
नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के असम दौरे के दौरान वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी गार्ड को श्रद्धांजलि न देने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ी आलोचना की है और कहा है कि ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर राष्ट्रीय धरोहरों का ठीक से सम्मान किया जाना चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने एक प्रेस बयान में कहा कि गार्ड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन शूरवीरों में से एक हैं, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना जीवन न्योछावर किया। इसलिए, प्रधानमंत्री का उससे सम्मानपूर्वक विदाय न करना न सिर्फ दुखद है, बल्कि यह जनता के भावनाओं के साथ खिलवाड़ जैसा है। पार्टी का कहना है कि सरकार को इस तरह के मामलों में ज़्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
आधिकारिक कार्यक्रमों में नेताओं द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देना एक पारंपरिक और महत्वपूर्ण कर्तव्य माना जाता है। इससे न केवल उनके योगदान का सम्मान होता है, बल्कि नए पीढ़ी को भी उनके बलिदान की जानकारी मिलती है। कांग्रेस ने सुझाव दिया है कि अगली बार इस तरह के दौरे में सभी प्रमुख हस्तियों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि कोई महत्वपूर्ण चरण अनदेखा न रह जाए।
वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, असम सरकार ने कहा है कि पूरे कार्यक्रम में सभी आवश्यक सरकारी व्यावस्थाएं की गई थीं और प्रधानमंत्री का दौरा सफल रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले ने एक बार फिर यह दर्शाया है कि इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान को लेकर राजनीतिक दलों में मतभेद हो सकते हैं। ऐसे समय में जब देश स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव मना रहा है, नेताओं को चाहिए कि वे सभी स्वतंत्रता सेनानियों को आवश्यक सम्मान दें और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करें।
हालांकि, कांग्रेस का यह आंदोलन असम में राजनीतिक हलचल को भी तेज कर सकता है क्योंकि राज्य आगामी चुनावों के लिए भी तैयारियां कर रहा है। इस मुद्दे पर और भी बयान आने की संभावना है।
इस विवाद ने देशभर में स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान की भावना को एक बार पुनः जगाया है और उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर भविष्य में इस तरह की चूक न हो, इसका विशेष ध्यान रखेगी।












