 6 जनवरी को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम थे, इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 6.88 करोड़ और महिलाओं की संख्या 5.67 करोड़ थी। तृतीय लिंग के मतदाताओं की संख्या केवल चार हजार के लगभग थी। अंतिम सूचि में कुल पुरुष मतदाता 7.30 करोड़ (54.54%) और महिलाएं 6.09 करोड़ (45.46%) हैं, जबकि तृतीय लिंग मतदाताओं की संख्या लगभग 4206 है जो 0.01% से कम है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि योजना SIR (Specific Identification Roll) की प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी। इसमें 4 नवंबर से मतदान प्रपत्रों की गणना प्रारंभ हुई तथा प्राथमिक फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि जनवरी में बढ़ाई गई थी। प्रारंभिक ड्राफ्ट वोटर रोल दिसंबर के अंत में प्रकाशित होना था लेकिन इसे 6 जनवरी 2026 तक स्थगित कर दिया गया। मूल दावे-आपत्तियां भी 6 मार्च 2026 तक बढ़ाई गईं, जिससे मतदाता सूची और अधिक विश्वसनीय बनी है। प्रदेश में मतदाता सूची में इस तरह के बड़े संशोधन पहली बार तेजी से हुए हैं। इससे पहले यूपी सहित 11 अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की फाइनल लिस्ट जारी हो चुकी है। सबसे अधिक मतदाताओं के नाम कटने का रिकॉर्ड गुजरात में 68 लाख नाम कटने के साथ बना है, वहीं बंगाल में 63 लाख मतदाताओं के नाम सूचि से हटे हैं। राज्य निर्वाचन कार्यालय यूपी की मतदाता सूचि में हुए संशोधन चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में गंभीर कदम माना जा रहा है। इससे न केवल फर्जी वोटरों की संख्या कम होगी बल्कि नए योग्य मतदाताओं को भी वोट देने का मौक़ा मिलेगा। मतदाता सूची की इस अंतिम सूची के आधार पर आगामी चुनावों की तैयारी शुरु कर दी जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने आमजन से आग्रह किया है कि वे अपनी मतदाता जानकारी का खुद भी बार-बार निरीक्षण करते रहें ताकि कोई अनावश्यक त्रुटि न रह जाए। फाइनल लिस्ट से जुड़ी निरंतर अपडेट्स के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के लाइव ब्लॉग को नियमित चेक किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े लोकतांत्रिक राज्य में निर्वाचन सूची की सटीकता से चुनाव प्रक्रिया और राष्ट्रीय लोकतंत्र में विश्वसनीयता बढ़ती है। फाइनल वोटर लिस्ट की इस घोषणा के बाद जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने का काम लगातार किया जा रहा है ताकि सभी पात्र मतदाता अपने निर्वाचनों में भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।

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