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थारू कैंप के पास ग्लेशियर टूटने से केदारनाथ पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त, यात्रा शुरू होने से पहले बारिश और बर्फबारी बनी सबसे बड़ी चुनौती, धाम में तीन फीट तक बर्फ जमी

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केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में अब मात्र 11 दिन शेष हैं। 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए धाम के द्वार खोल दिए जाएंगे। प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार आने वाले भक्तों को बेहतर अनुभव देने हेतु धाम और उसके आसपास सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्ती और विकास की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।

केदारनाथ तक पहुँचने वाले पैदल मार्ग और बेस कैंप की साफ-सफाई, मरम्मत तथा सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम ज़ोर-शोर से चल रहा है। प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के बीच निरंतर समन्वय के साथ काम हो रहा है ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न उत्पन्न हो। बर्फ हटाने से लेकर रास्तों को सुरक्षित बनाने तक हर स्तर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

हालांकि इन तैयारियों के बीच मौसम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है, और थारू कैंप के पास ग्लेशियर के टूटने से पैदल मार्ग को भी नुकसान पहुँचा है। इसके बावजूद सफाई एवं मरम्मत कार्य में लगी टीमें हर मुश्किल परिस्थिति में तत्पर हैं ताकि निर्धारित समय पर यात्राओं को सुचारू रूप से शुरू किया जा सके।

धूप खिलने से तैयारियाँ तेज

त्योहारों से पहले हुई भारी बारिश और हिमपात के बाद अब मौसम सुधरना शुरू हो गया है। तेज धूप के कारण धाम के आस-पास जमी मोटी बर्फ को हटाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। कर्मचारी और मजदूर मिलकर रास्ते की मरम्मत और सफाई में लगे हुए हैं ताकि श्रद्धालुओं के लिए यात्रा मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और साफ-सुथरा बनाया जा सके।

ग्लेशियर टूटने पर अफरा-तफरी

यात्रा की तैयारियों के बीच गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर थारू कैंप के पास दोपहर लगभग साढ़े बारह बजे ग्लेशियर टूट गया। यह घटना बड़ी लिनचौली से ऊपर हुई, जहां यात्रा मार्ग को सुगम बनाने के लिए लगातार कार्य चल रहा था। घटना के समय मौके पर कार्यरत मजदूर और कर्मचारी मौजूद थे। अचानक ग्लेशियर टूटने से कार्यस्थल पर अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा की दृष्टि से उस मार्ग पर यात्रा को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया।

खुशकिस्मती रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या जान की हानि की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है।

प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता

ग्लेशियर टूटने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। क्षतिग्रस्त मार्ग को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जा रहा है। लगातार भिन्न-भिन्न मौसम परिस्थितियाँ और बर्फबारी ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही हैं, लेकिन राहत यह है कि बचाव टीम मौके पर लगी हुई है और यात्रा को समय पर शुरू कराने में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि ग्लेशियर टूटने से कोई जनहानि नहीं हुई है और सभी कार्यकर्ता सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में परिस्थिति नियंत्रण में है और मार्ग खोलने के लिए श्रमिकों को तैनात कर दिया गया है।

भक्तों की संख्या में जारी है आस्था

पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों की बात करें तो केदारनाथ धाम पर श्रद्धालुओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद भक्ति और श्रद्धा में कमी नहीं आई है। वर्ष 2023 में लगभग 19.6 लाख, 2024 में 16.5 लाख और वर्ष 2025 में करीब 17.7 लाख श्रद्धालुओं ने धाम के दर्शन किए। कुल मिलाकर पिछले तीन वर्षों में लगभग 53.8 लाख श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं जो दर्शाता है कि आस्था लगातार बढ़ रही है।

यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि मौसम की विपरीत परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच भी लोग बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं। प्रशासन और संबंधित विभाग हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि इस बार भी यात्रियों को एक सुरक्षित, सहज और सुखद यात्रा अनुभव मिले।

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