Hot News

April 2026

Trending, राज्य-शहर

तीन अहम स्थानों पर अंडरब्रिज निर्माण की मांग

सिरोही में बढ़ती ट्रैफिक समस्या पर बड़ा कदम सांसद लुम्बाराम चौधरी ने नितिन गडकरी से की मुलाकात सिरोही। जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव और सडक़ दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए अब समाधान की दिशा में पहल तेज हो गई है। सिरोही-जालोर के सांसद लुम्बाराम चौधरी ने केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर जिले के तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर अंडरब्रिज निर्माण की मांग उठाई। सांसद चौधरी ने मंत्री गडकरी को अवगत कराया कि सिरोही जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-62 और राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-27 पर वाहनों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। इन मार्गों पर भारी वाहनों, स्थानीय यातायात और पैदल यात्रियों की एक साथ आवाजाही के कारण स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। उन्होंने बताया कि इन राजमार्गों पर कई ऐसे स्थान हैं जहां पर्याप्त सुरक्षा उपायों का अभाव है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप ले रही है। सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि जिन स्थानों पर अंडरब्रिज की मांग की गई है, वे क्षेत्र स्कूलों, बाजारों और आवासीय इलाकों के पास स्थित हैं। यहां रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, महिलाएं और आमजन सडक़ पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए अंडरब्रिज का निर्माण अत्यंत आवश्यक बताया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल दुर्घटनाओं में कमी लाएगा, बल्कि आमजन को भी बड़ी राहत देगा। इन तीन स्थानों पर रखी गई अंडरब्रिज की मांग सांसद लुम्बाराम चौधरी ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष तीन प्रमुख स्थानों का प्रस्ताव रखा जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग-62 पर साणेश्वर महादेव मंदिर रोड जहां यह क्षेत्र धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ स्थानीय आवाजाही का भी प्रमुख मार्ग है। यहां श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। डॉ. भीमराव अंबेडकर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के पास एचएच-62 जहां मेडिकल कॉलेज के आसपास मरीजों, स्टाफ और विद्यार्थियों की आवाजाही अधिक रहती है, जिससे यहां सुरक्षित पारगमन की आवश्यकता बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर आबूरोड स्थित हनुमान टेकरी, यह स्थान धार्मिक और स्थानीय दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जहां अक्सर भीड़ रहती है और सडक़ पार करना जोखिम भरा होता है। सांसद चौधरी ने कहा कि अंडरब्रिज निर्माण से न केवल सडक़ दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि यातायात भी सुचारू होगा। इससे स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह की आधारभूत संरचना का विकास क्षेत्रीय प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इससे सिरोही जिले में विकास को नई गति मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सांसद की मांगों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को प्रस्तावों का परीक्षण करने के निर्देश देने का आश्वासन दिया। मंत्री ने कहा कि सडक़ सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और जहां भी आवश्यक होगा, वहां उपयुक्त कदम उठाए जाएंगे।

T.K. Radha: from Kerala to Oppenheimer
लाइफस्टाइल

केरल से हॉलीवुड तक: टी.के. राधा ने कैसे तय किया ‘ओपेनहाइमर’ का सफर

क्या आप जानते हैं कि 1960 के दशक में केरल की एक महिला ने डॉ. रॉबर्ट जे ओपेनहाइमर से मुलाकात की थी? टी.के. राधा नाम की यह महिला विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में एक प्रतिभाशाली हस्ती थीं, जिनका जीवन और काम आज भी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। टी.के. राधा का जन्म केरल में हुआ था, जहां उन्होंने अपने शिक्षण जीवन की शुरुआत की। उनके परिवार ने शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी, जिससे वे बचपन से ही अध्ययन में रुचि रखने लगीं। विज्ञान के प्रति उनकी गहरी दिलचस्पी ने उन्हें इंजीनियरिंग और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। 1960 के दशक में, जब महिलाओं का STEM क्षेत्रों में प्रवेश सीमित था, तब भी राधा ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से कई बाधाओं को पार किया। उन्होंने कई शोध परियोजनाओं में हिस्सा लिया और विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उसी समय उनका डॉ. रॉबर्ट जे ओपेनहाइमर से मिलना हुआ, जो “परमाणु बम के पिता” के रूप में प्रसिद्ध थे। ओपेनहाइमर और राधा की मुलाकात एक महत्वपूर्ण अवसर थी, जिसने उन्हें विश्व विज्ञान समुदाय के करीब आने में मदद की। यह बातचीत और अनुभव उन्हें और भी अधिक प्रेरणा देने वाला साबित हुआ। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मानसिक दृढ़ता, समर्पण और ज्ञान की भूख से कोई भी व्यक्ति बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। टी.के. राधा के योगदान को विज्ञान व तकनीकी जगत में सम्मान मिला और उनकी उपलब्धियों को याद किया जाता है। आज के समय में, जब STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, उनकी कहानी नयी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है कि वे भी अपने सपनों को साकार कर सकें। इस प्रकार, टी.के. राधा न केवल केरल की गौरवशाली पुत्री हैं, बल्कि पूरे भारत की उन महिलाओं में से एक हैं जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनकी कहानी सुनना और साझा करना आवश्यक है, ताकि आने वाले वक्त में और भी प्रतिभाएं उनका अनुसरण कर सकें।

Mob vandalises prayer hall over burial dispute in Bastar
राज्य-शहर

बस्तर में दाह संस्कार विवाद ने लिया हिंसक रूप, प्रार्थना केंद्र पर हमला

काँकेर जिले के एक गाँव में क्रिस्चियन दाह संस्कार की रीति-रिवाजों के विरोध के बाद तनाव भड़क गया और भीड़ ने प्रार्थना हॉल को नुकसान पहुंचाया। इस घटना में पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बल स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास में जुटे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, गाँव में हाल ही में एक मृतक के लिए क्रिस्चियन दाह संस्कार किया जाना था, जिसे कुछ लोगों ने स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में विवाद शुरू हुआ, जो जल्द ही हिंसातक रूप ले लिया। भीड़ ने प्रार्थना हॉल पर हमला कर तोड़फोड़ की, जिससे इलाके में दहशत का माहौल पैदा हो गया। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने जबरदस्ती स्थान पर कब्जा करने की कोशिश की और सुरक्षा कर्मियों पर भी हमला किया। कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल स्थिति को काबू में लाने के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है। स्थानीय प्रशासन ने शांतिपूर्ण समाधान के लिए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के लिए तैयार रहने की अपील की है। साथ ही, घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है जो मामले की तह तक जाने का काम करेगी। इस घटना से पूर्व, इस क्षेत्र में धार्मिक सामंजस्य को लेकर कई बार विवाद होते रहे हैं। प्रशासन का यह प्रयास है कि इस प्रकार की घटनाओं को आगे न बढ़ने दिया जाए और सामाजिक सौहार्द कायम रखा जाए। स्थानीय लोगों ने भी अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए और एक-दूसरे के विश्वासों को समझने की जरूरत है। काँकेर पुलिस ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वे जनता से सहयोग की अपेक्षा करते हैं ताकि जल्द से जल्द इलाके में सामान्य स्थिति बहाल हो सके। इस पूरे मामले ने बस्तर क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक एकता की अहमियत को फिर से उजागर किया है और अधिकारियों को इसका समाधान निकालने के लिए सतर्क कर दिया है। आने वाले दिनों में हालात कैसे विकसित होते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

Kimi Antonelli: A blend of Senna’s soul and Bolt’s speed
खेल जगत

किमी एंटोनेली: सेनना की आत्मा, बोल्ट जैसी रफ्तार का नया तूफान

फॉर्मूला 1 (F1) की दुनिया में नए सितारे हमेशा ध्यान आकर्षित करते हैं, लेकिन कुछ ही चालक ऐसे होते हैं जो अपनी प्रतिबद्धता, कौशल और भावनाओं के संयोजन से सभी का दिल जीत लेते हैं। किमी एंटोनेली ऐसे ही एक युवा और प्रतिभाशाली ड्राइवर हैं, जो न केवल अपनी गति के लिए चर्चित हैं, बल्कि उनकी संवेदनशीलता और साहस भी उन्हें अलग पहचान देते हैं। किमी एंटोनेली की कहानी बताती है कि F1 सिर्फ एक तकनीकी खेल नहीं है, बल्कि यह ड्राइवर की आत्मा और दिल का प्रतिबिंब भी है। जैसे ब्राज़ील के महान अइरटन सेनना ने अपने जुनून और भावना से कार रेसिंग को एक नए आयाम तक पहुंचाया, वैसे ही किमी में भी वही जज्बा और संवेदनशीलता दिखती है। इसके अलावा, उनकी तीव्र गति बोल्ट की रफ्तार की याद दिलाती है, जो उन्हें युवा दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती है। हाल ही में आयोजित एक इंटरव्यू में, किमी ने बताया कि उनके लिए सिर्फ रेस जीतना महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि रेस के दौरान हर लम्हे को महसूस करना और उससे सीखना ज्यादा बड़ा मकसद है। उनका यह नजरिया दिखाता है कि वे मशीन की गति से आगे बढ़कर इंसानी भावना और सोच को भी महत्व देते हैं। ट्रैक पर उनकी आक्रामकता और पीछे की भावुकता संतुलन इस बात का प्रमाण है कि वे केवल एक तेज ड्राइवर ही नहीं, बल्कि रणनीतिक और समझदार खिलाड़ी भी हैं। उनके प्रशिक्षकों और विशेषज्ञों का मानना है कि किमी एंटोनेली F1 के लिए एक नई सोच और उम्मीद लेकर आए हैं जो खेल को न सिर्फ मनोरंजक बनाती है बल्कि उसमें एक नई जान भी डालती है। वर्तमान में फॉर्मूला 1 की प्रतियोगिताएं अत्यधिक प्रतिस्पर्धा से भरी हुई हैं, और हर ड्राइवर के लिए आवश्यक है कि वे शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक दृढ़ता दिखाएं। किमी की यह खूबी है कि वे अपने अंदर खेल के प्रति संजीदगी और अपनी भावनाओं का समावेश बखूबी करते हैं। यही कारण है कि उन्हें भविष्य का एक उभरता हुआ सितारा माना जाता है। अंततः किमी एंटोनेली का सफर यह साबित करता है कि फॉर्मूला 1 केवल प्रमुख तकनीकी उन्नति या मशीनरी पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह उस ड्राइवर की आत्मा का खेल है जो अपनी सीमाओं को पहचानते हुए अपने सपनों को साकार करता है। उनके प्रशंसक और विशेषज्ञ उनकी इस खासियत की सराहना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में किमी टीम इंडिया और विश्व रेसिंग जगत में अपनी पहचान और भी मजबूत करेंगे।

Seamless sibling synergy defined Akkarai Sisters’ concert
मनोरंजन

अक्कराई बहनों की सुरमयी साधना ने रचा संगीत का जादुई माहौल

शहर के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर हाल ही में एक अनूठा संगीत समारोह हुआ, जिसमें अक्कराई बहनों, सुश्रुत सबलक्ष्मी और सुर्शिला सॉर्नलथा ने एकत्रित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम में दोनों बहनों ने शास्त्रीय संगीत के कालजयी कृतियों को इतनी खूबसूरती से प्रस्तुत किया कि संगीत प्रेमियों की नजरें मंत्रमुग्ध हो गईं। सबलक्ष्मी और सॉर्नलथा की जोड़ी अपनी समरसता और सामंजस्य के लिए जानी जाती है, और इस बार उनका प्रदर्शन भी कुछ अलग नहीं था। दोनों ने एक साथ समय-परीक्षित कृतियों को प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं के मन में संगीत की चिरस्थायी छाप छोड़ी। खासतौर पर सॉर्नलथा ने अपने कन्नकोल (संयोजित ताल वाक्य) के माध्यम से संगीत में एक नई ऊर्जा का संचार किया, जो सामान्यतः पुरुष तबला वादकों द्वारा किया जाता है। सॉर्नलथा का कन्नकोल प्रदर्शन संगीत कार में एक अप्रत्याशित, लेकिन दिलचस्प ताल प्रस्तुतिकरण था, जिसने पूरे कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बना दिया। उनकी यह तकनीक न केवल तालबद्धता को बढ़ावा देती है, बल्कि समग्र संगीत प्रस्तुति को भी एक नवीन आयाम प्रदान करती है। इस संगम से यह स्पष्ट हो गया कि संगीत में लिंग आधारित सीमाएं मायने नहीं रखतीं, बल्कि प्रतिभा और समर्पण ही मायने रखते हैं। दोनों बहनों की इस प्रस्तुति ने शास्त्रीय संगीत के प्रति कई लोगों का दृष्टिकोण बदल दिया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न परंपरागत कृतियों को बारीकी से और भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया गया, जिनमें संगीत की गहराई और सांस्कृतिक महत्व स्पष्ट महसूस किया गया। दर्शकों ने इस संगीत आनंद को सराहा और लंबे समय तक तालियों की गड़गड़ाहट से मंच को गूंजाया। संगीत जगत के जानकारों ने भी अक्कराई बहनों के इस अनोखे संगम को एक मिसाल बताया है, जो संगीत में बहनों के समर्पण और संघर्ष की कहानी कहता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास संगीत के संरक्षण और नव सुविधाजनक स्वरूपों को प्रोत्साहित करते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से संगीत के प्रति उनकी पैनी समझ और भावनात्मक जुड़ाव दोनों ही प्रतिभाशाली बहनों के व्यक्तित्व को दर्शाता है। उन्हें यशस्वी कलाकारों की श्रेणी में रखते हुए कहा जा सकता है कि वे शास्त्रीय संगीत के नक्षत्र हैं, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी का मन जीता है। अक्कराई बहनों के इस संगीत समारोह ने साबित कर दिया कि संगीत उपकरण और तकनीकों की सीमाओं को पार करके भी एकता और सृजनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण स्थापित किया जा सकता है।

Before refrigeration, how did seafarers preserve food on long voyages?
तकनीकी

समंदर की चुनौती: बिना रेफ्रिजरेशन नाविक कैसे बचाते थे अपना राशन?

समुद्र यात्रा के इतिहास में भोजन संरक्षण की समस्या सदैव महत्वपूर्ण रही है। रेफ्रिजरेशन यंत्रों के आविष्कार से पहले, समुद्री यात्रियों को लंबी यात्राओं के दौरान अपने भोजन को सुरक्षित रखने के लिए पारंपरिक तरीकों का सहारा लेना पड़ता था। इस तकनीक ने उन्हें जहाज पर लंबे समय तक भोजन खराब होने से बचाने में मदद की। सबसे पहले, समुद्री यात्रियों ने नमक के माध्यम से मांस और मछली को संरक्षित करने का प्रमुख तरीका अपनाया। नमकीन करना, यानी मांस को मोटी परत में नमक लगाकर सूरज और हवा में सुखाना, एक प्राचीन और प्रभावी तरीका था। यह प्रक्रिया खाद्य पदार्थ में मौजूद जल को कम कर देती थी, जिससे बैक्टीरिया की वृद्धि रुक जाती थी। इसके अलावा, सूखे फल और अनाज जैसे चने, दालें और चावल जहाज पर सुरक्षित रूप से रखे जाते थे। इनमें नमी की मात्रा बहुत कम होती है, जिससे इन्हें लंबी अवधि तक बिना खराब हुए रखा जा सकता था। जहाज की डिब्बियों या कंटेनरों में भोजन को हवा और नमी से दूर रखा जाता था। समुद्री यात्रियों ने खाद्य पदार्थ संरक्षित करने के लिए धूम्रपान (स्मोकिंग) की भी विधि अपनाई। मांस या मछली को आग के धुएं में सुखाना और धूम्रपान करना जीवाणुओं को मारने में मदद करता था और स्वाद में भी सुधार करता था। इसके अलावा, सिरका या शराब का उपयोग खाद्य सुरक्षा के लिए किया जाता था, क्योंकि इसका एसिडिक गुण खाद्य पदार्थों को खराब होने से रोकता था। कुछ नाविक जड़ों, मसालों और विशेष प्रकार के जड़ी-बूटियों का भी इस्तेमाल करते थे, जो प्राकृतिक रूप से खाद्य संरक्षण में सहायक होते थे। इसके साथ ही, भोजन को लकड़ी के डिब्बों में या मोम लगाकर लपेटा जाता था ताकि उसे बाहरी नमी और कीटों से बचाया जा सके। इन पारंपरिक तकनीकों के कारण, जहाज पर लंबे समुद्री सफर के दौरान यात्रियों को पोषण मिलता रहा और उनकी भूख शांत रहती थी। वक्त के साथ नई तकनीकों और उपकरणों के कारण भोजन संरक्षण के तरीके और भी अधिक उन्नत हुए हैं, लेकिन इन पुराने तरीकों ने समुद्री इतिहास में अमूल्य योगदान दिया है।

How Ulloor Krishi Bhavan in Thiruvananthapuram is handholding small scale farmers
लाइफस्टाइल

उल्लूर कृषिभवन: तिरुवनंतपुरम में छोटे किसानों के लिए सहारा, आधुनिक खेती से जोड़ रहा नया भविष्य

तिरुवनंतपुरम, भारत। तिरुवनंतपुरम में स्थित उल्लूर कृषिभवन ने छोटे पैमाने के किसानों को सहायता प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृषिभवन ने “उल्लूर ग्रीन्स” नामक ब्रांड के तहत कृषि उत्पादों और मूल्य संवर्धित उत्पादों को बाज़ार में लेकर किसानों की आमदनी बढ़ाने का काम किया है। उल्लूर कृषिभवन ने न केवल उत्पादों के लिए एक खुदरा आउटलेट स्थापित किया है, बल्कि ऑनलाइन बिक्री की भी सुविधा उपलब्ध करवाई है। इससे किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर मिला है और उनकी उत्पादों की पहुंच व्यापक हुई है। यह पहल स्थानीय कृषि समुदाय के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग खोल रही है। कृषिभवन के अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे किसानों को न केवल तकनीकी सहायता प्रदान करना है, बल्कि उनकी पैदावार की गुणवत्ता और विपणन के लिए भी समुचित मार्गदर्शन देना है। “उल्लूर ग्रीन्स” ब्रांड के तहत उत्पादित फलों और सब्जियों के अलावा मूल्य संवर्धित खाद्य पदार्थ भी उपलब्ध हैं, जो उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कृषिभवन ने किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों, जैविक उत्पादन और फसल विविधीकरण के लिए प्रशिक्षण भी दिया है। इस पहल से किसानों को बेहतर उत्पादकता और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली है। क्षेत्रीय कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक होगी और ग्रामीण विकास को गति प्रदान करेगी। उपभोक्ताओं को भी ताजे और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद सीधे किसानों से मिल रहे हैं, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए लाभकारी है। समाप्त करते हुए, उल्लूर कृषिभवन की यह पहल न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह तिरुवनंतपुरम की कृषि अर्थव्यवस्था को स्थायी विकास की ओर ले जाने वाला कदम भी साबित हो रही है। भविष्य में इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी अपनाने की योजना बनाई जा रही है ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।

Almost 60% of India’s elephants are in Karnataka, Assam, T.N.
राज्य-शहर

भारत के 60% हाथी सिर्फ 3 राज्यों में! जानिए क्यों खास हैं कर्नाटक, असम और तमिलनाडु

नई दिल्ली: वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने देशभर में हाथियों की पहली बार डीएनए आधारित समकालिक गणना जारी की है। इस अध्ययन में सामने आया है कि भारत के लगभग 60 प्रतिशत हाथी तीन राज्यों – कर्नाटक, असम और तमिलनाडु – में पाए जाते हैं। यह रिपोर्ट हाथी संरक्षण और उनकी आवासीय स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाथी भारत का राष्ट्रीय धरोहर प्राणी है और वन्यजीवन में इसकी अहमियत न केवल पारिस्थितिक तंत्र के लिए, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश में हाथियों की संख्या और उनकी आबादी पर नजर रखना इनके संरक्षण के लिए आवश्यक होता है। इस उद्देश्य से वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने नवीनतम तकनीकों का प्रयोग करते हुए डीएनए आधारित पुनरावृत्ति परीक्षण के माध्यम से देशभर में हाथियों की संख्या का सटीक आकलन किया है। इस अध्ययन के अनुसार, कुल हाथी आबादी में कर्नाटक का हिस्सा सबसे बड़ा है, जिसके बाद असम और तमिलनाडु का स्थान आता है। कर्नाटक में विशाल वनों की उपलब्धता और संरक्षित क्षेत्रों की संख्या अधिक होने से हाथियों की संख्या यहाँ सर्वाधिक देखी गई है। असम, जो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, भी हाथी संरक्षण के लिए जाना जाता है, जबकि तमिलनाडु के जंगलों में भी हाथियों की अच्छी-खासी आबादी मौजूद है। विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में हाथियों की संख्यात्मक समीक्षा का यह पहला बड़ा प्रयास है जो डीएनए आधारित तकनीक पर आधारित है। इससे पारंपरिक सर्वेक्षणों की तुलना में अधिक विश्वसनीय और सटीक आंकड़े प्राप्त हुए हैं। इससे वन विभाग को संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी जिससे हाथियों के संघर्ष को कम किया जा सकेगा और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, “हाथियों की सही संख्या का आंकलन उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। हमारा लक्ष्य हाथियों और मनुष्यों के बीच संतुलन बनाए रखना और इनके आवासों का संरक्षण करना है।” उन्होंने यह भी बताया कि आगे भी इसके जैसे आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वन्यजीवन की गहन निगरानी जारी रखी जाएगी। इस रिपोर्ट ने जहां हाथी संरक्षण में एक नया अध्याय जोड़ा है, वहीं यह नीति निर्माताओं के लिए भी दिशा-निर्देश प्रदान करती है कि किस प्रकार से वन्यजीव संरक्षण योजनाओं में सुधार किया जाए। कर्नाटक, असम और तमिलनाडु सरकारों को विशेष रूप से अपने-अपने राज्यों में हाथियों के आवासों को सुरक्षित करने और मानव-हाथी टकराव को कम करने के लिए तत्पर रहना होगा। देश में हाथी आबादी बढ़ाने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करना आवश्यक है ताकि जैव विविधता बनी रहे और हाथी संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें। यह अध्ययन वन्यजीव संरक्षण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व को दर्शाता है और कहा जा सकता है कि भविष्य में ऐसे आधुनिक अध्ययन और भी ज्यादा प्रभावी साबित होंगे।

In Focus Podcast | Has gold lost its safe haven status?
विशेषज्ञों की राय

In Focus Podcast: | क्या बाजार की उथल-पुथल के बीच सोने ने अपना ‘सेफ हेवन’ स्टेटस खो दिया ?

बढ़ती अस्थिरता, ऊंची ब्याज दरें और वैश्विक संघर्षों के बीच सोने की पारंपरिक “सेफ हेवन” भूमिका पर सवाल विश्व भर में जारी वैश्विक तनाव के बीच सोने की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है। इस नए आर्थिक परिदृश्य में निवेशकों की निगाहें इस बहुमूल्य धातु की स्थिरता पर टिक गई हैं। इस एपीसोड में, कवित चौक और बी. भगवान दास से चर्चा के माध्यम से हम जानेंगे कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और इससे निवेशकों तथा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। पिछले कुछ महीनों में सोने ने पारंपरिक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अपनी विश्वसनीयता साबित की है। लेकिन, हाल की वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाओं ने सोने के मूल्य को प्रभावित किया है। वैश्विक मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में बदलाव, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में विविधता लानी शुरू कर दी है। कविता चौक ने कहा, “अक्सर आर्थिक संकट या geopolitical तनाव के दौरान निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं क्योंकि यह एक सुरक्षित आश्रय माना जाता है। लेकिन इस बार, बाजार में अल्पकालिक और दीर्घकालिक कारकों के मिश्रण के कारण, सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।” वहीं, बी. भगवान दास ने बताया कि वैश्विक आर्थिक नीतियों में तेजी से बदलाव और कुछ देशों की मुद्रास्फीति नियंत्रण की रणनीतियों का भी सोने की मांग और आपूर्ति पर असर पड़ा है। विश्लेषकों के अनुसार, हालिया गिरावट का एक कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि का संकेत भी है। उच्च ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसे गैर ब्याज आधारित संपत्ति के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं। इसके अलावा, डॉलर की ताकत में बढ़ोतरी भी सोने की कीमतों को दबाव में रखती है क्योंकि सोने की कीमतें अमेरिकी डॉलर में निर्धारित होती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इस गिरावट को लंबे समय तक नहीं माना जाना चाहिए। आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्यों में तेजी से बदलाव होने के कारण सोने की मांग पुनः बढ़ सकती है। निवेशकों को सावधानी बरतते हुए बाजार की गतिशीलता और फंडामेंटल संकेतों पर ध्यान देना आवश्यक होगा। इस एपीसोड में, कवित और भगवान दास ने गहराई से इन विषयों पर चर्चा की और बताया कि निवेशक वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में कैसे अपने निवेश विकल्पों का मूल्यांकन करें। सोने की आज की स्थिति को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण संवाद है जो निवेशकों एवं आम जनता दोनों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

Trending, राज्य-शहर

सरजावाव चौराहा बना ‘खतरे का कॉरिडोर’

रासूखात की हूल या प्रशासन की चुप्पी? सिरोही। शहर के मुख्य दरवाजे से जुड़ी सडक़ों की हालत आज सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर प्रशासन विकास और सुचारू यातायात के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। सरजावाव चौराहे से राजमाता धर्मशाला रोड तक का हिस्सा इन दिनों बदहाली, अतिक्रमण और अव्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। हालांकि हाथ लारी की कोई परेशानी नहीं है। वे अपना सामान बेच चलता बनते है। दुखद पहलू तो यह है कि यहां स्थायी दुकानदार अतिक्रमण की पहल में शुमार है। यह सडक़ न केवल शहर के मुख्य प्रवेश मार्ग से जुड़ी है, बल्कि रोडवेज डिपो जाने वाले यात्रियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। बावजूद इसके, यहां की स्थिति ऐसी है कि हर गुजरने वाला व्यक्ति खुद को जोखिम में महसूस करता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में अतिक्रमण करने वालों का हौसला इतना बढ़ गया है कि यदि कोई उन्हें टोकने की कोशिश करता है तो वे राजनीतिक रासूख का हवाला देने लगते है। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक ढील और राजनीतिक संरक्षण अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं। सरजावाव चौराहा, अतिक्रमण और गड्ढे का ‘डेंजर जोन’ सरजावाव चौराहा, जो शहर का एक प्रमुख आवाजाही का जंक्शन है, इन दिनों दुर्घटनाओं का केंद्र बन गया है। राजमाता धर्मशाला रोड के मुहाने पर स्थित एक मिष्ठान भंडार ने अपनी दुकान के बाहर लगभग 10 से 15 फीट तक सडक़ पर कब्जा कर रखा है। इतना ही नहीं, सडक़ के बीचों-बीच नाली पर बना गड्ढा स्थिति को और खतरनाक बना देता है। इस कारण से पूरी सडक़ सिकुडक़र मात्र 5 से 7 फीट रह गई है। हालात यह है कि दोपहिया वाहन चालक रोजाना गिरते-पड़ते है। चार पहिया वाहनों का निकलना तो कोई जंग से कम नहीं। अतिक्रमण के कारण सडक़ पर टेबल-कुर्सियां, दुकान का सामान और ग्राहकों के वाहन बेतरतीब खड़े रहते हैं। इससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। कई बार तो स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि एम्बुलेंस या इमरजेंसी वाहन भी फंस सकते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि एक संभावित बड़ा खतरा है जो कभी भी गंभीर हादसे का रूप ले सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सडक़ से रोजाना प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं। नगर परिषद भी महज कुछ फर्लांग की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सडक़ एक ‘डेंजर जोन’ की तरह है। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जहां तक नियमों की बात करें तो सार्वजनिक सडक़ों पर अतिक्रमण पूरी तरह प्रतिबंधित है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना और हटाने की कार्रवाई अनिवार्य है। इसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह प्रशासनिक विफलता मानी जा सकती है। शहरवासियों का साफ कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह बिना किसी दबाव के अतिक्रमण हटाने की मुहिम चलाए और इस सडक़ को सुरक्षित बनाए।

Shopping Cart
Scroll to Top