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April 2026

Rezium Coin: जयपुर से जल्द होने जा रहा है क्रिप्टो दुनिया का नया आगाज़
उदयपुर

Rezium Coin: जयपुर से क्रिप्टो दुनिया में नया युग शीघ्र ही शुरू

Rezium Coin: जयपुर से क्रिप्टो दुनिया में नया युग शीघ्र ही शुरू जयपुर, जिसे गुलाबी नगरी के नाम से जाना जाता है, अब तकनीक और वित्तीय नवाचार के क्षेत्र में एक नई क्रांति के लिए तैयार है। जल्द ही यहां से एक नया डिजिटल क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट – Rezium Coin – लॉन्च किया जाएगा, जो निवेशकों और तकनीकि विशेषज्ञों के बीच खासा उत्साह पैदा कर रहा है। Rezium Coin के लॉन्च से जयपुर की आर्थिक विकास यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है। यह क्रिप्टोकरेंसी प्रोजेक्ट खास तौर पर दक्ष टीम द्वारा विकसित किया गया है, जो ब्लॉकचेन तकनीक के नवीनतम मानकों पर आधारित है। इसके माध्यम से डिजिटल लेनदेन और वित्तीय लेनदेन को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और त्वरित बनाने की योजना है। आर्थिक विशेषज्ञों की मानें तो Rezium Coin के आने से न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी क्रिप्टोकरेंसी के प्रति विश्वास बढ़ेगा। खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए इस नई मुद्रा से लेनदेन की प्रक्रियाएं आसान और किफायती बनेंगी। इस परियोजना से जुड़ी टीम ने बताया कि Rezium Coin में निवेश करने वाले उपयोगकर्ताओं को कई तरह के लाभ मिलेंगे, जैसे कि तेज़ ट्रांजेक्शन स्पीड, कम शुल्क, और अत्याधुनिक सुरक्षा विशेषताएं। इसके अलावा, इसे उपयोग करना बेहद सरल होगा जिससे तकनीकी ज्ञान न रखने वाले भी इसे आसानी से समझ और उपयोग कर सकेंगे। जयपुर के टैक्र्नोलॉजी थिंक टैंकों और वित्त विशेषज्ञों ने इस नए क्रिप्टो प्रोजेक्ट की सराहना की है और माना है कि यह निवेश के नए अवसर प्रदान करेगा। इसके साथ ही, यह परियोजना स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार के नए रास्ते खोलेगी, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। आने वाले महीनों में Rezium Coin का विस्तृत परिचय और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है, जिससे निवेशकों और आम जनता को इस डिजिटल मुद्रा की पूरी समझ हो सके। ये पहल राजस्थान और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित होगी। संक्षेप में, Rezium Coin का जयपुर से लॉन्च होना क्रिप्टो एवं डिजिटल मुद्रा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास है, जो तकनीक और वित्त के संगम से नई संभावनाओं को जन्म देगा। यह न केवल निवेश के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि डिजिटल वित्तीय समावेशन को भी प्रोत्साहित करेगा।

विवाहिता की संदिग्ध मौत, पीहर पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप
जैसलमेर

विवाहिता की मौत संदिग्ध, पीहर पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया

विवाहिता की मौत संदिग्ध, पीहर पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया जैसलमेर जिले के चूंधी गांव से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां 23 वर्षीय विवाहिता समिता की संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र में सनसनी मचा दी है। जानकारी के अनुसार, समिता ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या की है, लेकिन उसके परिवार ने इस बात पर संदेह जताया है और ससुराल पक्ष पर उसकी हत्या का आरोप लगाया है। समिता जो कि ओमाराम की पुत्री थी, की शादी वर्ष 2018 में चूंधी गांव के तरुण राम से हुई थी। मृतका के दो छोटे बच्चे भी हैं। घटना के बाद समिता का शव जिला अस्पताल जवाहर चिकित्सालय की मोर्चरी में रखा गया है, जहां शुक्रवार के दिन काफी संख्या में पीहर पक्ष के लोग और अन्य ग्रामीण इकट्ठा हुए। पिहऱ पक्ष ने आरोप लगाया है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि एक योजनाबद्ध हत्या है। उनका कहना है कि समिता के शरीर पर चोट के कई निशान थे, उसका चेहरा सूजा हुआ था और हाथों पर घाव साफ नजर आ रहे थे। पीहर पक्ष ने प्रशासन से इस मामले की जांच तत्काल करने की मांग की है ताकि सच का पता लगाया जा सके और दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जा सके। स्थानीय पुलिस ने फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी है, और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। जांच अधिकारी ने बताया कि मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से मामले में संयम रखने और जांच के परिणाम का इंतजार करने की अपील की है। यह मामला जिले में महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा के मुद्दे को फिर से प्रमुखता से उजागर करता है। क्षेत्रवासियों ने महिला सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है। समिता की संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र में गहरी संवेदना और चिंता पैदा कर दी है।

Lisa Kudrow calls Alan Cumming 'such a force'
मनोरंजन

लीसा कुड्रो ने एलन कमींग को ‘इतनी ताकतवर शख्सियत’ बताया

लीसा कुड्रो ने हाल ही में फिल्म ‘रोमी एंड मिशेल्स हाई स्कूल रीयूनियन’ में अपने सह-कलाकार एलन कमींग की प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘इतनी ताकतवर शख्सियत’ बताया। इस फिल्म ने मनोरंजन की दुनिया में एक अमिट छाप छोड़ी है और एलन की भूमिका को खासतौर पर यादगार माना जाता है। लीसा ने बताया कि एलन कमींग ने फिल्म में अपनी भूमिका के जरिए कौन सा जादू बिखेरा, जो दर्शकों के दिलों को छू गया। उनका कहना है कि एलन की ऊर्जा और अभिनय की गहराई फिल्म को विशेष बनाती है। साथ ही, मशहूर अभिनेत्री मीरा सॉरविनो ने इस फिल्म की ‘टाइमलेस अपील’ पर जोर देते हुए कहा कि यह फिल्म पीढ़ियों के बीच एक पुल का काम करती है। मीरा ने यह भी बताया कि कैसे इस फिल्म की पटकथा और किरदार आज भी पॉप कल्चर में प्रभावशाली बने हुए हैं। यह फिल्म 90 के दशक की हाई स्कूल कॉमेडी शैली की एक बेजोड़ मिसाल मानी जाती है, जो दोस्ती, समझदारी और खुद को स्वीकार करने की कहानी को खूबसूरती से प्रस्तुत करती है। एलन की भूमिका, जो उनकी जानदार अभिनय कौशल से सजती है, इस बात का प्रमाण है कि क्यों इस फिल्म को अब भी प्रिय और यादगार माना जाता है। फैंस और आलोचक दोनों ही फिल्म के प्रति अपने स्नेह और सम्मान का इजहार करते हैं। लीसा कुड्रो का यह बयान न केवल एलन कमींग के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है, बल्कि इस क्लासिक फिल्म की स्थायित्व को भी रेखांकित करता है।

Tamil Nadu missed out on Central government schemes because DMK saw BJP as an enemy, says G.K. Vasan
राजनीति

तमिलनाडु ने केंद्र सरकार की योजनाओं से वंचित रह गया क्योंकि DMK ने BJP को दुश्मन माना: जी.के. वासन

तमिलनाडु में केंद्र सरकार की योजनाओं से वंचित रहने का कारण DMK का भाजपा को दुश्मन मानना है, ऐसा कहना है पूर्व केंद्रीय मंत्री और तामिल मक्कल कांग्रेस (TMC (M)) के अध्यक्ष जी.के. वासन का। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग की कमी के कारण तमिलनाडु की जनता अधूरी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाई है। जी.के. वासन ने आगे कहा कि चुनाव के लिए तमिलनाडु की जनता की सुरक्षा, खासकर महिलाओं की सुरक्षा, सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में विकास तभी संभव है जब केंद्र और राज्य सरकारें एक साथ मिलकर काम करें। उनका यह भी मानना है कि द्वि-इंजन सरकार होनी चाहिए, जिसमें दोनों सरकारें विकास कार्यों में सहयोग करें। उन्होंने आरोप लगाया कि DMK राज्य में वोट बैंक की राजनीति के चलते केंद्र से विकास योजनाओं को रोक रही है, जो कि पूरी तरह से राज्य की प्रगति के विरुद्ध है। वासन ने केंद्र सरकार की योजनाओं और नीतियों को राज्य में लागू कराने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जिससे तमिलनाडु के लोगों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। इसके अलावा, उन्होंने तमिलनाडु की महिलाओं की सुरक्षा को सबसे अहम थाना बताया और कहा कि यह चुनाव केवल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि जनता की भलाई के लिए होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पार्टी जो केंद्र सरकार के साथ तालमेल करके कार्य करे, वह तमिलनाडु के विकास में सहायक होगी। अंत में, जी.के. वासन ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे व्यक्तिगत और राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर जनता की सेवा में सहयोग करें और राज्य के विकास को प्राथमिकता दें। उन्होंने इससे पहले भी कई मौकों पर केंद्र और राज्य सरकारों के बेहतर तालमेल की वकालत की है। उनकी यह बात तमिलनाडु में आगामी चुनावों के माहौल को और भी विस्फोटक बना सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं और राजनीतिक दल जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हुए हैं। तमिलनाडु की जनता के लिए यह चुनाव विकास और सुरक्षा दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अजमेर में बारिश से तबाही: घरों में भरा पानी, लोग बहे; 6 जिलों में स्कूल बंद, 4 दिन में 23 की मौत
अजमेर

अजमेर में भारी बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त: घरों में पानी भरने से लोग बहे; 6 जिलों में स्कूल बंद, 4 दिनों में 23 मौतें

अजमेर में बारिश से तबाही: घरों में भरा पानी, लोग बहे; 6 जिलों में स्कूल बंद, 4 दिन में 23 की मौत अजमेर। पिछले चार दिनों से जारी भारी बारिश ने अजमेर सहित आसपास के छह जिलों में तबाही मचा दी है। शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है और लोगों के घरों में पानी भरने से उनके जीवन अस्त-व्यस्त हो गए हैं। नदी-नाले उफान पर हैं और कई लोग बाढ़ के कारण बह गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने बचाव एवं राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। इस भारी बारिश के कारण प्रभावित जिलों में स्कूल चार दिन के लिए बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन ने लोकल स्तर पर आपात स्थिति घोषित कर रखी है। अस्पतालों में घायल एवं प्रभावित लोगों का इलाज चल रहा है। अभी तक मिली रिपोर्टों के अनुसार 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर बाढ़ के चलते हादसों में घायल होकर जान गंवाने वाले हैं। बारिश ने कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। किसानों की फसलें खराब होने से उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, कई ग्रामीण इलाके जलमग्न हो गए हैं, जिससे वहां के लोगों को भोजन और साफ पानी की आपूर्ति में कठिनाई आ रही है। प्रशासन ने राहत सामग्री भेजकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। स्थानीय लोग प्रशासन से पोल्ट्री, कपड़ों और दवाओं की आपूर्ति तेज करने की मांग कर रहे हैं। मौसम विभाग ने भी आगामी दिनों में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है, इसलिए सतर्कता बरतने की सलाह दी है। प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा न करें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। अजमेर और आसपास के जिलों में इस प्रकार की आपदा पूर्व चेतावनी के बावजूद इतनी व्यापक नहीं थी, हालांकि अब लोगों का ध्यान बचाव कार्यों की ओर केंद्रित हो गया है। राज्य सरकार ने राहत एवं पुनर्वास कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके।

डॉ. पीसी व्यास को फैलोशिप अवार्ड से सम्मानित
जोधपुर

डॉ. पीसी व्यास को फैलोशिप पुरस्कार से सम्मानित

डॉ. पीसी व्यास को फैलोशिप पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो उनके उत्कृष्ट योगदान और समर्पण का मान्यता है। यह पुरस्कार उन्हें उनकी विद्वता और अनुसंधान के क्षेत्र में विशेष सम्मान प्रदान करता है। डॉ. पीसी व्यास को फैलोशिप पुरस्कार से नवाजा गया नई दिल्ली: भारतीय विद्वानों में अपनी खास पहचान बनाने वाले डॉ. पीसी व्यास को हाल ही में एक प्रतिष्ठित फैलोशिप पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उनके विद्वान के रूप में योगदान और अनुसंधान कार्यों की सराहना करता है। डॉ. व्यास ने हिंदी साहित्य में अपनी गहराई वाली समझ और व्यापक शोध के लिए देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण शोध प्रबंध एवं साहित्यिक लेख लिखे हैं, जो हिंदी साहित्य के अध्ययन को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। इस पुरस्कार से पहले भी डॉ. व्यास को अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन यह फैलोशिप उन्हें और उनकी शोध क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर प्रदान करेगा। कार्यक्रम स्थल पर आयोजित सम्मान समारोह में विद्वानों, शिक्षाविदों तथा साहित्यकारों ने डॉ. व्यास को उनके योगदान के लिए बधाई दी। इस अवसर पर डॉ. व्यास ने अपने भाषण में अपने शोध कार्यों और साहित्य के प्रति अपने समर्पण के बारे में बात की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैलोशिप से डॉ. पीसी व्यास को और अधिक व्यापक स्तर पर शोध के अवसर मिलेंगे, जिससे हिंदी साहित्य का अध्ययन और विकास होगा। इस पुरस्कार से हिंदी भाषा और साहित्य को भी काफी लाभ होगा। डॉ. पीसी व्यास के सम्मान समारोह में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने उनके उज्जवल भविष्य और हिंदी साहित्य के प्रति उत्साह को सराहा।

जयपुर

पार्वती जन्मोत्सव एवं काम-दहन प्रसंग से मिला संदेश: नारी सम्मान व ईश्वर साक्षात्कार से समाज का संतुलन

पार्वती जन्मोत्सव और काम-दहन प्रसंग से हमें यह गहरा संदेश मिलता है कि नारी का सम्मान और ईश्वर के साक्षात्कार से ही समाज में संतुलन स्थापित होता है। यह पर्व नारी शक्ति एवं पूजा की महत्ता को उजागर करता है। पार्वती माता का जन्मोत्सव न केवल आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि महिलाओं के सम्मान और उनकी भूमिका को भी समाज में स्थापित करता है। काम-दहन प्रसंग का सन्दर्भ भी समाज में पवित्रता और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का संकेत देता है। इस प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि वासनाओं और अहितकारी इच्छाओं का सामना कर मानव को संयमित और ईश्वर की उपासना की ओर अग्रसर होना चाहिए। नारी की गरिमा और समाज में उनका सम्मान तभी टिकाऊ होगा जब हर व्यक्ति आध्यात्मिक और नैतिक सिद्धांतों को समझे और अपनाए। समाज के संतुलन के लिए नारी का सशक्तिकरण आवश्यक है। पार्वती जैसे देवी स्वरूप नारी शक्ति को दर्शाते हैं, जो परिवार और समाज दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनका जीवन हमें आदर्श प्रस्तुत करता है कि कैसे व्यक्ति को त्याग, भक्ति और समर्पण के द्वारा जीवन को सफल एवं संतुलित बनाना चाहिए। इस प्रकार, पार्वती जन्मोत्सव और काम-दहन प्रसंग न केवल धार्मिक अनुष्ठान हैं, बल्कि ये समाज में नारी सम्मान और आध्यात्मिक जागरूकता का सशक्त माध्यम भी हैं। इनके माध्यम से हम यह सीखते हैं कि समाज में सच्चा संतुलन तब ही संभव है जब हम नारी का उचित सम्मान करें और ईश्वर के साक्षात्कार से आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ें।

पोकरण: हर्षोल्लास के साथ मनाया हनुमान जन्मोत्सव, मंदिरों में चढ़ाया रोटे का प्रसाद
जैसलमेर

पोकरण में हर्षोल्लास के साथ हनुमान जन्मोत्सव का भव्य आयोजन, मंदिरों में चढ़ा रोटे का प्रसाद

पोकरण में हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया पोकरण, 24 अप्रैल: स्वामी भक्ति एवं ब्रह्मचर्य के प्रतीक भगवान हनुमान के जन्मोत्सव को कस्बे में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर स्थानीय हनुमान मंदिरों में सुबह से विशेष पूजा-अर्चना तथा धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान हनुमान को रोटे का प्रसाद अर्पित कर अमन चैन और खुशहाली की प्रार्थना की। हनुमान जन्मोत्सव पर मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया था। भजन-कीर्तन की ध्वनि से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रही और उन्होंने पंडितों के निर्देशन में हनुमान चालीसा एवं अन्य धार्मिक मंत्रों का पाठ किया। इससे स्थानिय जनमानस में धार्मिक आस्था और उत्साह का वातावरण बना रहा। इस बैठक के दौरान पूजा-पाठ के साथ ही सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश भी दिया गया। खासकर इस अवसर पर युवा वर्ग ने भी सक्रिय भागीदारी दिखाई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सांस्कृतिक विरासत एवं धार्मिक परंपराएँ आगामी पीढ़ी में भी जीवित रहेंगी। हनुमान जी को स्वामी भक्ति, पराक्रम और ब्रह्मचर्य का प्रतीक माना जाता है। इनकी जन्मोत्सव पर यह धूमधाम प्रदेश के कई हिस्सों में देखी गई, जिसमें पोकरण का उत्साह विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। स्थानीय प्रशासन ने भी इस पर्व को सुरक्षित और सफल बनाने हेतु आवश्यक इंतजाम किए। कोविड-19 से संबंधित सभी सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए आयोजन सम्पन्न किया गया। श्रद्धालुओं ने मसीह स्वच्छता और सामाजिक दूरी के निर्देशों का पालन किया। इस प्रकार, हनुमान जन्मोत्सव ने पूरे कस्बे में आध्यात्मिक उल्लास और शांति की भावना का संचार किया है, जो आने वाले समय में भी स्थानीय जनजीवन का अभिन्न हिस्सा बनी रहेगी।

Trending, विशेषज्ञों की राय

राजस्थान में मौसमों का महासंगम: सर्दी, गर्मी, बारिश और पतझड़ एक मंच पर

सिरोही। कभी ग्लोबल वार्मिंग की चिंता, कभी जंगलों की कटाई पर बहस, तो कभी धरती के अंधाधुंध दोहन की खबरें। इन सबके बीच अब एक नया चमत्कार देखने को मिल रहा है। लगता है जैसे प्रकृति ने भी लोकतंत्र अपना लिया हो और सभी ऋतुओं को एक साथ भागीदारी दे दी हो। सुबह-सुबह जब नींद खुलती है तो लगता है मानो सर्दी ने फिर से वापसी कर ली हो। लोग कंबल में दुबके रहते हैं, चाय की चुस्की लेते हुए सोचते हैं कि अभी तो अप्रेल है, ये जनवरी वाला एहसास क्यों? लेकिन जैसे ही घड़ी दोपहर की ओर बढ़ती है, वही सर्दी अचानक छुट्टी पर चली जाती है और गर्मी बिना बुलाए मेहमान की तरह आ धमकती है। धूप इतनी तेज कि लगता है सूरज ने भी ओवरटाइम शुरू कर दिया है। दोपहर में पंखा, कूलर और एसी सब एक साथ चालू हो जाते हैं, और लोग सोचते हैं कि अब तो पूरी तरह गर्मी आ गई। लेकिन शाम होते-होते आसमान का मिजाज बदल जाता है। बादल घिर आते हैं, हवा में नमी बढ़ जाती है और कभी-कभी तो बारिश भी ऐसे होती है जैसे सावन का महीना चल रहा हो। अगर किस्मत ज्यादा मेहरबान हो तो ओले भी गिर जाते हैं। मानो मौसम ने सरप्राइज पैकेज दे दिया हो। सडक़ किनारे पेड़ों को देखें तो वे भी कंफ्यूज नजर आते हैं। कहीं हरे-भरे पत्ते, तो कहीं सूखे पत्तों की चादर बिछी हुई जैसे पतझड़ और बसंत ने समझौता कर लिया हो आखिर ये सब हो क्यों रहा है? विशेषज्ञ कहते हैं कि यह ग्लोबल वार्मिंग का असर है। यानी पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है। लेकिन आम आदमी की भाषा में कहें तो प्रकृति अब नाराज है। वर्षों से हो रही जंगलों की कटाई, नदियों का सूखना, पहाड़ों का टूटना और जमीन का अंधाधुंध इस्तेमाल इन सबने मिलकर मौसम को भी अस्थिर कर दिया है। पहले जहां हर ऋतु का अपना एक तय समय होता था। सर्दी सर्दियों में, गर्मी गर्मियों में और बारिश अपने मौसम में। अब वो समय-सारणी भी गड़बड़ा गई है। ऐसा लगता है जैसे मौसम विभाग की फाइलें भी मिश्रित हो गई हों और किसी को समझ नहीं आ रहा कि कौनसी ऋतु कब आएगी। इस बदलाव का असर सिर्फ लोगों की दिनचर्या पर ही नहीं, बल्कि खेती-किसानों पर भी पड़ रहा है। किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। वे तय नहीं कर पा रहे कि कब बोवाई करें और कब कटाई। बारिश समय पर नहीं होती, या फिर इतनी ज्यादा हो जाती है कि फसल खराब हो जाती है। कभी ओले गिर जाते हैं, तो कभी अचानक गर्मी बढ़ जाती है। जिससे फसलें झुलस जाती हैं। इंसान खुद इस स्थिति का जिम्मेदार है और फिर उसी पर चर्चा भी करता है। एक तरफ पेड़ों की कटाई जारी है, दूसरी तरफ पर्यावरण बचाओ के नारे लगाए जा रहे हैं। प्लास्टिक का उपयोग कम करने की बात होती है, लेकिन बाजार में हर चीज प्लास्टिक में ही मिलती है। यानी हम समस्या भी खुद पैदा कर रहे हैं और समाधान भी भाषणों में ढूंढ रहे हैं। सिरोही जैसे छोटे शहरों में भी अब बड़े शहरों जैसी समस्याएं दिखने लगी हैं। पहले यहां का मौसम अपेक्षाकृत संतुलित रहता था, लेकिन अब यहां भी वही मौसमी ड्रामा देखने को मिल रहा है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में शायद हमें मौसम शब्द की परिभाषा ही बदलनी पड़ेगी। प्रकृति हमें बार-बार संकेत दे रही है कि अब भी समय है संभलने का। अगर हमने अब भी ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में हालात और भी बिगड़ सकते हैं। यह सिर्फ तापमान का सवाल नहीं है, बल्कि हमारे अस्तित्व का सवाल है। अगर मौसम ही स्थिर नहीं रहेगा तो जीवन भी अस्थिर हो जाएगा।

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