
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है और महिला आरक्षण कानून में होने वाले बदलाव के जरिए देश को गुमराह कर रही है। उन्होंने यह बातें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक पेज से कही।
जय राम रमेश ने कहा कि सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन करने की तैयारी में है, जिसका वे औचित्य यह दे रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में समय लगेगा। लेकिन उन्होंने इस तर्क को खारिज करते हुए बताया कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने छह महीने से कम समय में जाति सर्वेक्षण पूरा किया है, इसलिए यह कोई बड़ा बहाना नहीं बन सकता। उन्होंने इसे सरकार के छिपे हुए एजेंडे के रूप में बताया और आरोप लगाया कि असल मकसद जाति जनगणना को रोकना है।
अनुच्छेद 334-A महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने को जाति जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। जयराम रमेश का मानना है कि सरकार इसे अलग करने का प्रयास कर रही है ताकि महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू किया जा सके, लेकिन इस प्रक्रिया में देश को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर चार मुख्य सवाल भी उठाए हैं, जिनमें महिला आरक्षण बिल की प्रक्रिया तथा इससे जुड़ी जनगणना की भूमिका को लेकर शंका व्यक्त की गई है।
महिला आरक्षण बिल के लिए प्रस्तावित विशेष सत्र
जयराम रमेश के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र प्रस्तावित है। इस सत्र में महिला आरक्षण कानून लागू करने और लोकसभा की सीटों में वृद्धि से संबंधित बिल पेश किए जाने की संभावना है। यदि संसद से अनुमति मिल जाती है, तो यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा।
जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू
जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस फेज में ‘हाउस लिस्टिंग’ यानी मकान गिनती कराई जा रही है। दूसरा चरण, जिसमें जनसंख्या गणना और जाति संबंधी प्रश्न शामिल हैं, फरवरी 2027 में किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब स्वतंत्रता के बाद जाति का डेटा संकलित किया जाएगा, आखिरी बार ऐसा 1931 में हुआ था। जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी, जिसमें कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए स्मार्टफोन से ही डेटा संग्रह करेंगे। आंकड़े जुटाने के लिए कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे।
महिला आरक्षण और भाजपा का सख्त रुख
16 से 18 अप्रैल के बीच संसद के विशेष सत्र के लिए भाजपा ने अपने सभी सांसदों को कड़ाई से 3-लाइन व्हिप जारी किया है, जिसमें इस दौरान संसद में उपस्थित रहने को आवश्यक बताया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हाल ही में सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी है जो महिला आरक्षण की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
कांग्रेस के नेता जयराम रमेश के बयान केंद्र सरकार की नीति और आगामी जनगणना तथा महिला आरक्षण कानून के बीच संबंध को लेकर चर्चा को और गहरा कर देंगे। आगामी संसद सत्र में इस विषय पर कई राजनीतिक और सामाजिक बहसें देखने को मिल सकती हैं, जो भारत के सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकती हैं।











