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40 दिन की जंग के बाद थमा तूफ़ान: अमेरिका-ईरान संघर्षविराम से दुनिया को राहत

खामेनेई की हत्या से भड़की आग, अब बातचीत की ओर बढ़े कदम वाशिंगटन/तेहरान । मध्य पूर्व में पिछले 40 दिनों से जारी भीषण तनाव के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम की घोषणा हो गई है। यह संघर्ष ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद शुरू हुआ था, जिसने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया था। अब दोनों देशों के बीच अस्थायी शांति स्थापित होने से वैश्विक स्तर पर राहत की सांस ली जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो सप्ताह के लिए टालने की घोषणा की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए बताया कि यह निर्णय क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों के तहत लिया गया है।ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को काफी हद तक हासिल कर चुका है और अब कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने इसे “दोनों पक्षों का संघर्षविराम” बताया, जो भविष्य की वार्ता के लिए रास्ता खोल सकता है। ईरान की शर्त: होर्मुज जलडमरूमध्य रहेगा खुला ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने संघर्षविराम की पुष्टि करते हुए कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखेगा। यह जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए लाइफलाइन माना जाता है, और इसके बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता था। ईरान के इस आश्वासन को संघर्षविराम की सबसे अहम शर्तों में से एक माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। शरीफ ने घोषणा की कि 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक शांति वार्ता शुरू होगी। उन्होंने इसे “ऐतिहासिक अवसर” बताते हुए दोनों पक्षों से स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर का भी इस कूटनीतिक पहल में अहम योगदान रहा, जिनकी अपील पर दोनों पक्षों ने संयम बरता। 10 सूत्रीय प्रस्ताव बना समझौते की नींव सूत्रों के अनुसार, ईरान की ओर से प्रस्तुत 10-सूत्रीय प्रस्ताव को वार्ता का आधार बनाया गया है। इस प्रस्ताव में क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, सैन्य गतिविधियों पर नियंत्रण और प्रतिबंधों में ढील जैसे मुद्दे शामिल हैं।  ट्रंप प्रशासन ने इस प्रस्ताव को “व्यावहारिक और संतुलित” बताते हुए अधिकांश बिंदुओं पर सहमति जताई है। इससे संकेत मिलते हैं कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद अब सुलझने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इजरायल का अलग रुख: लेबनान में अभियान जारी रहेगा जहां एक ओर अमेरिका और ईरान संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं, वहीं इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह लेबनान में अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा। इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) का कहना है कि उसकी कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है और यह ईरान-अमेरिका संघर्षविराम से अलग मुद्दा है। इससे संकेत मिलते हैं कि क्षेत्र में पूरी तरह शांति स्थापित होना अभी बाकी है। ईरान की चेतावनी: उल्लंघन हुआ तो मिलेगा करारा जवाब ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ किया है कि यह संघर्षविराम स्थायी शांति का संकेत नहीं है। यदि किसी भी पक्ष ने समझौते का उल्लंघन किया, तो ईरान कड़ी प्रतिक्रिया देगा।ईरानी नेतृत्व ने यह भी कहा कि वार्ता केवल एक अवसर है, लेकिन देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। 40 दिन की जंग: तनाव चरम पर, दुनिया चिंतित 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष धीरे-धीरे वैश्विक चिंता का विषय बन गया था। तेल की कीमतों में उछाल, समुद्री मार्गों पर खतरा और सैन्य गतिविधियों में तेजी ने पूरी दुनिया को अस्थिर कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और लंबा चलता, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गंभीर पड़ता।