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Why do mosquitoes love some people more than others?
तकनीकी

मच्छर कुछ लोगों को दूसरों से ज्यादा क्यों आकर्षित करते हैं?

नई दिल्ली: मच्छर, जो कि मौसम बदलते ही सबसे ज्यादा परेशान करने वाले कीट बन जाते हैं, कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में ज्यादा क्यों पसंद करते हैं, यह सवाल अक्सर उठा है। यह धारणा कि मच्छर केवल मीठे खून वाले इंसानों को ही काटते हैं, पूरी तरह सही नहीं है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मच्छर लोगों को कई अन्य कारकों के आधार पर आकर्षित करते हैं। सबसे पहला कारण है कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)। जब हम सांस लेते हैं, तो हम CO2 उत्सर्जित करते हैं, और मच्छर इसी गैस को अपनी भक्षक खोजने के लिए इस्तेमाल करते हैं। जिन लोगों की सांस तेज होती है, वे अधिक CO2 उत्सर्जित करते हैं, जिससे मच्छर उनकी ओर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा, शरीर से निकलने वाली विशिष्ट गंध भी मच्छरों को आकर्षित करती है। इंसान के शरीर से निकलने वाले स्वेद, बैक्टीरिया और त्वचा पर मौजूद रसायन मच्छरों की गंध पहचान प्रणाली को सक्रिय करते हैं। कुछ लोग आनुवंशिक रूप से ऐसे रसायनों को अधिक उत्सर्जित करते हैं, जो मच्छरों के लिए आकर्षक होते हैं। शारीरिक गर्मी भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मच्छर गर्म शरीर की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। इसलिए, शारीरिक व्यायाम या गर्म वातावरण में रहने से शरीर की तापन अधिक होती है, जिससे मच्छर का ध्यान बढ़ता है। कपड़े के रंगों का भी प्रभाव होता है। गहरे रंग जैसे काला और लाल रंग मच्छरों को ज्यादा आकर्षित करते हैं, जबकि हल्के रंगों के कपड़े उन्हें कम आकर्षित करते हैं। इसलिए, यह कहना गलत है कि केवल मीठे खून वाले लोगों को मच्छर ज्यादा काटते हैं। कई पर्यावरणीय और शारीरिक عوامل एक साथ मिलकर मच्छरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। मच्छरों से बचाव के लिए उचित सावधानियां बरतना आवश्यक है, जैसे कि मच्छरदानी का उपयोग करना, कीटनाशक लगाना और साफ-सफाई रखना। अन्ततः, मच्छरों के व्यवहार को समझकर और सावधानी अपनाकर हम अपने स्वयं को मच्छर जनित रोगों से बचा सकते हैं।

Why does water stay cool in a claypot even in peak summers?
लाइफस्टाइल

गर्मियों में मिट्टी के घड़े में पानी ठंडा क्यों रहता है?

गर्मी के मौसम में लोगों को ठंडे पानी की तलाश हमेशा रहती है। परन्तु क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि मिट्टी के घड़े में रखा पानी दूसरों के मुकाबले ज्यादा ठंडा क्यों रहता है? इसका कारण उस मिट्टी की विशेष संरचना है जिससे ये घड़े बनाए जाते हैं। पारंपरिक मिट्टी के घड़े आमतौर पर प्राकृतिक मिट्टी से बनाए जाते हैं जिसमें सिलिका और एलुमिना जैसे सूक्ष्म खनिज कणों की मात्रा अधिक होती है। ये खनिज कण मिट्टी की छिद्रपूर्ण बनावट के साथ मिलकर, पानी के अंदर और बाहर की गर्मी को नियंत्रित करते हैं। मिट्टी की यह छिद्रपूर्ण प्रकृति पानी के सतह पर संतुलित वाष्पीकरण करती है, जिससे घड़े के बाहर की सतह ठंडी हो जाती है। इस ठंडी सतह के कारण घड़े के अंदर रखा पानी भी ठंडा बना रहता है। इसके अलावा, मिट्टी घड़े की बनावट में ऐसे गुण होते हैं जो गर्मी के संचरण को धीमा करते हैं, जिससे घड़े की बाहरी गर्मी सीधे पानी तक नहीं पहुँच पाती। परिणामस्वरूप, गर्म दिनों में भी घड़े के अंदर पानी ठंडा और ताजा रहता है, जो इसे प्लास्टिक या धातु के बर्तनों से अलग बनाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्राकृतिक ठंडक प्रदान करने वाले घड़ों का उपयोग पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है क्योंकि इनमें बिजली या फ्रिज की आवश्यकता नहीं होती। इसके साथ ही क्ले पॉट्स जैविक और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बने होते हैं, जो उनके उपयोग को और भी सुरक्षित बनाते हैं। इस प्रकार, गर्मी के दौरान मिट्टी के घड़े में पानी ठंडा रहता है क्योंकि मिट्टी का प्राकृतिक खनिज मिश्रण और उसकी छिद्रपूर्ण बनावट पानी के तापमान को नियंत्रित करती है। यह अपनी सादगी और प्राकृतिक गुणों के कारण सदियों से भारतीय घरों में पसंद किया जाता रहा है।

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