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Trump suggests that Iran let ten oil tankers through Strait of Hormuz
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ट्रम्प का सुझाव: ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से दस तेल टैंकर गुजरने देने चाहिए

वॉशिंगटन, डीसी | 27 अप्रैल 2024 पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में व्हाइट हाउस के एक कैबिनेट बैठक में कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से दस तेल टैंकरों को गुजरने देने की अनुमति देनी चाहिए। ट्रम्प ने इस बयान के माध्यम से क्षेत्रीय तनाव को कम करने और तेल की आपूर्ति के स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। ट्रम्प ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हमें ईरान के साथ समझौता करना चाहिए ताकि तेल टैंकर बिना किसी बाधा के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकें। इससे न केवल तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी, बल्कि क्षेत्र में शांति भी कायम होगी।” होर्मुज जलडमरूमध्य एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके माध्यम से विश्व भर के तेल का बड़ा हिस्सा परिवाहित होता है। इस क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है, जिसने क्षेत्र की सुरक्षा पर असर डाला है। हाल के वर्षों में, ईरानी नौसेना और अमेरिकी सेना के बीच कई छोटे-मोटे संघर्ष देखने को मिले हैं, और कई बार ईरान ने इस जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर नियंत्रण बढ़ाने के प्रयास भी किए हैं। ऐसे में ट्रम्प का यह सुझाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की इस अपील का उद्देश्य न केवल राजनयिक संबंधों में सुधार करना है बल्कि अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करना है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने या अवरुद्ध होने की स्थिति में वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता आ सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ट्रम्प की इस पहल पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक कदम माना है जो क्षेत्रीय विवादों को कम कर सकता है, जबकि अन्य ने इसे अनुमति देने वाली रणनीति के रूप में देखा है जो ईरान को अधिक शक्ति प्रदान कर सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में सुधार लाने के प्रयास लंबे समय से जारी हैं, लेकिन कई द्विपक्षीय मतभेद और प्रतिबंध अभी भी बरकरार हैं। ट्रम्प के इस बयान से वर्तमान प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है कि वह ईरान के साथ बातचीत के नए रास्ते तलाशे। यह कदम वैश्विक तेल व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकर विश्व स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। इस क्षेत्र में कोई भी व्यवधान तेल की कीमतों में उछाल ला सकता है और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर सकता है। अंत में, ट्रम्प का यह सुझाव ऊर्जा बाजारों और क्षेत्रीय मामलों में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, बशर्ते इसे दोनों पक्षों द्वारा समझदारी और सहयोग के साथ अपनाया जाए।

Ballots without a country: a quiet case for pluralism in Myanmar
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देशहीन मतपत्र: म्यांमार में बहुलवाद के पक्ष में एक निंद्रा भरा मामला

नयी दिल्ली, भारत | 27 जून 2024 म्यांमार में हाल ही में हुए चुनाव एक जटिल और सांस्कृतिक रूप से विभाजित देश की राजनीतिक वास्तविकताओं को नजरअंदाज करते हुए सम्पन्न हुए। इस चुनाव प्रक्रिया में न केवल प्रमुख विपक्षी दलों को बाहर रखा गया, बल्कि देश के कई हिस्सों में आम जनता की सक्रिय भागीदारी भी नगण्य रही। म्यांमार, जहां भौगोलिक विविधता और सत्ता संघर्ष गहरे हैं, वहां चुनावों का स्वरूप अक्सर जमीन पर व्याप्त वास्तविकताओं से अमूर्त लगने लगता है। इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला, जिसने देश में लोकतंत्र की स्थिरता और बहुलवाद की जरूरत पर एक बड़ा सवाल चिन्ह लगा दिया है। चुनाव आयोग द्वारा लागू नियमों और प्रशासनिक दखल ने कई महत्वपूर्ण विपक्षी समूहों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया। इसके परिणामस्वरूप चुनाव परिणामों की वैधता और जनप्रतिनिधित्व पर व्यापक आशंकाएं उत्पन्न हुईं। राजनीतिक असंतोष और सत्ता संघर्ष ने देश को गहरे विभाजन की ओर धकेला है, जिससे बहुलवाद और संघीय सहिष्णुता की कमी लोकतांत्रिक संक्रमण को प्रभावित करती नजर आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार में स्थायी और समावेशी लोकतंत्र की स्थापना के लिए केवल चुनाव ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए आवश्यक है कि सभी पक्षों के बीच संवाद और सहमति बनी रहे तथा राजनीतिक बहुलवाद को प्रोत्साहित किया जाए। जब तक यह संभव नहीं होता, तब तक देश में स्थायी शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीज नहीं पड़ सकते। इस संदर्भ में, म्यांमार की वास्तविकताओं को समझते हुए चुनावी व्यवस्था में सुधार और व्यापक राजनीतिक सहभागिता सुनिश्चित करना अतिआवश्यक है। केवल तभी म्यांमार लोकतांत्रिक बदलाव की ओर बढ़ सकता है और सभी समुदायों के हितों की रक्षा कर सकता है।

India, other friendly countries granted passage through Hormuz: Iran
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ईरान ने भारत तथा अन्य मित्र देशों को होर्मुज जलसन्धि पारगमन की अनुमति दी

तेहरान, ईरान | 27 अप्रैल 2024 ईरान के विदेश मंत्री ने हाल ही में घोषणा की है कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाज अब होर्मुज जलसन्धि से सुरक्षित होकर गुजर सकेंगे। इस निर्णय से क्षेत्रीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा को काफी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस अवसर पर भारत और श्रीलंका को उनके महत्वपूर्ण सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया। ईरान के विदेश मंत्री ने बताया कि होर्मुज जलसन्धि पर ईरान की संप्रभुता पूरी तरह स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा, “यह जलसन्धि न केवल ईरान के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके माध्यम से तेल और अन्य वस्तुओं का महत्वपूर्ण व्यापार होता है।” जलसन्धि में पारगमन की आज्ञा प्रदान कर ईरान ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि वह क्षेत्रीय शांति और सहयोग को प्राथमिकता देता है। विदेश मंत्री ने कहा कि यह कदम क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास बढ़ाने एवं समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था। इस मौके पर विदेश मंत्री ने विशेष रूप से भारत और श्रीलंका का धन्यवाद किया, जिनके सहयोग से ईरान को इस क्षेत्र में पर्याप्त सहयोग और समर्थन मिला है। उन्होंने कहा, “भारत और श्रीलंका के योगदान के बिना इस प्रक्रिया को इतनी सफलता से पूरा करना संभव नहीं था।” विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलसन्धि से पारगमन की अनुमति मिलने से भारत सहित अन्य मित्र देशों को रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से लाभ होगा। यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देगा और समुद्र मार्ग के सुरक्षा मानकों को बढ़ाएगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस घोषणा का स्वागत किया है और कहा है कि भारत ईरान के इस कदम को सकारात्मक मानता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत हमेशा ही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए काम करता रहेगा। होर्मुज जलसन्धि विश्व के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल का लगभग एक तिहाई भाग गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग के सुरक्षा और पारगमन की अनुमति का बढ़ना वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस पहल से ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे, जो क्षेत्रीय विवादों को कम कर भविष्य में बेहतर साझेदारी का उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है। आगे देखते हुए यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि इस निर्णय से भारत को मध्यपूर्व में अपने आर्थिक और सामरिक हितों को और मजबूत करने में मदद मिलेगी, विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में। अंत में, यह कदम एक सकारात्मक संकेत है कि कैसे क्षेत्रीय सहयोग से जटिल समुद्री एवं भू-राजनीतिक चुनौतियों का समाधान संभव है।

U.S. judge blocks Pentagon's Anthropic blacklisting for now
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अमेरिका के न्यायाधीश ने फिलहाल पेंटागन की एनथ्रोपिक ब्लैकलिस्टिंग पर रोक लगा दी

वाशिंगटन, डीसी | 27 अप्रैल 2024 अमेरिका के न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पेंटागन की उस कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है जिसमें उसने एआई चैटबॉट क्लॉड (Claude) के उपयोग को लेकर तकनीकी कंपनी एनथ्रोपिक (Anthropic) को सैन्य अनुबंधों से बाहर करने की कोशिश की थी। यह विवाद तब उभरा जब एंथ्रोपिक ने अमेरिकी सैन्य बलों को अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग करने से मना कर दिया, खासकर निगरानी और स्वायत्त हथियारों के क्षेत्र में। रक्षा सचिव हागसेथ द्वारा उठाया गया यह कदम अपने आप में उल्लेखनीय था क्योंकि यह पहली बार था जब किसी कंपनी को एआई टूल को लेकर अमेरिकी सेना के संविदात्मक कामों से अलग रखा गया। उन्होंने यह कदम उस समय उठाया जब एंथ्रोपिक ने क्लॉड का उपयोग अमेरिकी सैनिक मिशनों के लिए करने से इनकार किया। यह निर्णय व्यापक तौर पर तकनीकी और सैन्य रणनीतियों के बीच एक नई जंग के रूप में देखा जा रहा है। न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाना उचित नहीं होगा जब तक कि सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं की गहराई से जांच नहीं हो जाती। उन्होंने निर्देश दिया कि पेंटागन को यह सिद्ध करने के लिए ठोस सबूत प्रस्तुत करने होंगे कि एंथ्रोपिक के खिलाफ यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सैन्य उपयोग के नैतिक, कानूनी और तकनीकी आयामों को उजागर करता है। कई तकनीकी कंपनियां इस चुनौतीपूर्ण मोड़ पर अपने समाधानों में पारदर्शिता और नियंत्रण को लेकर चिंतित हैं। दूसरी ओर, रक्षा विभाग का मानना है कि युद्ध के मैदान में स्वायत्त और उन्नत तकनीकों का प्रयोग उनकी श्रेष्ठता और सुरक्षा के लिए जरूरी है। इस विवाद से साफ होता है कि एआई तकनीक का मिलिट्री और नागरिक उपयोग के बीच संतुलन बनाना कितना जटिल है। एंथ्रोपिक का कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में एआई को लेकर नियम और नियंत्रण बहुत तेजी से बन रहे हैं। अमेरिकी न्यायालय का फैसला इस बहस में एक महत्वपूर्ण इशारा माना जा रहा है कि निजी कंपनियों के अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच एक न्यायसंगत सीमा तय होनी चाहिए। पेंटागन ने अभी इस निर्णय पर किसी टिप्पणी से परहेज किया है, जबकि एंथ्रोपिक ने अपने उपयोगकर्ता व गोपनीयता के अधिकारों की रक्षा की बात दोहराई है। आने वाले समय में इस मामले की कानूनी लड़ाई पर विशेष नजर बनी रहेगी, क्योंकि यह अमेरिका के एआई और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतियों को सीधे प्रभावित कर सकता है।

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अबू धाबी में ईरान का मिसाइल अटैक: भारतीय और पाकिस्तानी नागरिकों की मौत

ईरान-यूएई तनाव और मिसाइल हमला गुरुवार को अबू धाबी में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल के मलबे से एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई। यह हमला अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान हुआ। UAE की हवाई सुरक्षा प्रणाली ने मिसाइल को रोकने में सफलता हासिल की, लेकिन मलबा सड़क पर गिरकर लोगों के लिए घातक साबित हुआ। स्वेहान स्ट्रीट पर हादसा घटना स्वेहान स्ट्रीट पर हुई। मिसाइल को रोकने के बावजूद मलबा सड़क पर गिरा और दो लोगों की जान चली गई। घायलों में अमीराती, जॉर्डन और भारतीय नागरिक शामिल थे। यह घटना खाड़ी क्षेत्र में नागरिकों पर हुए हमलों में सबसे गंभीर मानी जा रही है। UAE की तैयारियाँ और हवाई सुरक्षा प्रणाली UAE के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अब तक कुल 357 बैलिस्टिक मिसाइलें, 15 क्रूज मिसाइलें और 1,815 ड्रोन निशाने पर रखे गए। सुरक्षा प्रणाली ने कई हमलों को रोक दिया, लेकिन मलबे के कारण नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बना रहा। मंत्रालय ने कहा कि आने वाले खतरों से निपटने के लिए तैयारी पूरी है। IRGC का बड़े पैमाने पर हमला युद्ध के 27वें दिन ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसका मुख्य लक्ष्य इजरायल का मिलिट्री कमांड सेंटर और परमाणु इन्फ्रास्ट्रक्चर था। मरने वालों और घायलों की स्थिति अब तक मारे गए लोगों में पाकिस्तानी, नेपाली, बांग्लादेशी और फिलिस्तीनी नागरिक शामिल हैं। घायलों में UAE, मिस्र, सूडान, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं। यह दर्शाता है कि युद्ध के दौरान आम नागरिक सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। मिसाइल मलबे का खतरा मिसाइल को रोके जाने के बावजूद मलबा नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हुआ। यह घटना बताती है कि युद्ध में तकनीकी सफलता भी नागरिकों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती। युद्ध के मानवीय प्रभाव युद्ध केवल सैनिकों के लिए ही नहीं, आम नागरिकों के लिए भी खतरनाक होता है। प्रवासी नागरिक, जो रोजगार और व्यापार के लिए आए हैं, सबसे अधिक जोखिम में हैं। भारतीय और पाकिस्तानी नागरिकों की मौत यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर आम लोगों पर भी पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपाय UAE सरकार ने आने वाले खतरों के लिए पूरी तैयारी का आश्वासन दिया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा प्रणाली सक्षम है और नागरिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाती है कि क्षेत्रीय संघर्ष का प्रभाव सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियाँ ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतीपूर्ण बना रहा है। अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद अप्रत्याशित पहलू, जैसे मिसाइल मलबा, नागरिकों के लिए खतरे बने हुए हैं। निष्कर्ष अबू धाबी में हुई यह घटना यह स्पष्ट करती है कि युद्ध की तकनीकी दक्षता भी नागरिकों को पूरी सुरक्षा नहीं दे सकती। भारतीय और पाकिस्तानी नागरिकों की मौत मानव सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है। सरकारों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझना चाहिए कि युद्ध के अप्रत्यक्ष प्रभाव भी आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।

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ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमले से पहले नेतन्याहू ने ट्रंप से की थी फोन वार्ता

HighLights नेतन्याहू ने ट्रंप को खामेनेई पर हमले का अवसर बताया ट्रंप पहले युद्ध से बचने की इच्छा रखते थे अमेरिका-इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से 48 घंटे पहले, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य ट्रंप को यह समझाना था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाना और ट्रंप की हत्या के ईरानी प्रयासों का बदला लेना एक ऐतिहासिक अवसर है। खुफिया जानकारी और हमला शुरू करने का कारण सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू और ट्रंप दोनों को उसी सप्ताह नई इंटेलिजेंस ब्रीफिंग मिली, जिसमें बताया गया कि खामेनेई और उनके मुख्य सहयोगी जल्द ही तेहरान स्थित अपने परिसर में बैठक करेंगे। नेतन्याहू को यह जानकारी मिली कि बैठक का समय शनिवार रात से बदलकर शनिवार सुबह कर दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि अब या कभी नहीं – यह खामेनेई को मारने और ट्रंप के खिलाफ पूर्व ईरानी साजिशों का जवाब देने का सर्वोत्तम अवसर है। इसमें 2024 की एक कथित साजिश भी शामिल थी, जब ट्रंप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। नेतन्याहू ने फोन पर ट्रंप को बताया कि इस ऑपरेशन से वह इतिहास रच सकते हैं और ईरानी जनता सड़कों पर उतरकर धार्मिक शासन व्यवस्था को चुनौती दे सकती है। ट्रंप की सोच और निर्णय हालांकि, ट्रंप ने पहले सार्वजनिक रूप से ईरान के साथ युद्ध से बचने की इच्छा जताई थी और कूटनीतिक तरीके से समाधान पसंद किया। 2024 में अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत ईरान के साथ शांति बनाए रखने पर जोर दिया था। लेकिन व्हाइट हाउस सूत्रों के अनुसार, जब पिछले वसंत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत असफल रही, तो ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई पर विचार करना शुरू किया। जून में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की। कूटनीतिक प्रयास और आगामी हमले की तैयारी दिसंबर में, मार-ए-लागो दौरे के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को जून के ऑपरेशन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होने की जानकारी दी। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे कूटनीतिक बातचीत का एक और दौर आजमाना चाहते हैं, लेकिन सैन्य विकल्प भी तैयार रखते हैं। इस साल ईरान में सत्ता विरोधी आंदोलन के बीच, इजरायली डिफेंस फोर्सेज और अमेरिकी सेनाओं के बीच गोपनीय समन्वय मजबूत हुआ। फरवरी में नेतन्याहू ने ट्रंप को ईरान के बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और अमेरिका तक हमले की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी। निष्कर्ष नेतन्याहू की वार्ता, खामेनेई की बैठक की समय-सारिणी और ट्रंप के विकल्पों का संयोजन अमेरिका-इजरायल हमले के पीछे निर्णायक कारण बने। यह स्पष्ट है कि ट्रंप के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता को मारने का मौका, कूटनीतिक बातचीत के विकल्प के बावजूद, मुख्य प्रेरणा बना।

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर अब मंडराने लगा है प्रॉक्सी वॉर और हाइब्रिड वॉरफेयर का खतरा

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध अब एक नए और खतरनाक चरण में पहुंच गया है। यह संघर्ष केवल मिसाइल हमलों या एयर स्ट्राइक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह प्रॉक्सी वॉर और हाइब्रिड वॉरफेयर में बदलता दिख रहा है। अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पूर्व RAW एजेंट व NSG कमांडो लकी बिष्ट ने एक वीडियो में   “हाइब्रिड वॉर” को लेकर चेतावनी जारी की है। प्रॉक्सी वॉर: ईरान की सबसे बड़ी ताकत ईरान लंबे समय से सीधे युद्ध के बजाय “प्रॉक्सी रणनीति” अपनाता रहा है। इसमें वह क्षेत्रीय संगठनों (जैसे लेबनान, इराक, यमन के समूह) के जरिए हमला करता है और अपने विरोधियों को कई मोर्चों पर उलझाए रखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह रणनीति ईरान को कम संसाधनों में भी बड़े देशों को चुनौती देने की ताकत देती है।  ईरान की पहले की प्रॉक्सी वॉर रणनीति (इतिहास) रहा है। लेबनान-हिजबुल्लाह हिजबुल्लाह को ईरान का सबसे मजबूत प्रॉक्सी माना जाता है इजराइल के खिलाफ कई बार संघर्ष में इस्तेमाल इराक-शिया मिलिशिया इराक में कई शिया समूह ईरान समर्थित माने जाते हैं अमेरिकी ठिकानों पर हमलों में इनकी भूमिका बताई जाती रही है यमन-हूती विद्रोही हूती आंदोलन को ईरान का समर्थन मिलता रहा है सऊदी अरब और खाड़ी देशों पर हमले सीरिया-असद सरकार समर्थन सीरिया में ईरान ने सरकार का समर्थन किया वहां भी प्रॉक्सी और मिलिशिया नेटवर्क सक्रिय रहे इन उदाहरणों से साफ है कि ईरान सीधे युद्ध से ज्यादा “अप्रत्यक्ष युद्ध” में माहिर रहा है। स्लीपर सेल और छिपे नेटवर्क का डर जैसे-जैसे युद्ध बढ़ रहा है, “स्लीपर सेल” यानी छिपे नेटवर्क की चर्चा भी तेज हो रही है। हालांकि अभी तक अमेरिका या यूरोप में बड़े पैमाने पर ऐसे नेटवर्क के सक्रिय होने का ठोस प्रमाण नहीं है लेकिन सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि  अगर युद्ध लंबा चला, तो छोटे स्तर के हमले या गुप्त नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं और यह खतरा पारंपरिक युद्ध से ज्यादा अप्रत्याशित होता है हाइब्रिड वॉर: बदलता युद्ध का चेहरा यह जंग अब “अनरिस्ट्रिक्टेड वॉरफेयर” यानी हर क्षेत्र में फैलती लड़ाई बनती जा रही है।  साइबर हमले (बैंकिंग, बिजली, डेटा सिस्टम), तेल और गैस सप्लाई पर हमले (जैसे होर्मुज संकट),  प्रॉक्सी ग्रुप्स के जरिए हमले,  प्रचार और मनोवैज्ञानिक युद्ध शामिल हैं। तेल और होर्मुज: जंग का सबसे बड़ा दांव इस युद्ध का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को बाधित किया  और अमेरिका ने इसे खोलने की चेतावनी दी है। इस जंग के कारण तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता आएगी।यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट जैसा बड़ा आर्थिक झटका दे सकता है। कैसे शुरू हुई यह जंग? यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाकर ईरान के ठिकानों और नेतृत्व को निशाना बनाया।इसके जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमले किए और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके लिए ईरान ने अपने प्रॉक्सी नेटवर्क को सक्रिय किया। अब यह संघर्ष मल्टी-फ्रंट वॉर बन चुका है, जिसमें लेबनान, खाड़ी देश और समुद्री मार्ग भी शामिल हो चुके हैं।

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ट्रंप फैमिली की प्रेडिक्शन मार्केट में एंट्री से मचा हड़कंप, अमेरिकी राजनीति और कानून के बीच बढ़ा टकराव

डिजिटल सट्टेबाजी की दुनिया में बड़ा बदलाव अमेरिका में डिजिटल प्रेडिक्शन मार्केट्स को लेकर बहस तेज हो गई है, खासकर तब से जब Trump Media & Technology Group ने ‘ट्रुथ प्रेडिक्ट’ नामक प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की है। यह प्लेटफॉर्म Truth Social के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे यूजर्स को सीधे ऐप के भीतर ही सट्टेबाजी जैसे विकल्प मिल सकेंगे। ट्रंप परिवार की भूमिका पर उठे सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर का नाम भी इस पूरे मामले में सामने आया है। वह प्रमुख प्रेडिक्शन प्लेटफॉर्म्स काल्शी और पॉलीमार्केट से सलाहकार और निवेशक के रूप में जुड़े हुए हैं। इससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या हैं प्रेडिक्शन मार्केट्स? प्रेडिक्शन मार्केट्स ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म होते हैं जहां लोग चुनाव, खेल, आर्थिक घटनाओं और वैश्विक घटनाओं के परिणामों पर दांव लगाते हैं। समर्थकों का कहना है कि ये बाजार भविष्यवाणी के सटीक संकेत देते हैं, जबकि आलोचक इन्हें ऑनलाइन जुआ का नया रूप मानते हैं। अमेरिकी कांग्रेस की बढ़ती सख्ती वॉशिंगटन में इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस में इस साल प्रेडिक्शन मार्केट्स को नियंत्रित करने के लिए कई विधेयक पेश किए गए हैं। इनमें इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक, चुनावी दांव पर सख्ती और Commodity Futures Trading Commission की शक्तियों को बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। संवेदनशील विषयों पर प्रतिबंध की मांग कुछ विधेयकों में युद्ध, आतंकवाद, हत्या और खेल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सट्टेबाजी पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही, सरकारी अधिकारियों और सांसदों को इन बाजारों में भाग लेने से रोकने का प्रस्ताव भी रखा गया है। ट्रंप परिवार का पुराना जुआ कारोबार यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप परिवार का नाम सट्टेबाजी से जुड़ा हो। 1990 में डोनाल्ड ट्रंप ने अटलांटिक सिटी में ताजमहल कैसिनो शुरू किया था। हालांकि बाद में यह कारोबार बंद हो गया, लेकिन अब डिजिटल युग में ट्रंप परिवार फिर से इस क्षेत्र में सक्रिय होता दिख रहा है। कानूनी विवाद और राज्यों का विरोध नेवादा और न्यूजर्सी जैसे राज्यों ने इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म बिना लाइसेंस के ऑनलाइन सट्टेबाजी चला रहे हैं। वहीं, CFTC द्वारा इन्हें कुछ छूट दिए जाने से विवाद और बढ़ गया है। डिजिटल बाजार का तेजी से विस्तार प्रेडिक्शन मार्केट्स का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। हर हफ्ते अरबों डॉलर का दांव इन प्लेटफॉर्म्स पर लगाया जा रहा है। इससे पारंपरिक कैसिनो उद्योग पर भी असर पड़ रहा है। निष्कर्ष ट्रंप परिवार की एंट्री ने इस बहस को और तेज कर दिया है। अब यह केवल एक कारोबारी मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और कानूनी टकराव का विषय बन गया है।  

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नेशनल वन स्टार एंड्योरेंस चैंपियनशिप 7–8 मार्च को जयपुर में

जयपुर/जोधपुर। भारतीय अश्वारोहण खेल के लिए गौरव का विषय है कि लगभग एक दशक बाद जयपुर में 100 किमी नेशनल वन स्टार एंड्योरेंस चैंपियनशिप 2025–26 का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता 07 एवं 08 मार्च 2026 को बेगास रोड, सांझरिया (आरईसी मणिपाल यूनिवर्सिटी के समीप) स्थित Royal Equestrian Club परिसर में आयोजित होगी। यह आयोजन Equestrian Federation of India के तत्वावधान में तथा Rajasthan Equestrian Association के सहयोग से संपन्न होगा। महासंघ के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय आयोजन प्रतियोगिता के मुख्य संयोजक एवं रॉयल इक्वेस्ट्रियन क्लब के निदेशक कैप्टन मुकेश सिंह शक्तावत ने बताया कि प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों, नियमों एवं विनियमों के अनुरूप संचालित की जाएगी। देश के विभिन्न राज्यों से चयनित घुड़सवार इसमें भाग लेंगे और अपनी सहनशक्ति, कौशल एवं रणनीति का प्रदर्शन करेंगे।7 मार्च को प्रातः 5 बजे फ्लैग ऑफ, चैंपियनशिप का विधिवत शुभारंभ 07 मार्च 2026 को प्रातः 5:00 बजे फ्लैग ऑफ के साथ होगा।उद्घाटन अवसर पर जनप्रतिनिधि एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे।प्रतियोगिता का समापन 08 मार्च 2026 की सायंकाल होगा, जिसमें विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा। जूरी की देखरेख में पारदर्शी संचालन चैंपियनशिप की निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु जूरी का गठन किया गया है। ईएफआई के कर्नल जगत सिंह द्वारा निम्न अधिकारियों को जूरी सदस्य नियुक्त किया गया है। इसमें कर्नल अशोक यादव,कर्नल सरप्रताप सिंह,कर्नल सी. एस. सोहल सदस्य नियुक्त किए गए है। एंड्योरेंस चैंपियनशिप के इवेंट कॉर्डिनेटर एवं जोधपुर के राइडर दुष्यंत सिंह मेड़तिया ने बताया कि सफल आयोजन के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। मुख्य जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं। दुष्यंत सिंह मेड़तिया (राठौड़)– इवेंट कॉर्डिनेटर, रामूराम देवासी – कैम्प इंचार्ज, हरभजन सिंह – अस्तबल मैनेजर, जयराम देवासी – आवास एवं अन्य व्यवस्थाएं संभालेंगे।  100 किमी नेशनल वन स्टार एंड्योरेंस क्या है? कॉर्डिनेटर दुष्यंत सिंह राठौड़ ने बताया कि यह घुड़सवारी (Equestrian) की एंड्योरेंस विधा की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता है, जिसमें घुड़सवार और उसका घोड़ा निर्धारित समय सीमा के भीतर 100 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हैं।  100 किमी वन स्टार इवेंट में भाग लेने वाले राइडर्स सामान्यतः 40 किमी एवं 80 किमी स्तर पूर्ण कर चुके होते हैं। यह राष्ट्रीय सीनियर श्रेणी में प्रवेश का महत्वपूर्ण चरण है। प्रतियोगिता की प्रक्रिया कैसे होती है? 100 किमी दूरी को विभिन्न चरणों (Loops) में विभाजित किया जाता है।  हर चरण के बाद वेटरनरी चेक (Vet Check) होता है, जिसमें घोड़े की— हार्ट रेट, सांस, चाल (Gait), डिहाइड्रेशनमांसपेशियों की स्थिति की जांच की जाती है। यदि घोड़ा फिट नहीं पाया जाता, तो राइडर को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इसलिए यह खेल “घोड़े की सुरक्षा पहले” के सिद्धांत पर आधारित है। राष्ट्रीय पहचान और भविष्य के अवसर यह आधिकारिक राष्ट्रीय चैंपियनशिप है। प्रदर्शन के आधार पर राइडर्स की राष्ट्रीय रैंकिंग बनती है। वन स्टार स्तर सफलतापूर्वक पूरा करने पर खिलाड़ी आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए पात्र बन सकते हैं। राजस्थान के लिए गौरव का अवसर करीब दस वर्षों बाद जयपुर में 100 किमी राष्ट्रीय वन स्टार एंड्योरेंस चैंपियनशिप का आयोजन राज्य के अश्वारोहण खेल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली एंड्योरेंस खेल के प्रमुख केंद्र हैं। रेगिस्तानी एवं खुले ट्रैक के कारण राजस्थान एंड्योरेंस के लिए आदर्श माना जाता है।इवेंट कॉर्डिनेटर दुष्यंत सिंह ने कहा कि 100 किमी नेशनल वन स्टार एंड्योरेंस चैंपियनशिप केवल एक रेस नहीं, बल्कि घुड़सवार और घोड़े के बीच विश्वास, संतुलन और सहनशक्ति की सबसे बड़ी परीक्षा है।यह प्रतियोगिता राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसमें सफलता भविष्य में बड़े अवसरों के द्वार खोल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय

क्या बांग्लादेश में हिंदुओं का अस्तित्व खतरे में?

125 से अधिक वैश्विक हिंदू संगठनों ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत हिंदू अल्प संख्यकों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार को लेकर तत्काल अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की है।इस अपील में स्थिति को जातीय सफाया बताते हुए संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और भारत से हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।मानवाधिकार समूहों, धार्मिक संगठनों और नागरिक समाज के नेताओं के एक गठबंधन ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर एक तत्काल अंतरराष्ट्रीय अपील जारी की है। यह चेतावनी देश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से कुछ ही दिन पहले आई है। हिंदू एडवांसिंग ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के नेतृत्व में जारी इस अपील में दावा किया गया है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली मौजूदा अंतरिम सरकार के तहत हिंदू समुदाय के सदस्यों को व्यवस्थित उत्पीडऩ का सामना करना पड़ रहा है। अपील पर हस्ताक्षर करने वालों ने स्थिति को जातीय और धार्मिक सफाए के रूप में वर्णित किया है, जिससे इस अल्पसंख्यक समूह के अस्तित्व को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 15 देशों के 125 से अधिक संगठनों और व्यक्तियों ने इस पत्र का समर्थन किया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ, भारत और अन्य वैश्विक शक्तियों से बांग्लादेश में हिंदू आबादी की रक्षा के लिए तत्काल और निर्णायक उपाय करने का आह्वान किया गया है। पत्र में दीपू चंद्र दास का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है, जिनकी ईशनिंदा के आरोपों के बाद सरेआम पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं, जिनमें देश की राष्ट्रीय संसद, जातीय संसद के सदस्यों का चुनाव किया जाएगा। व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद 2024 में शेख हसीना की लंबे समय से चली आ रही सरकार को सत्ता से हटाए जाने के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव है।

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