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 इलेक्टोरल लिटरेसी फेस्टिवल डे का आयोजन

सिरोही। इम्मानुएल मिशन सीनियर सैकेंडरी स्कूल, सिरोही के विद्यालय परिसर में जिला निर्वाचन अधिकारी (जिला कलेक्टर) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  के निर्देशानुसार  इलेक्टोरल लिटरेसी फेस्टिवल डे का आयोजन बड़े उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में किया गया।  कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें उनके मताधिकार के महत्व से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी  महेंद्र कुमार नानीवाल रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में एसडीएम  हरिसिंह देवल एवं जिला इलेक्शन ट्रेनर एवं प्रधानाचार्य रतिराम  प्रजापत उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत लोक नृत्य से हुई, जिसने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का मन मोह लिया। इलेक्टोरल लिटरेसी फेस्टिवल के अंतर्गत विद्यालय में विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। जिनमें चित्रकला प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता एवं नाटक प्रतियोगिता प्रमुख रहीं। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से मतदान के महत्व, लोकतंत्र की मजबूती तथा नागरिक कर्तव्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मतदाता जागरूकता पर आधारित नाटक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।इस अवसर पर एसडीएम ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाली युवा पीढ़ी को मतदान के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही प्रत्येक नागरिक को मतदाता बनना चाहिए तथा अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। साथ ही उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक बनें और समाज में भी मतदान के प्रति जागरूकता फैलाएं।जिला शिक्षा अधिकारी  नानीवाल ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मतदान है। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान से वंचित न रहे, एवं बताया कि एक-एक मत अमूल्य है और कोई भी मतदाता अपने मत से वंचित न रहे इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। विद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को प्रारंभ से ही लोकतांत्रिक मूल्यों से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।जिला स्वीप कॉर्डिनेटर एवं स्टेट लेवल इलेक्शन ट्रेनर प्रजापत ने भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित इलेक्टोरल लिटरेसी कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आयोग द्वारा नागरिकों को मतदाता सूची में नाम जोडऩे, संशोधन एवं अपडेट करने के लिए वर्ष में चार बार अवसर प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।विद्यालय के प्रधानाचार्य  टॉम पी. सैम ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की एवं उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने तथा लोकतंत्र की मजबूती में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।इस कार्यक्रम की रूपरेखा विद्यालय के ईएलसी सदस्य विजय प्रकाश वैष्णव द्वारा तैयार की गई, जिसके अंतर्गत इलेक्टोरल लिटरेसी फेस्टिवल को प्रभावी एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न किया गया।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक दिनेश कुमार खत्री द्वारा सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं उपस्थित अतिथियों को मतदाता जागरूकता शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया। ReplyForward Add reaction

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राजस्थान में पांचवी व आठवीं में ऑटोमैटिक प्रमोशन खत्म

जयपुर। राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने 5वीं और 8वीं कक्षा में ऑटोमैटिक प्रमोशन सिस्टम को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब इन कक्षाओं में छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट होने के लिए न्यूनतम अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यदि कोई विद्यार्थी निर्धारित न्यूनतम अंक नहीं ला पाता है तो उसे फेल माना जाएगा। यह निर्णय राज्य में लर्निंग आउटकम सुधारने और ड्रॉपआउट कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि बिना परीक्षा पास किए प्रमोशन मिलने से बच्चों की पढ़ाई के प्रति गंभीरता कम हो रही थी, जिससे आगे की कक्षाओं में छात्रों को कठिनाई होती थी।नए नियमों के तहत यदि कोई विद्यार्थी न्यूनतम अंक प्राप्त नहीं कर पाता है तो उसे सुधार के लिए 45 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा। इसके लिए विशेष शिक्षण (रिमेडियल टीचिंग) की व्यवस्था भी की जाएगी।नई व्यवस्था लागू होने से छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों और अभिभावकों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। विभाग का कहना है कि इससे पढ़ाई की निगरानी बेहतर होगी और बच्चों का शैक्षणिक स्तर सुधरेगा।शिक्षा विभाग के अनुसार इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के प्रति गंभीर बनाना, उनकी क्षमता बढ़ाना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।

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छात्र व छात्राओं के लिए अलग- अलग वॉशरूम हो, अन्यथा स्कूल की मान्यता रदद

हर स्कूल में छात्राओं को फ्री सैैनेटरी बांटना अनिवार्यसुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक विशेष निर्देश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर स्कूल में छात्राओं को फ्री में सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य होगा। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने होंगे। जो स्कूल ऐसा नहीं कर पाएंगे उनकी मान्यता रद्द की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में दिव्यांग-अनुकूल (डिसेबल-फ्रेंडली) टॉयलेट बनाए जाएं। जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने क्लास 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र सरकार की मेंस्ट्रुअल हाइजिन पॉलिसी (मासिक धर्म स्वच्छता नीति) को पूरे भारत में लागू करने पर यह आदेश सुनाया। यह आदेश सिर्फ कानूनी व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए नहीं है। यह उन क्लासरूम के लिए भी है, जहां लड़कियां मदद मांगने में झिझकती हैं। यह उन टीचर्स के लिए है, जो मदद करना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण बंधे हुए हैं। यह उन माता-पिता के लिए भी है, जो शायद यह नहीं समझ पाते कि उनकी चुप्पी का क्या असर पड़ता है। यह समाज के लिए भी है, ताकि प्रगति का पैमाना इस बात से तय हो कि हम अपने सबसे कमजोर वर्ग की कितनी सुरक्षा करते हैं। हम हर उस बच्ची तक यह संदेश पहुंचाना चाहते हैं, जो स्कूल में अबसेंट होने की शिकार बनी, क्योंकि उसके शरीर को बोझ की तरह देखा गया जबकि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है।

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कभी फोन बैंकिंग और एनपीए के पहाड़ से दबे भारतीय बैंक आज पूरी तरह स्वस्थ

जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने संसद में प्रस्तुत राष्ट्रपति के अभिभाषण एवं आर्थिक सर्वेक्षण 2025 पर कहा कि ये दोनों दस्तावेज इस बात के अकाट्य प्रमाण हैं कि भारत अब तात्कालिक समाधानों की राजनीति से ऊपर उठकर, एक समावेशी और दीर्घकालिक विकसित भारत की नींव रख चुका है। उन्होंने कहा कि विकास को अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए सुधार से मापा जा रहा है।  जोधपुर सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने वैश्विक परिदृश्य का हवाला देते हुए कहा कि जहां दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं महंगाई और मंदी से जूझ रही हैं, वहीं भारत ने एक आर्थिक नजीर पेश की है। पिछले एक दशक में दहाई अंकों में रहने वाली महंगाई को 4-4.5 प्रतिशत के दायरे में सीमित रखना मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कभी फोन बैंकिंग और एनपीए के पहाड़ से दबे भारतीय बैंक आज पूरी तरह स्वस्थ हैं। एनपीए अपने सर्वकालिक न्यूनतम स्तर पर है और बैंकों की बैलेंस शीट आज निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। राष्ट्रपति के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए शेखावत ने कहा कि पिछले वर्षों में 25 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से बाहर आना सामाजिक न्याय की एक ऐतिहासिक वैश्विक घटना है। 4 करोड़ पक्के आवास (32 लाख केवल पिछले एक वर्ष में) और 12.5 करोड़ परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराना, सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि डीबीटी के माध्यम से 6.75 लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचने से भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार हुआ है।कृषि क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों को रेखांकित करते हुए शेखावत ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध, चीनी और दलहन उत्पादक देश बन गया है। चावल उत्पादन में हमने चीन को पछाड़कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है कृषि जीडीपी में पशुधन का योगदान 4 प्रतिशत से बढ़कर 7 प्रतिशत हो गया है। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई ‘नीली क्रांति’ के चलते मत्स्य उत्पादन में 105 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।शेखावत ने कहा कि आज भारत का विकास ‘इंफ्रास्ट्रक्चर-लेड’ है। 150 वंदे भारत ट्रेनों का संचालन और 1,000 किमी का मेट्रो नेटवर्क भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बनाता है। अष्टलक्ष्मी (पूर्वोत्तर भारत) अब विकास का नया इंजन है। वहां 50,000 किमी ग्रामीण सड़कें और 80,000 करोड़ रुपए का रेलवे निवेश ऐतिहासिक है। असम में निर्मित सेमीकंडक्टर चिप्स भारत की तकनीकी क्षमता का नया वैश्विक चेहरा हैं।केंद्रीय मंत्री ने शेखावत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हुए हालिया ट्रेड एग्रीमेंट को’मदर ऑफ ऑल एग्रीमेंट्स’ की संज्ञा दी। इस समझौते के बाद भारत से निर्यात होने वाली 98.5 प्रतिशत वस्तुओं पर शून्य ड्यूटी लगेगी, जिससे जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर को भारी लाभ होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में शून्य मोबाइल यूनिट से शुरू हुआ सफर आज भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बना चुका है। पिछले एक साल में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक के स्मार्टफोन निर्यात किए गए हैं।केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत तक लाने का स्पष्ट रोडमैप और 7.2-7.8 प्रतिशत की अनुमानित विकास दर यह सिद्ध करती है कि भारत आत्मविश्वास से परिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दावोस के आर्थिक महाकुंभ में भी आज पूरी दुनिया भारत की ओर उम्मीद की दृष्टि से देख रही है।

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सुप्रीम कोर्ट की यूजीसी नए नियमों पर फिलहाल रोक

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर की है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। यूजीसी ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इनका देशभर में विरोध हो रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी।यूजीसी के नए कानून का नाम है प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026। इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे। नए नियमों के तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि यूजीसी ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। इनसे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा।

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शराब व बीयर के एक अप्रेल से बढेंगे दाम

जयपुर। प्रदेश में नई शराब नीति के तहत आबकारी ड्यूटी में बढोतरी की गई है। इससे देसी शराब, अंग्रेजी शराब व बीयर की भावों में इजाफा हुआ है। नई नीति के बाद अब एक अप्रेल से पांच रुपए से लेकर बीस रुपए तक शराब व बीयर की कीमतें बढ़ जाएगी। फाइनेंस डिपार्टमेंट (आबकारी) के निर्देशानुसार मौजूदा जो ठेके चल रहे हैं, उनके लाइसेंस की रिन्युअल गारंटी फीस बढ़ाई गई है। इससे अब ठेका संचालकों को मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में ज्यादा शराब बेचनी होगी। इसके अलावा नई नीति में शराब की दुकानों पर बिक्री के समय को रिव्यू करने के लिए आबकारी आयुक्त को अधिकार दिए हैं। संभावना है कि रिव्यू के बाद प्रदेश में शराब की बिक्री की समयावधि को 2 घंटे बढ़ाया जा सकता है।वित्त विभाग से जारी पॉलिसी में इस बार दुकान संचालकों को 1 के बजाय 2 गोदाम आवंटित करने का भी प्रावधान किया है। गोदाम केवल स्टॉक रखने के लिए होता है, लेकिन शहरी सीमा से बाहर (ग्रामीण) एरिया में ज्यादा बनने वाले इन गोदामों पर शराब बिक्री की लगातार शिकायतें आती है। मौजूदा ठेकेदारों का कहना है कि इससे अवैध तरीके से शराब बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।नई पॉलिसी में सरकार ने इस बार आबकारी ड्यूटी बढ़ाकर 80 फीसदी कर दी है। पहले यह 75 फीसदी लगती थी। 5 फीसदी ड्यूटी के बढऩे से वित्त वर्ष (2026-27) की शुरुआत यानी 1 अप्रेल से शराब की दुकानों पर शराब और बीयर की बोतल 5 से लेकर 20 रुपए तक महंगी मिलेगी। इसमें बीयर की बोतल या कैन 5 रुपए तक, जबकि 750 एमएल वाली अंग्रेजी शराब की एक बोतल 20 रुपए तक महंगी मिलेगी। इधर सरकार ने इस बार पॉलिसी में शराब का ठेका लेने के लिए आवेदन फीस भी बढाई है। पहले 2 करोड़ रुपए तक न्यूनतम रिजर्व प्राइज वाली दुकानों की नीलामी में हिस्सा लेने के लिए 50 हजार रुपए आवेदन शुल्क लगता था। उसे बढ़ाकर 60 हजार रुपए कर दिया गया है। 2 करोड़ रुपए से ज्यादा न्यूनतम रिजर्व प्राइज वाली दुकानों का संचालन 1 लाख रुपए आवेदन शुल्क के बजाय 1.20 लाख रुपए कर दिया है।

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छात्र-छात्राओं का व्यायाम प्रदर्शन, परेड की, गणतंत्र का जश्न मनाया

सिरोही। 77वां गणतंत्र दिवस समारोह अरविंद पवेलियन में सोमवार सुबह 9 बजे आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्य मंत्री ओटाराम देवासी और सांसद लुंबाराम चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत राज्य मंत्री देवासी ने ध्वजारोहण के साथ की, जिसके बाद उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और मार्च पास्ट की सलामी ली।कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 65 लोगों को सम्मानित किया गया। समारोह का मुख्य आकर्षण 1000 से अधिक छात्र-छात्राओं की ओर से किया गया सामूहिक व्यायाम प्रदर्शन रहा। मार्च पास्ट में राजस्थान सशस्त्र पुलिस बल, राजस्थान पुलिस, महिला पुलिस, गृह रक्षा दल, एनसीसी के विभिन्न विंग और विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के छात्रों ने भाग लिया।समारोह में एडीएम डॉ. राजेश गोयल ने राज्यपाल का संदेश पढ़ा। छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीतों और लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दीं। इसके बाद विभिन्न विभागों की ओर से प्रस्तुत की गई झांकियों में सडक़ सुरक्षा और महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद लुंबाराम चौधरी, कलेक्टर अल्पा चौधरी और एसपी डॉ. प्यारेलाल शिवरान ने दिव्यांगों को तिपहिया वाहन वितरित किए।

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सिरोही समाचार: बढ़ती महंगाई को लेकर शहर में चिंता, आम लोगों की जेब पर बढ़ा दबाव

सिरोही समाचार में एक बार फिर महंगाई का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। राजस्थान के सिरोही जिले में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं। खाद्य पदार्थों से लेकर ईंधन तक, लगातार बढ़ रही महंगाई का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में सब्ज़ी, दाल, आटा, दूध और रसोई गैस की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। सिरोही समाचार के अनुसार, मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए महीने का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है। सिरोही में महंगाई क्यों बनी चिंता का विषय विशेषज्ञों के अनुसार, सिरोही में महंगाई बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। परिवहन लागत में बढ़ोतरी, ईंधन की ऊंची कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं प्रमुख वजह मानी जा रही हैं। इसके अलावा, मानसून पर निर्भर कृषि उत्पादन में उतार-चढ़ाव का असर भी बाजार कीमतों पर पड़ा है। सिरोही समाचार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि थोक बाजार में ही कीमतें अधिक होने के कारण खुदरा स्तर पर राहत देना मुश्किल हो रहा है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। आम जनता पर बढ़ता आर्थिक दबाव सिरोही शहर के कई इलाकों में रहने वाले लोगों ने बताया कि पहले जहां घरेलू खर्च सीमित दायरे में रहता था, अब वही खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। स्कूल फीस, स्वास्थ्य सेवाएं और दैनिक जरूरतों की चीजें महंगी होने से आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि आय में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन खर्च लगभग हर महीने बढ़ रहा है। सिरोही समाचार में यह मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है कि महंगाई से सबसे ज्यादा प्रभावित आम नागरिक हो रहा है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया महंगाई को लेकर सिरोही जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए बाजार निरीक्षण किए जा रहे हैं। प्रशासन ने व्यापारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से सिरोही सहित पूरे राजस्थान में महंगाई नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। सिरोही समाचार में प्रकाशित प्रतिक्रियाओं के अनुसार, जनप्रतिनिधियों का कहना है कि आम जनता को राहत देने के लिए सब्सिडी और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए। विशेषज्ञों की राय आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई केवल स्थानीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की समस्या बन चुकी है। हालांकि, जिला स्तर पर प्रभावी निगरानी और स्थानीय समाधान से इसके असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है। निष्कर्ष कुल मिलाकर, सिरोही समाचार में महंगाई का मुद्दा एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आया है। जब तक आय और खर्च के बीच संतुलन नहीं बनता, तब तक आम जनता पर आर्थिक दबाव बना रहेगा। आने वाले समय में प्रशासन और सरकार के कदम इस समस्या को कितनी राहत देते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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