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March 2026

Others

सोना-चांदी की कीमतों में फिर उछाल

सोना ₹1.41 लाख, चांदी ₹2.24 लाख सोना और चांदी के दामों में आज फिर तेजी देखी गई है। सोने की कीमत ₹1,41,032 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,24,801 प्रति किलो तक पहुंच गई है। सोने में तेजी सोने के दाम में ₹1539 की बढ़ोतरी हुई है। बाजार खुलते ही इसमें तेजी देखने को मिली। चांदी भी मजबूत चांदी में ₹4927 प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह लगातार ₹2 लाख के ऊपर बनी हुई है। बढ़ोतरी के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता निवेशकों की मांग डॉलर की कमजोरी आम ग्राहकों पर असर ऊंचे दामों के कारण ज्वेलरी की मांग थोड़ी कम हुई है, लेकिन निवेश के लिए खरीदारी जारी है। निवेश के लिहाज से क्या करें? विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि के लिए निवेश फायदेमंद हो सकता है। निष्कर्ष सोना और चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है और आगे भी इसमें बढ़ोतरी की संभावना है।

Trump extends deadline for Iran to open Strait of Hormuz to April 6
अंतरराष्ट्रीय

ट्रम्प ने ईरान को हॉर्मुज जलसंधि खोलने की समय सीमा 6 अप्रैल तक बढ़ाई

वाशिंगटन, डी.सी. | 26 मार्च 2024 अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 26 मार्च को एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से घोषणा की कि वे ईरान के खिलाफ ऊर्जा संयंत्रों पर हवाई हमले को फिलहाल टाल देंगे। उन्होंने कहा कि ईरान को हॉर्मुज जलसंधि खोलने के लिए तय की गई समय सीमा 6 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। ट्रम्प ने इस निर्णय को पूर्व की गई कड़ी सैन्य कार्रवाई की बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने के तौर पर प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “हम अभी ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर कोई हमला नहीं करेंगे। हमारा मकसद बातचीत से समस्या का समाधान तलाशना है।” हॉर्मुज जलसंधि, जो कि खाड़ी क्षेत्र में एक प्रमुख सामरिक मार्ग है, औद्योगिक तेल परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तब बढ़ गया था जब ट्रम्प ने ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया और प्रतिबंधों को सख्त किया। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प द्वारा समय सीमा बढ़ाने का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों में कुछ नरमी लाना और क्षेत्रीय स्थिरता कायम रखना हो सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने कई बार ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वे हॉर्मुज जलसंधि में बाधा डालते हैं, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। ईरानी अधिकारियों ने अब तक इस समय सीमा विस्तार पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, वैश्विक तेल बाजार में इस खबर के बाद मामूली स्थिरता देखी गई, क्योंकि हॉर्मुज जलसंधि दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग 20% हिस्सा संभालती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस कदम को स्वागत योग्य बताया है, साथ ही सभी पक्षों से शांति और समझदारी से काम लेने की अपील की है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से क्षेत्र में संभवत: तनाव कम होगा और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभावों को रोका जा सकेगा। ट्रम्प की इस घोषणा ने वैश्विक राजनीति में उठापटक बढ़ा दी है, और सभी की निगाहें अब 6 अप्रैल को होंगी, जब तय समय सीमा समाप्त होगी। तब स्पष्ट होगा कि क्या ईरान हॉर्मुज जलसंधि को खुला रखेगा या क्षेत्र में फिर से टकराव की स्थिति उभर कर आएगी।

राज्य-शहर

यूपी में बिजली की मांग में उछाल: गर्मी और नई तकनीक का असर

बढ़ती खपत ने बढ़ाई चुनौती उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है और यह अब 21,450 मेगावाट तक पहुंच गई है। पिछले कुछ दिनों में मांग में करीब साढ़े तीन हजार मेगावाट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे बिजली विभाग की चुनौती बढ़ गई है। तापमान में वृद्धि का प्रभाव गर्मी के मौसम के साथ बिजली की खपत बढ़ना सामान्य बात है। हालांकि अभी अत्यधिक गर्मी नहीं पड़ी है, लेकिन तापमान में लगातार वृद्धि के कारण बिजली की मांग में तेजी आई है। आने वाले समय में एसी और कूलर के उपयोग से यह मांग और बढ़ सकती है। इंडक्शन चूल्हों का बढ़ता चलन गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमत और उपलब्धता की समस्या के कारण लोग तेजी से इंडक्शन चूल्हों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे बिजली की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है और यह मांग बढ़ने का एक प्रमुख कारण बन रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों का योगदान राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इन वाहनों की चार्जिंग के लिए बिजली की आवश्यकता होती है, जिससे कुल खपत पर असर पड़ रहा है। यह ट्रेंड आने वाले समय में और तेजी से बढ़ सकता है। मौसम में बदलाव से उतार-चढ़ाव हाल ही में हुई बारिश के कारण बिजली की मांग में अस्थायी गिरावट आई थी और यह 18,031 मेगावाट तक पहुंच गई थी। लेकिन मौसम साफ होने और तापमान बढ़ने के साथ मांग फिर तेजी से बढ़ने लगी। जून में रिकॉर्ड मांग की संभावना पावर कॉरपोरेशन के अनुसार इस साल जून में बिजली की मांग 34,000 मेगावाट से अधिक पहुंच सकती है। पिछले वर्ष जून में यह आंकड़ा 31,309 मेगावाट था, जिससे इस बार नए रिकॉर्ड बनने की संभावना है। विशेषज्ञों की चिंता उपभोक्ता परिषद के विशेषज्ञों का मानना है कि इंडक्शन उपकरण और ईवी चार्जिंग का बिजली मांग पर बड़ा असर है। उन्होंने इन कारणों का अलग से अध्ययन करने की मांग की है, ताकि भविष्य की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सके। विभाग की तैयारी और आश्वासन पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा है कि वर्तमान में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त है और प्रदेशवासियों को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य की मांग को देखते हुए तैयारी कर ली गई है। निष्कर्ष: भविष्य के लिए सतर्कता जरूरी उत्तर प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग आने वाले समय की बड़ी चुनौती का संकेत है। गर्मी, इंडक्शन उपकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग इस मांग को और बढ़ा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते ठोस योजना बनाई जाए, ताकि भीषण गर्मी के दौरान लोगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े।

Trump threatens Iran to make a deal or the U.S. will “keep blowing them away”
अंतरराष्ट्रीय

ट्रम्प ने ईरान को किया धमकी: सौदा करो नहीं तो अमेरिका उन्हें नष्ट करता रहेगा

डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को एक सख्त चेतावनी दी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होता है तो अमेरिका “उन्हें बार-बार नष्ट करता रहेगा”। यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति के बीच आया है, जो और अधिक संघर्ष की आशंका को जन्म दे रहा है। ट्रम्प की यह कड़ी भाषा पुरानी विवादों और अनसुलझे मुद्दों को लेकर अमेरिका की नीतियों में स्पष्टता दिखाती है। उन्होंने ईरान पर दबाव बढ़ाने की बात कही है ताकि कोई समाधान निकाला जा सके, लेकिन अगर वार्ता विफल रही तो उनके मुताबिक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की कड़ी बयानबाजी क्षेत्र में शांति के लिए खतरा साबित हो सकती है और इससे तनाव और बढ़ सकता है। इसके चलते कई देशों ने भी शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थता की भूमिका निभाने की मांग उठाई है। हालांकि अमेरिका का रुख सख्त है, लेकिन वैश्विक समुदाय उम्मीद करता है कि किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचा जाए और वार्ता के जरिए विवादों का समाधान निकाला जाए, जिससे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। इस बीच पश्चिम एशिया में सभी पक्षों को संयम बरतने और संवाद के माध्यम से समस्या सुलझाने की अपील की जा रही है ताकि कोई भी अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

Iran-Israel war: A day‑by‑day rundown of the escalating crisis
अंतरराष्ट्रीय

ईरान-इज़राइल युद्ध: बढ़ती संकट की दैनिक समीक्षा

तेहरान, ईरान | 27 अप्रैल 2024 पश्चिम एशिया में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है क्योंकि एक संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली हमले ने ईरान की सुप्रीम लीडर आयतोल्ला अली खामेनी की हत्या कर दी है। इस घटना के बाद से ईरान और उसके सहयोगी इज़राइल, गल्फ़ और अमेरिकी ठिकानों पर तेजी से प्रतिक्रिया दर्ज करा रहे हैं, जिससे क्षेत्र एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार, अमेरिकी और इज़राइली सेनाओं ने मिलकर ईरान में उच्च प्राथमिकता वाले ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप खामेनी की मौत हुई। इस हमले का मकसद ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमज़ोर करना था, लेकिन इसने क्षेत्रीय तनाव को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है। ईरान ने पलटवार करते हुए इज़राइल और अमेरिका के प्रमुख सैन्य अड्डों पर बमबारी की है, और साथ ही अपने सहयोगी समूहों को भी सक्रिय कर दिया है। हेज़बोल्लाह और हमास जैसे समूहों ने भी इज़राइल पर हमलों को तेज कर दिया है, जिससे क्षेत्र में सैन्य संघर्ष बढ़ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह युद्ध पश्चिम एशिया के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे केवल ईरान और इज़राइल ही नहीं, बल्कि सारी क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियाँ प्रभावित होंगी। संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देश इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। सैन्य विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि स्थिति इसी तरह बनी रही, तो यह संघर्ष बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे अल्पशंका में सामान्य नागरिक भी भारी नुकसान झेल सकते हैं। हालांकि, दोनों पक्षों से कुछ कूटनीतिक सहमति की उम्मीद अभी भी जगी हुई है। इस युद्ध की बढ़ती घटनाओं से जुड़ी खबरों के लिए हमारी वेबसाइट पर लगातार अपडेट्स उपलब्ध होंगे। पाठकों से अनुरोध है कि वे विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी लें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

Pakistan says 'U.S.-Iran indirect talks are taking place'
अंतरराष्ट्रीय

पाकिस्तान ने कहा: यूएस-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही हैं

इस्लामाबाद, पाकिस्तान | 27 जून 2024 पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक दर ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने ईरान को 15 बिंदुओं की एक सूची साझा की है, जिन पर ईरान गंभीरता से विचार कर रहा है। यह पहल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इशाक दर ने कहा कि इस प्रक्रिया में सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि तुर्की और मिस्र जैसे भाईचारे के देशों ने भी समर्थन प्रदान किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय साझेदारी और संवाद के माध्यम से तनाव को कम करना ही प्राथमिकता है। विदेश मंत्री ने बताया कि यह वार्ता सीधे तौर पर तो नहीं हो रही, लेकिन मध्यस्थता और संवाद के ज़रिए दोनों पक्ष आपसी समझ विकसित कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन प्रयासों से क्षेत्रीय सुरक्षा बेहतर होगी और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार आएगा। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का यह दौर दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावों को कम करने की दिशा में एक अहम पहल है। इससे परमाणु मुद्दों और क्षेत्रीय इरादों पर सहमति बनने की संभावना बढ़ सकती है। पाकिस्तान सरकार ने इस दौरान क्षेत्रीय देशों की भूमिका को भी सराहा है, जिनकी सक्रिय भागीदारी से संवाद और समन्वय में मजबूती आई है। विदेश मंत्री का यह बयान वैश्विक समुदाय के लिए एक संदेश भी है कि दक्षिण एशिया और पूर्वी मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए डिप्लोमेसी आवश्यक है। यह पहल तनावपूर्ण रिश्तों को सुधारने और भविष्य में संभावित संघर्षों को टालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में शांति और विकास के अवसर बढ़ेंगे।

U.S. appeals court sides with Trump administration on detaining immigrants without bond
अंतरराष्ट्रीय

अमेरिकी अपीलीय न्यायालय ने आप्रवासियों को बिना जमानत के हिरासत में रखने में ट्रंप प्रशासन का समर्थन किया

वॉशिंगटन, डी.सी. | 27 अप्रैल 2024 अमेरिका की एक अपीलीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस फैसले का समर्थन किया है, जिसमें आप्रवासी बिना जमानत के हिरासत में रखे जा सकते हैं। इस निर्णय ने ऐतिहासिक रूप से अपनाई गई जमानत नीति पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जिसमें निर्दोष और गैर-उड़ान जोखिम वाले आप्रवासियों को अक्सर जमानत दी जाती थी। परंपरागत रूप से, जिन आव्रजकों के ऊपर कोई आपराधिक आरोप नहीं होते, और जो भागने का खतरा नहीं दिखाते, उन्हें जमानत पर रिहा किया जाता था। इसके अतिरिक्त, जबरन हिरासत केवल हाल ही में सीमापार करने वाले आप्रवासियों तक सीमित था। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस नियम में परिवर्तन कर दिया, जिससे आप्रवासियों को हिरासत में रखने की अवधि बिना जमानत के बढ़ाने का अधिकार मिला। न्यायालय के फैसले ने इस बदलाव को वैध ठहराया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि संघीय सरकार के पास अधिक अधिकार हैं ताकि वे सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के लिए परिवर्तित परिस्थितियों के अनुरूप कदम उठा सकें। समर्थकों का कहना है कि यह निर्णय सीमाओं की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करेगा, जबकि विपक्षी इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखते हैं और मानते हैं कि इससे आप्रवासियों की स्वतंत्रता में अनावश्यक बाधाएं आएंगी। इस फैसले के साथ ही ट्रंप प्रशासन के उस नीति को भी बल मिला है, जिसमें आप्रवासियों को हिरासत में रखने के लिए न्यायिक जमानत पर निर्भरता को कम किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय आप्रवासन से जुड़े कानूनी विवादों में नई मिसाल कायम कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप, कई आप्रवासी अधिकार समूह और नागरिक संगठनों ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने न्यायालय से अपील करने और इस नीति की समीक्षा करने का आग्रह किया है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि व्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान हो। यह मामला अमेरिकी आप्रवासन नीति और न्यायिक हस्तक्षेप के बीच संतुलन की चुनौतियों को दर्शाता है, जो आगामी दिनों में और भी अधिक चर्चा का विषय बना रहेगा।

Trump suggests that Iran let ten oil tankers through Strait of Hormuz
अंतरराष्ट्रीय

ट्रम्प का सुझाव: ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से दस तेल टैंकर गुजरने देने चाहिए

वॉशिंगटन, डीसी | 27 अप्रैल 2024 पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में व्हाइट हाउस के एक कैबिनेट बैठक में कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से दस तेल टैंकरों को गुजरने देने की अनुमति देनी चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के माध्यम से क्षेत्रीय तनाव को कम करने और तेल की आपूर्ति के स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। ट्रम्प ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हमें ईरान के साथ समझौता करना चाहिए ताकि तेल टैंकर बिना किसी बाधा के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकें। इससे न केवल तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी, बल्कि क्षेत्र में शांति भी कायम होगी।” होर्मुज जलडमरूमध्य एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके माध्यम से विश्व भर के तेल का बड़ा हिस्सा परिवाहित होता है। इस क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है, जिसने क्षेत्र की सुरक्षा पर असर डाला है। हाल के वर्षों में, ईरानी नौसेना और अमेरिकी सेना के बीच कई छोटे-मोटे संघर्ष देखने को मिले हैं, और कई बार ईरान ने इस जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर नियंत्रण बढ़ाने के प्रयास भी किए हैं। ऐसे में ट्रम्प का यह सुझाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की इस अपील का उद्देश्य न केवल राजनयिक संबंधों में सुधार करना है बल्कि अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करना है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने या अवरुद्ध होने की स्थिति में वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता आ सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ट्रम्प की इस पहल पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक कदम माना है जो क्षेत्रीय विवादों को कम कर सकता है, जबकि अन्य ने इसे अनुमति देने वाली रणनीति के रूप में देखा है जो ईरान को अधिक शक्ति प्रदान कर सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में सुधार लाने के प्रयास लंबे समय से जारी हैं, लेकिन कई द्विपक्षीय मतभेद और प्रतिबंध अभी भी बरकरार हैं। ट्रम्प के इस बयान से वर्तमान प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है कि वह ईरान के साथ बातचीत के नए रास्ते तलाशे। यह कदम वैश्विक तेल व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकर विश्व स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। इस क्षेत्र में कोई भी व्यवधान तेल की कीमतों में उछाल ला सकता है और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर सकता है। अंत में, ट्रम्प का यह सुझाव ऊर्जा बाजारों और क्षेत्रीय मामलों में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, बशर्ते इसे दोनों पक्षों द्वारा समझदारी और सहयोग के साथ अपनाया जाए।

Ballots without a country: a quiet case for pluralism in Myanmar
अंतरराष्ट्रीय

देशहीन मतपत्र: म्यांमार में बहुलवाद के पक्ष में एक निंद्रा भरा मामला

नयी दिल्ली, भारत | 27 जून 2024 म्यांमार में हाल ही में हुए चुनाव एक जटिल और सांस्कृतिक रूप से विभाजित देश की राजनीतिक वास्तविकताओं को नजरअंदाज करते हुए सम्पन्न हुए। इस चुनाव प्रक्रिया में न केवल प्रमुख विपक्षी दलों को बाहर रखा गया, बल्कि देश के कई हिस्सों में आम जनता की सक्रिय भागीदारी भी नगण्य रही। म्यांमार, जहां भौगोलिक विविधता और सत्ता संघर्ष गहरे हैं, वहां चुनावों का स्वरूप अक्सर जमीन पर व्याप्त वास्तविकताओं से अमूर्त लगने लगता है। इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला, जिसने देश में लोकतंत्र की स्थिरता और बहुलवाद की जरूरत पर एक बड़ा सवाल चिन्ह लगा दिया है। चुनाव आयोग द्वारा लागू नियमों और प्रशासनिक दखल ने कई महत्वपूर्ण विपक्षी समूहों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया। इसके परिणामस्वरूप चुनाव परिणामों की वैधता और जनप्रतिनिधित्व पर व्यापक आशंकाएं उत्पन्न हुईं। राजनीतिक असंतोष और सत्ता संघर्ष ने देश को गहरे विभाजन की ओर धकेला है, जिससे बहुलवाद और संघीय सहिष्णुता की कमी लोकतांत्रिक संक्रमण को प्रभावित करती नजर आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार में स्थायी और समावेशी लोकतंत्र की स्थापना के लिए केवल चुनाव ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए आवश्यक है कि सभी पक्षों के बीच संवाद और सहमति बनी रहे तथा राजनीतिक बहुलवाद को प्रोत्साहित किया जाए। जब तक यह संभव नहीं होता, तब तक देश में स्थायी शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीज नहीं पड़ सकते। इस संदर्भ में, म्यांमार की वास्तविकताओं को समझते हुए चुनावी व्यवस्था में सुधार और व्यापक राजनीतिक सहभागिता सुनिश्चित करना अतिआवश्यक है। केवल तभी म्यांमार लोकतांत्रिक बदलाव की ओर बढ़ सकता है और सभी समुदायों के हितों की रक्षा कर सकता है।

India, other friendly countries granted passage through Hormuz: Iran
अंतरराष्ट्रीय

ईरान ने भारत तथा अन्य मित्र देशों को होर्मुज जलसन्धि पारगमन की अनुमति दी

तेहरान, ईरान | 27 अप्रैल 2024 ईरान के विदेश मंत्री ने हाल ही में घोषणा की है कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाज अब होर्मुज जलसन्धि से सुरक्षित होकर गुजर सकेंगे। इस निर्णय से क्षेत्रीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा को काफी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस अवसर पर भारत और श्रीलंका को उनके महत्वपूर्ण सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया। ईरान के विदेश मंत्री ने बताया कि होर्मुज जलसन्धि पर ईरान की संप्रभुता पूरी तरह स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा, “यह जलसन्धि न केवल ईरान के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके माध्यम से तेल और अन्य वस्तुओं का महत्वपूर्ण व्यापार होता है।” जलसन्धि में पारगमन की आज्ञा प्रदान कर ईरान ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि वह क्षेत्रीय शांति और सहयोग को प्राथमिकता देता है। विदेश मंत्री ने कहा कि यह कदम क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास बढ़ाने एवं समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था। इस मौके पर विदेश मंत्री ने विशेष रूप से भारत और श्रीलंका का धन्यवाद किया, जिनके सहयोग से ईरान को इस क्षेत्र में पर्याप्त सहयोग और समर्थन मिला है। उन्होंने कहा, “भारत और श्रीलंका के योगदान के बिना इस प्रक्रिया को इतनी सफलता से पूरा करना संभव नहीं था।” विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलसन्धि से पारगमन की अनुमति मिलने से भारत सहित अन्य मित्र देशों को रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से लाभ होगा। यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देगा और समुद्र मार्ग के सुरक्षा मानकों को बढ़ाएगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस घोषणा का स्वागत किया है और कहा है कि भारत ईरान के इस कदम को सकारात्मक मानता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत हमेशा ही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए काम करता रहेगा। होर्मुज जलसन्धि विश्व के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल का लगभग एक तिहाई भाग गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग के सुरक्षा और पारगमन की अनुमति का बढ़ना वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस पहल से ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे, जो क्षेत्रीय विवादों को कम कर भविष्य में बेहतर साझेदारी का उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है। आगे देखते हुए यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि इस निर्णय से भारत को मध्यपूर्व में अपने आर्थिक और सामरिक हितों को और मजबूत करने में मदद मिलेगी, विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में। अंत में, यह कदम एक सकारात्मक संकेत है कि कैसे क्षेत्रीय सहयोग से जटिल समुद्री एवं भू-राजनीतिक चुनौतियों का समाधान संभव है।

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