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CBSE बोर्ड 10वीं सेशन-1 का रिजल्ट जारी:UMANG एप पर चेक कर सकते हैं मार्कशीट; 15 मई से होंगे सेशन 2
राजनीति

CBSE बोर्ड 10वीं सेशन-1 का परिणाम घोषित: UMANG एप पर चेक करें मार्कशीट; सेशन 2 15 मई से शुरू

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 10वीं कक्षा के सेशन 1 का परिणाम आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है। इस वर्ष 25 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने इस परीक्षा में भाग लिया। उम्मीदवार अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट results.cbse.nic.in और UMANG ऐप के माध्यम से देख सकते हैं। सेशन 1 की परीक्षाएं देशभर के 8,000 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गईं। छात्रों को पास करने के लिए थ्योरी और आंतरिक आकलन दोनों में 33% से कम नहीं अंक लाना आवश्यक है। बोर्ड ने इस वर्ष 10वीं कक्षा के लिए नया टू-सेशन बोर्ड परीक्षा प्रणाली अपनाई है। पहला सत्र 17 फरवरी से 11 मार्च 2026 तक समाप्त हुआ, जबकि सेशन 2 के परीक्षा 15 मई से शुरू होकर 1 जून 2026 तक आयोजित की जाएंगी। सेशन 2 की परीक्षाएं उन छात्रों के लिए हैं जो अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं या सेक्शनल फेल हैं। इसमें सुधार के लिए अधिकतम तीन अंक सुधारने का अवसर मिलेगा। यदि किसी छात्र ने दो विषयों में फेल किया है तो वे कंपार्टमेंट कैटेगरी में आ सकते हैं और सेशन 2 की परीक्षा दे सकते हैं। तीन या उससे अधिक विषयों में फेल छात्र अगली मुख्य परीक्षा 2027 में देंगे। CBSE बोर्ड इस बार मेरिट लिस्ट या टॉपर घोषित नहीं करेगा। बोर्ड ने सभी स्कूलों व संस्थानों को निर्देश दिया है कि किसी भी छात्र को स्कूल या जिले का टॉपर घोषित न करें। यह नई नीति छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम करने के उद्देश्य से लागू की गई है। सेशन 1 और सेशन 2 परीक्षा दोनों पूरे सिलेबस पर आधारित होती हैं और दोनों परीक्षाओं का प्रारूप समान रहता है। छात्रों को दोनों सत्रों में एक ही परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देनी होगी और प्रैक्टिकल परीक्षाएं केवल एक बार ही दिसंबर-जनवरी के महीने में सम्पन्न होंगी। सेशन 2 की परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को अलग से रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा, हालांकि, यदि वे दोनों परीक्षाओं में भाग लेते हैं तो फीस एक साथ रखी जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि 10वीं के लिए अब कोई सप्लीमेंट्री परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, जिससे परीक्षाओं की व्यवस्था और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। छात्र UMANG ऐप पर अपना रिजल्ट ऐसे देख सकते हैं: ऐप खोलें, CBSE सेक्शन में जाएं, 10वीं सेशन 1 रिजल्ट विकल्प चुनें और अपना रोल नंबर भर कर परिणाम डाउनलोड करें। परीक्षा में हिस्सा लेने वाले सभी छात्र अपने स्कोरकार्ड की डिजिटल कॉपी सुरक्षित रख सकते हैं। बोर्ड ने कहा है कि 2025-26 से लागू इस नए टू बोर्ड सिस्टम के द्वारा छात्रों को बेहतर प्रदर्शन के कई विकल्प मिलेंगे, जिससे पढ़ाई में मनोबल भी बढ़ेगा और परिणामों में सुधार होगा। अधिक जानकारी और अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट तथा UMANG ऐप नियमित चेक करते रहें। 10वीं कक्षा सेशन 1 के परिणाम प्रकाशित होने के साथ ही शिक्षा जगत में नई उम्मीदें जग गई हैं और छात्र आगामी सेशन 2 के लिए तैयारियां तेज कर रहे हैं।

T.K. Radha: from Kerala to Oppenheimer
लाइफस्टाइल

केरल से हॉलीवुड तक: टी.के. राधा ने कैसे तय किया ‘ओपेनहाइमर’ का सफर

क्या आप जानते हैं कि 1960 के दशक में केरल की एक महिला ने डॉ. रॉबर्ट जे ओपेनहाइमर से मुलाकात की थी? टी.के. राधा नाम की यह महिला विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में एक प्रतिभाशाली हस्ती थीं, जिनका जीवन और काम आज भी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। टी.के. राधा का जन्म केरल में हुआ था, जहां उन्होंने अपने शिक्षण जीवन की शुरुआत की। उनके परिवार ने शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी, जिससे वे बचपन से ही अध्ययन में रुचि रखने लगीं। विज्ञान के प्रति उनकी गहरी दिलचस्पी ने उन्हें इंजीनियरिंग और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। 1960 के दशक में, जब महिलाओं का STEM क्षेत्रों में प्रवेश सीमित था, तब भी राधा ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से कई बाधाओं को पार किया। उन्होंने कई शोध परियोजनाओं में हिस्सा लिया और विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उसी समय उनका डॉ. रॉबर्ट जे ओपेनहाइमर से मिलना हुआ, जो “परमाणु बम के पिता” के रूप में प्रसिद्ध थे। ओपेनहाइमर और राधा की मुलाकात एक महत्वपूर्ण अवसर थी, जिसने उन्हें विश्व विज्ञान समुदाय के करीब आने में मदद की। यह बातचीत और अनुभव उन्हें और भी अधिक प्रेरणा देने वाला साबित हुआ। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मानसिक दृढ़ता, समर्पण और ज्ञान की भूख से कोई भी व्यक्ति बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। टी.के. राधा के योगदान को विज्ञान व तकनीकी जगत में सम्मान मिला और उनकी उपलब्धियों को याद किया जाता है। आज के समय में, जब STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, उनकी कहानी नयी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है कि वे भी अपने सपनों को साकार कर सकें। इस प्रकार, टी.के. राधा न केवल केरल की गौरवशाली पुत्री हैं, बल्कि पूरे भारत की उन महिलाओं में से एक हैं जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनकी कहानी सुनना और साझा करना आवश्यक है, ताकि आने वाले वक्त में और भी प्रतिभाएं उनका अनुसरण कर सकें।

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