Hot News
TIME-100 सूची में सुंदर पिचाई, रणबीर कपूर, विकास खन्ना शामिल:दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट; मोदी, शाहरुख और सचिन भी रह चुके हैं हिस्सा
राजनीति

TIME-100 सूची में सुंदर पिचाई, रणबीर कपूर और विकास खन्ना शामिल: विश्व के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की प्रतिष्ठित लिस्ट; मोदी, शाहरुख और सचिन भी रह चुके हैं हिस्सा

नई दिल्ली। प्रतिष्ठित TIME मैगजीन ने बुधवार को 2026 की TIME100 सूची जारी की, जिसमें दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों को शामिल किया गया है। इस साल की सूची में भारत से सुंदर पिचाई, बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर और मशहूर शेफ विकास खन्ना को सम्मानित किया गया है। यह सूची हर वर्ष मनोरंजन, तकनीक, खेल, वित्त, एक्टिविज्म और अकादमिक क्षेत्रों में卓越 योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रस्तुत करती है। TIME100 की इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर उनके प्रभाव को मान्यता देती है। इस वर्ष सुंदर पिचाई को उनके तकनीकी नवाचार और नेतृत्व के लिए सराहा गया है, वहीं रणबीर कपूर को उनकी फिल्मी और सामाजिक जिम्मेदारी के चलते चुना गया है। खासतौर पर मशहूर शेफ विकास खन्ना ने इस सम्मान को अपने लिए गर्व का क्षण बताया। खन्ना ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “TIME100 2026 की सूची में शामिल होना मेरे लिए अत्यधिक सम्मान की बात है। यह सफलता मेरे परिवार के त्याग, आशीर्वाद और मार्गदर्शन के बिना संभव नहीं थी। खासकर मेरी दादी, मां और बहन के योगदान को मैं कभी नहीं भूल सकता।” इस सूची में इस बार विश्व के अन्य प्रमुख हस्तियों जैसे राल्फ लॉरेन, केट हडसन, ईथन हॉक, मार्क केली और हिलारी नाइट को भी उनके-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए जगह मिली है। यह सूची समकालीन विश्व की विविधता और बहुआयामी प्रतिभाओं का प्रतिनिधित्व करती है। यह उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 2025 में पहली बार 21 साल के इतिहास में कोई भी भारतीय इस सूची में शामिल नहीं था, जो चर्चा का विषय बना था। उस वर्ष बांग्लादेश के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद यूनुस को सूची में जगह मिली थी। भारत के लिए इस बार के चयन ने फिर से यह साबित किया है कि देश के लोग तकनीक, कला और सामाजिक बदलाव में विश्व स्तर पर अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। TIME100 सूची में पहले शाहरुख खान, सचिन तेंदुलकर, नरेंद्र मोदी, दीपिका पादुकोण और महात्मा गांधी जैसे दिग्गज शामिल हो चुके हैं, जो इस सम्मान की व्यापक पहचान को दर्शाता है। इस वर्ष भारतीय हस्तियों का चयन न केवल देश की बढ़ती वैश्विक छवि को दर्शाता है, बल्कि यह युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। यह सम्मान भारत और विश्व के बीच सांस्कृतिक और तकनीकी संवाद को मजबूत करता है। समाप्त करते हुए, TIME100 की इस सूची में स्थान पाना वह सम्मान है जो व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ देश की सामूहिक प्रतिभा की मिसाल पेश करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत के पास विश्व मंच पर चमकने वाले अनेक सितारे हैं, जो देश का नाम गर्व से दुनिया भर में रोशन कर रहे हैं।

Khaleel Ahmed ruled out of IPL 2026 with quadricep injury
खेल जगत

खलील अहमद क्वाड्रिसेप चोट के कारण आईपीएल 2026 से बाहर

चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के तेज गेंदबाज खलील अहमद की टीम के लिए आईपीएल 2026 में भागीदारी खतरे में पड़ गई है। खलील अहमद को क्वाड्रिसेप क्षेत्र में गंभीर चोट लगने के कारण आगामी सीजन से बाहर होना पड़ा है। यह चोट उन्हें CSK और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बीच हुए आखिरी मुकाबले के दौरान लगी। मैच के दौरान खलील अहमद ने गेंदबाजी करते हुए अचानक चोट महसूस की, जिसके बाद उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। टीम के मेडिकल स्टाफ ने उनकी जांच की और पाया कि यह चोट उनकी आगामी खेलने की संभावना को प्रभावित करेगी। CSK के कोच और मेडिकल टीम ने पुष्टि की है कि खलील काफी समय तक रिहैबिलिटेशन पर रहेंगे और उनके पूरी तरह फिट होने में महीनों का समय लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्वाड्रिसेप चोट अगर ठीक से इलाज न हो तो खिलाड़ी की दौड़ने और गेंदबाजी पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। आईपीएल 2026 में CSK के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि खलील अहमद पिछले सीजन में अपनी तेज गति और यॉर्कर के लिए टीम के अहम खिलाड़ी साबित हुए थे। उनकी अनुपस्थिति में टीम को गेंदबाजी में एक बड़ा नुकसान होगा। निकट भविष्य में CSK खिलाड़ी और टीम प्रबंधन उनकी रिकवरी पर पूरा ध्यान देंगे ताकि वे जल्द से जल्द वापस खेल मैदान पर लौट सकें। खलील अहमद की गैरमौजूदगी में टीम के अन्य गेंदबाजों से प्रदर्शन की उम्मीद बढ़ जाएगी। आईपीएल फैंस के लिए यह खबर निराशाजनक है, लेकिन सभी को खलील की जल्द स्वस्थ होने की कामना करनी चाहिए। आगामी आईपीएल सीजन में उनकी वापसी मैचों को और रोमांचक बनाने के साथ-साथ CSK की गेंदबाजी लाइनअप को मजबूत बनाने में मदद करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग:याचिका खारिज; CJI बोले- जरूरत जागरूकता की है, हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते
राजनीति

सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग खारिज: CJI बोले- जरूरत जागरूकता की, किसी को मजबूर नहीं कर सकते

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वोटिंग अनिवार्य करना नीतिगत मामला है और इसे न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र के बाहर माना जाता है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमलया बागची तथा जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जान-बूझकर वोट नहीं डालने वालों के लिए दंडात्मक कार्रवाई और वोटिंग को अनिवार्य बनाने संबंधी याचिका पर अदालत सुनवाई नहीं कर सकती। बेंच ने याचिकाकर्ता अजय गोयल से कहा कि वे अपनी शिकायतों को लेकर सम्बंधित पक्षों से संपर्क करें। याचिकाकर्ता ने यह भी प्रस्ताव रखा था कि जो लोग जान-बूझकर मतदान से दूरी बनाते हैं उनके लिए सरकारी सुविधाओं को रोकने के निर्देश जारी किए जाएं। हालांकि, CJI ने कहा कि लोकतंत्र कानूनी दबाव से नहीं बल्कि जन जागरूकता से फलता-फूलता है। ‘‘यह देश कानून के शासन और लोकतंत्र में विश्वास रखता है, जहां 75 वर्षों में हमने दिखा दिया कि हम इस व्यवस्था पर कितना भरोसा करते हैं। हमें हर किसी से उम्मीद है कि वह मतदान करें, लेकिन यदि नहीं करते तो उनकी मर्जी। आवश्यकता जागरूकता की है, किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता।’’ सुनवाई के दौरान बेंच ने यह भी कहा कि चुनाव के समय नागरिकों को काफी कार्य करना पड़ता है। उन्होंने वोटिंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव की व्यावहारिक कठिनाइयों को रेखांकित किया। CJI ने कहा, ‘‘मान लीजिए कि मेरे साथी जस्टिस बागची को मतदान के लिए पश्चिम बंगाल जाना पड़े, जबकि वह उसी दिन काम पर हों, क्या हम इसे कर्तव्य समझेंगे?’’ इसके साथ ही न्यायालय ने समाज के वंचित वर्ग की विशेष चिंताएं भी जताईं। उन्होंने पूछा कि यदि कोई गरीब व्यक्ति अपनी रोज़ी-रोटी कमाने में लगा है तो उसे कैसे वोटिंग के लिए प्रेरित किया जाए। याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग को निर्देशित किया जाए कि वह एक समिति बनाए जो ऐसे लोगों पर रोक लगाने के प्रस्ताव दे, जो अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में नाकामयाब रहते हैं। हालांकि, चीफ जस्टिस ने कहा, ‘‘हमे डर है कि ये मामले नीतिगत दायरे में आते हैं और इन्हें न्यायपालिका द्वारा नहीं सुलझाया जा सकता।’’

The Hindu Sunday crossword no. 52
मनोरंजन

हिंदू संडे क्रॉसवर्ड नंबर 52

नई दिल्ली: भारतीय खेल जगत में हाल ही में कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं, जो देश के खेल प्रेमियों के लिए उत्साहजनक खबरें लेकर आई हैं। इन खबरों के माध्यम से हम आपको खेल की दुनिया की ताज़ा जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं। मौजूदा खेल सत्र में, हॉकी व टीम इंडिया ने अपनी प्रतिबद्धता और मेहनत से नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। हाल ही में आयोजित एशियन खेलों में भारतीय हॉकी टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। यह जीत न केवल खिलाड़ियों के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे देश के लिए भी एक सुनहरा पल है। इसके अतिरिक्त, क्रिकेट के क्षेत्र में भी भारतीय टीम ने कई महत्वपूर्ण मैचों में अपनी बढ़त बनाई है। युवा खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए टीम को मजबूत किया है। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान ने प्रेस वार्ता में कहा कि टीम की रणनीति नई है और वे आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। खेल मंत्रालय ने भी हाल ही में नए विकास अभियानों की घोषणा की है, जिसमें युवाओं को खेलों में प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि उन्हें भविष्य में खेल सुविधाओं को और बेहतर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए कई योजनाएं शुरू करने की योजना है। इस बीच, देश में फुटबॉल का भी तेजी से विकास हो रहा है। इন্ডियन सुपर लीग के मुकाबले दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं और खिलाड़ियों का प्रशिक्षण स्तर भी बढ़ रहा है। इस पूरे परिदृश्य से साफ जाहिर होता है कि भारत खेलों के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर पहुंचने की दिशा में अग्रसर है। इस रिपोर्ट के माध्यम से हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि खेल के प्रति बढ़ा हुआ लगाव और सरकार तथा निजी संस्थानों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की बदौलत भारतीय खेल जगत आने वाले समय में और भी समृद्ध और सफल होगा। देशवासियों का उत्साह और सहयोग ही इस सफलता की कुंजी है।

Mumbai introduces contract system for domestic players
खेल जगत

मुंबई में घरेलू खिलाड़ियों के लिए कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम लागू

मुंबई: मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) ने हाल ही में घरेलू क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए एक नया कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम शुरू किया है। इस नई पहल का उद्देश्य खिलाड़ियों के लिए बेहतर वित्तीय सुरक्षा और खेल से जुड़े संसाधनों की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है। हालांकि, एमसीए ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह कॉन्ट्रैक्ट प्रणाली पुरुष और महिला दोनों खिलाड़ियों पर लागू होगी या केवल पुरुष खिलाड़ियों तक सीमित रहेगी। इस कदम को मुंबई क्रिकेट के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से घरेलू खिलाड़ियों को नियमित आय और सुविधा मिलने में कठिनाई आती रही है। एमसीए की ओर से यह निर्णय घरेलू क्रिकेट के स्तर को और मजबूत बनाने और खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के मकसद से लिया गया है। एमसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हम चाहते हैं कि हमारे घरेलू खिलाड़ी अपने प्रदर्शन पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर सकें, उसकी चिंता किए बिना कि उनके वित्तीय पक्ष कैसे संभलेगा। यह प्रणाली खिलाड़ियों को नियमित वेतन, बोनस और अन्य सुविधाएं मुहैया कराएगी।” हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि महिला खिलाड़ियों के लिए भी इसी तरह के अनुबंध बनाए जाएंगे या नहीं। यह पहल भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है। घरेलू खिलाड़ियों की परिस्थितियाँ अब तक उतनी मजबूत नहीं थीं जितनी कि राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की। इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम से युवाओं को खेल के प्रति आकर्षित करने और उनकी प्रतिभा को उभारने में मदद मिलेगी। इस बारे में मुंबई क्रिकेट फैंस में उत्साह के साथ-साथ जिज्ञासा भी बनी हुई है कि क्या एमसीए भविष्य में महिला क्रिकेटरों के लिए इस योजना को लागू करेगा। महिला क्रिकेट देश में तेजी से विकास कर रहा है और ऐसे कदम से खिलाड़ियों को न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक समर्थन भी मिलेगा। एमसीए की वेबसाइट और सोशल मीडिया चैनलों पर इस नए कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम की जानकारी अपडेट की जाएगी, जिससे संबंधित खिलाड़ी और प्रशंसक सभी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रकार, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन का यह नया क़दम घरेलू क्रिकेट के भविष्य को उज्जवल बनाने का प्रयास है। आने वाले दिनों में इसका विस्तार महिलाओं तथा विभिन्न आयु वर्ग के खिलाड़ियों तक किया जाना अपेक्षित है।

सुप्रीम कोर्ट बोला- बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने:ट्रिब्यूनल जिन्हें 21 अप्रैल तक वोटर मानेगा, वो 23 को वोट डाल सकेंगे
राजनीति

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया- बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने, 21 अप्रैल तक मान्य वोटर 23 को कर सकेंगे मतदान

नई दिल्ली,  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जल्द ही जारी करे, जिसमें उन सभी वोटर्स को शामिल किया जाए जिनकी अपीलों पर ट्रिब्यूनल ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिनकी अपीलें अभी लंबित हैं, उन्हें वोट डालने की अनुमति नहीं मिलेगी। इससे पहले, पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत लगभग 90.83 लाख वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इसके बाद त्रिपक्षीय ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है, जहां इन हटाए गए नामों पर अपीलों की सुनवाई की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमलया बागची शामिल हैं, SIR प्रक्रिया से जुड़े विवादों पर सुनवाई कर रही है। बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने वाले हैं, पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा 29 अप्रैल को। पहले चरण के लिए जिन इलाकों में मतदान होना है, वहां 21 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल के फैसले आने पर ही वोटर मतदान कर सकेंगे। वहीं दूसरे चरण के क्षेत्र के वोटर्स के लिए यह अंतिम तारीख 27 अप्रैल रखी गई है। ट्रिब्यूनल द्वारा नामों को वोटर सूची में वापस जोड़ने के आदेश के बाद, चुनाव आयोग का इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तुरंत सूची में संशोधन करेगा। ट्रिब्यूनल की संख्या 19 है और ये रिटायर्ड हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की अगुवाई में काम कर रहे हैं, जिनके सामने कुल 34 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं। कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि ट्रिब्यूनलों को अतिभारित ना किया जाए ताकि वे समय पर मामले निपटा सकें। पश्चिम बंगाल में SIR का उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लिकेट व अयोग्य नाम काटना है। बावजूद इसके, इस प्रक्रिया को लेकर सियासी विवाद खूब गर्माया है। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर उनके समर्थकों को सूची से बाहर किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जरूरी प्रक्रिया मानता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के बाद अक्टूबर 2023 तक पश्चिम बंगाल के कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 90.83 लाख नाम हटा दिए गए, जो कुल मतदाता संख्या का लगभग 11.85% है। ज्यादातर हटाए गए नाम राज्य के बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों जैसे नॉर्थ 24 परगना और मृतिका में हैं। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख मतदाताओं में से 3.25 लाख और मृतिका में 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटाए गए हैं। स्पष्ट रूप से इस प्रक्रिया ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। 8 अप्रैल को, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने चुनाव आयोग से बैठक की थी, जिसमें उन्होंने SIR को लेकर समय मांगा था। लेकिन बैठक में खराब व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने केवल पांच मिनट में उनकी बात सुनी और उन्हें भगा दिया। चुनाव आयोग ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बैठक तनावपूर्ण रही। अंत में, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट होता है कि न्यायालय चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि सभी वैध मतदाता चुनाव में भाग ले सकें और मतदाता सूची में व्यापक पारदर्शिता रहे। यह कदम राजनीतिक दलों के बीच मतदाता सूची को लेकर हो रही विवादों को कम करने के लिए भी अहम माना जा रहा है।

Season 2 of Prime Video’s ‘Sapne vs Everyone’ gets release date
मनोरंजन

प्राइम वीडियो की सीरीज ‘Sapne vs Everyone’ के सीजन 2 की रिलीज़ डेट घोषित

नई दिल्ली। डिजिटल मनोरंजन की दुनिया में हिंदी वेब सीरीज की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में प्रसिद्ध प्राइम वीडियो की मशहूर सीरीज ‘Sapne vs Everyone’ का दूसरा सीजन जल्द ही दर्शकों के लिए रिलीज़ होने जा रहा है। इस सीरीज के निर्माण में The Viral Fever (TVF) की टीम ने अपनी महारत दिखाई है, जो क्रमशः मनोरंजक और सामाजिक दृष्टिकोण से भरपूर कंटेंट का निर्माण करती रही है। यह वेब सीरीज मुख्य रूप से अम्बरीष वर्मा, परमवीर सिंह चीमा और विजयंत कोहली के अभिनय कौशल पर आधारित है। इन तीनों ने अपनी भूमिकाओं में आत्मीयता और जीवन के संघर्ष को बखूबी प्रस्तुत किया है। ‘Sapne vs Everyone’ की कहानी युवाओं के सपनों, उनकी चुनौतियों और सामाजिक परिसंस्थाओं में उनके संघर्षों को लेकर बुनी गई है, जो सभी दर्शकों के दिलों को छूने में सक्षम है। सीजन 1 की शानदार सफलता के बाद, दर्शकों द्वारा इसके नए एपिसोड की मांग लगातार बढ़ती रही है, और उस प्रतिक्रिया को देखते हुए ही प्रोडक्शन हाउस ने फिलहाल रिलीज़ की तारीख का ऐलान किया है। The Viral Fever (TVF) ने एक ऑफिशियल बयान में कहा कि सीजन 2 निश्चित रूप से उनके दर्शकों को वही मज़ा और चिंतन प्रदान करेगा, जो पहली बार हुआ था। प्राइम वीडियो ने इस नए सीजन के लिए मार्केटिंग अभियान भी शुरू कर दिया है, जिसमें ट्रेलर रिलीज, सोशल मीडिया प्रमोशन और इंटरैक्टिव सत्र शामिल हैं। इन पहलों के माध्यम से वेब प्लेटफॉर्म ने यह सुनिश्चित किया है कि दर्शक सीरीज के नए एपिसोड का बेसब्री से इंतजार करें। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘Sapne vs Everyone’ जैसे वेब शो डिजिटल माध्यम की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण हैं, जो केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी पहुंचाते हैं। अम्बरीष वर्मा, परमवीर सिंह चीमा और विजयंत कोहली ने इस सीरीज की सफलता में अहम भूमिका निभाई है, जो नए कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। अंत में, यह कहा जा सकता है कि ‘Sapne vs Everyone’ के दूसरे सीजन के रिलीज होने से हिंदी वेब सीरीज के परिदृश्य में एक नई ऊर्जा का संचार होगा। दर्शक इस अपडेट के लिए सोशल मीडिया पर उत्साहपूर्वक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और नई कहानी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

Varun Dhawan’s ‘Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai’ first-look teaser out; film gets new release date
मनोरंजन

वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का पहला लुक टीजर रिलीज; नई रिलीज़ डेट का ऐलान

नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक डेविड धवन की आगामी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का पहला लुक टीजर आज रिलीज़ किया गया है। इस फिल्म में मुख्य भूमिका में वरुण धवन नजर आएंगे। टीजर के साथ ही फिल्म की नई रिलीज़ डेट का भी ऐलान किया गया है, जो दर्शकों के बीच उत्साह की लहर दौड़ा रहा है। डायरेक्टर डेविड धवन के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में वरुण धवन के साथ मनीष पॉल, चंकी पांडे, जिमी शेरगिल और मौनी रॉय भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। यह फिल्म हल्के-फुलके रोमांटिक कॉमेडी की श्रेणी में आती है और इसका विषय युवाओं की जिंदगी और प्यार के इर्द-गिर्द घूमता है। फिल्म का टीजर बेहद आकर्षक और रंगीन है, जिसने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर तुरंत खींच लिया। टीजर में वरुण धवन के चार्म और उनकी केमिस्ट्री स्पष्ट रूप से नजर आ रही है, जो इस फिल्म के प्रति दर्शकों की उम्मीदों को और बढ़ा रही है। डेविड धवन की फ़िल्में सामान्यतः मनोरंजन से भरपूर होती हैं, और इस फिल्म से भी ऐसी ही उम्मीद की जा रही है। निर्देशक डेविड धवन ने कहा, “है जवानी तो इश्क होना है एक ऐसी कहानी है जो युवाओं के जीवन की जटिलताओं और उनकी भावनाओं को दर्शाती है। हमने इसे हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में प्रस्तुत किया है ताकि दर्शक इसे पूरा आनंद लेकर देखें।” फिल्म की नई रिलीज़ डेट के बारे में जानकारी दी गई है कि यह आगामी महीनों में बड़े पर्दे पर दस्तक देगी। इससे पहले यह फिल्म कुछ अन्य तारीखों पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन निर्माताओं ने दर्शकों के हित को ध्यान में रखते हुए एक नई तारीख तय की है। इस फिल्म की रिलीज़ से पहले ही दर्शक सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी उत्साहित हैं और टीजर को बेहद पसंद कर रहे हैं। कई समीक्षकों ने भी इस फिल्म की कहानी और कलाकारों की भूमिका को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। यह फिल्म उन लोगों के लिए खास है जो मनोरंजन के साथ-साथ एक अच्छी कहानी का भी पसंदीदा हिस्सा बनाना चाहते हैं। ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में युवा प्रेम और दोस्ती के रस से भरपूर पल देखने को मिलेंगे। निर्माता और कलाकारों ने कहा है कि वे दर्शकों के अनुभव को यादगार बनाने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं और उम्मीद है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई करेगी। फिल्म के टीजर की रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया पर

Inside ‘Dacoit’: Shaneil Deo on directing Adivi Sesh and crafting the film
मनोरंजन

‘डकैट’ के अंदर: निर्देशक शेनिल देवो ने आदिवी साश और फिल्म निर्माण पर किया खुलासा

निर्देशक शेनिल देवो ने हाल ही में अपने नए प्रोजेक्ट ‘डकैट’ को लेकर एक विस्तृत चर्चा की, जिसमें उन्होंने आदिवी साश के साथ काम करने का अनुभव, ₹65 करोड़ के बजट पर बनी इस फिल्म की विशालता और इसके निर्माण की चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। ‘डकैट’ एक ऐसी फिल्म है जिसने बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है, न सिर्फ इसकी कहानी बल्कि इसके विजुअल लेंग्वेज और कलाकारों के प्रदर्शन को लेकर भी काफ़ी सराहना मिली है। शेनिल बताते हैं कि कैसे उन्होंने फिल्म की पटकथा को दृश्य भाषा में तब्दील किया और कलाकारों के हावभाव को स्क्रीन पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। शेनिल देवो ने कहा, “आदिवी साश के साथ काम करना एक उत्साहजनक अनुभव था, उनकी अनुशासन और परफॉर्मेंस की गहराई ने पूरी टीम को प्रभावित किया।” उन्होंने यह भी साझा किया कि इतने बड़े बजट वाली फिल्म बनाने में कई तकनीकी और प्रोडक्शन सम्बंधित चुनौतियां आईं, जिनका सामना वह और उनकी टीम ने दक्षता से किया। निर्देशक ने यह भी बताया कि फिल्म की कहानी कहने के लिए विजुअल इफेक्ट्स और सिनेमैटोग्राफी का विशेष महत्व था और उन्होंने इस पर विशेष ध्यान दिया। “हम चाहते थे कि दर्शक फिल्म की दुनिया में डूब जाएं और हर सीन उन्हें कहानी के करीब ले जाए,” शेनिल ने कहा। साथ ही, उन्होंने बताया कि कैसे शूटिंग के दौरान, लोकेशंस की अतिरिक्त जटिलताएं और उच्च तकनीकी उपकरणों का उपयोग फिल्म के उत्पादन को और भी चुनौतीपूर्ण बनाता रहा। पर टीम ने मिलकर हर बाधा को पार करते हुए अंततः एक उत्कृष्ट फिल्म प्रस्तुत की। फिल्म ‘डकैट’ की रिलीज के बाद इसकी आलोचनात्मक और व्यावसायिक सफलता ने यह प्रमाणित किया कि शेनिल देवो की न केवल निर्देशन की क्षमता है, बल्कि वे कहानी कहने की एक अनूठी दृष्टि रखते हैं। आदिवी साश के साथ उनका सहयोग निश्चित रूप से भारतीय सिनेमा में एक नई मिसाल स्थापित कर रहा है। इस फिल्म के ज़रिये शेनिल देवो ने साबित कर दिया है कि एक बड़े बजट की फिल्म को भी बिना कोई समझौता किए सटीक दृष्टि और मेहनत से बनाया जा सकता है। दर्शक और फिल्म प्रेमी दोनों इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं, जो भविष्य में भारतीय सिनेमा के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

'You don't pick a team on price tags' - Finch wants KKR to look beyond Green
खेल जगत

आप कीमत देखकर टीम का चयन नहीं करते हैं – फिंच ने कहा, केकेआर को ग्रीन से आगे देखना चाहिए

कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के पूर्व कप्तान और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर एरॉन फिंच ने केकेआर की रणनीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि टीम की कुछ रणनीतियां बहुत ही संदिग्ध और विवादास्पद रहीं, खासकर उस समय जब पावरप्ले के बाद टीम की गति में अचानक कमी आई। फिंच ने विशेष रूप से कैमरून ग्रीन को नंबर 6 पर बल्लेबाजी करने के फैसले पर भी अपनी असहमति जाहिर की। उनका कहना है कि टीमें केवल खिलाड़ियों के नाम या कीमत के आधार पर निर्णय नहीं ले सकतीं। इसके बजाय उन्हें बेहतर रणनीति और सामूहिक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। एरॉन फिंच का यह बयान केकेआर टीम के प्रदर्शन पर उठे सवालों की तरफ ध्यान आकर्षित करता है। पिछली कुछ पारियों में केकेआर ने पावरप्ले के बाद धीमी बल्लेबाजी की, जिससे टीम का दबाव बढ़ा और विपक्षी टीम को बढ़त लेने का मौका मिला। फिंच ने कहा, “टीम की कुछ रणनीतियां बहुत ही विवादास्पद थीं, विशेष रूप से पावरप्ले के बाद बल्लेबाजी की धीमी गति। इस वजह से टीम अपनी संभावित ताकत से कम प्रदर्शन कर पाई।” उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ बड़े नाम या महंगे खिलाड़ियों के नाम पर चयन करना सही रणनीति नहीं है। इस तरह की टिप्पणियां इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि फ्रेंचाइजी को भविष्य में अधिक संतुलित और सूझ-बूज वाला चयन और रणनीति बनानी होगी। फिंच ने केकेआर प्रबंधन को सलाह दी कि वे खिलाड़ियों का मूल्यांकन कीमत के बजाय उनकी फॉर्म, फिटनेस और टीम की ज़रूरतों के आधार पर करें। केकेआर की वर्तमान रणनीति और चयन प्रक्रिया के बारे में फिंच का यह दृष्टिकोण निश्चित ही विश्व क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय रहेगा। टीम के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वे अपने प्रदर्शन में सुधार करें और अपनी रणनीतियों को और बेहतर बनाएं ताकि आगामी मुकाबलों में बेहतर परिणाम हासिल कर सकें।

Shopping Cart
Scroll to Top