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How a research scholar’s curiosity about type designing led to a paper on Kerala’s vibrant hand-painted political graffiti
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कैसे एक शोध पाठक की टाइप डिजाइन में जिज्ञासा ने केरल की जीवंत हाथ से बनाई गई राजनीतिक ग्राफिटी पर शोध पत्र लिखा

आधार पर एक पूरी तरह से मानव द्वारा लिखी गई जैसी प्रोफेशनल न्यूज़ रिपोर्ट तैयार करें। निर्देश: 1. न्यूज़ की शुरुआत इस फॉर्मेट में करें: 2. भाषा: – सरल, स्पष्ट और शुद्ध हिंदी का प्रयोग करें – भाषा बिल्कुल मानव पत्रकार जैसी होनी चा हैदराबाद के आईआईटी के डॉक्टोरल शोधार्थी नीथा जोसेफ केरल की राजनीतिक पृष्ठभूमि और इसके अनूठे सांस्कृतिक पहलू को समझने में जुटी हैं। उन्होंने केरल के आठ जिलों में पाए जाने वाले हाथ से बने राजनीतिक ग्राफिटी की स्टाइलिस्टिक विविधताओं पर शोध पत्र तैयार किया है, जिसका शीर्षक है ‘The Visual Voices of Kerala’s Politics’। इस शोध में उन्होंने मलयालम फोंट के विभिन्न रूपों का विश्लेषण किया है जो स्थानीय राजनीतिक रंगों को दर्शाते हैं। नीथा का यह शोध पत्र केरल की राजनीतिक कला की एक अनदेखी परत को सामने लाता है। उनके मुताबिक, ये ग्राफिटी न केवल राजनीतिक विचारों के वाहक हैं, बल्कि वे सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद की एक अहम कड़ी भी हैं। हर जिले में ग्राफिटी की विभिन्न तकनीकें और अनूठे फोंट जो उपयोग किए गए हैं, वे स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और भाषा की सांस्कृतिक गहराई को बखूबी दर्शाते हैं। नीथा ने बताया कि केरल में हाथ से बनाई गई राजनीतिक ग्राफिटी एक जीवंत सांस्कृतिक विरासत है, जिसका अध्ययन न केवल कला और टाइपोग्राफी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य की राजनीतिक जागरूकता और सामाजिक आंदोलनों की समझ को भी बढ़ाता है। उनका शोध इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे स्थानीय भाषाई विविधताएं और कलात्मक अभिव्यक्ति एक-दूसरे से जुड़ी हैं। इसके साथ ही, नीथा का यह शोध प्रदेश के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा इस्तेमाल किए गए प्रतीकों और रंगों के चयन पर भी प्रकाश डालता है। उन्होंने यह भी नोट किया कि ग्राफिटी में उपयोग हुए फोंट का प्रत्येक रूप स्थानीय पहचान और राजनीति के बीच संबंध को दर्शाता है। लोकल प्रशासन और कला संरक्षण एजेंसियों के लिए यह शोध नई दिशा प्रदान कर सकता है ताकि इस अनूठे सांस्कृतिक दस्तावेज को संरक्षित किया जा सके। यह शोध पत्र केरल में हाथ से बनी राजनीतिक ग्राफिटी की परंपरा को नई दृष्टि देता है और शोधकर्ताओं, कलाकारों तथा राजनीतिक विश्लेषकों के लिए सहायक सिद्ध होगा। नीथा जोसेफ की यह पहल केरल की सांस्कृतिक धरोहर को समझने और भविष्य में इस क्षेत्र के और शोध को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Kerala Assembly polls 2026 | Interviews with key candidates and political leaders
राजनीति

केरल विधानसभा चुनाव 2026 | प्रमुख उम्मीदवारों और राजनेताओं के साथ साक्षात्कार

केरल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर प्रमुख उम्मीदवारों और राजनेताओं के साथ ‘‘द हिन्दू’’ द्वारा किए गए साक्षात्कारों की एक रिपोर्ट प्रस्तुत है। इस चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता और उम्मीदवार अपनी आगामी रणनीतियों, चुनावी मुद्दों और जनता की अपेक्षाओं पर अपने विचार साझा कर रहे हैं। साक्षात्कारों में मुख्य रूप से यह चर्चा हुई कि प्रदेश की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए राजनीतिक दल किस दिशा में काम करना चाहते हैं। उम्मीदवारों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, और विकास योजनाओं को मुख्य विषय के तौर पर उठाया। कई नेताओं ने कहा कि विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं की भूमिका अहम होगी, क्योंकि वे प्रदेश के भविष्य के निर्धारक हैं। उन्होंने युवाओं को आश्वस्त किया कि उनके हितों और सवालों को चुनावी एजेंडे का मुख्य हिस्सा बनाया जायेगा। साक्षात्कार में चुनाव आयोग द्वारा चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। उम्मीदवारों ने मतदाता जागरूकता अभियानों की जरूरत बताई ताकि अधिक से अधिक लोग अपने मत का प्रयोग कर सकें। राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होने के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी मतदाताओं के मुद्दे भी मुख्य फोकस बने हुए हैं। सभी नेताओं ने प्रदेश में विकास और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया। इस चुनाव में उभरती तकनीकों और सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीतियों का भी वर्णन किया गया। विधानसभा चुनाव 2026 को केरल की राजनीतिक दिशा तय करने वाले एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। अधिक जानकारी और विस्तृत साक्षात्कारों के लिए ‘‘द हिन्दू’’ की विशेष कवर रिपोर्ट पढ़ें, जिससे आप सभी उम्मीदवारों और नेताओं की विचारधारा और योजनाओं से रूबरू हो सकेंगे।

Kerala Assembly Elections 2026 : Seasoned wall artists in Thiruvananthapuram on their role in election campaigning
राजनीति

केरल विधानसभा चुनाव 2026 : चुनाव प्रचार में थिरुवनंतपुरम के अनुभवी वॉल कलाकारों की भूमिका

केरल विधानसभा चुनाव 2026 नजदीक आते ही चुनाव प्रचार की तैयारियां जोरों पर हैं। थिरुवनंतपुरम के अनुभवी वॉल कलाकार इस बार भी चुनावी वॉल पेंटिंग और पोस्टर डिजाइनिंग के माध्यम से अभियान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनका हुनर और कला न केवल जनसंपर्क का साधन बन रही है, बल्कि वे चुनावी संदेशों को प्रभावशाली ढंग से आम जनता के बीच पहुंचाने का जरिया भी हैं। वॉल आर्टिस्टों के अनुसार, चुनाव प्रचार में उनकी महत्ता केवल दीवारों को रंगने तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य जनता को सही सूचना देना, चुनावी मुद्दों को उजागर करना और सकारात्मक माहौल बनाना होता है। वे अक्सर स्थानीय मुद्दों और पार्टियों के आदर्शों को अपने चित्रों और पोस्टर्स में दर्शाते हैं, जिससे जनता आसानी से जिम्मेदार और जागरूक फैसले ले सके। थिरुवनंतपुरम के वरिष्ठ वॉल आर्टिस्ट राजेश का कहना है, “हमारे लिए यह सिर्फ कला नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है कि हम समाज तक सही संदेश पहुंचाएं। चुनावी समय में यह भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि दीवारों पर बने चित्र युवाओं और आम जनता का ध्यान आकर्षित करते हैं।” कुछ कलाकारों का यह भी कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों से काम मिलता है, लेकिन वे हमेशा निष्पक्ष और तथ्यात्मक रहने की कोशिश करते हैं। उन्हें अपने कार्य से जो सन्तुष्टि मिलती है, वह इन्हें इस क्षेत्र में निरंतर जुड़ा रहने के लिए प्रेरित करती है। वॉल आर्टिस्टों का यह भी मानना है कि डिजिटल युग में भी लोकल आर्ट का अपना प्रभावी स्थान है। चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया के साथ पारंपरिक माध्यमों जैसे दीवार पेंटिंग का जुड़ाव जनता के मन में रिस्पॉन्स बढ़ाने में कारगर होता है। इस तरह, थिरुवनंतपुरम के ये अनुभवी कलाकार न केवल कला के माध्यम से चुनावी संदेशों को जन जन तक पहुंचा रहे हैं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने में भी योगदान दे रहे हैं। चुनाव 2026 के दौरान उनकी रचनात्मकता और मेहनत निश्चित रूप से कांग्रेस, भाजपा समेत अन्य दलों की रणनीतियों को गति देगी।

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