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भाजपा नेता की हत्या में कर्नाटक कांग्रेस MLA को उम्रकैद:2016 के केस में विनय कुलकर्णी समेत 17 को सजा; CBI ने जांच की थी
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भाजपा नेता की हत्या में कर्नाटक कांग्रेस MLA को उम्रकैद: 2016 के केस में विनय कुलकर्णी समेत 17 को सजा; CBI ने जांच की

कर्नाटक के भाजपा नेता योगेश गौड़ा गौदर की हत्या के मामले में बेंगलुरु के स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी समेत 17 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 30-30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला 2016 में हुई इस हत्या की जांच के बाद आया है, जिसे प्रारंभ में स्थानीय पुलिस देख रही थी, लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव के कारण 2019 में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई थी। दरअसल, 15 जून 2016 को धारवाड़ जिले में बीजेपी नेता और जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की उनके जिम में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी और आरोप लगे कि मामले की जांच पर दबाव डाला गया। CBI की जांच में यह मामला गंभीर हो गया और कोर्ट ने 15 अप्रैल को कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी एवं 16 अन्य आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120B (आपराधिक साजिश) के अंतर्गत दोषी पाया। स्पेशल जज संतोष गजानन भट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी एक साजिश रचकर योगेश गौड़ा की हत्या में शामिल थे। अदालत ने यह अदालत से स्पष्ट रूप से कहा कि इस हत्या की योजना पूर्व में बनाई गई थी और सभी दोषी इसमें समान रूप से हिस्सा लेने वाले थे। इस सजा के बाद कांग्रेस नेता विनय कुलकर्णी की विधानसभा सदस्यता खतरे में है, क्योंकि कानून के अनुसार दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर एक जनप्रतिनिधि अयोग्य हो जाता है। विनय कुलकर्णी के अलावा आरोपियों में विक्रम बेल्लारी, कीर्ति कुमार, संदीप सावदत्ती, विनायक कटगी, महाबलेश्वर होंगल उर्फ ​​मुदाका, संतोष सावदत्ती, दिनेश एम, एस अश्वथ, केएस सुनील, नजीर अहमद, शानवाज, के नूतन, सी हर्षित, चन्द्रशेखर इंडी उर्फ ​​चंद्रू मामा, विकास कलबुर्गी और चन्नकेशव तिंगरीकर शामिल हैं। हालांकि, दो आरोपियों वासुदेव रामा नीलेकानी और सोमशेखर न्यामगौड़ा को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया। इस घटना की जांच की शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने की, लेकिन राजनीतिक दबाव और जांच में बाधा आने की वजह से मामले की सीबीआई को जिम्मेदारी दी गई। सीबीआई ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच की और अदालत में साक्ष्य पेश किए। इस केस में न्याय देवताओं ने सख्त फैसला सुनाकर कानूनी व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने का संदेश दिया है। योगेश गौड़ा हत्या केस की टाइमलाइन 15 जून 2016 – धारवाड़ में योगेश गौड़ा की उनके जिम में हत्या। 2016-2019 – स्थानीय पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच। 2019 – मामले की जांच CBI को सौंपी गई। 15 अप्रैल 2024 – कांग्रेस विधायक और अन्य 16 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। 28 अप्रैल 2024 – दोषियों को उम्रकैद और जुर्माना इत्यादि सजा सुनाई गई। यह फैसला राजनीतिक और अपराध जगत के लिए एक मजबूत संदेश है कि कानून के आगे सभी बराबर हैं। इसके साथ ही, इस केस का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान न्याय व्यवस्था की साख के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है। सजा के बाद यदि कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की सदस्यता रद्द होती है तो उनकी राजनीतिक भविष्य पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। सम्बंधित खबरें तमिलनाडु की मदुरै सेशन कोर्ट ने हाल ही में पिता-पुत्र की हिरासत में हुई मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (बहुत दुर्लभ) करार दिया और कहा कि यह अत्यधिक बर्बरता और सत्ता के दुरुपयोग का मामला है। यह मामला 2020 का है और छह साल की सुनवाई के बाद यह फैसला आया है। तमिलनाडु की इस घटना में कुल दस आरोपी थे, जिनमें से एक की कोविड के दौरान मौत हो गई थी। इस प्रकार के कड़े फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय न्याय व्यवस्था में अपराध के खिलाफ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। न्यायपालिका अपने निर्णयों से समाज में सुरक्षा और विश्वास कायम रखेगी।

केजरीवाल बोले-जज के बच्चे तुषार मेहता के साथ काम करते:तुषार CBI के वकील हैं, ऐसे में जज कांता मेहता के खिलाफ आदेश कैसे दे पाएंगी
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केजरीवाल ने जताई आपत्ति: जज के बच्चे CBI वकील तुषार मेहता के साथ काम करते हैं, इसलिए जज कैसे दे सकती हैं आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट में जारी शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की पुनः मांग की है। बुधवार को उन्होंने जस्टिस कांता की अदालत में एक नया हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने जज के दो बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करने के संबंध में सवाल उठाए हैं। केजरीवाल के हलफनामे में कहा गया है कि जज के दोनों बच्चे तुषार मेहता के साथ काम करते हैं, जो CBI की ओर से मामलों की पैरवी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा तुषार मेहता के खिलाफ आदेश कैसे जारी कर सकती हैं। यह मुद्दा न्यायिक निष्पक्षता और पक्षपात की आशंका से जुड़ा है। इससे पहले 13 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान भी केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा पर आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में आतंरिक शामिल होने का आरोप लगाया था। वे मांग कर चुके हैं कि ऐसे मामलों में न्यायाधीश को मामले से अलग होना चाहिए ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके। केजरीवाल की जज हटाने की अर्जी के मुख्य कारण 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल समेत 22 आरोपीयों को बरी किया था, जिसे CBI ने चुनौती दी है। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय पर रोक लगाते हुए यह कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत हैं। केजरीवाल ने कहा कि सुनवाई के दौरान CBI के अलावा कोई पक्ष मौजूद नहीं था, फिर भी आदेश में पक्षपात दिखाई दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जज के करीबी संबंध तुषार मेहता से और उनकी आरएसएस से जुड़ी गतिविधियों के कारण निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं। केजरीवाल ने जांच अधिकारी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर भी रोक लगने को संदिग्ध बताया है। 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को राहत दी थी और CBI की जांच की कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद सीबीआई की याचिका पर जस्टिस शर्मा ने सुनवाई की, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले की पहली नजर में खामियां बताईं। इस मामले में केजरीवाल को 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। मनीष सिसोदिया भी इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। हाईकोर्ट ने 9 मार्च को सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए CBI के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक लगाई है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई स्थगित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं। इससे इस अहम मामले की जटिलता और संवेदनशीलता का पता चलता है। इस पूरे घटनाक्रम ने न्याय प्रक्रिया के प्रति आम जनता में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निष्पक्ष और शीघ्र न्याय की मांग की जा रही है ताकि तूल पकड़ रहे विवादों का जल्द समाधान हो सके।

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