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Almost 60% of India’s elephants are in Karnataka, Assam, T.N.
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भारत के 60% हाथी सिर्फ 3 राज्यों में! जानिए क्यों खास हैं कर्नाटक, असम और तमिलनाडु

नई दिल्ली: वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने देशभर में हाथियों की पहली बार डीएनए आधारित समकालिक गणना जारी की है। इस अध्ययन में सामने आया है कि भारत के लगभग 60 प्रतिशत हाथी तीन राज्यों – कर्नाटक, असम और तमिलनाडु – में पाए जाते हैं। यह रिपोर्ट हाथी संरक्षण और उनकी आवासीय स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाथी भारत का राष्ट्रीय धरोहर प्राणी है और वन्यजीवन में इसकी अहमियत न केवल पारिस्थितिक तंत्र के लिए, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश में हाथियों की संख्या और उनकी आबादी पर नजर रखना इनके संरक्षण के लिए आवश्यक होता है। इस उद्देश्य से वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने नवीनतम तकनीकों का प्रयोग करते हुए डीएनए आधारित पुनरावृत्ति परीक्षण के माध्यम से देशभर में हाथियों की संख्या का सटीक आकलन किया है। इस अध्ययन के अनुसार, कुल हाथी आबादी में कर्नाटक का हिस्सा सबसे बड़ा है, जिसके बाद असम और तमिलनाडु का स्थान आता है। कर्नाटक में विशाल वनों की उपलब्धता और संरक्षित क्षेत्रों की संख्या अधिक होने से हाथियों की संख्या यहाँ सर्वाधिक देखी गई है। असम, जो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, भी हाथी संरक्षण के लिए जाना जाता है, जबकि तमिलनाडु के जंगलों में भी हाथियों की अच्छी-खासी आबादी मौजूद है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में हाथियों की संख्यात्मक समीक्षा का यह पहला बड़ा प्रयास है जो डीएनए आधारित तकनीक पर आधारित है। इससे पारंपरिक सर्वेक्षणों की तुलना में अधिक विश्वसनीय और सटीक आंकड़े प्राप्त हुए हैं। इससे वन विभाग को संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी जिससे हाथियों के संघर्ष को कम किया जा सकेगा और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, “हाथियों की सही संख्या का आंकलन उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। हमारा लक्ष्य हाथियों और मनुष्यों के बीच संतुलन बनाए रखना और इनके आवासों का संरक्षण करना है।” उन्होंने यह भी बताया कि आगे भी इसके जैसे आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वन्यजीवन की गहन निगरानी जारी रखी जाएगी। इस रिपोर्ट ने जहां हाथी संरक्षण में एक नया अध्याय जोड़ा है, वहीं यह नीति निर्माताओं के लिए भी दिशा-निर्देश प्रदान करती है कि किस प्रकार से वन्यजीव संरक्षण योजनाओं में सुधार किया जाए। कर्नाटक, असम और तमिलनाडु सरकारों को विशेष रूप से अपने-अपने राज्यों में हाथियों के आवासों को सुरक्षित करने और मानव-हाथी टकराव को कम करने के लिए तत्पर रहना होगा। देश में हाथी आबादी बढ़ाने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करना आवश्यक है ताकि जैव विविधता बनी रहे और हाथी संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें। यह अध्ययन वन्यजीव संरक्षण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व को दर्शाता है और कहा जा सकता है कि भविष्य में ऐसे आधुनिक अध्ययन और भी ज्यादा प्रभावी साबित होंगे।

In Focus Podcast | Has gold lost its safe haven status?
विशेषज्ञों की राय

In Focus Podcast: | क्या बाजार की उथल-पुथल के बीच सोने ने अपना ‘सेफ हेवन’ स्टेटस खो दिया ?

बढ़ती अस्थिरता, ऊंची ब्याज दरें और वैश्विक संघर्षों के बीच सोने की पारंपरिक “सेफ हेवन” भूमिका पर सवाल विश्व भर में जारी वैश्विक तनाव के बीच सोने की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है। इस नए आर्थिक परिदृश्य में निवेशकों की निगाहें इस बहुमूल्य धातु की स्थिरता पर टिक गई हैं। इस एपीसोड में, कवित चौक और बी. भगवान दास से चर्चा के माध्यम से हम जानेंगे कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और इससे निवेशकों तथा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। पिछले कुछ महीनों में सोने ने पारंपरिक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अपनी विश्वसनीयता साबित की है। लेकिन, हाल की वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाओं ने सोने के मूल्य को प्रभावित किया है। वैश्विक मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में बदलाव, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में विविधता लानी शुरू कर दी है। कविता चौक ने कहा, “अक्सर आर्थिक संकट या geopolitical तनाव के दौरान निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं क्योंकि यह एक सुरक्षित आश्रय माना जाता है। लेकिन इस बार, बाजार में अल्पकालिक और दीर्घकालिक कारकों के मिश्रण के कारण, सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।” वहीं, बी. भगवान दास ने बताया कि वैश्विक आर्थिक नीतियों में तेजी से बदलाव और कुछ देशों की मुद्रास्फीति नियंत्रण की रणनीतियों का भी सोने की मांग और आपूर्ति पर असर पड़ा है। विश्लेषकों के अनुसार, हालिया गिरावट का एक कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि का संकेत भी है। उच्च ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसे गैर ब्याज आधारित संपत्ति के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं। इसके अलावा, डॉलर की ताकत में बढ़ोतरी भी सोने की कीमतों को दबाव में रखती है क्योंकि सोने की कीमतें अमेरिकी डॉलर में निर्धारित होती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इस गिरावट को लंबे समय तक नहीं माना जाना चाहिए। आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्यों में तेजी से बदलाव होने के कारण सोने की मांग पुनः बढ़ सकती है। निवेशकों को सावधानी बरतते हुए बाजार की गतिशीलता और फंडामेंटल संकेतों पर ध्यान देना आवश्यक होगा। इस एपीसोड में, कवित और भगवान दास ने गहराई से इन विषयों पर चर्चा की और बताया कि निवेशक वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में कैसे अपने निवेश विकल्पों का मूल्यांकन करें। सोने की आज की स्थिति को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण संवाद है जो निवेशकों एवं आम जनता दोनों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

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सरजावाव चौराहा बना ‘खतरे का कॉरिडोर’

रासूखात की हूल या प्रशासन की चुप्पी? सिरोही। शहर के मुख्य दरवाजे से जुड़ी सडक़ों की हालत आज सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर प्रशासन विकास और सुचारू यातायात के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। सरजावाव चौराहे से राजमाता धर्मशाला रोड तक का हिस्सा इन दिनों बदहाली, अतिक्रमण और अव्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। हालांकि हाथ लारी की कोई परेशानी नहीं है। वे अपना सामान बेच चलता बनते है। दुखद पहलू तो यह है कि यहां स्थायी दुकानदार अतिक्रमण की पहल में शुमार है। यह सडक़ न केवल शहर के मुख्य प्रवेश मार्ग से जुड़ी है, बल्कि रोडवेज डिपो जाने वाले यात्रियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। बावजूद इसके, यहां की स्थिति ऐसी है कि हर गुजरने वाला व्यक्ति खुद को जोखिम में महसूस करता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में अतिक्रमण करने वालों का हौसला इतना बढ़ गया है कि यदि कोई उन्हें टोकने की कोशिश करता है तो वे राजनीतिक रासूख का हवाला देने लगते है। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक ढील और राजनीतिक संरक्षण अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं। सरजावाव चौराहा, अतिक्रमण और गड्ढे का ‘डेंजर जोन’ सरजावाव चौराहा, जो शहर का एक प्रमुख आवाजाही का जंक्शन है, इन दिनों दुर्घटनाओं का केंद्र बन गया है। राजमाता धर्मशाला रोड के मुहाने पर स्थित एक मिष्ठान भंडार ने अपनी दुकान के बाहर लगभग 10 से 15 फीट तक सडक़ पर कब्जा कर रखा है। इतना ही नहीं, सडक़ के बीचों-बीच नाली पर बना गड्ढा स्थिति को और खतरनाक बना देता है। इस कारण से पूरी सडक़ सिकुडक़र मात्र 5 से 7 फीट रह गई है। हालात यह है कि दोपहिया वाहन चालक रोजाना गिरते-पड़ते है। चार पहिया वाहनों का निकलना तो कोई जंग से कम नहीं। अतिक्रमण के कारण सडक़ पर टेबल-कुर्सियां, दुकान का सामान और ग्राहकों के वाहन बेतरतीब खड़े रहते हैं। इससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। कई बार तो स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि एम्बुलेंस या इमरजेंसी वाहन भी फंस सकते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि एक संभावित बड़ा खतरा है जो कभी भी गंभीर हादसे का रूप ले सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सडक़ से रोजाना प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं। नगर परिषद भी महज कुछ फर्लांग की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सडक़ एक ‘डेंजर जोन’ की तरह है। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जहां तक नियमों की बात करें तो सार्वजनिक सडक़ों पर अतिक्रमण पूरी तरह प्रतिबंधित है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना और हटाने की कार्रवाई अनिवार्य है। इसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह प्रशासनिक विफलता मानी जा सकती है। शहरवासियों का साफ कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह बिना किसी दबाव के अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाए और इस सडक़ को सुरक्षित बनाए।

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महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह

सिरोही में गूंजा ‘अहिंसा परमो धर्म’ का संदेश सिरोही। शहर में इस वर्ष भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। जैन समाज द्वारा आयोजित इस पावन अवसर ने पूरे शहर को धार्मिक रंग में रंग दिया, जहां हर ओर अहिंसा परमो धर्म और जियो और जीने दो के संदेश गूंजते नजर आए। इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि सामाजिक समरसता और विश्व शांति के संदेश को भी व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाया। महोत्सव की शुरुआत प्रात:कालीन प्रभात फेरी से हुई। सुबह-सुबह श्रद्धालु भक्ति गीतों और भगवान महावीर के जयकारों के साथ शहर की प्रमुख गलियों से होकर निकले। इस दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया। इसके बाद भव्य वरघोड़ा और शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जो महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहा। सजी-धजी झांकियों, बैंड-बाजों और पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालुओं ने इस शोभायात्रा को यादगार बना दिया। भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों को दर्शाती झांकियों ने लोगों को उनके आदर्शों की याद दिलाई। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु वर्धमान वीर की जय के उद्घोष करते हुए आगे बढ़ते रहे। शहर के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने इस शोभायात्रा का स्वागत किया और पुष्प वर्षा कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के चरणों में शीश नवाकर अपने जीवन में शांति, संयम और सदाचार की कामना की। पूजन कार्यक्रमों में जैन धर्म के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया। आचार्यों और विद्वानों ने अपने प्रवचनों में बताया कि सच्चा धर्म बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और सरल जीवनशैली में निहित होता है। स्वामी वात्सल्य और सेवा कार्य धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाजसेवा की भावना भी इस महोत्सव में देखने को मिली। स्वामी वात्सल्य कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में लोगों को भोजन प्रसादी वितरित की गई। इसके अलावा दिव्यांगजनों को मिठाई वितरित कर मानवता और करुणा का परिचय दिया गया। यह पहल इस बात का प्रतीक थी कि भगवान महावीर का संदेश केवल उपदेशों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहार में भी उतारा जा रहा है। गांधी पार्क योग संस्थान में इस अवसर पर एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में विश्व शांति, सद्भाव और मानव कल्याण के लिए प्रार्थना की गई। योग प्रशिक्षकों और समाजसेवियों ने इस दौरान कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान महावीर के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। आज जब दुनिया हिंसा, अशांति और संघर्षों से जूझ रही है, तब अहिंसा का सिद्धांत ही मानवता को सही दिशा दे सकता है। रात्रि में भक्ति संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान महावीर की महिमा का गुणगान किया गया। भक्तों ने देर रात तक भक्ति में लीन होकर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। भक्ति संध्या ने पूरे आयोजन को एक भावनात्मक और आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की, जहां हर व्यक्ति भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता नजर आया। समाज में एकता का आह्वान इस अवसर पर समाजसेवी जय विक्रम हरण और नितेश जैन उर्फ लाला भाई ने जैन समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज को छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठकर एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने सभी से भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने और समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के रामेश्वर लाल, योग प्रशिक्षक भीक सिंह भाटी, समाजसेवी जय विक्रम हरण, टीकम भाई सिंधी, योगाचार्य रामचंद्र, आशुतोष पटनी और गोविंद भाई शामिल रहे। इन सभी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करते हैं। भगवान महावीर के जीवन का संदेश भगवान महावीर का जीवन त्याग, तपस्या, संयम और अहिंसा का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची खुशी बाहरी भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति में निहित होती है। उनका सिद्धांत जियो और जीने दो आज के समय में और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह सिद्धांत न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति लाता है, बल्कि समाज में भी सह-अस्तित्व और सद्भाव को बढ़ावा देता है। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है—चाहे वह युद्ध हो, पर्यावरण संकट हो या सामाजिक असमानता—ऐसे में भगवान महावीर के विचार एक मार्गदर्शक के रूप में सामने आते हैं। उनकी अहिंसा की शिक्षा हमें यह सिखाती है कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि शांति और संवाद से संभव है। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने भीतर झांकें और अपने विचारों और कर्मों को शुद्ध करें।

विशेष आयोजन

अद्वैत दर्शन भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण एवं प्राचीन दर्शनशास्त्र है

नई दिल्ली, : अद्वैत दर्शन भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण एवं प्राचीन दर्शनशास्त्र है, जिसकी उत्पत्ति वेदांत शास्त्रों में हुई। इस दर्शन के अनुसार, ब्रह्म और आत्मा एक ही हैं, और संसार में जो विविधता दिखाई देती है, वह मायाजाल मात्र है। अद्वैत दर्शन के प्रमुख प्रतिपादक आदि शंकराचार्य हैं, जिन्होंने इस दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई। अद्वैत दर्शन का मूल मंत्र ‘एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति’ से समझा जा सकता है, जिसका अर्थ है कि सच्चाई एक है, लेकिन विद्वान उसे कई रूपों में प्रकट करते हैं। इस दर्शन के अनुसार, परम सत्ता ब्रह्म ही सर्वोच्च सत्य है और जगत का कोई भी चीज़ स्थायी नहीं है। संसार की विभिन्नता केवल माया के प्रभाव से उत्पन्न होती है, जो हमें वास्तविकता को नहीं समझने देती। विद्वानों का मानना है कि अद्वैत दर्शन ने भारतीय दर्शनशास्त्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इसने आत्मा और ब्रह्म के बीच के अंतर को समाप्त कर एकता की भावना को बढ़ावा दिया। इसके अलावा, इस दर्शन ने भक्तिमार्ग और ज्ञानमार्ग को संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे आध्यात्मिक साधना में आसानी हुई। आधुनिक भारत में भी अद्वैत दर्शन का महत्व कम नहीं हुआ है। कई विश्वविद्यालयों में यह दर्शनशास्त्र का एक अनिवार्य विषय है। इसके अधिकारिक अध्ययन से विद्यार्थियों को न केवल दार्शनिक ज्ञान मिलता है, बल्कि जीवन जीने की एक नई सोच भी मिलती है। कई समकालीन विचारक और योग गुरु इस दर्शन को अपनी शिक्षाओं का आधार मानते हैं। अद्वैत दर्शन आज भी लोगों के मन में अध्यात्मिक एवं दार्शनिक प्रश्नों के उत्तर खोजने का मार्ग प्रशस्त करता है। यह दर्शन एक ऐसी जीवनशैली और सोच प्रदान करता है, जो व्यक्ति और ब्रह्म के बीच के संबंध को गहरा करता है। परिणामस्वरूप, अद्वैत दर्शन वर्तमान युग में भी प्रासंगिक एवं प्रभावशाली बना हुआ है। इस प्रकार, अद्वैत दर्शन केवल एक शास्त्रीय संकल्पना नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविकता को समझने का एक प्रभावशाली मार्ग है, जो आज के समय में भी विज्ञान, दर्शन और आध्यात्म के क्षेत्र में अपना महत्व बनाए हुए है।

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असम दौरे पर पीएम ने गार्ड को श्रद्धांजलि क्यों नहीं दी? कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के असम दौरे के दौरान वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी गार्ड को श्रद्धांजलि न देने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ी आलोचना की है और कहा है कि ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर राष्ट्रीय धरोहरों का ठीक से सम्मान किया जाना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने एक प्रेस बयान में कहा कि गार्ड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन शूरवीरों में से एक हैं, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना जीवन न्योछावर किया। इसलिए, प्रधानमंत्री का उससे सम्मानपूर्वक विदाय न करना न सिर्फ दुखद है, बल्कि यह जनता के भावनाओं के साथ खिलवाड़ जैसा है। पार्टी का कहना है कि सरकार को इस तरह के मामलों में ज़्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। आधिकारिक कार्यक्रमों में नेताओं द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देना एक पारंपरिक और महत्वपूर्ण कर्तव्य माना जाता है। इससे न केवल उनके योगदान का सम्मान होता है, बल्कि नए पीढ़ी को भी उनके बलिदान की जानकारी मिलती है। कांग्रेस ने सुझाव दिया है कि अगली बार इस तरह के दौरे में सभी प्रमुख हस्तियों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि कोई महत्वपूर्ण चरण अनदेखा न रह जाए। वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, असम सरकार ने कहा है कि पूरे कार्यक्रम में सभी आवश्यक सरकारी व्यावस्थाएं की गई थीं और प्रधानमंत्री का दौरा सफल रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले ने एक बार फिर यह दर्शाया है कि इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान को लेकर राजनीतिक दलों में मतभेद हो सकते हैं। ऐसे समय में जब देश स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव मना रहा है, नेताओं को चाहिए कि वे सभी स्वतंत्रता सेनानियों को आवश्यक सम्मान दें और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करें। हालांकि, कांग्रेस का यह आंदोलन असम में राजनीतिक हलचल को भी तेज कर सकता है क्योंकि राज्य आगामी चुनावों के लिए भी तैयारियां कर रहा है। इस मुद्दे पर और भी बयान आने की संभावना है। इस विवाद ने देशभर में स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान की भावना को एक बार पुनः जगाया है और उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर भविष्य में इस तरह की चूक न हो, इसका विशेष ध्यान रखेगी।

राज्य-शहर

राज्यसभा चुनाव में ‘अवैध गतिविधियों’ का आरोप: हरियाणा कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की शिकायत

कांग्रेस ने निष्पक्ष मतदान पर उठाए सवाल, चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग हरियाणा कांग्रेस ने हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनावों के मद्देनजर चुनाव आयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर गैरकानूनी गतिविधियों की बात कही है और उचित जांच की मांग की है। इस कदम को राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुदृढ़ता के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान नियमों का उल्लंघन किया गया है, जिसके कारण चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उम्मीदवारों और उनके समर्थकों द्वारा दबाव और प्रोत्साहन के माध्यम से मतदाता प्रभावी रणनीतियाँ अपनाई गईं, जो चुनाव के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध हैं। पार्टी के प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा, “हमें खेद है कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कुछ लोगों ने नियमों की खुलेआम अवहेलना की है। हम चुनाव आयोग से अनुरोध करते हैं कि वे इन सभी मामलों की गंभीरता से जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि लोकतंत्र का सम्मान बना रहे।” चुनाव आयोग ने अभी इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह मामला चुनाव आयोग की सतर्कता और जवाबदेही को लेकर सत्ताधारी दलों और विपक्ष दोनों के लिए एक परीक्षण का मौका होगा। चुनाव आयोग की भूमिका चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा में आगामी राजनीतिक माहौल और आगामी विधान सभा चुनावों से पहले यह विषय काफी संवेदनशील है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर अपनी सुनवाई कराएंगे और इसे अपने राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा बनाएंगे। यह भी देखा जाना बाकी है कि चुनाव आयोग कैसे स्थिति को संभालता है और किस प्रकार के कदम उठाता है। विधि और नियमों का कड़ाई से पालन ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है, और इस मामले में हरियाणा कांग्रेस का कदम चुनाव आयोग की असरदार भूमिका की मांग को स्पष्ट करता है। अतः, आगामी दिनों में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई से इस विवाद का समाधान निकालने की उम्मीद की जा रही है, जिससे भविष्य में चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बने।

1.22 lakh Anganwadi workers in Rajasthan get ₹1,000 each through DBT
राष्ट्रीय

राजस्थान में 1.22 लाख आंगनवाड़ी कर्मियों को DBT के माध्यम से 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान

जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री ने हाल ही में आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण और विकास को बेहतर बनाने के लिए कई अहम पहलाओं की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों पर तीन से छह वर्ष के बच्चों को सप्ताह में पांच दिन गर्म दूध प्रदान किया जा रहा है। यह सेवा ‘अमृत आहार योजना’ के तहत दी जा रही है, जिसका उद्देश्य बच्चों के स्वस्थ पोषण को सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों की भौतिक संरचना को बेहतर बनाने के लिए भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य जारी है। इसके साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला पर्यवेक्षकों को स्मार्टफोन वितरित किए गए हैं, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग बेहतर हो सके। यह कदम डिजिटल माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन को आसान और पारदर्शी बनाने हेतु उठाया गया है। राज्य सरकार ने कुल 1.22 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) के तहत 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान किया है। यह राशि उनके कार्यों के सम्मान स्वरूप प्रदान की गई है, ताकि वे अपने परिवार और कार्य क्षेत्र में बेहतर सेवाएं दे सकें। आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी इलाकों में बच्चों और महिलाओं के कल्याण का प्रमुख माध्यम हैं, जहां पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अमृत आहार योजना के लाभ सप्ताह में पांच दिन बच्चों को गर्म दूध उपलब्ध कराना। बच्चों के संपूर्ण पोषण में सुधार। आंगनवाड़ी केंद्रों के स्तर सुधार के लिए भवनों का नवीनीकरण। डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सेवाओं का बेहतर प्रबंधन। सरकार का मानना है कि इन पहलों से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति बेहतर होगी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा। स्मार्टफोन वितरण से कार्य प्रक्रियाओं में गति आएगी तथा रिपोर्टिंग और निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी। राजस्थान में यह कदम सरकार की समर्पित और निरंतर प्रयासों का नतीजा है, जो बाल विकास परियोजनाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय अधिकारियों को आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए हैं। इस तरह की पहलों से राजस्थान में मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित होगा और आने वाले वर्षों में बच्चों के विकास और समग्र स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखा जाएगा।

Israel passes law making death penalty default sentence for Palestinians convicted of lethal attacks
अंतरराष्ट्रीय

इज़राइल ने कानून पास किया: घातक हमलों में दोषी फिलिस्तीनियों के लिए डिफ़ॉल्ट फांसी की सजा

नई दिल्ली। इज़राइल सरकार ने हाल ही में एक विवादास्पद नया कानून पारित किया है, जिसमें उन फिलिस्तीनी संदिग्धों को डिफ़ॉल्ट रूप से मौत की सजा (फांसी) सुनाने का आदेश दिया गया है, जो घातक आतंकवादी हमलों के दोषी पाए गए हैं। इस फैसले ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। कानून के अनुसार, यदि कोई फिलिस्तीनी नागरिक आतंकवादी हमलों में दोषी पाया जाता है, जिनमें मौत होती है, तो उसकी सजा फांसी होगी। इससे पहले, इज़राइल में सजा का निर्धारण अधिक लचीला था, जहां मौत की सजा को विशेष परिस्थितियों में ही लागू किया जाता था। लेकिन नए नियम के तहत, फांसी सजा को डिफॉल्ट बताया गया है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में बदलाव आएगा। सरकार ने इस कानून को आतंकवाद विरोधी कठोर कदम बताया है, जिससे हमलों को रोकने में मदद मिल सके। इज़राइली अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह कानून आतंकियों के लिए एक मजबूत चेतावनी होगा। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षा बलों को आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, फिलिस्तीनी प्रशासन और कई मानवाधिकार समूहों ने इस कानून की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कानून न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों के आधारभूत सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस तरह के कठोर कदमों से क्षेत्र में तनाव और हिंसा बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस कदम पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने इज़राइल से ऐसे कानूनों को वापिस लेने का आग्रह किया है, जिससे शांति प्रयासों को बढ़ावा मिल सके। वहीं कुछ देश इज़राइल की सुरक्षा चिंताओं को भी समझने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून फिलिस्तीन और इज़राइल के बीच लंबे समय से चली आ रही विवाद को और जटिल बना सकता है। सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहेगा। इस मामले में आगे क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि इज़राइल द्वारा अपनाया गया यह नया क़ानून क्षेत्रीय संघर्ष के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

The weight of existence: A landmark retrospective of Tyeb Mehta
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अस्तित्व का बोध: तैयब मेहता की एक उल्लेखनीय प्रदर्शनी

नई दिल्ली। इस समय क़िरण नादर म्यूजियम ऑफ़ आर्ट में भारतीय आधुनिक कलाकार तैयब मेहता की एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है, जिसमें उनके जीवन और कला की 120 से अधिक प्रभावशाली रचनाएँ प्रदर्शित की जा रही हैं। यह प्रदर्शनी भारत के आधुनिक कला क्षेत्र में मेहता के प्रतिष्ठित योगदान को समर्पित है और इसे देखकर कला प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। तैयब मेहता, जिन्हें प्रखर रंगों और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है, ने भारतीय आधुनिकता की कल्पना में एक नवीन मोड़ प्रस्तुत किया। इस प्रदर्शनी में उनके प्रारंभिक काल से लेकर उनकी अंतिम कृतियाँ तक का समग्र प्रदर्शन है, जो उनके विकास और विविध दृष्टिकोण को दर्शाता है। क़िरण नादर म्यूजियम ऑफ़ आर्ट ने इस आयोजन के माध्यम से मेहता की कला को नए संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे दर्शकों को उनके दृष्टिकोण और मनोभावना का गहरा अनुभव हो सके। प्रदर्शनी में प्रदर्शित अधिकांश कलाकृतियाँ मेहता के जीवन के विभिन्न पड़ावों पर रची गई हैं, जिनमें मानवीय अस्तित्व, सामाजिक संघर्ष, और आध्यात्मिक अन्वेषण जैसे विषय प्रमुख हैं। उनके प्रभावशाली चित्रों में अनिवार्यता, अंशकालिक अस्तित्व और समय की गति की भावना स्पष्ट रूप से झलकती है। मेहता ने अपनी कला के माध्यम से न केवल भारत के सामाजिक-राजनैतिक परिवर्तनों को चित्रित किया, बल्कि उन्होंने वैश्विक कला मंच पर भी अपनी विशेष पहचान बनाई। इस प्रदर्शनी के क्यूरेटर ने बताया कि उन्हें मेहता की कलाकृतियों में एक ऐसे कलाकार की झलक मिलती है जो गहन संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता दोनों का संयोजन करता है। यह आयोजन कलाकार के जन्मशताब्दी वर्ष पर विशेष रूप से आयोजित किया गया है, जो उनकी विरासत को मंच प्रदान करता है। क़िरण नादर म्यूजियम ने प्रदर्शनी के दौरान विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रम और संगोष्ठियाँ भी आयोजित की हैं, ताकि नई पीढ़ी को मेहता की कला के महत्व और प्रासंगिकता से अवगत कराया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रदर्शनी न केवल तैयब मेहता की कला का उत्सव है, बल्कि भारतीय आधुनिक कला की उस जड़ों की खोज भी है जिसने देश की कला स्तिथि को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया। कला प्रेमी और शोधकर्ता इसे एक सुनहरा अवसर मान रहे हैं, क्योंकि इसमें मेहता के न्यूनतर ज्ञात रचनात्मक प्रयोग और उनके विचारों की गहराई का समूचा प्रतिबिंब देखने को मिलता है। क़िरण नादर म्यूजियम में यह प्रदर्शनी आने वाले महीनों तक जारी रहेगी, और इसके माध्यम से भारतीय कला के प्रति जागरूकता एवं सराहना बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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