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धर्म एवं यात्रा, राज्य-शहर

संतों का जीवन विश्व कल्याण और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को जयपुर में आयोजित संत संसद कार्यक्रम में संतों की भूमिका और सनातन संस्कृति के संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संतों का जीवन केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह पूरे विश्व के कल्याण और मानवता के मार्गदर्शन के लिए समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि संतों के सानिध्य में आने से व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा में ले जा सकता है और अपने कर्मों को सार्थक बना सकता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा विश्व में अद्वितीय है और संत-महात्माओं ने सदियों से इस परंपरा को जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि संत समाज केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि समाज में नैतिकता, सेवा और समरसता का संदेश भी फैलाता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ राजस्थान की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने राजकीय मंदिरों में वर्षभर उत्सवों के भव्य आयोजन के लिए वित्तीय स्वीकृतियां दी हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिला है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने मंदिरों में कार्यरत पुजारियों के मानदेय में वृद्धि की है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। यह कदम न केवल पुजारियों के सम्मान को बढ़ाता है, बल्कि धार्मिक संस्थानों की मजबूती में भी सहायक है। मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने बताया कि पूंछरी का लौठा, खाटूश्याम जी और तीर्थराज पुष्कर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। इन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, यात्री सुविधाओं का विकास और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खाटूश्याम जी जैसे तीर्थ स्थल पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए वहां बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी तरह पुष्कर, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, वहां भी विकास कार्यों को गति दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने “कृष्ण गमन पथ” परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगी। इस परियोजना के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थानों को एक धागे में पिरोने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को एक समग्र आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा। उन्होंने गौ संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी विस्तार से उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोशालाओं में गायों के चारे के लिए प्रतिदिन 50 रुपये और बछड़ों के लिए 25 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही गोशालाओं में टीनशेड, स्वच्छ पानी और उचित चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। गायों के संरक्षण से जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है और किसानों की आय में भी वृद्धि होती है। मुख्यमंत्री ने संत समाज से आह्वान किया कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए आगे आएं और युवाओं को संस्कारों और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दें। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज तेजी से बदल रहा है, तब संतों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, विधायक कुलदीप धनकड़ और बालमुकुंदाचार्य सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा मेहंदीपुर बालाजी के महंत 1008 नरेश पुरी महाराज सहित बड़ी संख्या में साधु-साध्वीगण भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर संतों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज में नैतिकता और आध्यात्मिकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच संतों का मार्गदर्शन लोगों को संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम का समापन भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया और समाज के उत्थान के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। इस प्रकार, जयपुर में आयोजित संत संसद कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक जागरूकता को भी बढ़ावा दिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार आने वाले समय में भी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी।

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पश्चिम बंगाल चुनाव: कांग्रेस ने जारी की 284 उम्मीदवारों की सूची

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने रविवार शाम अपने उम्मीदवारों की पहली बड़ी सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 284 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, जो राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर पार्टी की रणनीति को स्पष्ट करते हैं।   कांग्रेस द्वारा जारी इस सूची में कई बड़े और चर्चित चेहरों को टिकट दिया गया है। खासतौर पर लोकसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को एक बार फिर बहरामपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है। यह सीट उनके लिए पारंपरिक रूप से मजबूत मानी जाती रही है और पार्टी को उम्मीद है कि वे यहां से जीत दर्ज कर सकते हैं।  इसके अलावा मालातीपुर सीट से मौसम नूर को उम्मीदवार बनाया गया है। मौसम नूर का नाम भी राज्य की राजनीति में जाना-पहचाना है और उन्हें टिकट देकर कांग्रेस ने अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।  कांग्रेस की रणनीति और चुनावी समीकरण कांग्रेस की इस सूची को देखते हुए साफ है कि पार्टी ने अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। कई सीटों पर पुराने और अनुभवी नेताओं को मौका दिया गया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में युवा उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है, लेकिन इस बार पार्टी गठबंधन और स्थानीय समीकरणों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मजबूत मुकाबले के बीच अपनी पहचान बनाए रखना है। हालांकि, पार्टी को उम्मीद है कि कुछ क्षेत्रों में वह निर्णायक भूमिका निभा सकती है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को केरल में भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी। उन्होंने पलक्कड़ में अपनी पहली रैली को संबोधित किया, जिसके बाद त्रिशूर में भी जनसभा की। पलक्कड़ की रैली में पीएम मोदी ने राज्य की मौजूदा राजनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केरल दशकों से “मतलबी राजनीति” के दो मुखौटों के बीच फंसा हुआ है। LDF और UDF पर सीधा हमला प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा: “एक तरफ LDF है, दूसरी तरफ UDF; एक तरफ कम्युनिस्ट, दूसरी कांग्रेस। एक करप्ट, दूसरा महा-करप्ट। एक कम्युनल, दूसरा महा-कम्युनल।” उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही गठबंधन केवल वोट बैंक की राजनीति करते हैं और राज्य के विकास के लिए ठोस काम नहीं करते। पीएम मोदी ने कहा कि LDF और UDF दोनों ही पार्टियों को भाजपा से डर लगता है क्योंकि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो उनके “काले कारनामों” का खुलासा हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा केरल में एक नया राजनीतिक विकल्प देने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य के विकास के लिए काम करेगी पलक्कड़ के बाद प्रधानमंत्री त्रिशूर पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 34 मिनट तक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और केरल में भाजपा के विस्तार की बात कही। त्रिशूर की रैली में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने भाजपा के उत्साह को बढ़ाया है। पार्टी नेताओं का मानना है कि इस बार केरल में भाजपा को पहले से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। दो राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर पश्चिम बंगाल और केरल—दोनों राज्यों में राजनीति का परिदृश्य अलग है, लेकिन दोनों ही जगह चुनावी माहौल गर्म हो चुका है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। केरल में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक प्रचार अभियान चला रही है। जहां बंगाल में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी रणनीति स्पष्ट हो रही है, वहीं केरल में बड़े नेताओं की रैलियों के जरिए माहौल बनाया जा रहा है।  

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नेपाल में छात्र राजनीति पर रोक, परीक्षाएं खत्म और संस्थानों के नाम बदलने का आदेश

काठमांडू। नेपाल में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। सरकार ने छात्र राजनीति पर पूरी तरह रोक लगाने के साथ-साथ शिक्षा प्रणाली में कई अहम बदलावों की घोषणा की है। इन फैसलों को सरकार के 100 दिन के एक्शन प्लान का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त कर उसे अधिक प्रभावी और छात्र-केंद्रित बनाना है। सरकार द्वारा शनिवार रात जारी आदेश में कहा गया कि अब स्कूलों और कॉलेजों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। यह कदम लंबे समय से शिक्षा संस्थानों में चल रहे राजनीतिक हस्तक्षेप को खत्म करने के लिए उठाया गया है, जिससे पढ़ाई का माहौल बेहतर हो सके। छात्र राजनीति पर पूरी तरह प्रतिबंध नए आदेश के तहत सभी राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों को 60 दिनों के भीतर अपने कार्यालय कॉलेज परिसरों से हटाने होंगे। सरकार का स्पष्ट मानना है कि शैक्षणिक संस्थान केवल शिक्षा के केंद्र होने चाहिए, न कि राजनीतिक गतिविधियों के अड्डे। इसकी जगह सरकार 90 दिनों के भीतर ‘स्टूडेंट काउंसिल’ या ‘वॉयस ऑफ स्टूडेंट्स’ जैसे नए मंच स्थापित करेगी। ये मंच पूरी तरह गैर-राजनीतिक होंगे और छात्रों की समस्याओं, सुझावों और विकास से जुड़े मुद्दों पर काम करेंगे। इससे छात्रों को अपनी आवाज उठाने का एक लोकतांत्रिक लेकिन गैर-राजनीतिक माध्यम मिलेगा। कक्षा 5 तक परीक्षाएं समाप्त शिक्षा प्रणाली में एक और बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए पारंपरिक परीक्षाएं समाप्त कर दी हैं। अब छोटे बच्चों का मूल्यांकन निरंतर और व्यवहारिक आधार पर किया जाएगा। सरकार का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा में बच्चों पर परीक्षा का दबाव डालने के बजाय उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करना ज्यादा जरूरी है। इससे बच्चों में रचनात्मकता और समझ विकसित होगी। विदेशी नाम बदलने का आदेश सरकार ने उन सभी स्कूलों और कॉलेजों को भी निर्देश दिए हैं जिनके नाम विदेशी हैं, जैसे ऑक्सफोर्ड, पेंटागन या सेंट जेवियर्स, कि वे इस वर्ष के भीतर अपने नाम नेपाली भाषा में बदलें। इस फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना और शिक्षा संस्थानों में स्थानीय भाषा को बढ़ावा देना है। ग्रेजुएशन तक नागरिकता जरूरी नहीं छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार ने कहा है कि अब ग्रेजुएशन तक पढ़ाई के लिए नेपाली नागरिकता अनिवार्य नहीं होगी। इसका मकसद उन छात्रों को राहत देना है जिनके पास दस्तावेजों की कमी है, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो। यह फैसला विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों और वंचित वर्गों के छात्रों के लिए राहत लेकर आया है। सरकार ने विश्वविद्यालयों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे परीक्षा परिणाम तय समय सीमा के भीतर ही घोषित करें। अब तक परिणामों में देरी के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित होता रहा है और कई बार उन्हें विदेश जाने के लिए मजबूर होना पड़ता था। नए नियमों के तहत अब शैक्षणिक कैलेंडर को सख्ती से लागू किया जाएगा, जिससे छात्रों को समय पर आगे की पढ़ाई और करियर के अवसर मिल सकें। नेताओं और अफसरों की संपत्ति की जांच सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़े नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच का भी फैसला लिया है। इसके लिए 15 दिनों के भीतर एक विशेष समिति गठित की जाएगी। यह समिति 2006 के बाद बड़े पदों पर रहे लोगों की संपत्ति की जांच करेगी और इसके बाद 1991 से 2006 के बीच के मामलों को भी देखा जाएगा। इस कदम का उद्देश्य भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और सरकारी कामकाज को साफ-सुथरा बनाना है। सरकार ने हर मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह अपने कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करे। प्रत्येक विभाग को अपने लक्ष्य और समय-सीमा पहले से तय करनी होगी और इसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को देनी होगी। इससे प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और गति आएगी। सरकार संविधान में संभावित बदलावों को लेकर भी गंभीर है। इसके लिए 7 दिनों के भीतर एक प्रारंभिक दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिससे इस विषय पर व्यापक चर्चा हो सके। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि जिन लोगों के साथ पहले अन्याय या भेदभाव हुआ है, उन मामलों को 15 दिनों के भीतर स्वीकार किया जाएगा। इसके बाद उनके लिए सुधार और सहायता योजनाएं बनाई जाएगी।

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नारलाई पहुंचीं मलाइका अरोड़ा: आदिनाथ जैन मंदिर में किए दर्शन

पाली जिले के शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर कस्बे नारलाई ने रविवार को एक खास पल का साक्षी बना, जब फिल्म अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा यहां स्थित प्राचीन आदिनाथ जैन मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचीं। उनके आगमन की खबर फैलते ही मंदिर परिसर में उत्साह और उत्सुकता का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी उनकी एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। दोपहर करीब 12 बजे मलाइका अरोड़ा मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान आदिनाथ का आशीर्वाद लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में शांति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा, लेकिन बाहर उनके प्रशंसकों की भीड़ लगातार बढ़ती रही। लोगों में उनके साथ फोटो लेने और उन्हें करीब से देखने की उत्सुकता साफ झलक रही थी। मलाइका अरोड़ा इन दिनों राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में छुट्टियां बिता रही हैं। वह नारलाई के प्रसिद्ध विरासत होटल ‘रावला नारलाई’ में ठहरी हुई हैं। यह होटल अपनी पारंपरिक राजस्थानी वास्तुकला, शाही आतिथ्य और प्राकृतिक परिवेश के लिए जाना जाता है।बताया जा रहा है कि मलाइका यहां की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियों के बीच बसे शांत वातावरण और ग्रामीण जीवन के अनुभव का आनंद ले रही हैं। शहरों की भागदौड़ से दूर, यह क्षेत्र सुकून और आत्मिक शांति की तलाश करने वाले लोगों के लिए एक आदर्श स्थल बन चुका है। जैसे ही स्थानीय लोगों को मलाइका के मंदिर आने की सूचना मिली, बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। मंदिर परिसर के बाहर युवाओं और महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। कई लोग मोबाइल फोन से उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आए। हालांकि, मंदिर प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था ने स्थिति को संभालते हुए दर्शन प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखा। मलाइका ने भी सरलता और सहजता के साथ सभी का अभिवादन किया, जिससे उनके प्रशंसकों में और भी उत्साह देखने को मिला। नारलाई राजस्थान के उन खास स्थानों में से एक है, जहां धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहां स्थित आदिनाथ जैन मंदिर अपनी प्राचीनता और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।इसके अलावा, नारलाई में तपेश्वर महादेव मंदिर और जैकल नाथ महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। ये मंदिर पहाड़ियों और प्राकृतिक गुफाओं के बीच स्थित हैं, जो इनकी विशेषता को और बढ़ाते हैं।नारलाई क्षेत्र केवल धार्मिक स्थलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी लेपर्ड सफारी के लिए भी जाना जाता है। यहां पर्यटक जंगलों में जाकर तेंदुओं को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का रोमांचक अनुभव लेते हैं।देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस सफारी का हिस्सा बनते हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन उद्योग को भी मजबूती मिलती है। यही कारण है कि नारलाई अब धीरे-धीरे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा हैमलाइका अरोड़ा जैसी प्रसिद्ध हस्ती के नारलाई दौरे से क्षेत्र के पर्यटन को निश्चित रूप से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अक्सर देखा जाता है कि जब कोई सेलिब्रिटी किसी स्थान का दौरा करता है, तो वह जगह सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए चर्चा में आ जाती है।  नारलाई के साथ भी कुछ ऐसा ही होने की संभावना है। यहां के होटल, पर्यटन स्थल और धार्मिक स्थान अब अधिक लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। इससे स्थानीय व्यवसायों और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो सकती है। मलाइका के आगमन से स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई लोगों ने इसे अपने क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया। उनका मानना है कि इस तरह के दौरे से नारलाई को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। स्थानीय व्यापारियों और होटल व्यवसायियों को भी उम्मीद है कि आने वाले समय में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी, जिससे उनकी आय में भी इजाफा होगा।

In Focus Podcast | Should men get paternity leave in India?
विशेषज्ञों की राय

फोकस पॉडकास्ट | क्या भारत में पुरुषों को पितृ अवकाश मिलना चाहिए?

हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पितृ अवकाश को लेकर नई दिशानिर्देशों की मांग की है। यह विषय सामाजिक और पारिवारिक बदलाव के संदर्भ में विशेष अहमियत रखता है, जिसके तहत पुरुषों को भी मातृत्व अवकाश की तरह पितृत्व अवकाश प्रदान किया जाना चाहिए। पितृत्व अवकाश पर इस बहस को लेकर प्रसिध्द पोडकास्ट होस्ट, प्रिसिला जेबराज ने विशेषज्ञ प्रोफेसर अश्विनी देशपांडे और संजय घोष के साथ इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा की। प्रोफेसर अश्विनी देशपांडे ने कहा कि भारत में पारंपरिक सोच में पुरुषों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र तक सीमित मानी जाती है, जबकि परिवार में उनकी भूमिका को कम माना जाता है। पितृत्व अवकाश से न केवल पिता और बच्चे के बीच मजबूत बंधन बनेगा, बल्कि महिलाओं के कार्यस्थल पर बने रहने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि सामाजिक संरचना में बदलाव के लिए कानूनी संरक्षण आवश्यक है, जो पितृत्व अवकाश को मान्यता और लागू करवाएगा। वहीं, संजय घोष ने इस पहल को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में जब भारतीय परिवार तेजी से बदल रहे हैं, तब पितृत्व अवकाश एक ऐसा कदम है जो परिवारों में संतुलन लाने में मदद करेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कार्यस्थल प्रशासन एवं नीतियां भी इस बदलाव के अनुकूल होनी चाहिए, जिससे पिता अपनी जिम्मेदारियां आराम से निभा सकें। यह विवादास्पद विषय सामाजिक सरोकारों के साथ-साथ कानून एवं कार्य संस्कृति में सुधार की मांग करता है। भारत ने मातृत्व अवकाश के क्षेत्र में प्रगति की है, लेकिन पितृत्व अवकाश की कमी ने पुरुषों की पारिवारिक भागीदारी को सीमित रखा है। सुप्रीम कोर्ट की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि वह न केवल पितृत्व अवकाश के लिए मान्यता सुनिश्चित करेगा, बल्कि इससे कार्यस्थल की लिंग समानता को भी बल मिलेगा। हालांकि, पितृत्व अवकाश को लेकर कई दफे बहस हुई है, पर अब इसे कानूनी रूप देने का प्रयास तेज हुआ है। यह बदलाव भारतीय समाज में पिता की भूमिका को नए अर्थ देने का प्रयास है, जो आने वाले समय में कार्य-संतुलन और परिवार की खुशहाली के लिए अहम साबित होगा। समाज विशेषज्ञ और मानवाधिकार समूह भी सुप्रीम कोर्ट के इस कदम का समर्थन कर रहे हैं और उम्मीद जताते हैं कि जल्द ही पितृत्व अवकाश भारत में औपचारिक तौर पर लागू हो। इससे कार्य क्षेत्र में समानता, पारिवारिक जिम्मेदारियों का पुनर्मूल्यांकन और बच्चों के लिए बेहतर पालन-पोषण के अवसर सुनिश्चित होंगे। इस चर्चा में यह भी सामने आया कि पितृत्व अवकाश न केवल एक कानूनी अधिकार होना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक स्वीकृति भी मिलनी चाहिए ताकि पारंपरिक सोच में बदलाव आए और परिवार के सभी सदस्य अपनी योग्य भूमिका निभा सकें।

The Indian scientist couple history forgot — and the new study bringing their ‘Jeewanu’ back to life
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भारतीय वैज्ञानिक दंपति जिसे इतिहास ने भुला दिया — और नई अध्ययन जो उनके ‘जीवाणु’ को वापस जीवन दे रहा है

जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के क्षेत्र में एक पुरानी प्रयोगशाला खोज फिर से चर्चा में आ गई है। हाल ही में हुए अनुसंधान से भारतीय वैज्ञानिक जोड़े कृष्ण बहादुर और एस. रंगनायकी की प्रयोगशाला में किए गए ‘जीवाणु’ प्रयोग को नए सिरे से मान्यता मिली है। यह प्रयोग जीवन की उत्पत्ति की खोज में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है, जिसे कई दशकों तक अनदेखा कर दिया गया। कृष्ण बहादुर और एस. रंगनायकी ने 20वीं सदी के मध्य में ‘जीवाणु’ नामक एक प्रयोग किया था, जिसमें उन्होंने जीवन के मूलभूत अणुओं के सामाजिक संयोजन को समझने का प्रयास किया था। यह प्रयोग बाद में वैज्ञानिक समुदाय में कम चर्चित रहने लगा, लेकिन अब हाल के शोध ने इसे पुनर्जीवित कर इसकी वैज्ञानिक महत्ता को स्थापित किया है। नई जांच में वैज्ञानिकों ने ट्राइप्टिक डाइजेस्ट और अन्य रासायनिक माध्यमों के उपयोग से यह सिद्ध किया है कि ‘जीवाणु’ झिल्लियों वाले अणु हो सकते हैं, जो जीवन के शुरुआती स्वरूपों के अध्ययन में मददगार हैं। इससे न सिर्फ जीवन की उत्पत्ति की गूढ़ता समझने में मदद मिली, बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ कि भारतीय शोधकर्ताओं का यह योगदान विश्व विज्ञान में कितना मूल्यवान है। डॉ. रिया शुक्ला, जो इस नए अध्ययन की मुख्य शोधकर्ता हैं, कहती हैं, “हमारा उद्देश्य था कि हम उन वैज्ञानिकों के बारे में ध्यान आकर्षित करें जिन्हें योग्य सम्मान नहीं मिला। कृष्ण बहादुर और रंगनायकी का शोध प्राचीन जीवन के रहस्यों को उजागर करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।” पिछले कुछ वर्षों में भौतिक और जैव रसायन के प्रति विज्ञान के दृष्टिकोण में बदलाव आया है, जिससे इस तरह की पुरानी खोजों का पुनर्मूल्यांकन हो रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पुराने प्रयोगों को नई तकनीकों और उपकरणों के साथ दोबारा जांचना विज्ञान के लिए एक नया आयाम खोल सकता है। कृष्ण बहादुर और एस. रंगनायकी की वैज्ञानिक उपलब्धियां और उनके शोध को अब एक विशेष प्रकाश में रखा जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा देगा। इससे न केवल भारतीय विज्ञान के इतिहास को समृद्धि मिली है, बल्कि विश्व स्तर पर भी इस नई खोज की सराहना हो रही है।

Why does water stay cool in a claypot even in peak summers?
लाइफस्टाइल

गर्मियों में मिट्टी के घड़े में पानी ठंडा क्यों रहता है?

गर्मी के मौसम में लोगों को ठंडे पानी की तलाश हमेशा रहती है। परन्तु क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि मिट्टी के घड़े में रखा पानी दूसरों के मुकाबले ज्यादा ठंडा क्यों रहता है? इसका कारण उस मिट्टी की विशेष संरचना है जिससे ये घड़े बनाए जाते हैं। पारंपरिक मिट्टी के घड़े आमतौर पर प्राकृतिक मिट्टी से बनाए जाते हैं जिसमें सिलिका और एलुमिना जैसे सूक्ष्म खनिज कणों की मात्रा अधिक होती है। ये खनिज कण मिट्टी की छिद्रपूर्ण बनावट के साथ मिलकर, पानी के अंदर और बाहर की गर्मी को नियंत्रित करते हैं। मिट्टी की यह छिद्रपूर्ण प्रकृति पानी के सतह पर संतुलित वाष्पीकरण करती है, जिससे घड़े के बाहर की सतह ठंडी हो जाती है। इस ठंडी सतह के कारण घड़े के अंदर रखा पानी भी ठंडा बना रहता है। इसके अलावा, मिट्टी घड़े की बनावट में ऐसे गुण होते हैं जो गर्मी के संचरण को धीमा करते हैं, जिससे घड़े की बाहरी गर्मी सीधे पानी तक नहीं पहुँच पाती। परिणामस्वरूप, गर्म दिनों में भी घड़े के अंदर पानी ठंडा और ताजा रहता है, जो इसे प्लास्टिक या धातु के बर्तनों से अलग बनाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्राकृतिक ठंडक प्रदान करने वाले घड़ों का उपयोग पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है क्योंकि इनमें बिजली या फ्रिज की आवश्यकता नहीं होती। इसके साथ ही क्ले पॉट्स जैविक और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बने होते हैं, जो उनके उपयोग को और भी सुरक्षित बनाते हैं। इस प्रकार, गर्मी के दौरान मिट्टी के घड़े में पानी ठंडा रहता है क्योंकि मिट्टी का प्राकृतिक खनिज मिश्रण और उसकी छिद्रपूर्ण बनावट पानी के तापमान को नियंत्रित करती है। यह अपनी सादगी और प्राकृतिक गुणों के कारण सदियों से भारतीय घरों में पसंद किया जाता रहा है।

Miami Open tennis final: Aryna Sabalenka beats Coco Gauff to complete ‘Sunshine Double’
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मियामी ओपन टेनिस फाइनल: अरिना साबालेन्का ने कोको गॉफ को हराकर ‘सनशाइन डबल’ पूरा किया

मियामी ओपन टेनिस प्रतियोगिता में फिर से अपनी बेहतरीन खेल प्रदर्शन का परिचय देते हुए, बेलारूसी टेनिस खिलाड़ी अरिना साबालेन्का ने कोको गॉफ को हराकर टाइटल अपने नाम किया। यह साबालेन्का के लिए मियामी ओपन का लगातार दूसरा खिताब है और साथ ही यह जीत उनके और गॉफ के बीच के हेड-टू-हेड रिकॉर्ड को 7-6 की बढ़त पर ले गई है। कोको गॉफ, जो मियामी की स्थानीय खिलाड़ी हैं, इस टूर्नामेंट को खासा महत्व देती हैं क्योंकि यह उनका गृह नगर टूर्नामेंट है। इसके बावजूद, साबालेन्का ने कड़ी मेहनत करते हुए फाइनल में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया और प्रतियोगिता का खिताब जीतकर अपनी मजबूती को साबित किया। इस मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन साबालेन्का की निरंतर एकाग्रता और ताकत ने अंततः बाज़ी लगाई। इस जीत ने साबालेन्का के करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी है, जिससे उनकी विश्व रैंकिंग और भी मजबूत हुई है। टेनिस विशेषज्ञों का मानना है कि साबालेन्का का यह प्रदर्शन उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाएगा तथा आने वाले टूर्नामेंटों के लिए उन्हें प्रेरित रखेगा। साथ ही, गॉफ के लिए यह हार एक सीख है जो उन्हें और बेहतर बनने के लिए प्रेरित करेगी। इस तरह, मियामी ओपन 2024 ने टेनिस प्रेमियों को एक रोमांचक और यादगार मुकाबला देखने को दिया, जिसमें दो युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।

Mann ki Baat: PM Modi urges citizens to jointly face challenges emerging due to West Asia war
राष्ट्रीय

मन्न की बात: पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया युद्ध के कारण उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए नागरिकों से संयुक्त प्रयास की अपील की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया ‘मन्न की बात’ कार्यक्रम में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोस में लगभग एक महीने से एक ‘भयंकर युद्ध’ जारी है, जिसने क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति दोनों को खतरे में डाल दिया है। पीएम मोदी ने इस मामले में भारत के नागरिकों और देशवासियों से एकजुट होकर आने वाली चुनौतियों का सामना करने की अपील की। उन्होंने कहा, “हम सबको मिलकर इस संकट का सामना करना होगा क्योंकि इससे न केवल क्षेत्रीय देशों, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित हो रही है।” प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत इस संकट को गहनता से समझ रहा है और वैश्विक समुदाय के सहयोग से शांति स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने प्रभावित देशों में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष प्रयास शुरू कर दिए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि इस ज्वलंत स्थिति के बीच भारत अपनी विदेश नीति में संयम और समझदारी बनाए रखेगा, साथ ही देश के विकास को बाधित नहीं होने देगा। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि सरकार हर संभव स्थिति को ध्यान में रखते हुए रणनीतियाँ तैयार कर रही है। वहीं, प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस समय अफवाहों से बचें और आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही स्थिति को समझें। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर देते हुए लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। इस पूरे संदर्भ में, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह समय है देशवासियों के एकजुट होने का, ताकि हम इन कठिन दौरों को मिलकर पार कर सकें और भारत को विश्व में एक सशक्त और शांतिप्रेमी राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत कर सकें।” माना जा रहा है कि इस वक्त के जटिल अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच भारत ने अपनी कूटनीति और रणनीतियों से वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका और भी मजबूत कर ली है। प्रधानमंत्री की यह अपील देश के हर नागरिक तक पहुंच रही है जो इस संकट से निपटने में सहयोगी है।

Chennai RWA shines in TN’s solar race
राज्य-शहर

चेन्नई आरडब्ल्यूए ने तमिलनाडु की सौर ऊर्जा प्रतियोगिता में दिखाई धाक

चेन्नई के पेरुम्बक्कम स्थित एक प्रमुख निवासी समुदाय, बोलिनेनी हिलसाइड, तमिलनाडु में सबसे बड़े सौर छत प्रतिष्ठान के लिए सम्मानित किया गया है। यह 1295 इकाइयों वाला गेटेड कम्युनिटी, जो ओल्ड महाबलीपुरम रोड के पास स्थित है, राज्य की सौर ऊर्जा पहल में एक मिसाल बन गया है। बोलिनेनी हिलसाइड को यह पुरस्कार रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (आरडब्ल्यूए) की श्रेणी में मिला है, जो तमिलनाडु के सौर ऊर्जा विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इसके छत पर लगाए गए सोलर पैनल न केवल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाते हैं बल्कि ऊर्जा की बचत और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहित करते हैं। इस परियोजना की शुरुआत कुछ वर्ष पहले हुई थी, जब समुदाय ने मिलकर नवीनीकृत ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। स्थानीय प्राधिकरणों और सौर ऊर्जा कंपनियों की सहभागिता से इसे सुगम बनाया गया। इस प्रतिष्ठान की क्षमता हजारों घरों को ऊर्जा प्रदान करने के बराबर है, जिससे न केवल बिजली बिलों में कमी आई है, बल्कि बिजली की मांग पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की पहलें पूरे राज्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने में सहायक साबित होंगी। बिलकुल स्पष्ट है कि बोलिनेनी हिलसाइड का यह कदम अन्य आरडब्ल्यूए के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा, जो पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत दोनों को प्राथमिकता देते हैं। समुदाय के सदस्यों ने इस उपलब्धि को साझा करने पर खुशी जताई और भविष्य में भी ऐसे पर्यावरणीय अनुकूल प्रोजेक्ट्स के लिए प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया। तमिलनाडु सरकार ने भी इस पहल को सार्वजनिक रूप से सराहा है और कहा है कि राज्य में सौर ऊर्जा क्षेत्र का विकास निरंतर तेजी से हो रहा है। इस सफलता के साथ, बोलिनेनी हिलसाइड ने साबित कर दिया है कि सामूहिक प्रयासों से न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि व्यापक स्तर पर भी स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में प्रभावी परिवर्तन लाया जा सकता है। आने वाले समय में अन्य रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे तमिलनाडु में सौर ऊर्जा की उपलब्धता और उपयोग बढ़ेगा।

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