इस साल मानसून कमजोर रहेगा, अल नीनो का असर:करीब 80 सेमी बारिश का अनुमान, सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है
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इस साल मानसून कमजोर रहेगा, अल नीनो के कारण करीब 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान, सीजन के अंत में कुछ राहत संभव

नई दिल्ली: इस साल मानसून सामान्य से कम रहने की भविष्यवाणी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने की है। IMD के अनुसार, 2024 के मानसून सीजन में देश में करीब 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जो पिछले 50 वर्षों के औसत 87 सेंटीमीटर से कम है। यह पिछले आठ वर्षों में मानसून की पहली बार कमजोर होने की स्थिति है। IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल, डॉ. एम. मोहापात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार बारिश कुल मिलाकर लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसे सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में रखा गया है। खासतौर पर लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्य, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के मध्य इलाके, दक्षिण ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु को छोड़कर पूरे देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल 1 जून के आसपास केरल के तट पर पहुंचेगा और 15 से 20 जून के बीच भोपाल समेत मध्य भारत में दाखिल होगा। लेकिन अल नीनो नामक जलवायु प्रभाव के कारण मानसून में कुछ देरी हो सकती है। जून के महीने में अल नीनो की संभावना बढ़ जाती है, जो समुद्र के तापमान में वृद्धि के कारण मानसून को कमजोर करता है, जिससे वर्षा कम होने का खतरा रहता है। इतिहास को देखें तो 1951 से अब तक 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी है, जिसमें अधिकांश बार देश में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। हालांकि, इस बार सितंबर के आखिर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के सकारात्मक चरण के कारण कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जो सामान्यतः वर्षा बढ़ाने में मदद करता है। अल नीनो और ला नीना दो प्रमुख जलवायु पैटर्न होते हैं। अल नीनो में समुद्र का तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, जिससे सामान्य से अधिक या कम बारिश के क्षेत्र बदलते हैं। वहीं, ला नीना में समुद्र का पानी ठंडा होता है, जिससे अधिक बादल बनते हैं और मानसून अच्छी तरह सक्रिय रहता है। पिछले वर्ष मानसून केरल पहुंचने में 8 दिन पहले था, 24 मई को। सामान्यतः मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है और जून के मध्य तक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पहुंच जाता है। मुंबई तक मानसून लगभग 11 जून तक पहुंच जाता है और पूरे देश में बारिश का यह सिलसिला जुलाई के मध्य तक जारी रहता है। मानसून की वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से सितंबर के बीच शुरू होकर अक्टूबर के मध्य तक पूरी होती है। IMD के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 150 सालों के दौरान मानसून के केरल पहुंचने की तारीखें भिन्न रही हैं। 1918 में यह सबसे जल्दी 11 मई को पहुंचा था, जबकि 1972 में सबसे देर से 18 जून को। इस वर्ष अल नीनो की वजह से मानसून में कुछ देरी और कमजोर पड़ने की संभावना है, लेकिन अक्टूबर तक मौसम में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। आम आदमी के लिए 9 बड़ी बातें इस साल बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। IMD का अनुमान है कि कुल वर्षा 80 सेंटीमीटर के करीब होगी। अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है। लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़कर ज्यादातर इलाकों में कम बारिश होगी। दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचेगा। 15-20 जून तक मध्य भारत में मानसून दस्तक देगा। सितंबर में इंडियन ओशन डाइपोल से बारिश में सुधार संभव है। पिछले साल मानसून 8 दिन पहले आया था। मानसून की वापसी अक्टूबर तक पूरी हो जाती है। यह स्थिति खेती, जल स्रोत और जलभराव के नजरिए से महत्वपूर्ण है। किसानों को मौसम की सूचनाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी ताकि वे आगे की योजनाएं बेहतर तरीके से बना सकें।