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खड़गे बोले- महिला आरक्षण संशोधन जल्दबाजी में लाया जा रहा: सरकार आचार संहिता का उल्लंघन कर रही; लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 816 होंगी

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को सरकार द्वारा लाए जा रहे महिला आरक्षण संशोधन बिल और लोकसभा सीटों में वृद्धि के प्रस्ताव पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। खड़गे ने कहा कि सरकार यह बिल जल्दबाजी में लेकर आ रही है और चुनाव के मद्देनजर इसे पास करवाना चाहती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा चुनावी आचार संहिता के दौरान संसद सत्र बुलाना नियमों का उल्लंघन है।

दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के दौरान खड़गे ने प्रमुख रूप से बताया कि फिलहाल सरकार की ओर से उन्हें कोई औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जानकारी केवल प्रधानमंत्री के एक पत्र के माध्यम से सामने आई है। लंबे समय से मौन बनाए रखने के बाद अब अचानक इस संशोधन बिल को लेकर सक्रियता दिखाई जा रही है।

सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें संविधान संशोधन बिल प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रस्ताव के अंतर्गत महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है जबकि लोकसभा और विधानसभा की सीटों को लगभग 50% तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। लोकसभा की वर्तमान सीटें 543 हैं, जिन्हें बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है जिसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होंगी।

बैठक के मुख्य बिंदु

  • सरकार द्वारा महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन कानून में बदलाव के लिए अलग-अलग बिल लाने की योजना।
  • नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना की बजाय 2011 की जनगणना पर आधारित होगा।
  • यह कानून राज्यों की विधानसभाओं एवं केंद्र शासित प्रदेशों जैसे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी में भी लागू होगा।
  • महिला आरक्षण के बाद उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 होने का अनुमान।

राहुल गांधी ने भी इस मसले पर सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित है। CWC की बैठक में महिला आरक्षण के अलावा परिसीमन और पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा हुई।

सरकार ने हाल ही में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को कैबिनेट से मंजूरी दिलाई है। इस अधिनियम के जरिए लोकसभा सीटों में बृद्धि और महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। इस परिवर्तन के बाद महाराष्ट्र में भी लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी, जहां महिला आरक्षण के तहत 24 सीटें अलग से आरक्षित होंगी। बिहार में भी यह संख्या 20 तक पहुंच सकती है, जबकि मध्य प्रदेश में लगभग 15 महिला आरक्षित सीटें प्रस्तावित हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 स्त्रियों के लिए आरक्षित सीटें होने का अनुमान है।

महिला आरक्षण का इतिहास

1931 में पहली बार भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिला आरक्षण का मुद्दा उठा, लेकिन यह प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसे नेताओं ने समान राजनीतिक अधिकारों की मांग की थी। 1971 में महिलाओं की स्थिति पर समिति बनी, जिसके मतभेदों के कारण आरक्षण का समर्थन सीमित रहा।

1974 में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के उद्देश्य से एक रिपोर्ट सौंपी गई, जिसमें पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण की सिफारिश की गई। 1988 की राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना ने ग्राम पंचायत स्तर से संसद तक एक-तिहाई विराम देने की सिफारिश की, जिसने बाद में 73वें और 74वें संविधान संशोधन की नींव रखी।

1993 में 73वीं और 74वीं संविधान संशोधन के तहत पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित कर दी गईं। इसके बाद कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में 50% तक महिला आरक्षण लागू किया है।

केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इस संशोधन को लागू करने के लिए तैयारी में है। यह बिल संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जा सकता है जिससे लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंच जाएगी। सरकार महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक न्याय के मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

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