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फगड़ा–घुड़ला भौलावणी गणगौर: लोक आस्था, परंपरा और उत्सव का अनुपम संगम

जोधपुर। मरुधरा की सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत और आकर्षक अध्याय—फगड़ा-घुड़ला भौलावणी गणगौर—आज शाम 6:30 बजे से पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि सदियों पुरानी लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामुदायिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण है, जो शहर की गलियों को रंग, संगीत और भक्ति के माहौल से भर देता है। इस अवसर पर निकलने वाली गणगौर की सवारियों का भव्य जुलूस ओलम्पिक सिनेमा से प्रारंभ होकर गांधी स्कूल, जालोरी गेट, बालवाड़ी स्कूल, खाण्डाफलसा, आड़ा बाजार और सिरे बाजार होते हुए ऐतिहासिक घण्टाघर व नई सड़क तक पहुंचेगा, जहां मध्य रात्रि के आसपास इसका समापन होगा। जुलूस में सजी-धजी झांकियां, पारंपरिक वेशभूषा में कलाकार, लोक वाद्य यंत्रों की धुन और सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन को विशेष बना देंगे। गणगौर और घुड़ला: इतिहास और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि राजस्थान में गणगौर पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व मुख्य रूप से माता गौरी (पार्वती) और भगवान शिव की पूजा को समर्पित होता है। अविवाहित युवतियां मनचाहा वर पाने के लिए और विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र व सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं। घुड़ला परंपरा का इतिहास घुड़ला की परंपरा का संबंध एक ऐतिहासिक कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि मध्यकाल में एक मुस्लिम शासक या सेनापति घुड़ला खान ने गांव की महिलाओं पर अत्याचार किया था। इसके विरोध में ग्रामीणों ने उसका वध कर दिया। उसकी स्मृति में एक छेद वाला मिट्टी का घड़ा (घुड़ला) बनाकर उसमें दीप जलाकर घुमाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस परंपरा के माध्यम से समाज में यह संदेश दिया जाता है कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। फगड़ा: रंग, संगीत और उल्लास का प्रतीक फगड़ा, होली के बाद मनाया जाने वाला एक लोक उत्सव है, जिसमें महिलाएं और पुरुष पारंपरिक गीत गाते हुए, नृत्य करते हुए जुलूस का हिस्सा बनते हैं। इसमें लोकगीतों के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है। फगड़ा-घुड़ला का यह संगम राजस्थान की लोक संस्कृति का अद्भुत उदाहरण है, जहां धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का सुंदर मेल देखने को मिलता है। जुलूस का मार्ग और विशेष आकर्षण आज शाम निकलने वाला जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगा। प्रमुख मार्ग इस प्रकार हैं: ओलम्पिक सिनेमा से शुरुआत गांधी स्कूल जालोरी गेट बालवाड़ी स्कूल खाण्डाफलसा आड़ा बाजार सिरे बाजार घण्टाघर नई सड़क (समापन स्थल) जुलूस में ट्रैक्टर-ट्रॉली, ठेले, तांगे और अन्य वाहनों पर विभिन्न प्रकार की झांकियां सजाई जाएंगी। इन झांकियों में पौराणिक कथाएं, सामाजिक संदेश और स्थानीय लोक जीवन की झलक देखने को मिलेगी। यातायात व्यवस्था: शहर में रहेगा विशेष प्रबंधन जुलूस के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं: 1. पूर्ण प्रतिबंधित मार्ग ओलम्पिक तिराहा से जालोरी गेट के बीच सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। 2. डायवर्जन व्यवस्था जुलूस का अगला सिरा जालोरी गेट पहुंचने पर शनिश्चरजी का थान और पांचवीं रोड की ओर से आने वाले यातायात को सरदारपुरा की ओर मोड़ा जाएगा। नई सड़क से जालोरी गेट की ओर जाने वाले वाहनों को पुरी तिराहा, रेलवे स्टेशन, ओलम्पिक तिराहा, तारघर मोड़, मेहता भवन और जलजोग होते हुए 12वीं रोड की ओर डायवर्ट किया जाएगा। विशेष छूट: मरीजों के अस्पताल आने-जाने पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। 3. प्रमुख बाजारों में प्रतिबंध जालोरी गेट से आड़ा बाजार, सिरे बाजार, घण्टाघर और नई सड़क तक सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। 4. आंशिक सामान्य यातायातजुलूस का पिछला हिस्सा जालोरी गेट पार करने के बाद शनिश्चरजी का थान से नई सड़क चौराहा और विपरीत दिशा में यातायात सामान्य रूप से चालू रहेगा। 5. घण्टाघर क्षेत्र में प्रतिबंध जुलूस के घण्टाघर पहुंचने पर जवाहर खाना मोड़, पन्ना निवास और द्वितीय पोल पुलिस चौकी से घण्टाघर तक वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था इस आयोजन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। शहर के प्रमुख चौराहों और जुलूस मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से तुरंत निपटा जा सके। लोक संस्कृति का जीवंत उदाहरण फगड़ा-घुड़ला भौलावणी गणगौर केवल एक पर्व नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यह आयोजन पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है, जिसमें हर वर्ग और हर आयु के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। यह पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और यह संदेश देता है कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर रखना कितना महत्वपूर्ण है।

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सोना-चांदी की कीमतों में फिर उछाल

सोना ₹1.41 लाख, चांदी ₹2.24 लाख सोना और चांदी के दामों में आज फिर तेजी देखी गई है। सोने की कीमत ₹1,41,032 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,24,801 प्रति किलो तक पहुंच गई है। सोने में तेजी सोने के दाम में ₹1539 की बढ़ोतरी हुई है। बाजार खुलते ही इसमें तेजी देखने को मिली। चांदी भी मजबूत चांदी में ₹4927 प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह लगातार ₹2 लाख के ऊपर बनी हुई है। बढ़ोतरी के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता निवेशकों की मांग डॉलर की कमजोरी आम ग्राहकों पर असर ऊंचे दामों के कारण ज्वेलरी की मांग थोड़ी कम हुई है, लेकिन निवेश के लिए खरीदारी जारी है। निवेश के लिहाज से क्या करें? विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि के लिए निवेश फायदेमंद हो सकता है। निष्कर्ष सोना और चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है और आगे भी इसमें बढ़ोतरी की संभावना है।

Panel wants prosecution of ousted Nepal PM Oli over violence in Gen Z protests
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Panel Seeks Legal Action Against Former Nepal PM Oli for Violence in Gen Z Protests

Former Nepal Prime Minister K.P. Sharma Oli, along with associates Lekhak and Khapung, faces serious legal consequences if prosecuted and convicted in relation to the violence that erupted during Gen Z protests. A court ruling could result in a maximum penalty of 10 years imprisonment. The panel’s decision to pursue prosecution is indicative of the government’s stance on handling civil unrest and accountability of public officials. This situation highlights the tension between the ruling authorities and the youth-led movements demanding change, illustrating the broader implications of political actions on civic freedom. The potential legal case against Oli raises questions about the judiciary’s role in upholding democratic principles and addressing alleged abuses of power by politicians during protests. The outcome of such a case could not only impact the careers of those involved but might also set precedents for future political accountability in Nepal.

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नगर परिषद का 1469 करोड़ का बजट, बदलेगी तस्वीर

जोधपुर। संभागीय आयुक्त व नगर परिषद प्रशासक डा. प्रतिभासिंह ने गुरुवार को 1469 करोड़ रुपए का वार्षिक बजट पेश किया। शहर में 15 नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का बजट में निर्णय लिया गया है।नगर निगम के एकीकरण के बाद पहली बार यह बजट पेश हुआ है। पूर्व में निगम का क्षेत्रफल 234 वर्ग किलोमीटर था, जो अब बढक़र 290 वर्ग किलोमीटर हो गया है। बजट को अब राज्य सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।संभागीय आयुक्त डॉ. प्रतिभा सिंह ने बताया कि इस बजट का फोकस सफाई व्यवस्था के एकीकरण, डिजिटल पारदर्शिता, ट्रैफिक प्रबंधन, हरित ऊर्जा और खेल सुविधाओं के विस्तार पर है। निर्वाचित होकर आने वाले पार्षदों को विकास कार्यों के लिए 60 लाख रुपए तक की अनुशंसा का प्रावधान भी रखा गया है। गत वर्ष के मुकाबले इस बार करीब 112 करोड़ कम का बजट जारी किया गया है। गत वर्ष निगम उत्तर और दक्षिण दोनों मिलाकर 1581 करोड़ का बजट जारी किया गया था, लेकिन इस बार निगम की ओर से घाटे का बजट पेश किया गया है। बजट में घोषणा के मुताबिक नगर निगम की ओर से भूमि का रिकॉर्ड डिजिटलाइजेशन किया जाएगा। वर्तमान में निगम क्षेत्राधिकार की करीब 1 लाख फाइलें हैं। जिनमें से 22 हजार का डिजिटलाइजेशन किया जा चुका है। शेष अन्य के लिए इस बजट में 11 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। ऐसे में आने वाले समय में निगम एरिया के प्लॉट, खाली जमीन से लेकर सभी तरह को बिल्डिंग आदि की जानकारी डिजिटल भी मिल सकेगी। इससे निगम के सिस्टम में बैठे दलाल, भ्रष्टाचारियों ओर फर्जी डॉक्यूमेंट बनाकर प्लॉट पर अपना कब्जा बताने वालों पर भी लगाम लगेगी। पेश किए बजट से आने वाले समय में शहर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, दो प्रमुख मार्गों को आदर्श मार्ग बनाने ओर कचरा ढोने से लेकर उसकी प्रोसेसिंग के कामों में एक ही वेंडर को लगाने के प्रस्ताव पारित किए गए। अब इस बजट को राज्य सरकार को भेजा जाएगा। अब नए बजट के तहत जीतकर आने वाले पार्षदों को विकास कार्यों के लिए 60 लाख रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है।प्रशासक प्रतिभा सिंह ने बताया प्रदेश सरकार की चालू वित्तीय घोषणा के तहत इवी और सीएजी स्टेशन पीपीपी मोड में विकसित किए जाएंगे। वर्तमान में शहर में दस जगहों पर इसका कार्य प्रगति पर है। निगम बजट में अब आने वाले समय में 30 जगहों पर इवी स्टेशन प्रस्तावित किए हैं। शहर के 7 टूरिस्ट पैलेस पर भी ये स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए शहर में 15 नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का बजट में निर्णय लिया गया है। वर्तमान में जोधपुर शहर के उम्मेद क्लब और गांधी मैदान के पीछे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स डॅपलप किया जा रहा है। वहीं, शहर के दो प्रमुख सडक़ों को विकसित किया जाएगा। इसमें सडक़ को चौड़ा करना, फुटपाथ, वृक्षारोपण आदि किया जाएगा।

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 इलेक्टोरल लिटरेसी फेस्टिवल डे का आयोजन

सिरोही। इम्मानुएल मिशन सीनियर सैकेंडरी स्कूल, सिरोही के विद्यालय परिसर में जिला निर्वाचन अधिकारी (जिला कलेक्टर) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी  के निर्देशानुसार  इलेक्टोरल लिटरेसी फेस्टिवल डे का आयोजन बड़े उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में किया गया।  कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें उनके मताधिकार के महत्व से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी  महेंद्र कुमार नानीवाल रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में एसडीएम  हरिसिंह देवल एवं जिला इलेक्शन ट्रेनर एवं प्रधानाचार्य रतिराम  प्रजापत उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत लोक नृत्य से हुई, जिसने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का मन मोह लिया। इलेक्टोरल लिटरेसी फेस्टिवल के अंतर्गत विद्यालय में विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। जिनमें चित्रकला प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता एवं नाटक प्रतियोगिता प्रमुख रहीं। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से मतदान के महत्व, लोकतंत्र की मजबूती तथा नागरिक कर्तव्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मतदाता जागरूकता पर आधारित नाटक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।इस अवसर पर एसडीएम ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाली युवा पीढ़ी को मतदान के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही प्रत्येक नागरिक को मतदाता बनना चाहिए तथा अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। साथ ही उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक बनें और समाज में भी मतदान के प्रति जागरूकता फैलाएं।जिला शिक्षा अधिकारी  नानीवाल ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मतदान है। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान से वंचित न रहे, एवं बताया कि एक-एक मत अमूल्य है और कोई भी मतदाता अपने मत से वंचित न रहे इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। विद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को प्रारंभ से ही लोकतांत्रिक मूल्यों से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।जिला स्वीप कॉर्डिनेटर एवं स्टेट लेवल इलेक्शन ट्रेनर प्रजापत ने भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित इलेक्टोरल लिटरेसी कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आयोग द्वारा नागरिकों को मतदाता सूची में नाम जोडऩे, संशोधन एवं अपडेट करने के लिए वर्ष में चार बार अवसर प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।विद्यालय के प्रधानाचार्य  टॉम पी. सैम ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की एवं उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने तथा लोकतंत्र की मजबूती में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।इस कार्यक्रम की रूपरेखा विद्यालय के ईएलसी सदस्य विजय प्रकाश वैष्णव द्वारा तैयार की गई, जिसके अंतर्गत इलेक्टोरल लिटरेसी फेस्टिवल को प्रभावी एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न किया गया।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक दिनेश कुमार खत्री द्वारा सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं उपस्थित अतिथियों को मतदाता जागरूकता शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया। ReplyForward Add reaction

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