
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने रविवार शाम अपने उम्मीदवारों की पहली बड़ी सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 284 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, जो राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर पार्टी की रणनीति को स्पष्ट करते हैं। कांग्रेस द्वारा जारी इस सूची में कई बड़े और चर्चित चेहरों को टिकट दिया गया है। खासतौर पर लोकसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को एक बार फिर बहरामपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है। यह सीट उनके लिए पारंपरिक रूप से मजबूत मानी जाती रही है और पार्टी को उम्मीद है कि वे यहां से जीत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा मालातीपुर सीट से मौसम नूर को उम्मीदवार बनाया गया है। मौसम नूर का नाम भी राज्य की राजनीति में जाना-पहचाना है और उन्हें टिकट देकर कांग्रेस ने अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।
कांग्रेस की रणनीति और चुनावी समीकरण
कांग्रेस की इस सूची को देखते हुए साफ है कि पार्टी ने अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। कई सीटों पर पुराने और अनुभवी नेताओं को मौका दिया गया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में युवा उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है, लेकिन इस बार पार्टी गठबंधन और स्थानीय समीकरणों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मजबूत मुकाबले के बीच अपनी पहचान बनाए रखना है। हालांकि, पार्टी को उम्मीद है कि कुछ क्षेत्रों में वह निर्णायक भूमिका निभा सकती है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को केरल में भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी। उन्होंने पलक्कड़ में अपनी पहली रैली को संबोधित किया, जिसके बाद त्रिशूर में भी जनसभा की। पलक्कड़ की रैली में पीएम मोदी ने राज्य की मौजूदा राजनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केरल दशकों से “मतलबी राजनीति” के दो मुखौटों के बीच फंसा हुआ है।
LDF और UDF पर सीधा हमला
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा: “एक तरफ LDF है, दूसरी तरफ UDF; एक तरफ कम्युनिस्ट, दूसरी कांग्रेस। एक करप्ट, दूसरा महा-करप्ट। एक कम्युनल, दूसरा महा-कम्युनल।” उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही गठबंधन केवल वोट बैंक की राजनीति करते हैं और राज्य के विकास के लिए ठोस काम नहीं करते। पीएम मोदी ने कहा कि LDF और UDF दोनों ही पार्टियों को भाजपा से डर लगता है क्योंकि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो उनके “काले कारनामों” का खुलासा हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा केरल में एक नया राजनीतिक विकल्प देने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य के विकास के लिए काम करेगी पलक्कड़ के बाद प्रधानमंत्री त्रिशूर पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 34 मिनट तक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और केरल में भाजपा के विस्तार की बात कही। त्रिशूर की रैली में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने भाजपा के उत्साह को बढ़ाया है। पार्टी नेताओं का मानना है कि इस बार केरल में भाजपा को पहले से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
दो राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर
पश्चिम बंगाल और केरल—दोनों राज्यों में राजनीति का परिदृश्य अलग है, लेकिन दोनों ही जगह चुनावी माहौल गर्म हो चुका है।
- पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है।
- केरल में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक प्रचार अभियान चला रही है।
जहां बंगाल में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी रणनीति स्पष्ट हो रही है, वहीं केरल में बड़े नेताओं की रैलियों के जरिए माहौल बनाया जा रहा है।











