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April 2026

उमा भारती के लिए चेन पुलिंग कर पंजाब मेल रोकी:झांसी में 5 मिनट खड़ी रही; रेलवे बोला- ट्रेन समय पर थी, पूर्व CM ने कहा- पहले छूटी
राजनीति

उमा भारती के लिए चेन पुलिंग कर पंजाब मेल को रोका गया, झांसी में ट्रेन 5 मिनट तक रुकी

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के लिए रविवार को झांसी रेलवे स्टेशन पर पंजाब मेल ट्रेन को चेन पुलिंग के जरिए रोकना पड़ा। उमा भारती जब प्लेटफॉर्म पहुंचीं, तो नई दिल्ली जाने वाली पंजाब मेल पहले ही आधा प्लेटफॉर्म छोड़ चुकी थी। उनकी यात्रा को लेकर उनके समर्थकों ने तुरंत चेन पुलिंग की, जिससे ट्रेन को करीब पांच मिनट तक रुका रहना पड़ा। इस दौरान ट्रेन का फर्स्ट एसी कोच A-1 यार्ड में पहुंच चुका था, इसलिए उमा भारती B-1 कोच में सवार हुईं। इस घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री का कहना था कि ट्रेन निर्धारित समय से पहले ही चल पड़ी थी, जो रेलवे की अव्यवस्था का प्रमाण है। उन्होंने कहा, “आज जो मेरे साथ हुआ, वो आम यात्रियों के साथ भी अक्सर होता है। खासकर मथुरा, झांसी और ललितपुर स्टेशन पर ऐसी दिक्कतें अधिक होती हैं। वरिष्ठ नागरिक, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए ये स्थिति और कठिनाई पैदा करती है।” उमा भारती का दावा: ट्रेन समय से पहले रवाना हुई उमा भारती ने बताया कि वे दोपहर 2:18 बजे झांसी स्टेशन पर पहुंच गई थीं, जबकि उनकी ट्रेन 2:23 बजे रवाना होनी थी। वे एस्केलेटर से प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही थीं, मगर रेलवे अधिकारियों ने उन्हें ई-कार्ट इस्तेमाल करने के लिए कहा। जब ई-कार्ट ट्रैक के सामने पहुंचा, तो एक ट्रेन गुजरने के कारण उन्हें पांच मिनट तक वहीं ठहरना पड़ा। इसके बाद उन्होंने हाथ ठेला लिया, जिससे वे देर हो गईं और ट्रेन छूट गई। रेल मंत्री को लिखे पत्र में रेलवे व्यवस्था पर उठाए सवाल इस घटना को लेकर उमा भारती ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने रेलवे की संवेदनशीलता की कमी पर चिंता जताई और कहा कि मथुरा जैसे स्टेशनों पर भी यात्रियों के लिए सुविधाओं की सही व्यवस्था नहीं है। उन्होंने झांसी रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की। उन्होंने कहा, “मैं ट्रेन आने से पहले आई थी, लेकिन ट्रेन समय से पहले आई और चली गई। मंच के बीच में चल रही व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है।” उन्होंने यह भी बताया कि जब वे प्लेटफॉर्म के 1 नंबर से 4 नंबर की ओर जा रही थीं, तो ट्रैक पर लंबी गाड़ी चल रही थी, जिसके कारण इंतजार करना पड़ा। बाद में हाथ ठेला ट्रैक में फंसा था, जिसके निकाले जाने में भी समय लगा। ट्रेन अपने निर्धारित समय से पहले पहुंचने और पहले छूटने के कारण ये परेशानी उत्पन्न हुई। रेलवे का पक्ष और जांच मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि चेन पुलिंग उमा भारती के समर्थकों ने नहीं बल्कि अन्य यात्रियों ने की थी। उन्होंने कहा कि रेलवे के सिस्टम में ट्रेन निर्धारित समय से पहले प्लेटफॉर्म छोड़ने की व्यवस्था नहीं होती है। हालांकि, ट्रेन निर्धारित समय से पहले प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाती है। रेलवे इस घटना की जांच कर रहा है ताकि पता चल सके कि ट्रेन टाइम से पहले रवाना हुई या नहीं। यात्रियों के लिए जरूरी सुधार उमा भारती ने इस घटना का हवाला देते हुए रेलवे अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे ऐसे घटनाओं को गंभीरता से लें और यात्रियों की सुविधाओं में सुधार करें। उन्होंने कहा, “मेरे साथ जो हुआ, वह आम जनता के लिए एक चेतावनी है। महिलाएं, बुजुर्ग, दिव्यांग और बच्चे लिए लोग रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा चाहते हैं। रनवे की प्रणाली में ऐसे बदलाव जरूरी हैं कि कोई यात्री ऐसी परेशानी का शिकार न हो।” यह पूरी घटना रेलवे स्टेशन पर बेहतर प्रबंधन और समन्वय की जरूरत को दर्शाती है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थिति न उत्पन्न हो और यात्रियों को सुविधा समय के अनुसार मिल सके।

Asha Bhosle’s short foray into the Kannada film industry
मनोरंजन

आशा भोसले का कन्नड़ फिल्म उद्योग में संक्षिप्त सफर

आशा भोसले, जिनका नाम भारतीय संगीत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है, ने अपनी अद्भुत आठ दशक की करियर के दौरान कई भाषाओं और शैलियों में अपने स्वर का जादू बिखेरा है। इसके बावजूद, उनकी कन्नड़ फिल्म उद्योग में शामिल होने की घटना एक खास और दिलचस्प पहलू है, जिसे अक्सर कम ही लोग जानते हैं। सैंडलवुड के नाम से मशहूर कन्नड़ फिल्म उद्योग में आशा भोसले ने तीन गीत गाए, जो उनके संगीत की विविधता और बहुमुखी प्रतिभा का उदाहरण हैं। ये तीन chansons न केवल विभिन्न संगीत स्वादों को दर्शाते हैं, बल्कि उनके आवाज की अनोखी छवि को भी उजागर करते हैं। उच्च गुणवत्ता और भावनात्मक गहराई के साथ, आशा भोसले ने कन्नड़ फिल्मों के लिए गाये गए इन गीतों में अपने अनुभव और संगीत संवेदनाओं को पूरी तरजीह दी। उनकी आवाज़ ने न केवल इसे संगीतमय बनाया, बल्कि दर्शकों के दिलों तक भी पहुंचा। यह संक्षिप्त पर प्रभावशाली चरण, जो उनकी लंबी और प्रसिद्ध गायकी यात्रा का हिस्सा है, संगीत प्रेमियों के लिए एक दिलचस्प अध्याय है। आशा भोसले ने विभिन्न भाषाओं में गाने की कला को समृद्ध किया है और कन्नड़ संगीत में भी उनकी योगदान की गूंज महसूस की जा सकती है। अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि आशा भोसले का सैंडलवुड में काम करना उनके कैरियर की एक अनमोल खूबसूरती है, जो विभिन्न सांस्कृतिक और भाषाई सीमाओं को पार करते हुए संगीत की अपार ताकत को दर्शाता है। इस छोटे से सफर ने उनके गीतों के संग्रह को और भी विविध और समृद्ध बनाया।

Asha Bhosle: 7 Interesting facts about the legendary singer
मनोरंजन

आशा भोसले: प्रसिद्ध गायिका के बारे में 7 रोचक तथ्य

भारतीय संगीत जगत की मशहूर और बहुमुखी गायिका आशा भोसले ने अपनी चार दशकों से अधिक की करियर में हजारों गाने गाए हैं। उनकी गायकी की विविधता और उनकी तीव्र आवाज़ सीमा ने उन्हें भारतीय संगीत के इतिहास में एक अमिट स्थान दिलाया है। उनकी प्रतिभा ने उन्हें न केवल भारत में बल्कि विश्व भर में एक प्रतिष्ठित गायिका के रूप में स्थापित किया है। आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को एक संगीत परिवार में हुआ था। संगीत के प्रति उनकी रुचि बचपन से ही नजर आने लगी थी। उन्होंने अपनी बहन लता मंगेशकर के मार्गदर्शन में संगीत की शिक्षा ली और जल्द ही खुद को एक बेहतरीन गायिका के रूप में स्थापित कर लिया। उनकी आवाज़ की बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें विभिन्न भाषाओं और संगीत शैलियों में काम करने की अनुमति दी। आशा भोसले ने हिंदी के साथ-साथ मराठी, बंगाली, पंजाबी, और कई अन्य भारतीय भाषाओं के गाने गाए हैं। उनकी फेमस गानों की सूची में ‘आंखों के आगे आज क्या है’, ‘चालाक चाला चुपके से’, और ‘म reportedly’ जैसे Klassiker शामिल हैं। आशा भोसले के करियर की सबसे बड़ी खासियत उनकी तीव्र आवाज का दायरा है, जो उन्हें विभिन्न प्रकार के गीतों को धाराप्रवाह गाने का मौका देता है। भले ही वह भावुक प्रेम गीत हों या ऊर्जावान नृत्य गीत, आशा की आवाज़ ने हमेशा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है। इसके अलावा, आशा भोसले ने भारतीय संगीत उद्योग के कई बड़े संगीतकारों जैसे एस डी बर्मन, आर डी बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ काम किया है। उनकी प्रतिभा और मेहनत के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं, जिनमें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार और पद्म श्री शामिल हैं। वर्तमान में भी आशा भोसले अपने संगीत में सक्रिय हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। उनकी आवाज़ और उनका योगदान भारतीय संगीत के लिए सदैव यादगार रहेगा।

कांग्रेस बोली-सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती:जयराम रमेश ने कहा- महिला आरक्षण में बदलाव से देश को गुमराह किया जा रहा
राजनीति

जाति जनगणना पर सियासत तेज: कांग्रेस का आरोप—सरकार टाल रही है फैसला, महिला आरक्षण पर भी उठे सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है और महिला आरक्षण कानून में होने वाले बदलाव के जरिए देश को गुमराह कर रही है। उन्होंने यह बातें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक पेज से कही। जय राम रमेश ने कहा कि सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन करने की तैयारी में है, जिसका वे औचित्य यह दे रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में समय लगेगा। लेकिन उन्होंने इस तर्क को खारिज करते हुए बताया कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने छह महीने से कम समय में जाति सर्वेक्षण पूरा किया है, इसलिए यह कोई बड़ा बहाना नहीं बन सकता। उन्होंने इसे सरकार के छिपे हुए एजेंडे के रूप में बताया और आरोप लगाया कि असल मकसद जाति जनगणना को रोकना है। अनुच्छेद 334-A महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने को जाति जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। जयराम रमेश का मानना है कि सरकार इसे अलग करने का प्रयास कर रही है ताकि महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू किया जा सके, लेकिन इस प्रक्रिया में देश को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर चार मुख्य सवाल भी उठाए हैं, जिनमें महिला आरक्षण बिल की प्रक्रिया तथा इससे जुड़ी जनगणना की भूमिका को लेकर शंका व्यक्त की गई है। महिला आरक्षण बिल के लिए प्रस्तावित विशेष सत्र जयराम रमेश के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र प्रस्तावित है। इस सत्र में महिला आरक्षण कानून लागू करने और लोकसभा की सीटों में वृद्धि से संबंधित बिल पेश किए जाने की संभावना है। यदि संसद से अनुमति मिल जाती है, तो यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस फेज में ‘हाउस लिस्टिंग’ यानी मकान गिनती कराई जा रही है। दूसरा चरण, जिसमें जनसंख्या गणना और जाति संबंधी प्रश्न शामिल हैं, फरवरी 2027 में किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब स्वतंत्रता के बाद जाति का डेटा संकलित किया जाएगा, आखिरी बार ऐसा 1931 में हुआ था। जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी, जिसमें कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए स्मार्टफोन से ही डेटा संग्रह करेंगे। आंकड़े जुटाने के लिए कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। महिला आरक्षण और भाजपा का सख्त रुख 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद के विशेष सत्र के लिए भाजपा ने अपने सभी सांसदों को कड़ाई से 3-लाइन व्हिप जारी किया है, जिसमें इस दौरान संसद में उपस्थित रहने को आवश्यक बताया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हाल ही में सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी है जो महिला आरक्षण की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। कांग्रेस के नेता जयराम रमेश के बयान केंद्र सरकार की नीति और आगामी जनगणना तथा महिला आरक्षण कानून के बीच संबंध को लेकर चर्चा को और गहरा कर देंगे। आगामी संसद सत्र में इस विषय पर कई राजनीतिक और सामाजिक बहसें देखने को मिल सकती हैं, जो भारत के सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकती हैं।

अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से, 57 दिन चलेगी:28 अगस्त को खत्म होगी; 15 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू होंगे
धर्म एवं यात्रा

अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू, 28 अगस्त को समाप्त होगी; रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू

  अमरनाथ यात्रा के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को बताया कि इस साल यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से पहला जत्था रवाना होगा। यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन 15 अप्रैल से शुरू होंगे, जो देशभर के 556 बैंक शाखाओं और श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन भी कराया जा सकेगा। LG मनोज सिन्हा ने बताया कि इस बार 13 से 70 वर्ष के लोग इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं। यात्रा की शुरुआत गुफा में 19 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पहली पूजा से होगी। यात्रा के मुख्य दो रूट खुलेंगे: पारंपरिक नुनवान-पहलगाम रूट जो 48 किलोमीटर लंबा है और बालटाल रूट जो 14 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता है। यात्रा के प्रमुख रूट और उनके प्रमुख पड़ाव पहलगाम रूट: इस रूट पर गुफा तक पहुंचने में लगभग तीन दिन लगते हैं। यह रास्ता आसान और पैदल यात्रा के लिए अनुकूल माना जाता है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी है, जो बेस कैंप से 16 किलोमीटर दूर है। यहां से चढ़ाई शुरू होती है। तीन किलोमीटर की चढ़ाई के बाद पिस्सू टॉप आता है, यहां से पैदल चलकर शाम तक शेषनाग पहुंचा जा सकता है। अगले दिन शेषनाग से 14 किलोमीटर का सफर करते हुए पंचतरणी पहुंचा जाता है, जो गुफा से सिर्फ 6 किलोमीटर दूर है। बालटाल रूट: यह रूट उन यात्रियों के लिए उपयुक्त है जिनके पास यात्रा के लिए कम समय हो। इस मार्ग पर सिर्फ 14 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन चढ़ाई बेहद खड़ी और चुनौतीपूर्ण है। बुजुर्ग यात्रियों के लिए यह रूट कठिन साबित हो सकता है क्योंकि रास्ते संकरे और खतरनाक मोड़ों से भरे हुए हैं। यात्रा के दौरान ध्यान देने योग्य बातें यात्रा के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट, चार पासपोर्ट साइज़ फोटो, आधार कार्ड, RFID कार्ड और ट्रैवल एप्लिकेशन फॉर्म साथ रखना अनिवार्य है। फिजिकल फिटनेस के लिहाज से रोजाना चार से पांच किलोमीटर पैदल चलने की प्रैक्टिस शुरू करें। श्वास नियंत्रित योग जैसे प्राणायाम और एक्सरसाइज करें ताकि सहनशीलता बढ़े। यात्रा के दौरान ऊनी कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक, पर्याप्त पानी और आवश्यक दवाओं का साथ होना जरूरी है। अमरनाथ यात्रा देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। इसका सही तरीके से आयोजन और सावधानीपूर्वक तैयारी यात्रियों की सुरक्षा और यात्रा की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। उपराज्यपाल का यह निर्देश है कि सभी यात्री निर्धारित नियमों का पालन करें ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित रहे। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर प्रशासन सभी आवश्यक सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में जुटा है ताकि इस पवित्र यात्रा को सुचारू ढंग से आयोजित किया जा सके।

दिल्ली-यूपी में एक दिन बाद 40°C के पार जाएगा तापमान:मनाली में बर्फबारी, पारा -7 डिग्री पहुंचा; जम्मू में बवंडर उठा
धर्म एवं यात्रा

मनाली में बर्फबारी और जम्मू में बवंडर उठा

  देश भर में गर्मी का प्रकोप तेज होता जा रहा है और मौसम विभाग ने आगामी दिनों में उत्तर-पश्चिमी भारत में तापमान बढ़ने की चेतावनी दी है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के मनाली में शनिवार शाम को बर्फबारी हुई, जहां तापमान रात को -7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। जम्मू में भी एक बवंडर देखने को मिला, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता की लहर दौड़ गई। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत कई शहरों में रविवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच सकता है। दिल्ली में भी शनिवार को तापमान 34.7 डिग्री तक पहुँचकर पिछले दिन की तुलना में बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी गर्मी का असर देखने को मिला और तापमान 36 डिग्री तक पहुँच गया। राजस्थान के सीकर और शेखावाटी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के प्रभाव से तापमान में कुछ गिरावट आई थी, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि रविवार से फिर से तापमान बढ़ने लगेगा। मौसम विभाग के आगामी दो दिनों (13 और 14 अप्रैल) के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत में तापमान में 6 से 8 डिग्री की वृद्धि होगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में तेज गर्मी बनी रहेगी। बिहार में भी गर्मी जारी रहने की संभावना है जबकि छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हीटवेव का खतरा भी बना है। पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और तूफान की संभावना बनी हुई है, जो गर्मी को कुछ हद तक कम करने में सहायक हो सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 15 अप्रैल से मध्य प्रदेश में नया मौसम प्रणाली सक्रिय होगा, जिससे राज्य में तापमान में और वृद्धि हो सकती है। मनाली में बर्फबारी और जम्मू में बवंडर जैसी परिस्थितियों ने मौसम की जटिलता को दर्शाया है। ये घटनाएँ मौसम के अचानक बदलाव का संकेत हैं और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। बीते सप्ताह से तापमान में तेजी से बदलाव देखने को मिला है, जो पर्यावरण और आम जनजीवन पर प्रभाव डाल सकता है। अतः, आने वाले दिनों में उत्तर भारत में गर्मी के थपेड़ों से बचाव के लिए सावधानी बरतना जरूरी होगा। लोगों को तेज धूप और गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना, हल्का और ढीला परिधान पहनना, और संभव हो तो धूप से बचना चाहिए। सरकार और प्रशासन भी आवश्यक राहत उपायों को जल्द लागू करें ताकि आम जनमानस को गर्मी की मार से राहत मिल सके।

खबर हटके- सैनिक पी गए 36 लाख लीटर कॉफी:सांप ने काटा तो बच्चे को नदी में बांधा; शटर-दीवार के बीच 6 घंटे फंसा रहा चोर
धर्म एवं यात्रा

खबर हटके: अमेरिकी सैनिकों ने पी 36 लाख लीटर कॉफी; सांप ने काटा तो बच्चे को नदी में बांधा; शटर-दीवार के बीच 6 घंटे फंसा रहा चोर

  आज की खबरों में कुछ अनोखी और हैरान करने वाली घटनाएं सामने आई हैं, जो आपकी रुचि को जरूर बढ़ाएंगी। सबसे पहले बात करते हैं अमेरिकी सैनिकों की, जो अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनावपूर्ण जंग के दौरान लगभग 36 लाख लीटर कॉफी पी चुके हैं। कॉफी की इतनी बड़ी मात्रा से सैनिकों को सतर्क और चौकस बनाए रखने में मदद मिली। वहीं, उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक बच्चे के साथ हुई एक डरावनी घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है। जब उस बच्चे को सांप ने काटा, तो स्थानीय लोग उसे बचाने की पूरी कोशिश करने के बजाय उसे 12 घंटे तक गंगा नदी में बांधकर रखने का फैसला किया। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी है और लोगों में इसके प्रति संवेदना और चिंता दोनों देखी गई है। इसी तरह, गाजियाबाद में एक चोर की अजीबोगरीब स्थिति का समाचार भी सामने आया है। वह चोर लगभग 6 घंटे तक शटर और दीवार के बीच फंसा रहा। पुलिस और आसपास के लोगों ने उसकी मदद के लिए प्रयास किए और अंततः उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर लोगों को चेतावनी दी है कि सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसी असामान्य परिस्थितियों में सही कदम उठाना आवश्यक है। इन तीनों घटनाओं के अलावा भी आज खबर हटके में और कई रोचक एवं हटके खबरें सामने आई हैं, जो आपको देश-दुनिया की ताजा जानकारियों से रूबरू कराएँगी। हम ऐसे खबरों को आपके लिए लाते रहेंगे ताकि आपका दिन मनोरंजक और जानकारीपूर्ण बना रहे। यदि आपको हमारी ये खबरें पसंद आईं तो कृपया खबर हटके को बेहतर बनाने के लिए अपना फीडबैक जरूर दें। इसके लिए <a href=”

Aloo Puri Recipe | Masala Potato Poori
खाना खजाना

आलू पूरी रेसिपी | मसाला आलू पूरी

देश भर में विभिन्न प्रकार की पूरी रेसिपी बहुत लोकप्रिय हैं, जिनका सेवन नाश्ते से लेकर डिनर तक किया जाता है। आलू पूरी, जिने मसाला आलू पूरी या आलू की पूरी भी कहा जाता है, एक ऐसी व्यंजन है जो अपनी अनोखी बनावट और स्वाद के कारण घर-घर पसंद की जाती है। यह पूरी आमतौर पर गेहूं के आटे से बनती है, जिसमें मैश किए हुए आलू को आटे के साथ मिलाकर खमीरदार और नरम पूरी बनाई जाती है। आलू पूरी का इतिहास और लोकप्रियता इसकी सरलता और स्वादिष्टता में छिपी है। यह व्यंजन न केवल ग्रामीण इलाकों में बल्कि शहरों में भी विभिन्न अवसरों पर बनाया जाता है। खासकर ठण्डे मौसम में गरमागरम आलू पूरी का आनंद और भी बढ़ जाता है। इस पूरी को बनाने के लिए कटे हुए या मैश किए हुए आलू को हल्के मसालों के साथ आटे में मिलाया जाता है जिससे पूरी में तीखापन और मिर्च की हल्की झलक मिलती है। आलू पूरी को आमतौर पर मट्ठा, दही, या किसी भी तरह की चटनी के साथ परोसा जाता है। इसके साथ-साथ यह सब्जी या नए साल के ताजे धनिये की चटनी के साथ भी अत्यंत स्वादिष्ट लगती है। बाजारों में भी आलू पूरी विभिन्न स्ट्रीट फूड स्टॉल्स पर बड़ी आसानी से उपलब्ध रहती है। आलू पूरी की खास बात यह है कि इसे बनाना आसान होने के साथ-साथ यह पौष्टिक भी होती है क्योंकि इसमें आलू के पोषक तत्व और गेहूं का आटा दोनों शामिल होते हैं। इसके बनाने में कम समय लगता है और बच्चों तथा वयस्क सभी को यह पसंद आती है। टिप्स के अनुसार, पूरी के आटे में थोड़ा सा मिश्रण करने के लिए धनिया पाउडर, हींग और नमक डाला जा सकता है जिससे पूरी का स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। साथ ही, पूरी को तलते समय मध्यम आंच पर तला जाना चाहिए जिससे वे फुल कर नरम और क्रिस्पी बनें। समाचार में आलू पूरी की रेसिपी को लेकर यह भी बताया गया कि इसे घर पर बनाने के कुछ आसान और व्यावहारिक तरीके हैं, जो सभी गृहणियों के लिए उपयोगी और समय बचाने वाले साबित होते हैं। इस रेसिपी को मानना और अपनाना घरेलू खाना पकाने की संस्कृति को समृद्ध करता है और भारतीय व्यंजनों की विविधता को प्रदर्शित करता है। आलू पूरी सभी के लिए स्वादिष्ट और संतोषजनक भोजन प्रदान करती है।

Pani Puri Recipe – Street Style | Golgappa or Puchka – 5 Tips
खाना खजाना

पानी पूरी रेसिपी – स्ट्रीट स्टाइल | गोलगप्पा या फुचका – 5 खास टिप्स

पानी पूरी, जिसे गोलगप्पा या फुचका के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय सड़क भोजन का एक अत्यंत प्रिय व्यंजन है। इसकी अलग-अलग प्रदेशों में भिन्न-भिन्न स्टाइल हैं, लेकिन इसका स्वाद और ताज़गी सब जगह लोकप्रिय है। पानी पूरी बनाने की प्रक्रिया में तली हुई पूरी, मसालेदार पानी और तीखे/खट्टे चटनी का समागम होता है, जो इसे अन्य स्नैक्स से अलग बनाता है। भारतीय स्ट्रीट फूड की लोकप्रियता का कारण न केवल इसका स्वाद है, बल्कि इसकी अद्भुत विविधता और स्थानीय मसालों का कुशल मिश्रण भी है। पानी पूरी के लोकप्रिय होने के पीछे यह कारण भी है कि इसका आनंद कहीं भी, कभी भी लिया जा सकता है और यह सफर या त्योहार के दौरान भी लोगों की पहली पसंद रहती है। इसके बनाने की विधि सरल होने के बावजूद, सफलता के लिए कुछ खास बातें ध्यान में रखना आवश्यक है। सबसे पहले, पूरी का सही आकार और कुरकुरापन बनाना जरूरी है ताकि पानी में डालने के बाद वह पूरी गल न जाये। दूसरा, पानी के मसालों का संतुलन ऐसा होना चाहिए कि पानी खट्टा, मीठा और मसालेदार तीनों का सही मिश्रण प्रस्तुत करे। तीसरा, आलू या चने की स्टफिंग को भी उपयुक्त मसालों से तैयार करना चाहिए जिससे स्वाद में विविधता आए। इसके अलावा, पनीर, मूंगफली, काला नमक, पुदीना और हरी मिर्च के साथ प्रयोग इस व्यंजन को और भी स्वादिष्ट और हेल्दी बनाते हैं। स्ट्रीट फूड व्यवसायी अपनी जगह और ग्राहक के स्वाद के अनुसार पानी पूरी के पानी में बदलाव करते रहते हैं, जिससे यह व्यंजन कभी भी नई खुशबू और स्वाद के साथ प्रस्तुत किया जाता है। अंततः, पानी पूरी न केवल एक त्वरित स्नैक है बल्कि इसके माध्यम से भारतीय खाने की विविधता, मसालों की समृद्धता और स्थानीय पाक कला का भी परिचय मिलता है। आज के दौर में घरों में भी पानी पूरी बनाना बेहद लोकप्रिय हो गया है, जहां परिवार के सदस्य मिलकर इसका आनंद लेते हैं। यह भोजन प्रेमियों के लिए एक यादगार और स्वादिष्ट अनुभव प्रदान करता है।

Samson had a 'lot of doubts' in his mind after low scores in first three games
खेल जगत

सैमसन के मन में पहले तीन मैचों में कम स्कोर के बाद थे कई सवाल

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मौजूदा सत्र की शुरुआत भारतीय बल्लेबाज ऋतुराज सैमसन के लिए खास नहीं रही। टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के बाद जहां उन्होंने अपने पिछले तीन मैचों में 97, 89 और 89 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई, वहीं IPL के पहले तीन मैचों में उनके बल्ले से मात्र 6, 7 और 9 रन निकले। इस प्रदर्शन ने क्रिकेट एक्सपर्ट्स और फैंस के बीच उनकी फार्म को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया है। सैमसन चाहे आईपीएल के बड़े मंच पर खुद को साबित करने में अभी तक कामयाब नहीं हो सके हैं, लेकिन उनके पास टैलेंट की कमी नहीं है। पिछले टी20 विश्व कप में उनके प्रदर्शन ने यह दिखा दिया था कि वह चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खेल सकते हैं। उनके धीमे शुरूआती स्कोर ने यह भी संकेत दिया है कि अभी उन्हें अपनी फिटनेस या तकनीक पर काम करने की जरूरत हो सकती है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि सैमसन को पिछले चुनावी मैचों में मिली निराशाजनक शुरुआत से निराश नहीं होना चाहिए। IPL का फॉर्मेट और दबाव विश्व कप से काफी अलग होता है और ऐसे में खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार करना पड़ता है। टीम के कोच और कप्तान ने भी टीम की रणनीतियों में बदलाव की बात की है जिससे सैमसन अपने खेल को बेहतर बना सकें। कहा जा रहा है कि उन्हें ज्यादा मौके दिए जा सकते हैं और अलग-अलग पोजीशनों से बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है। आईपीएल में किसी भी खिलाड़ी के लिए हिटिंग स्ट्राइक रेट और रन बनाने की निरंतरता रख पाना बहुत जरूरी होता है। सैमसन के लिए यह मौका है कि वह अपने फैंस का भरोसा फिर से जीतें और पिछले अच्छे दौर को दोहरा सके। आगामी मैचों में उनकी बल्लेबाजी पर सबकी निगाहें टिकी हैं और क्रिकेट प्रेमी उम्मीद कर रहे हैं कि वह टीम की जीत में बड़ा योगदान देंगे। इस बीच, सैमसन ने मीडिया से बातचीत में अपने दिमाग में चल रहे संदेहों को स्वीकार किया है, लेकिन साथ ही कहा कि वह आत्मविश्वास बनाए रखेंगे और बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी मेहनत करेंगे। यह वक्त उनकी क्रिकेट यात्रा का ऐसा पड़ाव है जहां धैर्य और मेहनत ही सफलता की कुंजी बनेगी। IPL जैसे मजबूत टैलेंट और प्रतिस्पर्धा के बीच, सैमसन के लिए यह जरूरी होगा कि वे मानसिक रूप से मजबूत रहें और अपनी तकनीक में सुधार करते हुए टीम के लिए उपयोगी साबित हों। भारतीय क्रिकेट प्रेमी और आलोचक दोनों ही उनसे इस सीजन शानदार प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में सैमसन के कदम आगे बढ़ाने और अपने स्किल्स को निखारने का यह समय है, जिससे वे IPL के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा सकें और टीम इंडिया के लिए बड़े टूर्नामेंटों में अपनी जगह मजबूत कर सकें।

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