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भारत के 60% हाथी सिर्फ 3 राज्यों में! जानिए क्यों खास हैं कर्नाटक, असम और तमिलनाडु

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नई दिल्ली: वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने देशभर में हाथियों की पहली बार डीएनए आधारित समकालिक गणना जारी की है। इस अध्ययन में सामने आया है कि भारत के लगभग 60 प्रतिशत हाथी तीन राज्यों – कर्नाटक, असम और तमिलनाडु – में पाए जाते हैं। यह रिपोर्ट हाथी संरक्षण और उनकी आवासीय स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हाथी भारत का राष्ट्रीय धरोहर प्राणी है और वन्यजीवन में इसकी अहमियत न केवल पारिस्थितिक तंत्र के लिए, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश में हाथियों की संख्या और उनकी आबादी पर नजर रखना इनके संरक्षण के लिए आवश्यक होता है। इस उद्देश्य से वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने नवीनतम तकनीकों का प्रयोग करते हुए डीएनए आधारित पुनरावृत्ति परीक्षण के माध्यम से देशभर में हाथियों की संख्या का सटीक आकलन किया है।

इस अध्ययन के अनुसार, कुल हाथी आबादी में कर्नाटक का हिस्सा सबसे बड़ा है, जिसके बाद असम और तमिलनाडु का स्थान आता है। कर्नाटक में विशाल वनों की उपलब्धता और संरक्षित क्षेत्रों की संख्या अधिक होने से हाथियों की संख्या यहाँ सर्वाधिक देखी गई है। असम, जो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, भी हाथी संरक्षण के लिए जाना जाता है, जबकि तमिलनाडु के जंगलों में भी हाथियों की अच्छी-खासी आबादी मौजूद है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में हाथियों की संख्यात्मक समीक्षा का यह पहला बड़ा प्रयास है जो डीएनए आधारित तकनीक पर आधारित है। इससे पारंपरिक सर्वेक्षणों की तुलना में अधिक विश्वसनीय और सटीक आंकड़े प्राप्त हुए हैं। इससे वन विभाग को संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी जिससे हाथियों के संघर्ष को कम किया जा सकेगा और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, “हाथियों की सही संख्या का आंकलन उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। हमारा लक्ष्य हाथियों और मनुष्यों के बीच संतुलन बनाए रखना और इनके आवासों का संरक्षण करना है।” उन्होंने यह भी बताया कि आगे भी इसके जैसे आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वन्यजीवन की गहन निगरानी जारी रखी जाएगी।

इस रिपोर्ट ने जहां हाथी संरक्षण में एक नया अध्याय जोड़ा है, वहीं यह नीति निर्माताओं के लिए भी दिशा-निर्देश प्रदान करती है कि किस प्रकार से वन्यजीव संरक्षण योजनाओं में सुधार किया जाए। कर्नाटक, असम और तमिलनाडु सरकारों को विशेष रूप से अपने-अपने राज्यों में हाथियों के आवासों को सुरक्षित करने और मानव-हाथी टकराव को कम करने के लिए तत्पर रहना होगा।

देश में हाथी आबादी बढ़ाने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करना आवश्यक है ताकि जैव विविधता बनी रहे और हाथी संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें। यह अध्ययन वन्यजीव संरक्षण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व को दर्शाता है और कहा जा सकता है कि भविष्य में ऐसे आधुनिक अध्ययन और भी ज्यादा प्रभावी साबित होंगे।

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