Hot News

आबूराज को स्वच्छता में रोल मॉडल बनाएंगे- गुप्ता

Share News!

आबूराज। आबूराज यानि माउंट आबू जो प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी विशेष पहचान रखता है, अब स्वच्छता के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत नगर पालिका आबूराज में आयोजित एक महत्वपूर्ण स्वच्छता कार्यशाला में प्रदेश के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री के स्वच्छता संकल्प को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर उतारना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यशाला में नगर पालिका के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। गुप्ता ने स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसे केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन-जन से जुड़ा राष्ट्रीय अभियान बताया। उन्होंने कहा कि आबूराज जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल की स्वच्छता सीधे प्रदेश और देश की छवि से जुड़ी होती है, इसलिए यहां विशेष ध्यान देना बेहद आवश्यक है। गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वयं स्वच्छता अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा करते हैं और हर सप्ताह व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर कार्यों की स्थिति की जानकारी लेते हैं। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पूरी ईमानदारी और तत्परता के साथ काम करने का आह्वान किया। स्वच्छ भारत मिशन की महत्ता को रेखांकित करते हुए गुप्ता ने कहा कि यह अभियान वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया था, जिसने देश में स्वच्छता के प्रति नई जागरूकता पैदा की है। इस अभियान के तहत देशभर में लगभग 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ, जिससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को बड़ी राहत मिली। कोरोना महामारी के दौरान इन शौचालयों का महत्व और अधिक स्पष्ट हुआ, जब लोगों को घरों में ही रहना पड़ा। उन्होंने स्वच्छता और स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को भी उजागर किया। गुप्ता ने कहा कि गंदगी और अस्वच्छता के कारण पहले हर वर्ष लाखों लोग बीमारियों का शिकार होते थे और कई लोगों की जान भी चली जाती थी। लेकिन अब स्वच्छता के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इन आंकड़ों में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण न केवल बीमारियों को कम करता है, बल्कि जीवन स्तर को भी बेहतर बनाता है, इसलिए हर नागरिक को इसे अपनी आदत में शामिल करना चाहिए।
कार्यशाला में निकायों की रैंकिंग व्यवस्था की भी जानकारी दी गई। गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को स्वच्छता के आधार पर चार श्रेणियों—ए, बी, सी और डी में विभाजित किया गया है। ए श्रेणी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले निकाय शामिल होंगे, जबकि बी श्रेणी में संतोषजनक कार्य करने वाले निकाय आएंगे। सी श्रेणी में सुधार की आवश्यकता वाले और डी श्रेणी में गंभीर लापरवाही वाले निकायों को रखा गया है। इस व्यवस्था से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और जवाबदेही तय होगी। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को स्वच्छता अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए गुप्ता ने निर्देश दिए कि हर घर से नियमित और समयबद्ध तरीके से कचरा एकत्र किया जाए। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग संग्रहित करना अनिवार्य किया जाए और सुबह 10 बजे से पहले यह कार्य पूरा कर लिया जाए। एक वाहन को अधिकतम 400 घरों तक ही सीमित रखने के निर्देश दिए गए, ताकि कार्य की गुणवत्ता बनी रहे।
इसके अलावा, सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने की बात कही गई। सामुदायिक शौचालयों और मूत्रालयों की सफाई दिन में कम से कम तीन बार सुनिश्चित करने, पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखने और उनके रखरखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा गया, ताकि लोग उनका अधिक से अधिक उपयोग करें।
व्यावसायिक क्षेत्रों में रात्रिकालीन सफाई को अनिवार्य बताते हुए कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया। उन्हें रेडियम जैकेट पहनने और निर्धारित सीमा में कार्य करने के निर्देश दिए गए। शहर के सभी खाली प्लॉटों की सफाई सुनिश्चित करने के लिए पहले सूचना जारी करने और फिर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
गुप्ता ने बाग-बगीचों, पार्कों और पर्यटन स्थलों की स्वच्छता और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर साफ-सफाई, हरियाली, बच्चों के झूले और अन्य सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए। इसके साथ ही सडक़ों, नालियों, डिवाइडरों और बिजली व्यवस्था के रखरखाव को भी स्वच्छता अभियान का हिस्सा बताया गया। अवैध मीट-मांस की दुकानों पर रोक लगाने और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। झीलों और तालाबों में गंदे पानी और सीवरेज के प्रवेश को रोकने तथा जल स्रोतों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अंत में गुप्ता ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से आबूराज न केवल पर्यटन, बल्कि स्वच्छता के क्षेत्र में भी पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है।

Shopping Cart
Scroll to Top
क्रिकेट के 73 नियम बदले