गगनयान मिशन का दूसरा क्रू मॉड्यूल टेस्ट सफल:चिनूक हेलिकॉप्टर से 3 किमी ऊंचाई से छोड़ा गया; पैराशूट के साथ समुद्र में सेफ लैंडिंग
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गगनयान मिशन के दूसरे क्रू मॉड्यूल टेस्ट में सफलता हासिल: चिनूक हेलिकॉप्टर से 3 किमी ऊंचाई से छोड़ा गया, पैराशूट के सहारे समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग

  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की है। शुक्रवार को ISRO ने दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-1) सफलता पूर्वक पूरा किया। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य पैराशूट प्रणाली की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता की जांच करना था, जो मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी में अहम भूमिका निभाएगा। टेस्ट के दौरान लगभग 5.7 टन वजनी डमी क्रू कैप्सूल को वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से 3 किलोमीटर ऊंचाई से छोड़ा गया। कैप्सूल ने पैराशूट के माध्यम से सुरक्षित रूप से समुद्र में लैंड किया। यह टेस्ट पिछले आठ महीनों में दूसरा एयर ड्रॉप टेस्ट था, पहला टेस्ट 24 अगस्त 2025 को संपन्न हुआ था। यह परीक्षण गगनयान मिशन की तैयारी की दिशा में एक बड़ा कदम है। गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है, जिसमें 2027 में तीन भारतीय पायलट अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। ये पायलट तीन दिन तक 400 किलोमीटर की कक्षा में रहेंगे, उसके बाद स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित रूप से लैंड होगा। मिशन की कुल लागत लगभग 20,193 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। फिलहाल इसरो ने वायुसेना के चार पायलटों को चुना है, जिनमें ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं। शुभांशु शुक्ला पहले ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताकर अपने अनुभव से इस मिशन को मजबूती प्रदान कर चुके हैं। गगनयान मिशन की तैयारियां लॉन्च व्हीकल (HLVM3) तैयार: इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले इस रॉकेट की सिक्योरिटी और अन्य टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। इसे पहले GSLV Mk III के नाम से जाना जाता था जिसे अपग्रेड किया गया है। एस्ट्रोनॉट्स का चयन और प्रशिक्षण: चयनित पायलटों ने भारत और रूस में व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसमें सिम्युलेटर से लेकर मेडिकल और स्पेस संबंधित अन्य तैयारियां शामिल हैं। क्रू और सर्विस मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल (जहां पायलट बैठेंगे) और सर्विस मॉड्यूल (पावर, प्रोपल्शन, लाइफ सपोर्ट सिस्टम) विकास के अंतिम चरण में हैं। इसकी टेस्टिंग एवं इंटीग्रेशन शेष है। क्रू एस्केप सिस्टम: लॉन्चिंग के दौरान आकस्मिक स्थिति के लिए क्रू मॉड्यूल को तुरंत अलग करने के लिए सॉलिड मोटर्स पर आधारित सिस्टम सफलतापूर्वक विकसित और परीक्षण किए गए हैं। रिकवरी टेस्टिंग: ISRO और भारतीय नौसेना ने अरब सागर में असमय लैंडिंग के बाद क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी के लिए परीक्षण किए हैं, साथ ही ऑस्ट्रेलिया के साथ बैकअप रिकवरी के लिए समझौता हुआ है। मानव रहित मिशन के लिए रोबोट: 2020 में ISRO ने व्योममित्र नामक ह्यूमनोइड रोबोट का निर्माण किया है, जो माइक्रोग्रेविटी में प्रयोगों और मॉड्यूल की टेस्टिंग करेगा। भविष्य की योजनाओं में, गगनयान मिशन के लिए इसरो दो मानव रहित टेस्ट फ्लाइट भेजेगा, उसके पश्चात एक रोबोट मिशन और फिर चौथी फ्लाइट में मानव को भेजा जाएगा। पहली मानव रहित टेस्ट फ्लाइट वर्ष के अंत तक भेजे जाने की संभावना है। इसरो के वैज्ञानिक और तकनीकी दल गगनयान मिशन को सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, जो भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में एक बड़ा कदम साबित होगा। इस तरह के परीक्षण मिशन की सफलता के लिए आवश्यक हैं क्योंकि वे वास्तविक परिस्थितियों में प्रणालियों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं। इससे मिशन की सुरक्षा और सफलता की संभावनाएं बढ़ती हैं। गगनयान मिशन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिसने देश की क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है।