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🟢 बंगाल चुनाव: मतदाता सूची में नाम नहीं, फिर भी मिली ड्यूटी; जांच में जुटा चुनाव आयोग

पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों के बीच एक गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, लेकिन उन्हें चुनावी ड्यूटी के लिए नियुक्त किया गया है। इस स्थिति ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने जांच शुरू कर दी है। 🔍 क्या है पूरा मामला? राज्य के विभिन्न जिलों से मिली जानकारी के अनुसार, कई सरकारी कर्मचारियों—जिनमें केंद्रीय बलों के जवान, शिक्षक और अन्य कर्मी शामिल हैं—को चुनावी ड्यूटी सौंपी गई है। लेकिन जब उन्होंने मतदाता सूची में अपना नाम जांचा, तो वह उसमें मौजूद नहीं मिला। यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि चुनावी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों का खुद मतदाता सूची में होना जरूरी माना जाता है। 📍 बीरभूम से सामने आया मामला बीरभूम जिले के सिउड़ी-2 ब्लॉक के अनंतपुर गांव के निवासी शेख नजरुल इस्लाम का मामला प्रमुख रूप से सामने आया है। वह 1994 से CRPF में कार्यरत हैं वर्तमान में छत्तीसगढ़ में तैनात हैं उन्हें चुनावी ड्यूटी के लिए बंगाल बुलाया गया लेकिन पूरक मतदाता सूची में उनका नाम शामिल नहीं था। 🏫 शिक्षकों के मामले भी सामने आए इसी तरह मेदिनीपुर और बीरभूम के कुछ शिक्षकों के नाम भी मतदाता सूची से गायब पाए गए। प्रसेनजीत चक्रवर्ती मोहम्मद एनामुल हक दोनों को “फर्स्ट पोलिंग ऑफिसर” के रूप में बुलाया गया था, लेकिन उनका नाम मतदाता सूची में नहीं मिला। इससे उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वे खुद मतदाता सूची में नहीं हैं, तो चुनाव की निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित करेंगे। ❓ उठ रहे सवाल इस मामले ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं: क्या यह तकनीकी गड़बड़ी है? क्या मतदाता सूची अपडेट करने में चूक हुई है? क्या इससे चुनाव की पारदर्शिता प्रभावित होगी? विशेषज्ञों के अनुसार, मतदाता सूची चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। 💻 तकनीकी समस्या भी आई सामने इस बीच चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी समस्या देखने को मिली। EPIC नंबर डालने पर कई मतदाताओं का स्टेटस “विचाराधीन” दिख रहा था। हालांकि, बाद में इस तकनीकी समस्या को ठीक कर लिया गया। 🛠️ आयोग की कार्रवाई चुनाव आयोग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और: संबंधित जिलों से रिपोर्ट मांगी है मतदाता सूची की समीक्षा की जा रही है तकनीकी खामियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं 🧭 निष्कर्ष पश्चिम बंगाल में सामने आया यह मामला चुनावी व्यवस्था में सुधार की जरूरत को दर्शाता है। यदि समय रहते इस गड़बड़ी को ठीक नहीं किया गया, तो इससे मतदाताओं के भरोसे पर असर पड़ सकता है। अब सभी की नजर चुनाव आयोग की जांच और उसके फैसलों पर टिकी है।

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हिमाचल: राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा के चुनाव को हाई कोर्ट ने चुनौती दी

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा के चुनाव को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र, राज्य सरकार और भारतीय निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि शर्मा सरकारी अनुबंधों के कारण अयोग्य हैं और उन्होंने चुनावी हलफनामे में सत्यता का उल्लंघन किया। साथ ही, कुछ संपत्तियों का विवरण छिपाने का भी आरोप है। हाई कोर्ट की कार्रवाई हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी शामिल हैं, ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता विनय शर्मा की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई की। अदालत ने अनुराग शर्मा, केंद्र सरकार, राज्य सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। सभी प्रतिवादियों को 21 मई 2026 तक जवाब दायर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील और जनहित से जुड़ा हुआ बताया। याचिकाकर्ता की मांगें सरकारी अनुबंधों के कारण अयोग्यता:याचिकाकर्ता ने अनुराग शर्मा को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9ए के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि चुनाव समय पर उनके नाम पर कई सरकारी ठेके लंबित थे। झूठा हलफनामा दाखिल करने पर कार्रवाई:याचिकाकर्ता ने निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया कि वह धारा 125ए के तहत झूठा हलफनामा दाखिल करने पर कार्यवाही करे। नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश:प्रार्थी ने आयोग से यह भी अनुरोध किया कि राज्यसभा सीट के लिए नया चुनाव कराया जाए। यह सीट सांसद इंदु गोस्वामी के कार्यकाल समाप्त होने के कारण अधिसूचित की गई थी। सरकारी अनुबंधों का विवरण अनुराग शर्मा ने अपने चुनावी हलफनामे में स्वीकार किया कि उनके नाम पर कई सरकारी ठेके लंबित हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन विभाग और अन्य प्राधिकरणों द्वारा दिए गए सड़क और पुल निर्माण कार्य शामिल हैं। ठेके 2022, 2024, 2025 और फरवरी 2026 तक के हैं, जिनमें से कई अभी निर्माणाधीन हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह धारा 9ए के तहत अयोग्यता का कारण बनता है। अयोग्यता के बावजूद नामांकन याचिकाकर्ता ने अदालत में बताया कि इन अयोग्यताओं के बावजूद रिटर्निंग अधिकारी ने अनुराग शर्मा का नामांकन स्वीकार किया और 09 मार्च 2026 को उन्हें निर्वाचित घोषित किया। यह दर्शाता है कि चुनाव प्रक्रिया में संभावित अनियमितता हुई। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह चुनाव वैधानिक रूप से चुनौती योग्य है। संपत्तियों का विवरण छिपाने का आरोप याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अनुराग शर्मा ने भारतीय निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर कई संपत्तियों का विवरण नहीं दिया। शर्मा एक सरकारी ठेकेदार हैं। उनके पास वर्तमान में सार्वजनिक कल्याण विभाग और अन्य प्राधिकरणों के कई अनुबंध हैं। इससे याचिकाकर्ता का कहना है कि उनका नामांकन संपत्ति और अनुबंध की जानकारी छिपाकर किया गया, जो लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है। संभावित कानूनी परिणाम यदि हाई कोर्ट याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला देती है: अनुराग शर्मा का राज्यसभा चुनाव रद्द हो सकता है। उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए और 125ए के तहत अयोग्य घोषित किया जा सकता है। चुनाव आयोग को नई प्रक्रिया के तहत चुनाव कराने का निर्देश मिल सकता है। राजनीतिक और संवैधानिक महत्व राज्यसभा सांसदों के चुनाव में वैधानिक अयोग्यता और हलफनामों की सत्यता का मामला संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह मामला हिमाचल प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव आयोग और अदालत की कार्रवाई से भविष्य के चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। याचिकाकर्ता की दलीलें अनुराग शर्मा के पास चुनाव समय पर सरकारी ठेके थे, जो धारा 9ए के तहत अयोग्यता का कारण हैं। उन्होंने झूठा हलफनामा दाखिल किया और संपत्तियों का विवरण छिपाया। इसके कारण चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ हुआ। अनुराग शर्मा का पक्ष अभी तक अनुराग शर्मा या उनके प्रतिनिधियों की ओर से अधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। आने वाले जवाब और सुनवाई में उनके पक्ष की दलीलों की जानकारी अदालत में सामने आएगी। अगली सुनवाई हाई कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को 21 मई तक जवाब दायर करने का आदेश दिया है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद मुख्य सुनवाई की तारीख तय होगी। अदालत इस मामले में संवेदनशील और त्वरित कार्रवाई कर सकती है। निष्कर्ष हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा के चुनाव पर नोटिस जारी करके चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की है। सरकारी अनुबंध और हलफनामों की सत्यता की जांच होगी। यदि याचिकाकर्ता के दावे सही पाए जाते हैं तो चुनाव रद्द और नया चुनाव आयोजित किया जा सकता है। यह मामला राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और देश में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने में मार्गदर्शक साबित हो सकता है।

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बंगाल चुनाव 2026: ओवैसी-कबीर गठबंधन से बदलेगा सियासी खेल?

नई राजनीति, नया समीकरण 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक परिदृश्य में एक अहम मोड़ देखने को मिल रहा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने हुमायूं कबीर की क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबंधन किया है। यह कदम बंगाल में चुनावी रणनीति को पूरी तरह से बदल सकता है। हुमायूं कबीर, जिन्होंने पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और बाद में तृणमूल कांग्रेस के साथ राजनीति की है, अब अपनी अलग पहचान के साथ मैदान में हैं। उनके पास पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में स्थानीय नेटवर्क और मजबूत पैठ है। AIMIM के साथ गठबंधन करने के बाद उनकी ताकत और प्रभाव बढ़ सकता है। ओवैसी की रणनीति और विस्तार असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM पहले भी देश के कई राज्यों में अपनी पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही थी। पश्चिम बंगाल में पिछली कोशिशों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन के बाद पार्टी को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि AIMIM का उद्देश्य राज्य में मुस्लिम मतदाताओं पर असर डालना और उन्हें एक नई विकल्प की ओर मोड़ना है। यह गठबंधन छोटे और क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए भी तैयार है। वोट बैंक समीकरण बदलने की संभावना हुमायूं कबीर और AIMIM का गठबंधन खासकर उन इलाकों में असरदार हो सकता है, जहां अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह गठबंधन पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस समर्थकों को प्रभावित कर सकता है। वहीं, विपक्ष का कहना है कि इससे वोटों का बंटवारा होगा, जिसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है। तीसरे विकल्प की चुनौती राजनीतिक विशेषज्ञ इस गठबंधन को बंगाल में तीसरे विकल्प के रूप में देख रहे हैं। अगर यह गठबंधन सफल होता है, तो राज्य की राजनीति में नया मोड़ आएगा। चुनावी समीकरण अब सिर्फ TMC और BJP तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि AIMIM-कबीर गठबंधन भी निर्णायक हो सकता है। स्थानीय मुद्दों पर ध्यान गठबंधन ने बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक न्याय जैसे स्थानीय मुद्दों पर काम करने की योजना बनाई है। हुमायूं कबीर ने कहा कि उनका मकसद जनता की आवाज को मजबूती देना है। गठबंधन का यह एजेंडा अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच काफी हद तक प्रभाव डाल सकता है। गठबंधन के राजनीतिक लाभ और चुनौतियां इस गठबंधन के कई संभावित लाभ हैं: स्थानीय नेताओं की ताकत बढ़ाना अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधना क्षेत्रीय मुद्दों पर फोकस वहीं चुनौतियां भी कम नहीं हैं: विपक्षी दलों का वोट बंटवारा TMC और BJP जैसी मजबूत पार्टियों के खिलाफ मुकाबला गठबंधन के नए नेताओं के बीच सामंजस्य चुनावी रणनीति और तैयारी राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि AIMIM और हुमायूं कबीर का फोकस उन सीटों पर होगा जहां मुस्लिम मतदाता अधिक हैं। यहां पर उनका उद्देश्य पारंपरिक पार्टियों के वोटरों को प्रभावित करना और नया विकल्प पेश करना है। चुनाव की तैयारी में गठबंधन ने स्थानीय नेता, कार्यकर्ता और सोशल मीडिया कैंपेन पर जोर दिया है। उनका मानना है कि यह रणनीति उन्हें निर्णायक बढ़त दिला सकती है। समर्थक और आलोचक क्या कहते हैं समर्थक मानते हैं कि गठबंधन का उद्देश्य क्षेत्रीय मुद्दों को मजबूती देना और स्थानीय नेतृत्व को आगे लाना है। वहीं आलोचक कहते हैं कि यह गठबंधन वोटों का बंटवारा कर सकता है और इसका फायदा BJP को मिल सकता है। निष्कर्ष 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन एक नया फैक्टर साबित हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि हुमायूं कबीर और AIMIM का यह कदम मतदाताओं के बीच कितना असर डाल पाता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह निश्चित रूप से एक नई चुनौती है। चुनावी मुकाबला अब पहले से अधिक रोमांचक और अनिश्चित नजर आ रहा है।

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पूर्व सीएम Ashok Gehlot का सरकार पर तंज: “प्रदेश में चल रहा है इंतजारशास्त्र

राजस्थान की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने राज्य सरकार के कामकाज पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि दिसंबर 2023 से प्रदेश में एक अजीबोगरीब “इंतजारशास्त्र” लागू कर दिया गया है। उनका आरोप है कि पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू किए गए जनहितकारी प्रोजेक्ट्स को जानबूझकर धीमा कर दिया गया है, जिससे न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं बल्कि जनता को भी अपने अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल गहलोत ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार के दौरान शुरू किए गए कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स आज अधर में लटके हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार राजनीतिक कारणों से इन योजनाओं को आगे नहीं बढ़ा रही है। उनका कहना है कि इस तरह की राजनीति से प्रदेश का नुकसान हो रहा है और आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को रोकना या धीमा करना केवल राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। “जनता ने सरकार को काम करने के लिए चुना है, न कि पिछली सरकार के कामों को रोकने के लिए,” गहलोत ने कहा। जयपुर में तैयार संस्थान अब भी बंद पूर्व मुख्यमंत्री ने खास तौर पर Jaipur के जेएलएन मार्ग स्थित ‘महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज’ का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इस संस्थान की भव्य इमारत वर्ष 2024 में ही पूरी तरह तैयार हो चुकी है, लेकिन अब तक इसे शुरू नहीं किया गया है। गहलोत ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इस संस्थान को शुरू करने से क्यों बच रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“क्या सरकार इसीलिए इस संस्थान को शुरू नहीं कर रही क्योंकि यह Mahatma Gandhi के नाम पर है?” 233 करोड़ की लागत से बना संस्थान गहलोत ने जानकारी दी कि इस संस्थान की नींव अक्टूबर 2022 में लगभग 233 करोड़ रुपये के बजट से रखी गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के युवाओं को सुशासन और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और शोध सुविधाएं प्रदान करना था। उन्होंने कहा कि इस संस्थान को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे Tata Institute of Social Sciences और MIT Pune की तर्ज पर विकसित किया जाना था। इसका मकसद था कि राजस्थान के छात्र-छात्राओं को राज्य में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा मिल सके। स्वायत्त संस्थान के रूप में की गई थी स्थापना गहलोत ने यह भी बताया कि इस संस्थान को एक एक्ट के माध्यम से स्वायत्त दर्जा दिया गया था, ताकि यह राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहकर स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा और शोध जैसे क्षेत्रों को राजनीति से दूर रखना बेहद जरूरी है। “हमारा उद्देश्य था कि यह संस्थान आने वाले वर्षों में देश और दुनिया में एक पहचान बनाए और राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाए,” उन्होंने कहा। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस संस्थान को शुरू न करना सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र इस संस्थान में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण यह सपना अधूरा रह गया है। गहलोत ने कहा—“संस्थान किसी एक सरकार या दल के लिए नहीं होते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए बनाए जाते हैं। ऐसे में उन्हें रोकना या टालना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” गांधी के नाम पर राजनीति? अपने बयान में गहलोत ने यह भी कहा कि Mahatma Gandhi के नाम और उनके विचारों से राजनीतिक द्वेष रखना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि गांधी जी देश के राष्ट्रपिता हैं और उनके नाम पर बने संस्थान का विरोध करना संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा—“गांधी जी के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। उनके नाम पर बने संस्थान को शुरू करने में देरी करना न केवल उनके विचारों का अपमान है बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी से भी मुंह मोड़ना है।” सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग गहलोत ने राज्य सरकार से मांग की कि वह तुच्छ राजनीति से ऊपर उठकर इस संस्थान को तुरंत शुरू करे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया, तो जनता इसका जवाब जरूर देगी। उन्होंने कहा—“जनहित के प्रोजेक्ट्स को रोकना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सरकार को चाहिए कि वह सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए और प्रदेश के विकास के लिए काम करे।” राजनीतिक माहौल में बढ़ी तल्खी गहलोत के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विकास परियोजनाओं को लेकर इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप जनता के बीच भी चर्चा का विषय बनते हैं और इससे सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है। जनता की उम्मीदें और सरकार की जिम्मेदारी राजस्थान की जनता ने हमेशा विकास और सुशासन को प्राथमिकता दी है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सरकारें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाएं। गहलोत का यह बयान न केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है, बल्कि यह उन सवालों को भी उठाता है जो आम जनता के मन में हैं—क्या विकास कार्य राजनीति की भेंट चढ़ रहे हैं?

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Rajasthan Day 2026: लोकधुनों, नृत्य और स्वाद का अनोखा संगम

सिरोही। राज्य सरकार के निर्देशानुसार राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में गुरुवार को ऐतिहासिक सरूप विलास परिसर में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। रंग-बिरंगी रोशनी, पारंपरिक साज-सज्जा और लोक संस्कृति की झलकियों से सजे इस कार्यक्रम ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दराज से आए आगंतुकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों, आधुनिक संगीत और विविध सांस्कृतिक गतिविधियों ने राजस्थान की समृद्ध परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।लोक संस्कृति की छटा से सजा मंचकार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने पूरे वातावरण को राजस्थानी रंग में रंग दिया। सरिता कंवर ने चरी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सिर पर जलते दीपकों के साथ संतुलन बनाते हुए किया गया यह नृत्य न केवल कलाकार की कला का परिचायक था, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक विरासत का जीवंत उदाहरण भी बना। इसके बाद जैसलमेर से आए मांगणियार कलाकारों ने अपनी सुरीली आवाज में लोक गायन प्रस्तुत किया। मांगणियार गायन की मधुर धुनों ने उपस्थित जनसमूह को जैसे किसी अलग ही दुनिया में पहुंचा दिया। उनके गीतों में राजस्थान की रेत, लोककथाएं और सांस्कृतिक इतिहास की झलक साफ दिखाई दी।लोक से लेकर बॉलीवुड तक का रंगारंग संगमकार्यक्रम में केवल पारंपरिक प्रस्तुतियां ही नहीं, बल्कि आधुनिक संगीत का भी बेहतरीन समावेश देखने को मिला। आकाश कलावंत और प्रिंस विनोद ने बॉलीवुड गीतों की प्रस्तुति देकर युवाओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं उर्मिला देवी ने राजस्थानी गीतों के माध्यम से लोक संस्कृति को एक नई ऊर्जा दी। मेडिकल कॉलेज सिरोही के विद्यार्थियों ने रजवाड़ी रिदम पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। युवाओं की इस प्रस्तुति में पारंपरिक और आधुनिक शैली का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।अनोखी प्रस्तुतियां बनी आकर्षण का केंद्रकार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पिंकी राजपुरोहित एंड ग्रुप द्वारा प्रस्तुत दुर्गा वाहिनी तलवार एक्ट रहा। इस प्रस्तुति में साहस, अनुशासन और पारंपरिक युद्ध कला का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इसके साथ ही अन्नु सोलंकी ग्रुप ने घुटना चकरी/तराजू नृत्य की प्रस्तुति दी। इस अनोखे नृत्य में कलाकारों ने संतुलन और तालमेल का अदभुत प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थितिइस सांस्कृतिक संध्या में कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। प्रभारी मंत्री केके विश्नोई, सांसद लुंबाराम चौधरी, जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित, जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी, पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह, अतिरिक्त जिला कलेक्टर डॉ. राजेश गोयल और मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाशचंद अग्रवाल सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सभी अतिथियों ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी संस्कृति को सहेजने का माध्यम हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोडऩे का भी कार्य करते हैं।फूडकोर्ट और सेल्फी प्वाइंट बने आकर्षण का केंद्रकार्यक्रम में केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं, बल्कि आमजन के मनोरंजन के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं। परिसर में लगाए गए फूडकोर्ट में विभिन्न स्टॉल्स पर लोगों ने राजस्थानी और अन्य व्यंजनों का स्वाद लिया। दाल-बाटी-चूरमा से लेकर चाट-पकौड़ी और मिठाइयों तक, हर स्वाद यहां उपलब्ध था। इसके अलावा, सिरोही जिले की ऐतिहासिक धरोहरों को दर्शाते सेल्फी प्वाइंट भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। युवाओं और परिवारों ने यहां जमकर तस्वीरें खिंचवाईं और इस खास दिन की यादों को अपने कैमरों में कैद किया।क्यों मनाते है राजस्थान दिवसराजस्थान दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि राज्य की गौरवशाली विरासत, संस्कृति और इतिहास को याद करने का अवसर है। 30 मार्च 1949 को विभिन्न रियासतों के एकीकरण के बाद आधुनिक राजस्थान का गठन हुआ था। इसी ऐतिहासिक दिन को हर वर्ष राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है।संस्कृति और उत्साह का यादगार संगम पूरे कार्यक्रम के दौरान दर्शकों का उत्साह देखने लायक था। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज से वातावरण गूंजता रहा। कार्यक्रम का संचालन राकेश पुरोहित और कार्तिकेय शर्मा ने शानदार ढंग से किया, जिससे पूरा आयोजन व्यवस्थित और आकर्षक बना रहा। अंतत:, सरूप विलास में आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या राजस्थान की विविधता, परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम साबित हुई। इस आयोजन ने न केवल लोगों को मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩे का भी कार्य किया।

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SIROHI NEWS: नए एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने संभाली कमान

सिरोही। जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने सोमवार को औपचारिक रूप से अपना पदभार ग्रहण कर लिया। एसपी कार्यालय पहुंचकर उन्होंने जिले की पुलिस व्यवस्था की कमान संभाली और अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ परिचयात्मक बैठक भी की। उनके पदभार ग्रहण करने के साथ ही जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीदें बढ़ गई हैं। पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालते हुए राठौड़ ने साफ संकेत दिया कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को जब नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ एसपी कार्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोर सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जसाराम, डिप्टी पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र वर्मा, डिप्टी पुलिस अधीक्षक मुकेश चौधरी, कोतवाली थाना प्रभारी कैलाशदान और शिवगंज थाना प्रभारी अमराम सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान एसपी राठौड़ ने अधिकारियों और कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और जिले की वर्तमान कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में जानकारी ली।कानून व्यवस्था बनाए रखना पहली जिम्मेदारीपदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि पुलिस जनता की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास और सहयोग का रिश्ता मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुलिस प्रशासन लगातार प्रयास करेगा ताकि लोगों को सुरक्षा का भरोसा मिल सके। राठौड़ ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकडऩा ही नहीं बल्कि अपराध होने से पहले ही उसे रोकना भी है। इसके लिए प्रभावी रणनीति बनाकर कार्य किया जाएगा।संगठित अपराधों पर कसेगा शिकंजानवनियुक्त एसपी ने साफ शब्दों में कहा कि जिले में संगठित अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।उन्होंने कहा कि संगठित अपराध केवल कानून व्यवस्था को ही प्रभावित नहीं करते बल्कि समाज में भय का माहौल भी पैदा करते हैं। इसलिए ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। एसपी राठौड़ ने कहा कि पुलिस विभाग आधुनिक तकनीक और खुफिया तंत्र की मदद से अपराधियों तक पहुंचेगा और उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा।शराब और डोडा तस्करी पर सख्त कार्रवाईसिरोही जिला लंबे समय से शराब और डोडा तस्करी के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। इस विषय पर बात करते हुए एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि तस्करी के नेटवर्क को तोडऩे के लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि अवैध तस्करी को रोका जा सके। एसपी ने कहा कि तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।मुखबिर तंत्र को किया जाएगा मजबूतअपराध नियंत्रण के लिए खुफिया जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एसपी राठौड़ ने कहा कि पुलिस का मुखबिर तंत्र मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुखबिर तंत्र के जरिए अपराधियों की गतिविधियों की समय रहते जानकारी मिल सकती है, जिससे पुलिस समय पर कार्रवाई कर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार गश्त बढ़ाएं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें।पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय पर जोरएसपी राठौड़ ने कहा कि पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि जनता का सहयोग मिलने से अपराध नियंत्रण में काफी मदद मिलती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। पुलिस प्रशासन हर सूचना को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करेगा।इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस थानों में आने वाले लोगों के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए।पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में प्रयासएसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की प्रकृति बदल रही है और अपराधी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में पुलिस को भी आधुनिक तकनीक का उपयोग करना जरूरी है।उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग तकनीकी संसाधनों का अधिक उपयोग करेगा ताकि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही साइबर अपराधों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा क्योंकि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी बढ़ रहे हैं।यातायात व्यवस्था सुधारने पर भी रहेगा ध्यानसिरोही शहर और जिले के प्रमुख मार्गों पर बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए एसपी राठौड़ ने कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाएगा।उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। इसका उद्देश्य सडक़ दुर्घटनाओं को कम करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।महिला सुरक्षा पर विशेष ध्याननवनियुक्त एसपी ने कहा कि महिला सुरक्षा पुलिस विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि महिला हेल्पलाइन और पुलिस की अन्य सेवाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा ताकि जरूरत पडऩे पर महिलाओं को तुरंत सहायता मिल सके।

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बाल विवाह रोकथाम के लिए आमजन को प्रेरित करें : अल्पा चौधरी

सिरोही। कृषि विभाग के आत्मा सभागार में मंगलवार को जिला कलक्टर अल्पा चौधरी की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग की त्रैमासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित विभिन्न बाल संरक्षण योजनाओं, अभियानों एवं समन्वयात्मक गतिविधियों की बिंदुवार समीक्षा की गई तथा संबंधित विभागों को समयबद्ध एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश प्रदान किए गए। बैठक में बाल विवाह मुक्त सिरोही अभियान की प्रगति पर विशेष चर्चा करते हुए जिला कलक्टर ने निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर पर अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं, विद्यालयों, आंगनवाड़ी केन्द्रों एवं सामुदायिक आयोजनों के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों के संबंध में व्यापक जागरूकता फैलाई जाए। महिला अधिकारिता विभाग द्वारा आयोजित अमृता मेले में बाल विवाह मुक्त सिरोही विषय पर आकर्षक एवं जानकारी पूर्ण स्टॉल लगाकर आमजन को बाल संरक्षण कानूनों, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिला परिवहन अधिकारी को जिले में संचालित बाल वाहिनियों (स्कूल वाहनों) की नियमित जांच करने, ओवरलोडिंग पर सख्त कार्यवाही करने तथा ऐसे ऑटो रिक्शा एवं अन्य वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए जो अवैध रूप से बाल वाहिनी के रूप में संचालित किए जा रहे हैं।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जसाराम को निर्देशित किया गया कि जिले के समस्त राजकीय एवं गैर-राजकीय विद्यालयों की 200 मीटर परिधि में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए नियमित निरीक्षण, चालान एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही जिले में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए चिन्हित संवेदनशील स्थानों पर नियमित गश्त करने के निर्देश दिए। नगरीय निकायों को उन क्षेत्रों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश प्रदान किए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देशित किया गया कि जिले की सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों में बिजली, पेयजल एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता का भौतिक सत्यापन कर आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की जाए। जिससे बच्चों एवं महिलाओं को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो सके। सहायक निदेशक राजेन्द्र कुमार पुरोहित ने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। बैठक में अध्यक्ष बाल कल्याण समिति सुश्री रतन बाफना, सदस्य शशिकला मरडिया एवं प्रताप सिंह नून, पुलिस विभाग से मोहनसिंह राव, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी भंवरलाल पुरोहित, विजय कुमार व्यास, अधीक्षक राजकीय सम्प्रेक्षण एवं किशोर गृह भंवरसिंह, श्रम कल्याण अधिकारी हंसदीप, उपनिदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग किशनाराम लोल, सहायक निदेशक महिला अधिकारिता विभाग श्रीमती अंकिता राजपुरोहित, जिला परिवहन अधिकारी अक्षमिता,संरक्षण अधिकारी कन्हैयालाल, कार्डिनेटर 1098 मनोहरसिंह, काउन्सलर प्रिंससिंह, कनिष्ठ सहायक प्रकाश कुमार, आउटरिच वर्कर दिलीप धवल आदि मौजूद थे।

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Rajasthan news प्रदेश में 31 लाख 36 हजार 286 वोटर कटे

जयपुर। राजस्थान निर्वाचन विभाग ने 199 विधानसभा सीटों की एसआईआर के बाद फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन कर दिया। प्रदेश में 31 लाख 36 हजार 286 वोटर कट गए हैं। निर्वाचन विभाग से जारी आंकड़ों के मुताबिक ड्राफ्ट लिस्ट के बाद 12.91 लाख नए वोटर जोड़े हैं, जबकि 2.42 लाख के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशन और मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजस्थान की देखरेख में राजस्थान में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। शनिवार को राज्य की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया, जिसमें करीब 5 करोड़ 15 लाख से अधिक मतदाता शामिल हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि यह अभियान 27 अक्टूबर 2025 से 21 फरवरी 2026 तक चरणबद्ध तरीके से चलाया गया। प्रारंभिक सूची में 5,46,56,215 मतदाता थे, लेकिन गहन सत्यापन, दावे-आपत्तियों और संशोधन प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची में कुल 5,15,19,929 मतदाता दर्ज किए गए।एसआईआर की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अब प्रदेश में 5 करोड़ 15 लाख 19 हजार 929 वोटर हैं, जबकि 27 अक्टूबर 2025 को एसआईआर शुरू होने से पहले कुल 5 करोड़ 46 लाख 56 हजार 215 वोटर थे। जोधपुर जिले में एसआईआर के तहत फाइनल वोटर लिस्ट 2 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम कट गए हैं। सबसे ज्यादा नाम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र में हटाए गए, जबकि ओसियां में सबसे कम नाम कटे हैं। वहीं, पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत की विधानसभा में 9 हजार से ज्यादा मतदाता बढ़े हैं। फाइनल वोटर लिस्ट में लिंगानुपात में 2 अंकों की बढ़ोतरी हुई है, महिला वोटर्स की संख्या बढ़ी है। ड्राफ्ट लिस्ट के वक्त लिंगानुपात यानी प्रति हजार पुरुष वोटर पर महिलाओं की संख्या 909 थी, जो अब 911 हो गई। लिंगानुपात में जयपुर जिले में 7 अंक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कोटा में 6 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। अजमेर, सिरोही, डूंगरपुर, बूंदी, झालावाड़ और बारां में 4 अंकों की बढोतरी हुई है।ड्राफ्ट लिस्ट के बाद फाइनल वोटर लिस्ट में 18 से 19 साल के युवा वोटर्स की संख्या में 4,35,061 की बढ़ोतरी हुई है। राज्य में जयपुर जिले में 1.30 प्रतिशत, बाड़मेर में 1.26 प्रतिशत, भरतपुर में 1.22 प्रतिशत, फलौदी में 1.18 प्रतिशत और बूंदी में 1.09 प्रतिशत युवा मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने बताया कि वोटर लिस्ट में नाम जोडऩे, हटाने का काम जारी रहेगा। बीएलओ के पास फॉर्म भरकर अब भी वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाया जा सकता है। इसके लिए फॉर्म 6 भरना होगा। वोटर पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन भी नाम जुड़वा सकते हैं।जोधपुर जिले में एसआईआर के बाद फाइनल वोटर लिस्ट में 2 लाख 3 हजार 381 मतदाता कम हो गए हैं, जिसके बाद जिले में अब 20 लाख 97 हजार 971 वोटर्स हैं। जोधपुर के सरदारपुरा विधानसभा से सबसे ज्यादा 51 हजार 71 और सबसे कम नाम 7 हजार 512 ओसियां विधानसभा से कटे हैं। मतदाता सूची में सबसे ज्यादा 1 लाख 69 हजार 197 पुरुष और 1 लाख 52 हजार 394 महिला मतदाता लूणी विधानसभा में है, जबकि सबसे कम 83 हजार 664 पुरुष और 81 हजार 193 महिला मतदाता जोधपुर शहर विधानसभा सीट पर हैं। पाली में एसआईआर की फाइनल वोटर लिस्ट में 27 हजार 633 मतदाता बढ गए हैं। अब जिले में कुल 14 लाख 15 हजार 156 मतदाता हो गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 9 हजार 558 मतदाता पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत की सुमेरपुर विधानसभा में बढे हैं, जबकि पाली में सबसे ज्यादा 2,996 नाम काटे गए हैं।

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नगर परिषद का 1469 करोड़ का बजट, बदलेगी तस्वीर

जोधपुर। संभागीय आयुक्त व नगर परिषद प्रशासक डा. प्रतिभासिंह ने गुरुवार को 1469 करोड़ रुपए का वार्षिक बजट पेश किया। शहर में 15 नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का बजट में निर्णय लिया गया है।नगर निगम के एकीकरण के बाद पहली बार यह बजट पेश हुआ है। पूर्व में निगम का क्षेत्रफल 234 वर्ग किलोमीटर था, जो अब बढक़र 290 वर्ग किलोमीटर हो गया है। बजट को अब राज्य सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।संभागीय आयुक्त डॉ. प्रतिभा सिंह ने बताया कि इस बजट का फोकस सफाई व्यवस्था के एकीकरण, डिजिटल पारदर्शिता, ट्रैफिक प्रबंधन, हरित ऊर्जा और खेल सुविधाओं के विस्तार पर है। निर्वाचित होकर आने वाले पार्षदों को विकास कार्यों के लिए 60 लाख रुपए तक की अनुशंसा का प्रावधान भी रखा गया है। गत वर्ष के मुकाबले इस बार करीब 112 करोड़ कम का बजट जारी किया गया है। गत वर्ष निगम उत्तर और दक्षिण दोनों मिलाकर 1581 करोड़ का बजट जारी किया गया था, लेकिन इस बार निगम की ओर से घाटे का बजट पेश किया गया है। बजट में घोषणा के मुताबिक नगर निगम की ओर से भूमि का रिकॉर्ड डिजिटलाइजेशन किया जाएगा। वर्तमान में निगम क्षेत्राधिकार की करीब 1 लाख फाइलें हैं। जिनमें से 22 हजार का डिजिटलाइजेशन किया जा चुका है। शेष अन्य के लिए इस बजट में 11 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। ऐसे में आने वाले समय में निगम एरिया के प्लॉट, खाली जमीन से लेकर सभी तरह को बिल्डिंग आदि की जानकारी डिजिटल भी मिल सकेगी। इससे निगम के सिस्टम में बैठे दलाल, भ्रष्टाचारियों ओर फर्जी डॉक्यूमेंट बनाकर प्लॉट पर अपना कब्जा बताने वालों पर भी लगाम लगेगी। पेश किए बजट से आने वाले समय में शहर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, दो प्रमुख मार्गों को आदर्श मार्ग बनाने ओर कचरा ढोने से लेकर उसकी प्रोसेसिंग के कामों में एक ही वेंडर को लगाने के प्रस्ताव पारित किए गए। अब इस बजट को राज्य सरकार को भेजा जाएगा। अब नए बजट के तहत जीतकर आने वाले पार्षदों को विकास कार्यों के लिए 60 लाख रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है।प्रशासक प्रतिभा सिंह ने बताया प्रदेश सरकार की चालू वित्तीय घोषणा के तहत इवी और सीएजी स्टेशन पीपीपी मोड में विकसित किए जाएंगे। वर्तमान में शहर में दस जगहों पर इसका कार्य प्रगति पर है। निगम बजट में अब आने वाले समय में 30 जगहों पर इवी स्टेशन प्रस्तावित किए हैं। शहर के 7 टूरिस्ट पैलेस पर भी ये स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए शहर में 15 नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का बजट में निर्णय लिया गया है। वर्तमान में जोधपुर शहर के उम्मेद क्लब और गांधी मैदान के पीछे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स डॅपलप किया जा रहा है। वहीं, शहर के दो प्रमुख सडक़ों को विकसित किया जाएगा। इसमें सडक़ को चौड़ा करना, फुटपाथ, वृक्षारोपण आदि किया जाएगा।

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तैयारी कर चले परीक्षा को, 18 हजार से अधिक पहुंचे परीक्षा केंद्र

सिरोही। जिले में आठवीं बोर्ड परीक्षा गुरुवार से शुरु हुई। पहले दिन अंग्रेजी विषय की परीक्षा संपन्न हुई। परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावक बच्चों का हौसला बढ़ाते नजर आए। परीक्षा दोपहर 1.30 बजे शुरू हुई और 4 बजे समाप्त हुई। 148 परीक्षा केंद्रों पर 18, 548 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। इसमें से 9765 छात्र तथा 8783 बालिाकाएं शामिल हुई। जबकि 303 छात्र अनुपस्थित रहे। जिसमें 181 छात्र तथा 122 छात्राएं अनुपस्थित रही। डाइट प्रधानाचार्य मृदुला व्यास ने बताया कि जिले के सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी गई। प्रशासन ने नकल रोकने के लिए उडनदस्तों को तैनात किया। कहीं भी नकल या अनुचित गतिविधियों की सूचना नहीं मिली। जिससे परीक्षा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। आठवीं बोर्ड की परीक्षा जिले को पांच ब्लॉक सिरोही, आबूरोड, पिण्डवाड़ा, रेवदर एवं शिवगंज में आयोजित की गई। प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक संग्रह केंद्र स्थापित किया गया। जहां से परीक्षा का संचालन किया गया।परीक्षार्थियों के अनुसार पेपर अच्छा रहा। कुछ सवाल कठिन थे, लेकिन अधिकांश छात्रों ने अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई। अभिभावक भी बच्चों की मेहनत पर भरोसा जताते दिखे। अब परीक्षार्थी अगली परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं।

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