1.22 lakh Anganwadi workers in Rajasthan get ₹1,000 each through DBT
राष्ट्रीय

राजस्थान में 1.22 लाख आंगनवाड़ी कर्मियों को DBT के माध्यम से 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान

जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री ने हाल ही में आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण और विकास को बेहतर बनाने के लिए कई अहम पहलाओं की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों पर तीन से छह वर्ष के बच्चों को सप्ताह में पांच दिन गर्म दूध प्रदान किया जा रहा है। यह सेवा ‘अमृत आहार योजना’ के तहत दी जा रही है, जिसका उद्देश्य बच्चों के स्वस्थ पोषण को सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों की भौतिक संरचना को बेहतर बनाने के लिए भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य जारी है। इसके साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला पर्यवेक्षकों को स्मार्टफोन वितरित किए गए हैं, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग बेहतर हो सके। यह कदम डिजिटल माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन को आसान और पारदर्शी बनाने हेतु उठाया गया है। राज्य सरकार ने कुल 1.22 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सीधे लाभ हस्तांतरण (DBT) के तहत 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान किया है। यह राशि उनके कार्यों के सम्मान स्वरूप प्रदान की गई है, ताकि वे अपने परिवार और कार्य क्षेत्र में बेहतर सेवाएं दे सकें। आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी इलाकों में बच्चों और महिलाओं के कल्याण का प्रमुख माध्यम हैं, जहां पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अमृत आहार योजना के लाभ सप्ताह में पांच दिन बच्चों को गर्म दूध उपलब्ध कराना। बच्चों के संपूर्ण पोषण में सुधार। आंगनवाड़ी केंद्रों के स्तर सुधार के लिए भवनों का नवीनीकरण। डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सेवाओं का बेहतर प्रबंधन। सरकार का मानना है कि इन पहलों से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति बेहतर होगी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा। स्मार्टफोन वितरण से कार्य प्रक्रियाओं में गति आएगी तथा रिपोर्टिंग और निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी। राजस्थान में यह कदम सरकार की समर्पित और निरंतर प्रयासों का नतीजा है, जो बाल विकास परियोजनाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय अधिकारियों को आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए हैं। इस तरह की पहलों से राजस्थान में मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित होगा और आने वाले वर्षों में बच्चों के विकास और समग्र स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखा जाएगा।