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Author name: Kamlesh Purohit

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आंध्र प्रदेश: विजयवाड़ा से शुरू हुई भारत की पहली AQI मॉनिटरिंग इंटरसिटी बस सेवा, यात्रियों को मिलेगी साफ हवा

विजयवाड़ा से देश की पहली AQI-आधारित इंटरसिटी बस सेवा शुरू हुई है, जिसका उद्देश्य यात्रियों को लंबी यात्रा के दौरान स्वच्छ हवा प्रदान करना है। विजयवाड़ा से देश की पहली AQI आधारित बस सेवा शुरू उन्नत एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम से बस में स्वच्छ हवा उपलब्ध यात्री ऐप और स्क्रीन पर रियल-टाइम AQI देख सकेंगे आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से देश में पहली बार एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर आधारित इंटरसिटी बस सेवा शुरू हो गई है। इंटरसिटी मोबिलिटी ब्रांड इंटरसिटी स्मार्टबस ने इस अनोखी सेवा को विजयवाड़ा-बेंगलुरु रूट पर लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य यात्रियों को लंबी यात्रा के दौरान भी स्वच्छ और सुरक्षित हवा उपलब्ध कराना है। इस सेवा का शुभारंभ विजयवाड़ा की डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) शेरीन बेगम ने किया। उन्होंने इसे इंटरसिटी ट्रांसपोर्टेशन में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो यात्रियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा पर फोकस करता है। बस के अंदर हवा बाहर से भी साफ सामान्य बसों में अंदर की हवा बाहर की हवा से 2-3 गुना ज्यादा प्रदूषित होती है, लेकिन स्मार्टबस AQI में लगाए गए एडवांस्ड एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम ने इस समस्या को दूर किया है। ट्रायल रन के दौरान बस के अंदर PM2.5 का स्तर लगभग 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रखा गया, जो कई बड़े शहरों की बाहरी हवा से भी बेहतर है। कंपनी के अनुसार, यात्रा के 90 प्रतिशत से ज्यादा समय हवा की गुणवत्ता अच्छी बनी रहती है। यह सिस्टम लगातार हवा की निगरानी करता है और जरूरत पड़ने पर फिल्ट्रेशन को ऑटोमैटिकली बढ़ा देता है, जिससे यात्री प्रदूषण से सुरक्षित रहते हैं। डिजिटल स्क्रीन और ऐप पर लाइव अपडेट इस बस की सबसे खास बात यात्रियों को सफर के दौरान ही हवा की गुणवत्ता की जानकारी मिलना है। बस के अंदर लगी डिजिटल स्क्रीन पर रियल-टाइम AQI और PM2.5 लेवल दिखाए जाते हैं। साथ ही, इंटरसिटी मोबाइल ऐप पर भी ये डेटा उपलब्ध रहता है, ताकि यात्री अपनी सीट से ही हवा की क्वालिटी ट्रैक कर सकें। यात्री इन बसों को इंटरसिटी ऐप या वेबसाइट पर इंटरसिटी एक्यूआई टैग चुनकर बुक कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि यह सेवा यात्रा को न सिर्फ आरामदायक, बल्कि सेहतमंद भी बनाएगी।

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दुर्गाष्टमी, अशोकाष्टमी व रामनवमी का दुर्लभ संगम

सिरोही। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर इस वर्ष 26 मार्च का दिन अत्यंत विशेष और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन चैत्र शुक्ल अष्टमी (दुर्गाष्टमी), अशोकाष्टमी और रामनवमी का खास संगम बन रहा है। यह संयोग धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्षों बाद ऐसा अवसर बन रहा है। जब देवी आराधना और भगवान श्रीराम जन्मोत्सव एक ही दिन विशेष मुहूर्त में मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी रहेगा। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन, भजन-कीर्तन और राम जन्मोत्सव के आयोजन होंगे। इस दिन की महत्ता को देखते हुए श्रद्धालुओं में पहले से ही उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। तिथियों का अदभुत संयोग चैत्र शुक्ल अष्टमी (दुर्गाष्टमी) 26 मार्च को सुबह 11.49 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात 11.50 बजे से नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। नवमी तिथि अगले दिन 27 मार्च को सुबह 10.07 बजे तक मान्य रहेगी। इस प्रकार 26 मार्च को ही अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों का संयोग बन रहा है, जो इसे और अधिक विशेष बना देता है। यही कारण है कि इस दिन दुर्गाष्टमी, अशोकाष्टमी और रामनवमी तीनों पर्व एक साथ मनाए जाएंगे। अभिजित मुहूर्त में होगा श्रीराम जन्मोत्सव ज्योतिष एवं वास्तुविद आचार्य प्रदीप दवे के अनुसार, भगवान श्रीराम का जन्म अभिजित मुहूर्त में हुआ था। इस वर्ष 26 मार्च को दोपहर 12.15 बजे अभिजित मुहूर्त पड़ रहा है, जो राम जन्मोत्सव के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, नवमी तिथि, अभिजित मुहूर्त में हुआ था। इस आधार पर 26 मार्च को दोपहर 12.15 बजे मंदिरों में विशेष पूजा, आरती और श्रीराम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। रामचरितमानस में वर्णित है श्रीराम जन्म का समय गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के बालकांड में श्रीराम जन्म का वर्णन करते हुए कहा गया है नौमी तिथि मधु मास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता। मध्य दिवस अति सीत न धामा, पावन काल लोक बिश्रामा। इस चौपाई का अर्थ है कि भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र (मधु) मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि में, अभिजित मुहूर्त में, दिन के मध्य में हुआ था, जब मौसम संतुलित और सुखद था। यह समय समस्त लोकों के लिए कल्याणकारी और पवित्र माना गया है। सूर्योदय तिथि सिद्धांत और निर्णय हिंदू पंचांग के अनुसार, जिस तिथि का प्रभाव सूर्योदय के समय होता है, वही तिथि पूरे दिन मान्य मानी जाती है। इस सिद्धांत के अनुसार 27 मार्च को सूर्योदय के समय नवमी तिथि रहेगी, इसलिए सामान्यत: रामनवमी 27 मार्च को मानी जा सकती थी। लेकिन इस वर्ष विशेष परिस्थिति यह है कि 26 मार्च को नवमी तिथि दोपहर से प्रारंभ हो रही है। उसी दिन अभिजित मुहूर्त भी उपलब्ध है। 27 मार्च को अभिजित मुहूर्त नवमी तिथि में नहीं आ रहा। इसी कारण शास्त्रसम्मत निर्णय के अनुसार रामनवमी 26 मार्च को ही मनाना अधिक उचित और मान्य रहेगा। दुर्गाष्टमी और अशोकाष्टमी व दुर्गाष्टमी का महत्व चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। श्रद्धालु कन्या पूजन, हवन और विशेष अनुष्ठान करते हैं। यह दिन शक्ति साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अशोकाष्टमी का पर्व भी इसी दिन मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दुखों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ‘अशोक’ का अर्थ होता है – शोक का नाश करने वाला, इसलिए यह दिन मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है। मंदिरों में विशेष आयोजन की तैयारी इस दुर्लभ संयोग को देखते हुए कमोबेश सभी क्षेत्रों के मंदिरों में विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों की सजावट की जा रही है। भजन-कीर्तन और सुंदरकांड पाठ का आयोजन होगा। राम जन्म के समय विशेष आरती की जाएगी। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाएगा। राम मंदिरों में विशेष रूप से दोपहर 12.15 बजे भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। घंटों-घडिय़ालों और जयकारों के बीच वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। इस बार एक ही दिन तीन प्रमुख पर्व होने के कारण श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। लोग व्रत, पूजा और धार्मिक आयोजनों की तैयारी में जुटे हुए हैं। महिलाओं द्वारा घरों में घट स्थापना, पूजा और कन्या पूजन की तैयारी की जा रही है। बाजारों में भी पूजा सामग्री, फल, फूल और सजावटी वस्तुओं की मांग बढ़ गई है। मिठाई की दुकानों पर भी रौनक देखने को मिल रही है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष दिन ज्योतिषियों के अनुसार यह दिन साधना, पूजा और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी। कन्या पूजन से माता दुर्गा की कृपा मिलेगी। राम नाम जप और सुंदरकांड पाठ से मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

राष्ट्रीय

अब बिना क्लेम के मिलेगा PF का पैसा: EPFO ला रहा ऑटो-सेटलमेंट सुविधा, करोड़ों खाताधारकों को राहत

बड़ी पहल: बिना आवेदन सीधे खाते में पैसा देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अब एक नई ऑटो-सेटलमेंट सुविधा शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत निष्क्रिय खातों में पड़ा पीएफ का पैसा सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इस सुविधा के लागू होने के बाद खाताधारकों को किसी तरह का क्लेम करने या कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। क्या है ऑटो-सेटलमेंट सुविधा? ऑटो-सेटलमेंट सुविधा एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था है, जिसके जरिए ईपीएफओ आधार से सत्यापित खातों की पहचान कर उनमें पड़ी लावारिस राशि को सीधे संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में भेज देगा। इससे वर्षों से अटके करोड़ों रुपये लोगों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। कितनी राशि और कितने खाते? ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार, करीब 81 लाख निष्क्रिय खातों में लगभग 5,200 करोड़ रुपये की राशि पड़ी हुई है। इनमें से कई खाते ऐसे हैं जिनमें लाखों रुपये जमा हैं, लेकिन खाताधारकों ने अब तक क्लेम नहीं किया है। लावारिस धन का बड़ा आंकड़ा फरवरी 2026 तक ईपीएफओ के पास 31.8 लाख निष्क्रिय खातों में कुल 10,181 करोड़ रुपये की राशि पड़ी हुई है। यह राशि लंबे समय से बिना दावे के पड़ी है, जिसे अब ऑटो-सेटलमेंट के जरिए निपटाने की योजना बनाई जा रही है। किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? इस सुविधा का सबसे ज्यादा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो रिटायर हो चुके हैं या जिन्होंने नौकरी बदलने के बाद अपना पीएफ ट्रांसफर नहीं कराया। इसके अलावा, ऐसे खाताधारक जिनके खाते आधार से लिंक हैं लेकिन लंबे समय से निष्क्रिय हैं, उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा। कैसे काम करेगा सिस्टम? नई प्रणाली के तहत ईपीएफओ पहले आधार और बैंक खाते की जानकारी का मिलान करेगा। इसके बाद सत्यापन पूरा होने पर राशि सीधे संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। निष्क्रिय खाता किसे माना जाता है? ईपीएफओ उन खातों को निष्क्रिय मानता है, जिनमें लंबे समय तक कोई योगदान नहीं किया गया हो। आमतौर पर, 55 वर्ष की आयु के बाद यदि तीन वर्षों तक कोई योगदान नहीं होता, तो खाता निष्क्रिय हो जाता है। सरकार की बड़ी पहल यह कदम सरकार की डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को उनके हक का पैसा समय पर मिलेगा।

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ट्रंप फैमिली की प्रेडिक्शन मार्केट में एंट्री से मचा हड़कंप, अमेरिकी राजनीति और कानून के बीच बढ़ा टकराव

डिजिटल सट्टेबाजी की दुनिया में बड़ा बदलाव अमेरिका में डिजिटल प्रेडिक्शन मार्केट्स को लेकर बहस तेज हो गई है, खासकर तब से जब Trump Media & Technology Group ने ‘ट्रुथ प्रेडिक्ट’ नामक प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की है। यह प्लेटफॉर्म Truth Social के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे यूजर्स को सीधे ऐप के भीतर ही सट्टेबाजी जैसे विकल्प मिल सकेंगे। ट्रंप परिवार की भूमिका पर उठे सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर का नाम भी इस पूरे मामले में सामने आया है। वह प्रमुख प्रेडिक्शन प्लेटफॉर्म्स काल्शी और पॉलीमार्केट से सलाहकार और निवेशक के रूप में जुड़े हुए हैं। इससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या हैं प्रेडिक्शन मार्केट्स? प्रेडिक्शन मार्केट्स ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म होते हैं जहां लोग चुनाव, खेल, आर्थिक घटनाओं और वैश्विक घटनाओं के परिणामों पर दांव लगाते हैं। समर्थकों का कहना है कि ये बाजार भविष्यवाणी के सटीक संकेत देते हैं, जबकि आलोचक इन्हें ऑनलाइन जुआ का नया रूप मानते हैं। अमेरिकी कांग्रेस की बढ़ती सख्ती वॉशिंगटन में इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस में इस साल प्रेडिक्शन मार्केट्स को नियंत्रित करने के लिए कई विधेयक पेश किए गए हैं। इनमें इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक, चुनावी दांव पर सख्ती और Commodity Futures Trading Commission की शक्तियों को बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। संवेदनशील विषयों पर प्रतिबंध की मांग कुछ विधेयकों में युद्ध, आतंकवाद, हत्या और खेल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सट्टेबाजी पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही, सरकारी अधिकारियों और सांसदों को इन बाजारों में भाग लेने से रोकने का प्रस्ताव भी रखा गया है। ट्रंप परिवार का पुराना जुआ कारोबार यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप परिवार का नाम सट्टेबाजी से जुड़ा हो। 1990 में डोनाल्ड ट्रंप ने अटलांटिक सिटी में ताजमहल कैसिनो शुरू किया था। हालांकि बाद में यह कारोबार बंद हो गया, लेकिन अब डिजिटल युग में ट्रंप परिवार फिर से इस क्षेत्र में सक्रिय होता दिख रहा है। कानूनी विवाद और राज्यों का विरोध नेवादा और न्यूजर्सी जैसे राज्यों ने इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म बिना लाइसेंस के ऑनलाइन सट्टेबाजी चला रहे हैं। वहीं, CFTC द्वारा इन्हें कुछ छूट दिए जाने से विवाद और बढ़ गया है। डिजिटल बाजार का तेजी से विस्तार प्रेडिक्शन मार्केट्स का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। हर हफ्ते अरबों डॉलर का दांव इन प्लेटफॉर्म्स पर लगाया जा रहा है। इससे पारंपरिक कैसिनो उद्योग पर भी असर पड़ रहा है। निष्कर्ष ट्रंप परिवार की एंट्री ने इस बहस को और तेज कर दिया है। अब यह केवल एक कारोबारी मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और कानूनी टकराव का विषय बन गया है।  

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Rajasthan Day 2026: लोकधुनों, नृत्य और स्वाद का अनोखा संगम

सिरोही। राज्य सरकार के निर्देशानुसार राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में गुरुवार को ऐतिहासिक सरूप विलास परिसर में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। रंग-बिरंगी रोशनी, पारंपरिक साज-सज्जा और लोक संस्कृति की झलकियों से सजे इस कार्यक्रम ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दराज से आए आगंतुकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों, आधुनिक संगीत और विविध सांस्कृतिक गतिविधियों ने राजस्थान की समृद्ध परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।लोक संस्कृति की छटा से सजा मंचकार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने पूरे वातावरण को राजस्थानी रंग में रंग दिया। सरिता कंवर ने चरी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सिर पर जलते दीपकों के साथ संतुलन बनाते हुए किया गया यह नृत्य न केवल कलाकार की कला का परिचायक था, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक विरासत का जीवंत उदाहरण भी बना। इसके बाद जैसलमेर से आए मांगणियार कलाकारों ने अपनी सुरीली आवाज में लोक गायन प्रस्तुत किया। मांगणियार गायन की मधुर धुनों ने उपस्थित जनसमूह को जैसे किसी अलग ही दुनिया में पहुंचा दिया। उनके गीतों में राजस्थान की रेत, लोककथाएं और सांस्कृतिक इतिहास की झलक साफ दिखाई दी।लोक से लेकर बॉलीवुड तक का रंगारंग संगमकार्यक्रम में केवल पारंपरिक प्रस्तुतियां ही नहीं, बल्कि आधुनिक संगीत का भी बेहतरीन समावेश देखने को मिला। आकाश कलावंत और प्रिंस विनोद ने बॉलीवुड गीतों की प्रस्तुति देकर युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं उर्मिला देवी ने राजस्थानी गीतों के माध्यम से लोक संस्कृति को एक नई ऊर्जा दी। मेडिकल कॉलेज सिरोही के विद्यार्थियों ने रजवाड़ी रिदम पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। युवाओं की इस प्रस्तुति में पारंपरिक और आधुनिक शैली का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।अनोखी प्रस्तुतियां बनी आकर्षण का केंद्रकार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पिंकी राजपुरोहित एंड ग्रुप द्वारा प्रस्तुत दुर्गा वाहिनी तलवार एक्ट रहा। इस प्रस्तुति में साहस, अनुशासन और पारंपरिक युद्ध कला का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इसके साथ ही अन्नु सोलंकी ग्रुप ने घुटना चकरी/तराजू नृत्य की प्रस्तुति दी। इस अनोखे नृत्य में कलाकारों ने संतुलन और तालमेल का अदभुत प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थितिइस सांस्कृतिक संध्या में कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। प्रभारी मंत्री केके विश्नोई, सांसद लुंबाराम चौधरी, जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित, जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी, पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह, अतिरिक्त जिला कलेक्टर डॉ. राजेश गोयल और मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाशचंद अग्रवाल सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सभी अतिथियों ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी संस्कृति को सहेजने का माध्यम हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोडऩे का भी कार्य करते हैं।फूडकोर्ट और सेल्फी प्वाइंट बने आकर्षण का केंद्रकार्यक्रम में केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं, बल्कि आमजन के मनोरंजन के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं। परिसर में लगाए गए फूडकोर्ट में विभिन्न स्टॉल्स पर लोगों ने राजस्थानी और अन्य व्यंजनों का स्वाद लिया। दाल-बाटी-चूरमा से लेकर चाट-पकौड़ी और मिठाइयों तक, हर स्वाद यहां उपलब्ध था। इसके अलावा, सिरोही जिले की ऐतिहासिक धरोहरों को दर्शाते सेल्फी प्वाइंट भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। युवाओं और परिवारों ने यहां जमकर तस्वीरें खिंचवाईं और इस खास दिन की यादों को अपने कैमरों में कैद किया।क्यों मनाते है राजस्थान दिवसराजस्थान दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि राज्य की गौरवशाली विरासत, संस्कृति और इतिहास को याद करने का अवसर है। 30 मार्च 1949 को विभिन्न रियासतों के एकीकरण के बाद आधुनिक राजस्थान का गठन हुआ था। इसी ऐतिहासिक दिन को हर वर्ष राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है।संस्कृति और उत्साह का यादगार संगम पूरे कार्यक्रम के दौरान दर्शकों का उत्साह देखने लायक था। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज से वातावरण गूंजता रहा। कार्यक्रम का संचालन राकेश पुरोहित और कार्तिकेय शर्मा ने शानदार ढंग से किया, जिससे पूरा आयोजन व्यवस्थित और आकर्षक बना रहा। अंतत:, सरूप विलास में आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या राजस्थान की विविधता, परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम साबित हुई। इस आयोजन ने न केवल लोगों को मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩे का भी कार्य किया।

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जोधपुर में गणगौर माता की भव्य शोभायात्रा 21 मार्च को, 2 किलो सोने के आभूषणों से सजेगी माता

राजस्थान की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में गणगौर पर्व का विशेष स्थान है। इसी कड़ी में Jodhpur शहर में इस वर्ष भी गणगौर माता की भव्य शोभायात्रा पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा 21 मार्च को शाम 5 बजे से शुरू होगी, जिसमें माता को करीब 2 किलो सोने के आभूषण पहनाए जाएंगे। इन आभूषणों की अनुमानित कीमत 2 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। हर वर्ष की तरह इस बार भी शहर के हजारों श्रद्धालु, महिलाएं, कुंवारी कन्याएं और श्रद्धालु इस ऐतिहासिक यात्रा में शामिल होंगे। यह शोभायात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि जोधपुर की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का भी भव्य प्रदर्शन मानी जाती है। गणगौर पर्व का धार्मिक महत्व गणगौर पर्व मुख्य रूप से माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की पूजा का पर्व है। राजस्थान सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह पर्व बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। विशेष रूप से अविवाहित लड़कियां अच्छे वर की कामना और विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र व सुखी दांपत्य जीवन के लिए गणगौर माता की पूजा करती हैं। राजस्थान में यह पर्व होली के दूसरे दिन से शुरू होकर लगभग 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान महिलाएं और युवतियां रोजाना पूजा-अर्चना करती हैं और अंतिम दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। 2 किलो सोने के आभूषणों से सजेगी गणगौर माता इस वर्ष गणगौर माता की प्रतिमा को करीब 2 किलो सोने के आभूषणों से सजाया जाएगा, जिनकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। इन आभूषणों में शामिल होंगे: इन बहुमूल्य आभूषणों से सजी गणगौर माता की प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। राखी हाउस से शुरू होगी शोभायात्रा गणगौर माता की भव्य शोभायात्रा राखी हाउस से शुरू होगी। यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए अंत में घंटाघर प्रांगण पहुंचेगी। शोभायात्रा का निर्धारित मार्ग इस प्रकार रहेगा: इन सभी मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। जगह-जगह स्वागत द्वार, पुष्प वर्षा और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। घंटाघर पर होगा जलग्रहण कार्यक्रम शोभायात्रा जब घंटाघर प्रांगण पहुंचेगी, तब वहां जलग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार गणगौर माता की पूजा की जाएगी। जलग्रहण के बाद गणगौर माता को पुनः राखी हाउस लाया जाएगा, जहां माता पुनः विराजमान होंगी। यह पूरा कार्यक्रम शहर के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष महत्व गणगौर माता की पूजा विशेष रूप से कुंवारी कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि जो कन्या श्रद्धा से गणगौर माता की पूजा करती है, उसे अच्छा जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है। कार्यक्रम के संयोजक Ashok Bhaiya ने बताया कि वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है कि: वे गणगौर माता के समक्ष चुनरी साड़ी, सवा पान प्रसाद, गुलाब की माला और इत्र चढ़ाती हैं। इसके बाद महिलाएं माता के दाएं कान में अपनी मनोकामना कहती हैं। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है। पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा जोधपुर में गणगौर माता की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। शहर के कई परिवार इस आयोजन से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जोधपुर की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर भी है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस शोभायात्रा का हिस्सा बनते हैं और पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। जालोरीबारी में बनेगा विशेष मंच इस वर्ष शोभायात्रा को और भव्य बनाने के लिए जालोरीबारी क्षेत्र में विशेष स्टेज मंच तैयार किया जाएगा। इस मंच पर कई आकर्षक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें शामिल होंगे: इसके साथ ही जोधपुर के नामचीन बैंड शोभायात्रा में अपनी प्रस्तुति देंगे, जिससे यात्रा का माहौल और भी भव्य और आकर्षक बनेगा। शहर में उत्सव जैसा माहौल गणगौर शोभायात्रा को लेकर पूरे जोधपुर शहर में उत्साह का माहौल है। बाजारों को सजाया जा रहा है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इस आयोजन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। व्यापारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी जगह-जगह: आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। संभावित व्यवस्थाएं: ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके। राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान है गणगौर गणगौर पर्व राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। विशेष रूप से जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और बीकानेर जैसे शहरों में यह पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार महिलाओं की आस्था, पारिवारिक परंपराओं और सामाजिक एकता का भी प्रतीक माना जाता है।

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SIROHI NEWS: नए एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने संभाली कमान

सिरोही। जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने सोमवार को औपचारिक रूप से अपना पदभार ग्रहण कर लिया। एसपी कार्यालय पहुंचकर उन्होंने जिले की पुलिस व्यवस्था की कमान संभाली और अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ परिचयात्मक बैठक भी की। उनके पदभार ग्रहण करने के साथ ही जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीदें बढ़ गई हैं। पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालते हुए राठौड़ ने साफ संकेत दिया कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को जब नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ एसपी कार्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोर सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जसाराम, डिप्टी पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र वर्मा, डिप्टी पुलिस अधीक्षक मुकेश चौधरी, कोतवाली थाना प्रभारी कैलाशदान और शिवगंज थाना प्रभारी अमराम सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान एसपी राठौड़ ने अधिकारियों और कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और जिले की वर्तमान कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में जानकारी ली।कानून व्यवस्था बनाए रखना पहली जिम्मेदारीपदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि पुलिस जनता की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास और सहयोग का रिश्ता मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुलिस प्रशासन लगातार प्रयास करेगा ताकि लोगों को सुरक्षा का भरोसा मिल सके। राठौड़ ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकडऩा ही नहीं बल्कि अपराध होने से पहले ही उसे रोकना भी है। इसके लिए प्रभावी रणनीति बनाकर कार्य किया जाएगा।संगठित अपराधों पर कसेगा शिकंजानवनियुक्त एसपी ने साफ शब्दों में कहा कि जिले में संगठित अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।उन्होंने कहा कि संगठित अपराध केवल कानून व्यवस्था को ही प्रभावित नहीं करते बल्कि समाज में भय का माहौल भी पैदा करते हैं। इसलिए ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। एसपी राठौड़ ने कहा कि पुलिस विभाग आधुनिक तकनीक और खुफिया तंत्र की मदद से अपराधियों तक पहुंचेगा और उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा।शराब और डोडा तस्करी पर सख्त कार्रवाईसिरोही जिला लंबे समय से शराब और डोडा तस्करी के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। इस विषय पर बात करते हुए एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि तस्करी के नेटवर्क को तोडऩे के लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि अवैध तस्करी को रोका जा सके। एसपी ने कहा कि तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।मुखबिर तंत्र को किया जाएगा मजबूतअपराध नियंत्रण के लिए खुफिया जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एसपी राठौड़ ने कहा कि पुलिस का मुखबिर तंत्र मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुखबिर तंत्र के जरिए अपराधियों की गतिविधियों की समय रहते जानकारी मिल सकती है, जिससे पुलिस समय पर कार्रवाई कर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार गश्त बढ़ाएं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें।पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय पर जोरएसपी राठौड़ ने कहा कि पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि जनता का सहयोग मिलने से अपराध नियंत्रण में काफी मदद मिलती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। पुलिस प्रशासन हर सूचना को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करेगा।इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस थानों में आने वाले लोगों के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए।पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में प्रयासएसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की प्रकृति बदल रही है और अपराधी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में पुलिस को भी आधुनिक तकनीक का उपयोग करना जरूरी है।उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग तकनीकी संसाधनों का अधिक उपयोग करेगा ताकि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही साइबर अपराधों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा क्योंकि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं।यातायात व्यवस्था सुधारने पर भी रहेगा ध्यानसिरोही शहर और जिले के प्रमुख मार्गों पर बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए एसपी राठौड़ ने कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाएगा।उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। इसका उद्देश्य सडक़ दुर्घटनाओं को कम करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।महिला सुरक्षा पर विशेष ध्याननवनियुक्त एसपी ने कहा कि महिला सुरक्षा पुलिस विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि महिला हेल्पलाइन और पुलिस की अन्य सेवाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा ताकि जरूरत पडऩे पर महिलाओं को तुरंत सहायता मिल सके।

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तल्ख रुख के बीच आध्यात्मिक सरोवर में भी गोते लगा गए योगी आदित्यनाथ

जालोर। राजस्थान के जालोर जिले में स्थित ऐतिहासिक और आस्था के प्रमुख केंद्र सिरे मंदिर में सोमवार को रत्नेश्वर महादेव मंदिर के 375वें स्थापना महोत्सव के अवसर पर भव्य धार्मिक कार्यक्रम और धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर देशभर से संत-महात्मा, श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन रहा, जिसमें उन्होंने धर्म, संस्कृति, समाज और राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। धर्मसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने देश की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और सनातन धर्म की शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपरा से है। उन्होंने इस दौरान कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधते हुए राम मंदिर आंदोलन, राम सेतु और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर तीखे बयान दिए। उन्होंने कहा कि यदि देश की आजादी के बाद तत्कालीन सरकारें चाहतीं, तो अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बहुत पहले बन सकता था। लेकिन उस समय की सरकारों ने इस विषय पर सकारात्मक पहल करने के बजाय उल्टी पैरवी की और राम के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े किए। अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर भारत की करोड़ों जनता की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर देश की स्वतंत्रता के तुरंत बाद ही बन सकता था, लेकिन उस समय की सरकारों की नीतियों के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि उस समय कुछ लोगों ने राम सेतु को तोडऩे तक का प्रयास किया और सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर यह कहा गया कि भगवान राम का कोई अस्तित्व नहीं है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन्होंने राम और कृष्ण के अस्तित्व को नकारा, आज समय ने उन्हें जवाब दे दिया है। जिन लोगों ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाया, उन्हें आज जनता ने नकार दिया है। प्रभु की कृपा से आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है और यह भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत की आस्था और संस्कृति को कभी दबाया नहीं जा सकता। समय-समय पर आने वाली चुनौतियों के बावजूद सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा हमेशा मजबूत होकर उभरती है।सिरे मंदिर और रत्नेश्वर महादेव मंदिर का ऐतिहासिक महत्वजिले का सिरे मंदिर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यह मंदिर नाथ संप्रदाय की परंपरा से जुड़ा हुआ है और यहां हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। रत्नेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना लगभग 375 वर्ष पहले हुई थी और तब से यह क्षेत्र धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। मंदिर के स्थापना महोत्सव के अवसर पर हर वर्ष विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और संत सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं। इस बार 375वें महोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में भव्य आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी संत-महात्मा और श्रद्धालु पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए उमड़ती रही। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भजन-कीर्तन और प्रवचन का भी आयोजन किया गया।आध्यात्मिक शक्ति की परंपरा का किया उल्लेखधर्मसभा के दौरान योगी आदित्यनाथ ने भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की संत परंपरा सदियों से समाज को मार्गदर्शन देती आई है। उन्होंने कहा कि नाथ संप्रदाय की परंपरा में 9 नाथ और 84 सिद्धों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि इन संतों की आध्यात्मिक शक्ति और तपस्या के कारण ही भारत की आध्यात्मिक चेतना आज भी जीवित है। योगी ने कहा कि इन संतों की सूक्ष्म दृष्टि और कृपा से समाज को हमेशा सकारात्मक दिशा मिलती रहती है। 9 नाथ और 84 सिद्धों की परंपरा अजर-अमर है। यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक है। इनके आशीर्वाद से समाज में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। संतों की शिक्षाएं समाज को जोडऩे का कार्य करती हैं और लोगों को धर्म, सेवा और परोपकार की प्रेरणा देती हैं।राजा मानसिंह के योगदान की सराहना कीअपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने रत्नेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान देने वाले राजा मानसिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय राजा मानसिंह ने इस मंदिर के निर्माण और विकास में जो सहयोग दिया, वह एक महान कार्य था। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जब राजाओं और शासकों ने धर्म और समाज की सेवा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। रत्नेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण भी उसी परंपरा का एक उदाहरण है। योगी ने कहा कि किसी भी महान कार्य के लिए यदि सकारात्मक मानसिकता से योगदान दिया जाए, तो वह योगदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। समाज और आने वाली पीढय़िां उसे हमेशा याद रखती हैं।समाज को तोडऩे वाली राजनीति पर जताई चिंताअपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने समाज में बढ़ते जातिवाद और विभाजनकारी राजनीति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जातिवाद समाज को कमजोर करता है और लोगों के बीच दूरी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि सभी लोग मिलकर काम करें और आपसी भाईचारे को बढ़ावा दें। योगी ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर आधारित रही है। जातिवाद की राजनीति समाज को तोडऩे का काम करती है। हमें ऐसी मानसिकता से दूर रहना होगा और समाज को एकजुट करने की दिशा में प्रयास करना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समाज में एकता और सदभाव बनाए रखने के लिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें।कार्यक्रम में संत-महात्माओं का रहा सानिध्यरत्नेश्वर महादेव मंदिर के 375वें महोत्सव के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में कई संत-महात्माओं का सानिध्य भी प्राप्त हुआ। इस दौरान मंच पर विभिन्न संतों और धार्मिक गुरुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से गंगानाथ महाराज, योगी नरहरिनाथ, संध्यानाथ महाराज, गिरवरनाथ महाराज, योगी काशीनाथ, योगी रूपनाथ महाराज, केशवनाथ महाराज, योगी पंचमनाथ, योगी सुंदराईनाथ महाराज, नारायणनाथ महाराज, मंगलाईनाथ महाराज, विक्रमनाथ महाराज और

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वन्यजीवों के हलक तर करने पहुंचा एक लाख लीटर पानी

वन्यजीवों के हलक तर करने पहुंचा एक लाख लीटर पानी 26 टैंकरों के माध्यम से पहल ग्रुप का सराहनीय कार्य सिरोही। शहर में मानवता और प्रकृति प्रेम की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली है। भीषण गर्मी के बीच वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए पहल ग्रुप सिरोही ने एक बार फिर सराहनीय कदम उठाया है। हर साल की तरह इस वर्ष भी ग्रुप के सदस्यों ने वाडा खेड़ा जोड़ क्षेत्र में स्थित नाड़ी में पानी की व्यवस्था कर वन्यजीवों को बड़ी राहत दी है। पहल ग्रुप के सदस्यों की ओर से एक साथ 26 पानी के टैंकरों के माध्यम से लगभग एक लाख लीटर पानी वाडा खेड़ा की नाड़ी में डाला गया। गर्मी के मौसम में जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में पानी के स्रोत सूखने लगते हैं, ऐसे में यह प्रयास वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है। केवल पानी की ही व्यवस्था नहीं की गई, बल्कि वन्यजीवों के भोजन का भी ध्यान रखा गया। ग्रुप की ओर से ककड़ी, गाजर और आलू जैसी खाद्य सामग्री भी वहां रखवाई गई, ताकि गर्मी के दिनों में पानी के साथ-साथ वन्यजीवों को भोजन भी मिल सके। ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि यह अभियान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। आज से अगले करीब तीन महीनों तक प्रतिदिन एक पानी का टैंकर इस नाड़ी में डलवाया जाएगा, जिससे भीषण गर्मी के दौरान वन्यजीवों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े। सालभर समाजसेवा में सक्रिय रहता है पहल ग्रुप पहल ग्रुप केवल गर्मियों में पानी की व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है। यह समूह पूरे साल विभिन्न सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाता है। ग्रुप की ओर से शहर में जरूरतमंद लोगों, पशुओं और वन्यजीवों की सहायता के लिए समय-समय पर कई पहल की जाती हैं। शहर में जगह-जगह लगाए गए पानी के कैंपर गर्मी के मौसम में आमजन को राहत देने के लिए शहर के अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए पानी के कैंपर भी इसी ग्रुप की पहल का परिणाम हैं। इन कैंपरों से राहगीरों और जरूरतमंद लोगों को पीने का ठंडा पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। पहल ग्रुप का संचालन सहायक उप निरीक्षक सचेंद्र रतनू के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस समूह में करीब 95 सदस्य जुड़े हुए हैं। सभी सदस्य हर महीने स्वेच्छा से अंशदान एकत्रित करते हैं और इसी राशि से सामाजिक व सेवा कार्यों को अंजाम दिया जाता है। यह राशि वन्यजीवों, गायों और जरूरतमंद असहाय लोगों की मदद में खर्च की जाती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सदस्य रहे मौजूद वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था के इस कार्यक्रम में ग्रुप के सभी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान सचेंद्र रतनू, भेरूपाल सिंह (अधिवक्ता), हेमंत पुरोहित, हरदयाल सिंह, शैतान खरोर, गणपत लाल, अमजद खान, सज्जन सिंह, एम.पी. सिंह, करण सिंह, अशोक माली, हनुमान प्रजापत, दिग्विजय सिंह, तख्तसिंह पुरोहित, भरत माली, विनोद मालवीय, मुकेश खंडेलवाल, कमलेश सोनी, महादेव, प्रदीप वैष्णव, मंछाराम, किशन माली, भंवर माली, लालचंद खंडेलवाल, राहुल माली, अशोक माली, भैराराम और मांगीलाल रावल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। पहल ग्रुप का यह प्रयास न केवल वन्यजीवों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि समाज के सामने सेवा, संवेदना और प्रकृति संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। ऐसे कार्य यह संदेश देते हैं कि यदि समाज के लोग मिलकर पहल करें, तो पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए बड़े बदलाव संभव हैं।

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10 मार्च को मनाई जाएगी शीतला सप्तमी, 9 मार्च को रांधन छठ

सिरोही। शीतला सप्तमी अर्थात चैत्र कृष्ण सप्तमी मंगलवार तथा रांधण छठ- चैत्र कृष्ण षष्ठी सोमवार को मान्य रहेगी। ज्योतिष एवं वास्तुविद आचार्य प्रदीप दवे एवं शीतला माता मंदिर पुजारी ओमप्रकाश वैष्णव ने बताया कि शीतला माता पूजन का शुभ मुहूर्त प्रात: 4-15 से 9-01, 9-52 से 2-16, सायं 3-44 से 5-12 बजे एवं सायं गोधुलिक वेला में 06-32 से रात्रि 09-10 तक श्रेष्ठ है, साथ ही इस बार वीदर (बिच्छुडा) पेटा में होने एवं मंगलवार सुषुप्त होने तथा सप्तमी तिथि पूजन की मान्यता होने से सप्तमी तिथि को पूरे दिन पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा।इस समय बनाए बासोड़ाशीतला माता का महाप्रसाद (भोग) बनाने का शुभ मुहूर्त चैत्र कृष्ण षष्ठी (रांधण षठ) सोमवार प्रात: शुभ वेला में 6-57 से 8-25, 9-53 से 11-21, मध्यान्ह 12-25 से 01-12 अभिजित मुहुर्त एवं सायं 04-16 से 06-40 बजे तक शुभ वेला में श्रेष्ठ रहेगा।शीतला माताजी के पूजन के विशेष नियमशीतला माता को ज्योत नहीं होती है। कपूर व अगरबत्ती नहीं जलाना चाहिए। दही, म_ा, छाछ आदि खाने-पीने की सामग्री माताजी के सामने प्रसाद के रुप में चढाई जाती है। अत: खाने-पाने पीने की सामग्री माताजी के सिर पर गिरानी या ढोलनी नहीं चाहिए। परिवार की सुरक्षा के लिए श्रीफल हमेशा अखण्ड चढता है अत: श्रीफल या नारियल को तोड़ कर नहीं चढाएं। श्रीफल (नारियल) पर यथाशक्ति भेंट रख कर माताजी को अर्पण करने से समृद्धता बढती है तथा अकाल मृत्यु का नाश होता है। शीतला माता के हाथ में झाडू है, इसका मतलब बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वच्छता का ध्यान रखना जरुरी हैबासी भोजन का वैज्ञानिक महत्ववैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो इस मौसम में खाना एक या दो दिन पड़ा रहता है तो खाने पर फफूंद लगनी शुरु हो जाती है। वैज्ञानिक इस फफूंद को ‘पेनासिलीन’ नाम से पुकारते हैं। इस फफूंद को माइक्रोस्कोप द्वारा आसानी से देखा जा सकता है। इस प्रकार प्राकृतिक रुप से पैदा हुई फफूंद शरीर में जाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा होती है। जिससे चेचक, घमोरिया, फोड़े-फुन्सी व गर्मी जनित बीमारियां नहीं होती है। आजकल इस फफूंद के इंजेक्शन बाजार में पेनिसिलिन के नाम से उपलब्ध है। जबकि प्राचीन काल से ऐसी मान्यता चली आ रही है कि शीतला माता व ओरी माता को प्रसन्न करने से चेचक नहीं होती है। आज भी माताजी के मंदिर में जाकर शीतला व ओरी माता का पूजन कर बासोड़े का भोग लगाते है।

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