March 2026

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वन्यजीवों के हलक तर करने पहुंचा एक लाख लीटर पानी

वन्यजीवों के हलक तर करने पहुंचा एक लाख लीटर पानी 26 टैंकरों के माध्यम से पहल ग्रुप का सराहनीय कार्य सिरोही। शहर में मानवता और प्रकृति प्रेम की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली है। भीषण गर्मी के बीच वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए पहल ग्रुप सिरोही ने एक बार फिर सराहनीय कदम उठाया है। हर साल की तरह इस वर्ष भी ग्रुप के सदस्यों ने वाडा खेड़ा जोड़ क्षेत्र में स्थित नाड़ी में पानी की व्यवस्था कर वन्यजीवों को बड़ी राहत दी है। पहल ग्रुप के सदस्यों की ओर से एक साथ 26 पानी के टैंकरों के माध्यम से लगभग एक लाख लीटर पानी वाडा खेड़ा की नाड़ी में डाला गया। गर्मी के मौसम में जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में पानी के स्रोत सूखने लगते हैं, ऐसे में यह प्रयास वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है। केवल पानी की ही व्यवस्था नहीं की गई, बल्कि वन्यजीवों के भोजन का भी ध्यान रखा गया। ग्रुप की ओर से ककड़ी, गाजर और आलू जैसी खाद्य सामग्री भी वहां रखवाई गई, ताकि गर्मी के दिनों में पानी के साथ-साथ वन्यजीवों को भोजन भी मिल सके। ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि यह अभियान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। आज से अगले करीब तीन महीनों तक प्रतिदिन एक पानी का टैंकर इस नाड़ी में डलवाया जाएगा, जिससे भीषण गर्मी के दौरान वन्यजीवों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े। सालभर समाजसेवा में सक्रिय रहता है पहल ग्रुप पहल ग्रुप केवल गर्मियों में पानी की व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है। यह समूह पूरे साल विभिन्न सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाता है। ग्रुप की ओर से शहर में जरूरतमंद लोगों, पशुओं और वन्यजीवों की सहायता के लिए समय-समय पर कई पहल की जाती हैं। शहर में जगह-जगह लगाए गए पानी के कैंपर गर्मी के मौसम में आमजन को राहत देने के लिए शहर के अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए पानी के कैंपर भी इसी ग्रुप की पहल का परिणाम हैं। इन कैंपरों से राहगीरों और जरूरतमंद लोगों को पीने का ठंडा पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। पहल ग्रुप का संचालन सहायक उप निरीक्षक सचेंद्र रतनू के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस समूह में करीब 95 सदस्य जुड़े हुए हैं। सभी सदस्य हर महीने स्वेच्छा से अंशदान एकत्रित करते हैं और इसी राशि से सामाजिक व सेवा कार्यों को अंजाम दिया जाता है। यह राशि वन्यजीवों, गायों और जरूरतमंद असहाय लोगों की मदद में खर्च की जाती है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सदस्य रहे मौजूद वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था के इस कार्यक्रम में ग्रुप के सभी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान सचेंद्र रतनू, भेरूपाल सिंह (अधिवक्ता), हेमंत पुरोहित, हरदयाल सिंह, शैतान खरोर, गणपत लाल, अमजद खान, सज्जन सिंह, एम.पी. सिंह, करण सिंह, अशोक माली, हनुमान प्रजापत, दिग्विजय सिंह, तख्तसिंह पुरोहित, भरत माली, विनोद मालवीय, मुकेश खंडेलवाल, कमलेश सोनी, महादेव, प्रदीप वैष्णव, मंछाराम, किशन माली, भंवर माली, लालचंद खंडेलवाल, राहुल माली, अशोक माली, भैराराम और मांगीलाल रावल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। पहल ग्रुप का यह प्रयास न केवल वन्यजीवों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि समाज के सामने सेवा, संवेदना और प्रकृति संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। ऐसे कार्य यह संदेश देते हैं कि यदि समाज के लोग मिलकर पहल करें, तो पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए बड़े बदलाव संभव हैं।

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10 मार्च को मनाई जाएगी शीतला सप्तमी, 9 मार्च को रांधन छठ

सिरोही। शीतला सप्तमी अर्थात चैत्र कृष्ण सप्तमी मंगलवार तथा रांधण छठ- चैत्र कृष्ण षष्ठी सोमवार को मान्य रहेगी। ज्योतिष एवं वास्तुविद आचार्य प्रदीप दवे एवं शीतला माता मंदिर पुजारी ओमप्रकाश वैष्णव ने बताया कि शीतला माता पूजन का शुभ मुहूर्त प्रात: 4-15 से 9-01, 9-52 से 2-16, सायं 3-44 से 5-12 बजे एवं सायं गोधुलिक वेला में 06-32 से रात्रि 09-10 तक श्रेष्ठ है, साथ ही इस बार वीदर (बिच्छुडा) पेटा में होने एवं मंगलवार सुषुप्त होने तथा सप्तमी तिथि पूजन की मान्यता होने से सप्तमी तिथि को पूरे दिन पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा।इस समय बनाए बासोड़ाशीतला माता का महाप्रसाद (भोग) बनाने का शुभ मुहूर्त चैत्र कृष्ण षष्ठी (रांधण षठ) सोमवार प्रात: शुभ वेला में 6-57 से 8-25, 9-53 से 11-21, मध्यान्ह 12-25 से 01-12 अभिजित मुहुर्त एवं सायं 04-16 से 06-40 बजे तक शुभ वेला में श्रेष्ठ रहेगा।शीतला माताजी के पूजन के विशेष नियमशीतला माता को ज्योत नहीं होती है। कपूर व अगरबत्ती नहीं जलाना चाहिए। दही, म_ा, छाछ आदि खाने-पीने की सामग्री माताजी के सामने प्रसाद के रुप में चढाई जाती है। अत: खाने-पाने पीने की सामग्री माताजी के सिर पर गिरानी या ढोलनी नहीं चाहिए। परिवार की सुरक्षा के लिए श्रीफल हमेशा अखण्ड चढता है अत: श्रीफल या नारियल को तोड़ कर नहीं चढाएं। श्रीफल (नारियल) पर यथाशक्ति भेंट रख कर माताजी को अर्पण करने से समृद्धता बढती है तथा अकाल मृत्यु का नाश होता है। शीतला माता के हाथ में झाडू है, इसका मतलब बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वच्छता का ध्यान रखना जरुरी हैबासी भोजन का वैज्ञानिक महत्ववैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो इस मौसम में खाना एक या दो दिन पड़ा रहता है तो खाने पर फफूंद लगनी शुरु हो जाती है। वैज्ञानिक इस फफूंद को ‘पेनासिलीन’ नाम से पुकारते हैं। इस फफूंद को माइक्रोस्कोप द्वारा आसानी से देखा जा सकता है। इस प्रकार प्राकृतिक रुप से पैदा हुई फफूंद शरीर में जाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा होती है। जिससे चेचक, घमोरिया, फोड़े-फुन्सी व गर्मी जनित बीमारियां नहीं होती है। आजकल इस फफूंद के इंजेक्शन बाजार में पेनिसिलिन के नाम से उपलब्ध है। जबकि प्राचीन काल से ऐसी मान्यता चली आ रही है कि शीतला माता व ओरी माता को प्रसन्न करने से चेचक नहीं होती है। आज भी माताजी के मंदिर में जाकर शीतला व ओरी माता का पूजन कर बासोड़े का भोग लगाते है।

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नेशनल वन स्टार एंड्योरेंस चैंपियनशिप 7–8 मार्च को जयपुर में

जयपुर/जोधपुर। भारतीय अश्वारोहण खेल के लिए गौरव का विषय है कि लगभग एक दशक बाद जयपुर में 100 किमी नेशनल वन स्टार एंड्योरेंस चैंपियनशिप 2025–26 का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता 07 एवं 08 मार्च 2026 को बेगास रोड, सांझरिया (आरईसी मणिपाल यूनिवर्सिटी के समीप) स्थित Royal Equestrian Club परिसर में आयोजित होगी। यह आयोजन Equestrian Federation of India के तत्वावधान में तथा Rajasthan Equestrian Association के सहयोग से संपन्न होगा। महासंघ के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय आयोजन प्रतियोगिता के मुख्य संयोजक एवं रॉयल इक्वेस्ट्रियन क्लब के निदेशक कैप्टन मुकेश सिंह शक्तावत ने बताया कि प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों, नियमों एवं विनियमों के अनुरूप संचालित की जाएगी। देश के विभिन्न राज्यों से चयनित घुड़सवार इसमें भाग लेंगे और अपनी सहनशक्ति, कौशल एवं रणनीति का प्रदर्शन करेंगे।7 मार्च को प्रातः 5 बजे फ्लैग ऑफ, चैंपियनशिप का विधिवत शुभारंभ 07 मार्च 2026 को प्रातः 5:00 बजे फ्लैग ऑफ के साथ होगा।उद्घाटन अवसर पर जनप्रतिनिधि एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे।प्रतियोगिता का समापन 08 मार्च 2026 की सायंकाल होगा, जिसमें विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा। जूरी की देखरेख में पारदर्शी संचालन चैंपियनशिप की निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु जूरी का गठन किया गया है। ईएफआई के कर्नल जगत सिंह द्वारा निम्न अधिकारियों को जूरी सदस्य नियुक्त किया गया है। इसमें कर्नल अशोक यादव,कर्नल सरप्रताप सिंह,कर्नल सी. एस. सोहल सदस्य नियुक्त किए गए है। एंड्योरेंस चैंपियनशिप के इवेंट कॉर्डिनेटर एवं जोधपुर के राइडर दुष्यंत सिंह मेड़तिया ने बताया कि सफल आयोजन के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। मुख्य जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं। दुष्यंत सिंह मेड़तिया (राठौड़)– इवेंट कॉर्डिनेटर, रामूराम देवासी – कैम्प इंचार्ज, हरभजन सिंह – अस्तबल मैनेजर, जयराम देवासी – आवास एवं अन्य व्यवस्थाएं संभालेंगे।  100 किमी नेशनल वन स्टार एंड्योरेंस क्या है? कॉर्डिनेटर दुष्यंत सिंह राठौड़ ने बताया कि यह घुड़सवारी (Equestrian) की एंड्योरेंस विधा की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता है, जिसमें घुड़सवार और उसका घोड़ा निर्धारित समय सीमा के भीतर 100 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हैं।  100 किमी वन स्टार इवेंट में भाग लेने वाले राइडर्स सामान्यतः 40 किमी एवं 80 किमी स्तर पूर्ण कर चुके होते हैं। यह राष्ट्रीय सीनियर श्रेणी में प्रवेश का महत्वपूर्ण चरण है। प्रतियोगिता की प्रक्रिया कैसे होती है? 100 किमी दूरी को विभिन्न चरणों (Loops) में विभाजित किया जाता है।  हर चरण के बाद वेटरनरी चेक (Vet Check) होता है, जिसमें घोड़े की— हार्ट रेट, सांस, चाल (Gait), डिहाइड्रेशनमांसपेशियों की स्थिति की जांच की जाती है। यदि घोड़ा फिट नहीं पाया जाता, तो राइडर को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इसलिए यह खेल “घोड़े की सुरक्षा पहले” के सिद्धांत पर आधारित है। राष्ट्रीय पहचान और भविष्य के अवसर यह आधिकारिक राष्ट्रीय चैंपियनशिप है। प्रदर्शन के आधार पर राइडर्स की राष्ट्रीय रैंकिंग बनती है। वन स्टार स्तर सफलतापूर्वक पूरा करने पर खिलाड़ी आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए पात्र बन सकते हैं। राजस्थान के लिए गौरव का अवसर करीब दस वर्षों बाद जयपुर में 100 किमी राष्ट्रीय वन स्टार एंड्योरेंस चैंपियनशिप का आयोजन राज्य के अश्वारोहण खेल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली एंड्योरेंस खेल के प्रमुख केंद्र हैं। रेगिस्तानी एवं खुले ट्रैक के कारण राजस्थान एंड्योरेंस के लिए आदर्श माना जाता है।इवेंट कॉर्डिनेटर दुष्यंत सिंह ने कहा कि 100 किमी नेशनल वन स्टार एंड्योरेंस चैंपियनशिप केवल एक रेस नहीं, बल्कि घुड़सवार और घोड़े के बीच विश्वास, संतुलन और सहनशक्ति की सबसे बड़ी परीक्षा है।यह प्रतियोगिता राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसमें सफलता भविष्य में बड़े अवसरों के द्वार खोल सकती है।

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