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बॉर्डर जिलों के लिए 360 डिग्री सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार

बीकानेर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने बीकानेर में सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे जिलों से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma, राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों तथा बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और फलोदी के जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया। सीमा प्रबंधन को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सीमा प्रबंधन को सशक्त एवं व्यापक बनाया जाए। प्रत्येक सीमावर्ती जिले के लिए 360 डिग्री सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार करने का निर्णय लिया गया। इस एकीकृत प्रयास में स्थानीय नागरिकों, राज्य सरकार की मशीनरी तथा सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे सीमा प्रबंधन को और अधिक समग्र एवं मजबूत बनाया जा सके। अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध निर्माणों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने बीएसएफ, सीबीडीटी, एनसीबी तथा राज्य सरकार की मशीनरी के साथ समन्वित सीमा प्रबंधन रणनीति अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि घुसपैठ, नारकोटिक्स तस्करी, अतिक्रमण, आतंकवादी फंडिंग और अन्य सीमा-पार अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैंकों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और फर्जी दस्तावेजों की जांच के निर्देश बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री ने जिला कलेक्टरों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए कि सभी बैंकों में पूर्ण कानूनी एवं वित्तीय अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही प्रमुख व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का सत्यापन, उनके फंडिंग स्रोतों की जांच, म्यूल खातों एवं शेल कंपनियों की पहचान, फर्जी आधार कार्डों की जांच तथा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए। उन्होंने साइबर अपराधों के त्वरित निवारण के लिए ‘1930’ कॉल सेंटर के प्रभावी उपयोग तथा क्षेत्र में कानून व्यवस्था एवं न्यायिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने के लिए तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल बैठक के दौरान वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Village Programme) के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया। इसके माध्यम से अंतिम छोर तक शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने, आर्थिक अपराधों पर रोक लगाने, बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसंख्या को बेहतर सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों में सभी सरकारी योजनाओं का 100 प्रतिशत संतृप्तिकरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। बैठक में कहा गया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही केंद्र एवं राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास और सुरक्षा को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।

गुजरात में फूड पॅाइजनिंग से 200 लोग बीमार:59 को अस्पताल में भर्ती, शादी में आम का जूस पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी
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आम का जूस बना आफत: गुजरात में फूड पॉयजनिंग से 200 लोग बीमार, 59 अस्पताल में भर्ती

शादी में आम के जूस के बाद तबीयत बिगड़ी गुजरात के दाहोद जिले के अभलोड गांव में सोमवार रात हुई एक शादी समारोह में फूड पॉयजनिंग की घटना हुई, जिससे 200 से अधिक लोग बीमार पड़ गए। इस घटना के बाद 59 लोगों को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया गया है कि लगभग 400 मेहमान इस शादी में शामिल हुए थे। शादी में डिनर की शुरुआत शाम 8 बजे हुई थी। कई मेहमानों ने बताया कि उन्होंने आम का जूस पीने के बाद अचानक तबीयत खराब महसूस करनी शुरू कर दी। कुछ घंटों के भीतर लोगों को उल्टी, दस्त और तेज पेट दर्द की शिकायत हुई। दाहोद कलेक्टर योगेश निर्गुडे ने बताया कि फूड पॉयजनिंग का प्रमाण तब स्पष्ट हुआ जब 230 लोगों ने उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत की। इसके बाद अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। सप्ताह के सोमवार की रात को जुटे इतने बड़े मेहमानों के बीच इतनी भारी संख्या में बीमार होने की घटना ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया। सभी बीमार लोगों को नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। डॉक्टर राजीव डामोर ने पुष्टि की है कि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है और सब जल्द ही ठीक हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ना केवल आम के जूस बल्कि शादी में दिए गए भोजन की भी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन ने घटना के संबंध में जांच का आदेश दिया है और फूड सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन करने की हिदायत जारी की है। जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है ताकि लोगों की जान को खतरा न हो। यह घटना फूड सेफ्टी और स्वास्थ्य सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। शादी जैसे बड़े आयोजन में भोजन की गुणवत्ता और सफाई का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है ताकि ऐसी अप्रिय घटनाएं न हों। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घटना स्थल पर सक्रिय हैं और वे जल्द से जल्द घटना की पूरी तहकीकात करने में जुटी हैं। गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी स्थानीय प्रशासन पूरी तैयारी कर रहा है। फिलहाल, प्रभावित परिवारों को राहत और अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार ने लोगों से जागरूक रहने और संदिग्ध भोजन से बचने का आग्रह किया है। इस तरह के हादसे यह याद दिलाते हैं कि सार्वजनिक आयोजन में भोजन की सुरक्षा के लिए हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। आम के जूस जैसे लोकप्रिय पेय पदार्थों की सुरक्षा जांच जरूरी हो जाती है ताकि सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

पचपदरा रिफाइनरी अग्निकांड- सुरक्षा एजेंसियां जांच करने पहुंचीं:पीएम का दौरा स्थगित होने के बाद क्रेन से हटा रहे डोम; सीएम आज करेंगे निरीक्षण
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पचपदरा रिफाइनरी अग्निकांड: सुरक्षा एजेंसियां जांच के लिए पहुंचीं

20 अप्रैल को बालोतरा के पचपदरा रिफाइनरी में आग लगने की घटना ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। यह हादसा उस वक्त हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रिफाइनरी के उद्घाटन के लिए आने वाले थे, लेकिन दुर्घटना के कारण उनका दौरा स्थगित कर दिया गया। हादसे के लगभग 20 घंटे बाद सुरक्षा एजेंसियां और तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर पहुंचकर गहन जांच कर रहे हैं। पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार दोपहर करीब 2 बजे हीट एक्सचेंजर सर्किट में हाइड्रोकार्बन की लीकेज के चलते अचानक आग लग गई। इस आग ने कुछ ही मिनटों में तेजी पकड़ ली और बड़ी लपटों के साथ धुआं पूरे क्षेत्र में फैल गया। कई किलोमीटर दूर से भी आग की लपटें और धुंए को देखा जा सकता था, जिसने स्थानीय लोगों में डर और चिंता की स्थिति पैदा कर दी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीमों ने संयुक्त रूप से काम किया और कई घंटे की मशक्कत के बाद आग को नियंत्रण में लाने में सफलता मिली। इस बीच रिफाइनरी के बहुमंजिली डोम को प्रधानमंत्री की जनसभा के लिए तैयार किया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री के दौरे के स्थगित होने के साथ ही मंगलवार सुबह से क्रेन की मदद से इसे हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। रिफाइनरी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बाहरी लोगों का किसी भी प्रकार का प्रवेश पूरी तरह बंद है ताकि जांच कार्य सुगमता से हो सके। सुरक्षा एजेंसियां घटना के कारणों का पता लगाने में लगी हुई हैं और तकनीकी टीमें सामान एकत्रित कर रही हैं ताकि अग्निकांड की सही कारणों का खुलासा हो सके। प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज दोपहर लगभग 12:35 बजे पचपदरा रिफाइनरी पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री का निरीक्षण घटनास्थल पर कार्रवाई की गति और प्रभावित क्षेत्र का अवलोकन करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों की तैयारियों में आई कमी पर भी सवाल उठाने की उम्मीद है। यह दुर्घटना राज्य के लिए गहरा सदमा साबित हुई है क्योंकि यह रिफाइनरी 13 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद पूर्ण होने वाली थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बेहतर टेक्नोलॉजी और कुशल इंजीनियर्स के मौजूद होने के बावजूद इस स्तर की सुरक्षा चूक गंभीर चिंता की बात है। यह सवाल उठता है कि क्या सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन पर्याप्त रूप से किया गया था। पीएम मोदी के दौरे के टलने से रिफाइनरी परिसर में उदासी और निराशा का माहौल है। सुरक्षा एजेंसियां, तकनीकी टीमें और शासन प्रशासन मिलकर ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने पर फोकस कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की अप्रत्याशित घटनाओं से बचा जा सके। अग्निकांड की पल-पल की अपडेट और विस्तृत रिपोर्ट के लिए संबंधित ब्लॉग और खबर चैनल निरंतर जानकारी प्रदान कर रहे हैं। राज्य प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द जांच के निष्कर्ष जारी किए जाएं और पचपदरा रिफाइनरी की गतिविधियां पुनः सामान्य हो सकें।

पढ़ाई-जॉब के लिए रूस गए,फौजी बनाकर युद्ध में झोंका:रूस-यूक्रेन युद्ध, भारत के 13 से ज्यादा युवाओं की मौत
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पढ़ाई और नौकरी के लिए रूस गए युवाओं को फौजी बना युद्ध में भेजा: रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत के 13 से अधिक युवाओं की मौत

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के युवा अंशु पढ़ाई के लिए रूस गया था, लेकिन वहां उसे जबरन सैनिक बनाकर यूक्रेन युद्ध में भेज दिया गया। लगभग छह महीने बाद, 17 अप्रैल को उसका शव घर पहुंचा, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। यह केवल अंशु का मामला नहीं है, बल्कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के अनेक परिवार इसी तरह के दर्द का सामना कर रहे हैं। इन राज्यों के कुल 13 से अधिक युवाओं की मृत्यु हो चुकी है और सैकड़ों युवा अभी भी लापता हैं। दैनिक भास्कर ने इन परिवारों से विस्तृत बातचीत की, जिसमें पता चला कि एजेंटों ने युवाओं को स्टडी, वर्क या टूरिस्ट वीजा के बहाने रूस भेजा। वहां पहुंचकर उन्हें पैसों के लालच या भय दिखाकर जबरदस्ती आर्मी में भर्ती करवा लिया गया और मात्र 10-15 दिनों की ट्रेनिंग के बाद युद्ध की फ्रंट लाइन पर भेज दिया गया। वर्तमान में कई युवाओं के शव रूसी झंडे में लिपटे उनके घर लौट रहे हैं, जबकि कुछ का कोई पता नहीं चल पा रहा। इस दुखद घटना से प्रभावित परिवारों में कुछ के नाम इस प्रकार हैं: हरियाणा से विकास और अनुज (करनाल), अंशु (रेवाड़ी), अंकित (फतेहाबाद), रवि, गीतिक शर्मा, कर्मचंद (कैथल), सोनू (हिसार), अंकित (सोनीपत); पंजाब से समरजीत (लुधियाना) और मनदीप (जालंधर); राजस्थान से अजय (बीकानेर); तथा जम्मू-कश्मीर से सचिन और खाऊर पालनवाला (जम्मू)। इस पूरे मामले में 4 राज्यों के 26 परिवारों ने संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका की सुनवाई 24 अप्रैल को निर्धारित है। रोहतक के श्रीभगवान और हिसार के विकास ने बताया कि परिवारों से संपर्क कर इन्हें संयुक्त रूप से आवाज बुलंद करने की प्रेरणा मिली है। याचिका में मांग की गई है कि जिन युवाओं को जबरन युद्ध में भेजा गया है, उनकी स्थिति स्पष्ट की जाए, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा झांसेबाज एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यह घटनाक्रम देश भर में चिंता का विषय बन गया है और युवाओं के भविष्य एवं उनके परिवारों की बेहतरी के लिए त्वरित एवं ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सरकार और न्यायपालिका से उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ देखेंगे ताकि ऐसे दुर्घटनाओं को दोबारा न होने दिया जा सके।

Jagan alleges corruption in Amaravati project, proposes ‘MAVIGUN’ as alternative
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अमरावती प्रोजेक्ट पर सवाल, जगन बोले—‘माविगुन’ है बेहतर विकल्प

पूर्व मुख्यमंत्री का दावा है कि अमरावती परियोजना में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है और इसपर खर्च की गई राशि अत्यधिक है। उन्होंने ‘माविगुन कॉरिडोर’ को अमरावती के विकल्प के रूप में पेश किया है, जिसे मछलीपट्नम, विजयवाड़ा और गुंटूर को जोड़ते हुए एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि माविगुन कॉरिडोर को अमरावती से बहुत कम लागत पर विकसित किया जा सकता है, जो कि राज्य की आर्थिक उन्नति में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमरावती परियोजना में पारदर्शिता का अभाव और भ्रष्टाचार ने राज्य को आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचाया है। माविगुन को लेकर उनका तर्क है कि यह योजना एक कुशल, पारदर्शी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकल्प है, जो क्षेत्रीय विकास को अधिक तेजी से आगे बढ़ाएगी। माविगुन कॉरिडोर की योजना में मुख्य शहरों को जोड़कर एक मजबूत औद्योगिक और वाणिज्यिक हब स्थापित करने की बात कही गई है। इससे न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि निवेशकों के लिए भी यह आकर्षक निवेश क्षेत्र बन सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कॉरिडोर के विकास में राज्य सरकार को न्यूनतम खर्च करना पड़ेगा, जो वित्तीय दबाव को कम करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर माविगुन कॉरिडोर की योजना सही रणनीति और प्रभावी प्रबंधन के साथ लागू की जाती है तो यह क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता और विकास में सहायक होगा। इस क्षेत्र में पूर्व में ही कई औद्योगिक इकाइयाँ और व्यापारिक केंद्र मौजूद हैं, जिन्हें जोड़कर एक समेकित आर्थिक इकाई का निर्माण किया जा सकता है। हालांकि, अमरावती परियोजना को लेकर चल रही विवादास्पद स्थिति और वित्तीय असमंजस के बीच माविगुन कॉरिडोर के विकल्प के रूप में प्रस्तुत होने से राज्य में विकास की दिशा में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष और समाज के विभिन्न वर्ग इस प्रस्ताव को गंभीरता से ले रहे हैं और इस पर विस्तृत चर्चा की उम्मीद है। सरकारी सूत्रों ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी विकल्पों पर गहन विचार किया जाएगा और राज्य के विकास के लिए जो भी सबसे उपयुक्त होगा, उसे प्राथमिकता दी जाएगी। इस बीच, माविगुन कॉरिडोर की योजना एक नया आर्थिक मॉडल के रूप में उभर कर सामने आई है। अंततः, माविगुन कॉरिडोर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कैसे विकसित किया जाता है और क्या यह राज्य के व्यापक आर्थिक लक्ष्यों को पूरा कर सकेगा। वर्तमान परिदृश्य में यह विकल्प नए विकास की संभावनाओं के द्वार खोलता दिख रहा है।

1.22 lakh Anganwadi workers in Rajasthan get ₹1,000 each through DBT
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राजस्थान में 1.22 लाख आंगनवाड़ी कर्मियों को DBT के माध्यम से 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान

जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री ने हाल ही में आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण और विकास को बेहतर बनाने के लिए कई अहम पहलाओं की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों पर तीन से छह वर्ष के बच्चों को सप्ताह में पांच दिन गर्म दूध प्रदान किया जा रहा है। यह सेवा ‘अमृत आहार योजना’ के तहत दी जा रही है, जिसका उद्देश्य बच्चों के स्वस्थ पोषण को सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों की भौतिक संरचना को बेहतर बनाने के लिए भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य जारी है। इसके साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला पर्यवेक्षकों को स्मार्टफोन वितरित किए गए हैं, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग बेहतर हो सके। यह कदम डिजिटल माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन को आसान और पारदर्शी बनाने हेतु उठाया गया है। राज्य सरकार ने कुल 1.22 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) के तहत 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान किया है। यह राशि उनके कार्यों के सम्मान स्वरूप प्रदान की गई है, ताकि वे अपने परिवार और कार्य क्षेत्र में बेहतर सेवाएं दे सकें। आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी इलाकों में बच्चों और महिलाओं के कल्याण का प्रमुख माध्यम हैं, जहां पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अमृत आहार योजना के लाभ सप्ताह में पांच दिन बच्चों को गर्म दूध उपलब्ध कराना। बच्चों के संपूर्ण पोषण में सुधार। आंगनवाड़ी केंद्रों के स्तर सुधार के लिए भवनों का नवीनीकरण। डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सेवाओं का बेहतर प्रबंधन। सरकार का मानना है कि इन पहलों से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति बेहतर होगी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा। स्मार्टफोन वितरण से कार्य प्रक्रियाओं में गति आएगी तथा रिपोर्टिंग और निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी। राजस्थान में यह कदम सरकार की समर्पित और निरंतर प्रयासों का नतीजा है, जो बाल विकास परियोजनाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय अधिकारियों को आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए हैं। इस तरह की पहलों से राजस्थान में मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित होगा और आने वाले वर्षों में बच्चों के विकास और समग्र स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखा जाएगा।

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सडक़ वही, सफर वही,टोल का मूड अपग्रेड!

सडक़ों पर अब गाडिय़ां ही नहीं, जेबें भी सफर करेंगी और वो भी पेड मोड में। नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश की सडक़ें भले धीरे-धीरे बनें, लेकिन टोल रेट हर साल समय पर विकास कर लेते हैं। एक अप्रेल से टोल दरों में बढ़ोतरी लागू होगी और तारीख भी ऐसी कि जनता को लगे कहीं ये अप्रेल फूल स्पेशल ऑफर तो नहीं! लेकिन नहीं, ये मज़ाक नहीं है। ये वही गंभीर मजाक है जो हर साल दोहराया जाता है। हालांकि कार वालों को राहत दी गई है। मतलब आम आदमी को मनोवैज्ञानिक सुकून मिल गया। लेकिन असली चोट कॉमर्शियल और भारी वाहनों पर पड़ी है और जैसा कि परंपरा है, वो खर्च आखिरकार आम जनता की जेब से ही वसूला जाएगा बस रास्ता थोड़ा घुमा हुआ होगा। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर रेट तय होते हैं। यानी अगर महंगाई बढ़े तो टोल बढ़ेगा, और अगर महंगाई कम भी हो जाए तो भी टोल संभावनाओं के आधार पर बढ़ सकता है! कारों के सालाना पास की बात करेें तो पहले 3000 रुपए में 200 बार टोल पार करने का मौका मिलता था, अब 3075 रुपए में वही सुविधा मिलेगी। यानी 75 रुपए ज्यादा देकर आपको वही पुराना रास्ता, वही ट्रैफिक और वही गडढे, बस अनुभव थोड़ा महंगा हो जाएगा। कुल मिलाकर, सडक़ें अब सिर्फ दूरी कम नहीं कर रहीं बल्कि धीरे-धीरे बैंक बैलेंस भी कम कर रही हैं। हम सब इस विकास यात्रा में शामिल हैं क्योंकि रास्ता चाहे कोई भी हो, टोल तो देना ही पड़ेगा!

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पश्चिम बंगाल चुनाव: कांग्रेस ने जारी की 284 उम्मीदवारों की सूची

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने रविवार शाम अपने उम्मीदवारों की पहली बड़ी सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 284 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, जो राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर पार्टी की रणनीति को स्पष्ट करते हैं।   कांग्रेस द्वारा जारी इस सूची में कई बड़े और चर्चित चेहरों को टिकट दिया गया है। खासतौर पर लोकसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को एक बार फिर बहरामपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है। यह सीट उनके लिए पारंपरिक रूप से मजबूत मानी जाती रही है और पार्टी को उम्मीद है कि वे यहां से जीत दर्ज कर सकते हैं।  इसके अलावा मालातीपुर सीट से मौसम नूर को उम्मीदवार बनाया गया है। मौसम नूर का नाम भी राज्य की राजनीति में जाना-पहचाना है और उन्हें टिकट देकर कांग्रेस ने अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।  कांग्रेस की रणनीति और चुनावी समीकरण कांग्रेस की इस सूची को देखते हुए साफ है कि पार्टी ने अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। कई सीटों पर पुराने और अनुभवी नेताओं को मौका दिया गया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में युवा उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है, लेकिन इस बार पार्टी गठबंधन और स्थानीय समीकरणों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मजबूत मुकाबले के बीच अपनी पहचान बनाए रखना है। हालांकि, पार्टी को उम्मीद है कि कुछ क्षेत्रों में वह निर्णायक भूमिका निभा सकती है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को केरल में भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी। उन्होंने पलक्कड़ में अपनी पहली रैली को संबोधित किया, जिसके बाद त्रिशूर में भी जनसभा की। पलक्कड़ की रैली में पीएम मोदी ने राज्य की मौजूदा राजनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केरल दशकों से “मतलबी राजनीति” के दो मुखौटों के बीच फंसा हुआ है। LDF और UDF पर सीधा हमला प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा: “एक तरफ LDF है, दूसरी तरफ UDF; एक तरफ कम्युनिस्ट, दूसरी कांग्रेस। एक करप्ट, दूसरा महा-करप्ट। एक कम्युनल, दूसरा महा-कम्युनल।” उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही गठबंधन केवल वोट बैंक की राजनीति करते हैं और राज्य के विकास के लिए ठोस काम नहीं करते। पीएम मोदी ने कहा कि LDF और UDF दोनों ही पार्टियों को भाजपा से डर लगता है क्योंकि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो उनके “काले कारनामों” का खुलासा हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा केरल में एक नया राजनीतिक विकल्प देने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य के विकास के लिए काम करेगी पलक्कड़ के बाद प्रधानमंत्री त्रिशूर पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 34 मिनट तक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और केरल में भाजपा के विस्तार की बात कही। त्रिशूर की रैली में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने भाजपा के उत्साह को बढ़ाया है। पार्टी नेताओं का मानना है कि इस बार केरल में भाजपा को पहले से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। दो राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर पश्चिम बंगाल और केरल—दोनों राज्यों में राजनीति का परिदृश्य अलग है, लेकिन दोनों ही जगह चुनावी माहौल गर्म हो चुका है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। केरल में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक प्रचार अभियान चला रही है। जहां बंगाल में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी रणनीति स्पष्ट हो रही है, वहीं केरल में बड़े नेताओं की रैलियों के जरिए माहौल बनाया जा रहा है।  

Mann ki Baat: PM Modi urges citizens to jointly face challenges emerging due to West Asia war
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मन्न की बात: पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया युद्ध के कारण उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए नागरिकों से संयुक्त प्रयास की अपील की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया ‘मन्न की बात’ कार्यक्रम में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोस में लगभग एक महीने से एक ‘भयंकर युद्ध’ जारी है, जिसने क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति दोनों को खतरे में डाल दिया है। पीएम मोदी ने इस मामले में भारत के नागरिकों और देशवासियों से एकजुट होकर आने वाली चुनौतियों का सामना करने की अपील की। उन्होंने कहा, “हम सबको मिलकर इस संकट का सामना करना होगा क्योंकि इससे न केवल क्षेत्रीय देशों, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित हो रही है।” प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत इस संकट को गहनता से समझ रहा है और वैश्विक समुदाय के सहयोग से शांति स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने प्रभावित देशों में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष प्रयास शुरू कर दिए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि इस ज्वलंत स्थिति के बीच भारत अपनी विदेश नीति में संयम और समझदारी बनाए रखेगा, साथ ही देश के विकास को बाधित नहीं होने देगा। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि सरकार हर संभव स्थिति को ध्यान में रखते हुए रणनीतियाँ तैयार कर रही है। वहीं, प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस समय अफवाहों से बचें और आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही स्थिति को समझें। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर देते हुए लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। इस पूरे संदर्भ में, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह समय है देशवासियों के एकजुट होने का, ताकि हम इन कठिन दौरों को मिलकर पार कर सकें और भारत को विश्व में एक सशक्त और शांतिप्रेमी राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत कर सकें।” माना जा रहा है कि इस वक्त के जटिल अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच भारत ने अपनी कूटनीति और रणनीतियों से वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका और भी मजबूत कर ली है। प्रधानमंत्री की यह अपील देश के हर नागरिक तक पहुंच रही है जो इस संकट से निपटने में सहयोगी है।

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🟢 QS रैंकिंग में भारत का परचम: IITs, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और BITS पिलानी शीर्ष 50 में शामिल

वैश्विक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। QS Quacquarelli Symonds द्वारा जारी ‘QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स बाय सब्जेक्ट’ के 16वें संस्करण में भारतीय संस्थानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया के शीर्ष 50 में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इस रैंकिंग में चार IITs, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और BITS पिलानी का शामिल होना भारत की बढ़ती शैक्षणिक साख का स्पष्ट संकेत है। 📊 QS रैंकिंग क्या है और कैसे तय होती है? QS Quacquarelli Symonds एक प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था है, जो हर वर्ष विश्वविद्यालयों और उनके विषय-विशेष कार्यक्रमों की रैंकिंग जारी करती है। इस रैंकिंग के तहत: 100 से अधिक देशों के करीब 1,900 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन किया गया 21,000 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रमों का विश्लेषण हुआ 55 विषयों और 5 व्यापक संकाय क्षेत्रों को शामिल किया गया रैंकिंग तय करने में अकादमिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, शोध प्रभाव, उद्धरण (citations) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मानकों को आधार बनाया जाता है। 🇮🇳 भारतीय संस्थानों का अभूतपूर्व प्रदर्शन इस वर्ष भारत ने शीर्ष 50 में कुल 27 स्थान हासिल किए हैं, जो 2024 के 12 स्थानों के मुकाबले दोगुने से भी अधिक हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली न केवल तेजी से सुधार कर रही है, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी मजबूती से आगे बढ़ रही है। यह सफलता 12 अलग-अलग भारतीय संस्थानों के उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। 🏫 IITs का शानदार दबदबा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) ने इस रैंकिंग में अपनी परंपरागत मजबूती को एक बार फिर साबित किया है। IIT दिल्ली के 6 प्रोग्राम शीर्ष 50 में शामिल IIT बॉम्बे, IIT खड़गपुर और IIT मद्रास ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया IIT दिल्ली ने केमिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग तथा कंप्यूटर साइंस जैसे विषयों में भारत का नेतृत्व किया है। 🎓 JNU और BITS पिलानी की बड़ी उपलब्धि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और BITS पिलानी का शीर्ष 50 में स्थान पाना इस बात का संकेत है कि भारत केवल तकनीकी शिक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक विज्ञान और बहु-विषयक शिक्षा में भी आगे बढ़ रहा है। JNU लंबे समय से सामाजिक विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध और भाषाओं के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है, जबकि BITS पिलानी नवाचार और उद्योग-उन्मुख शिक्षा के लिए जाना जाता है। 📈 अन्य संस्थानों का उल्लेखनीय प्रदर्शन IIT (ISM) धनबाद खनन और खनिज इंजीनियरिंग में 21वें स्थान पर रहा IIM अहमदाबाद ने बिजनेस और मार्केटिंग में 21वां स्थान हासिल किया विशेष बात यह है कि भारत ने पहली बार ‘मार्केटिंग’ विषय में वैश्विक रैंकिंग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 🌍 शिक्षा की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा में सुधार इस रैंकिंग से स्पष्ट होता है कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में लगातार सुधार हो रहा है। जेसिका टर्नर ने भारत की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि: भारत में गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और बिजनेस क्षेत्रों में सुधार उल्लेखनीय है उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में भारत को शोध क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करना होगा। 🔬 शोध और नवाचार पर बढ़ता फोकस भारतीय संस्थान अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शोध और नवाचार के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़ाव बढ़ रहा है उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत हो रहा है अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी बढ़ रही है यह बदलाव भारत को एक वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 🚀 भविष्य की संभावनाएं QS रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन से यह संकेत मिलता है कि: भारत वैश्विक शिक्षा हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है विदेशी छात्रों को आकर्षित करने की क्षमता बढ़ेगी अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग के अवसर बढ़ेंगे अगर यही गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत शीर्ष शिक्षा महाशक्तियों में शामिल हो सकता है। 🧭 निष्कर्ष QS Quacquarelli Symonds की ताजा रैंकिंग में भारतीय संस्थानों का शानदार प्रदर्शन देश के लिए गर्व की बात है। IITs, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और BITS पिलानी की उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि भारत की शिक्षा प्रणाली तेजी से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है। अब अगली चुनौती इस प्रगति को बनाए रखते हुए शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में और आगे बढ़ने की होगी, ताकि भारत भविष्य में विश्व का अग्रणी शिक्षा केंद्र बन सके।

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